श्रीराधाष्टकम एक संस्कृत श्लोक है जो राधा, कृष्ण की प्रियतमा, के लिए समर्पित है। यह श्लोक 8 श्लोकों में लिखा गया है, और प्रत्येक श्लोक में राधा की एक अलग विशेषता या गुण का वर्णन किया गया है।
श्रीराधाष्टकम का पहला श्लोक इस प्रकार है:
राधिका कृष्णवल्लभा त्रिभुवन-जननी
सरस्वती गंगा-कमला भवानी
अष्टभुजा जगदम्बा त्रिपुरसुंदरी
राधा-राधा जय राधा जय राधा
इस श्लोक में, भक्त राधा को कृष्ण की वल्लभा, त्रिभुवन-जननी, सरस्वती, गंगा, कमला, भवानी, अष्टभुजा जगदम्बा और त्रिपुरसुंदरी कहते हैं। वे राधा को "राधा-राधा" के रूप में पुकारते हैं, जो उनके लिए एक आराधना है।
श्रीराधाष्टकम एक शक्तिशाली भक्ति श्लोक है जो भक्तों के दिलों में राधा के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह श्लोक राधा की भक्ति करने की इच्छा को प्रेरित करने में मदद कर सकता है।
श्रीराधाष्टकम की रचना 16वीं शताब्दी के वैष्णव कवि और दार्शनिक चैतन्य महाप्रभु द्वारा की गई थी। यह श्लोक राधा के भक्तों द्वारा अक्सर गाया और पढ़ा जाता है।
यहां श्रीराधाष्टकम के सभी 8 श्लोक दिए गए हैं:
राधिका कृष्णवल्लभा त्रिभुवन-जननी सरस्वती गंगा-कमला भवानी अष्टभुजा जगदम्बा त्रिपुरसुंदरी राधा-राधा जय राधा जय राधा
राधिका गोपी-वल्लभा यमुना-तट-निवासिनी अष्टांग-सौन्दर्य-सम्पन्ना मधुर-भाषिणी राधा-राधा जय राधा जय राधा
राधिका कृष्ण-प्रिया मधुर-विलासिनी गोपी-गण-समवेता यमुना-तट-निवासिनी राधा-राधा जय राधा जय राधा
राधिका कृष्ण-भाविनी मधुर-गीति-गायिका गोपी-गण-समवेता यमुना-तट-निवासिनी राधा-राधा जय राधा जय राधा
राधिका कृष्ण-भक्ता मधुर-लीला-दर्शिनी गोपी-गण-समवेता यमुना-तट-निवासिनी राधा-राधा जय राधा जय राधा
राधिका कृष्ण-प्रेयसी मधुर-रस-निधिनी गोपी-गण-समवेता यमुना-तट-निवासिनी राधा-राधा जय राधा जय राधा
राधिका कृष्ण-सखी मधुर-सौन्दर्य-सम्पन्नी गोपी-गण-समवेता यमुना-तट-निवासिनी राधा-राधा जय राधा जय राधा
राधिका कृष्ण-भगवती मधुर-भक्ति-प्रदायिनी गोपी-गण-समवेता यमुना-तट-निवासिनी राधा-राधा जय राधा जय राधा
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