श्री लक्ष्मीस्तोत्रम् लोपामुद्रा, भगवान विष्णु की पत्नी और धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी, श्रीमती लक्ष्मी की एक स्तुति है। यह स्तुति लोपामुद्रा, ऋषि वशिष्ठ की पत्नी द्वारा रचित है।
स्तुति के अनुसार, श्रीमती लक्ष्मी समस्त सृष्टि की स्वामिनी हैं। वे सभी सुखों और समृद्धि की देवी हैं। वे सभी देवताओं की अधिष्ठात्री देवी भी हैं।
स्तुति में, श्रीमती लक्ष्मी को विभिन्न नामों से संबोधित किया जाता है, जो उनकी विभिन्न शक्तियों और गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें "धनलक्ष्मी" कहा जाता है, जो धन की देवी हैं। उन्हें "पुत्रलक्ष्मी" कहा जाता है, जो पुत्रों की देवी हैं। और उन्हें "ज्ञानलक्ष्मी" कहा जाता है, जो ज्ञान की देवी हैं।
श्री लक्ष्मीस्तोत्रम् लोपामुद्रा एक शक्तिशाली स्तुति है जो श्रीमती लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए की जा सकती है। यह स्तुति धन, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए फायदेमंद है।
स्तुति का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
श्री लक्ष्मीस्तोत्रम् लोपामुद्रा
अथ श्री लक्ष्मीस्तोत्रम् लोपामुद्रा
लोपामुद्रा उवाच
नमस्ते लक्ष्मी महाभागे, वीणा पुस्तक धारिणी। चतुर्भुजे शुभ्र वस्त्रे, स्मेरमुखे सुशोभने।
अर्थ:
हे महाभागे लक्ष्मी देवी, आपको मेरा प्रणाम है। आप वीणा और पुस्तक धारण करती हैं। आपके चार हाथ हैं, आपके वस्त्र शुभ्र हैं, और आपकी मुस्कान सुंदर है।
**महालक्ष्मी नमस्तेऽस्तु, सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्राहि मां देवि, दुर्गति नाश कारिणी।
अर्थ:
हे महालक्ष्मी देवी, आपको मेरा प्रणाम है। आप सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं। हे देवी, मुझे अपनी शरण में लीजिए और मुझे दुर्भाग्य से बचाइए।
**सर्व धन संपत्ते, धान्यं बहु फलं प्रदा। पुत्र पौत्रादि सहिते, कुलं वृद्धि कारक।
अर्थ:
मुझे सभी प्रकार की धन-संपत्ति, भरपूर फसल और पुत्र-पौत्र आदि के साथ अपने कुल का विस्तार करने के लिए।
**आयुरारोग्य सुखं मे, देहि धनं धान्यं सुख। मोक्षार्थं च भवतु, त्वदीयं पाद पंकज।
अर्थ:
मुझे आयु, आरोग्य, सुख, धन और धान्य प्रदान करें। और मोक्ष प्राप्ति के लिए भी आपके चरण कमलों की शरण में रहूं।
इति श्री लक्ष्मीस्तोत्रम् लोपामुद्रा समाप्तम्।
स्तुति का पाठ करने की विधि:
इस स्तुति का पाठ करने के लिए, सबसे पहले एक साफ और शांत स्थान चुनें। फिर, एक आसन पर बैठें और अपने सामने एक श्रीमती लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र रखें। अब, हाथ में एक माला लें और स्तुति का पाठ शुरू करें। स्तुति का पाठ करते समय, श्रीमती लक्ष्मी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति रखें।
स्तुति का पाठ करने का सबसे अच्छा समय शुक्रवार है। आप इसे किसी भी समय कर सकते हैं, लेकिन सुबह जल्दी या शाम को सूर्यास्त के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है।
स्तुति का पाठ करने से पहले, स्नान करके स्वच्छ हो जाएं। फिर, साफ कपड़े पहनें और एक पवित्र स्थान पर जाएं। वहां, एक आसन पर बैठें और अपने सामने एक श्रीमती लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र रखें। अब, अपने हाथों में एक माला लें और स्तुति का पाठ शुरू करें। स्तुति का पाठ करते समय, श्रीमती लक्ष्मी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति रखें।
स्तुति का पाठ करने के बाद, श्रीमती लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को प्रसाद अर्पित करें। आप फूल, धूप, दीप, फल और मिठाई आदि अर्पित कर सकते हैं। इसके
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