Sri Maheshwara Pratah Smaranam and Pancharatna Stotram
श्री महेश्वर प्रातः स्मृति एक संस्कृत श्लोक है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह श्लोक भक्तों को भगवान शिव को प्रातःकाल याद करने के लिए प्रेरित करता है।
श्लोक इस प्रकार है:
श्री महेश्वर प्रातः स्मृति
प्रातः स्फुरणं रविवदं
द्युतिमानं ज्योतिर्मयं
त्रिनेत्रं शशिवर्णं च
वन्दे महेश्वरं शिवम्
अर्थ
हे महेश्वर शिव, आप सूर्य की तरह चमकते हैं। आप प्रकाश और ज्ञान के अवतार हैं। आपके तीन नेत्र हैं और आपका रंग चंद्रमा की तरह है। मैं आपको प्रणाम करता हूं।
पंचारत्न स्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के पांच रत्नों की महिमा का वर्णन करता है। ये पांच रत्न हैं:
- शिवलिंग
- गंगा
- नंदी
- रुद्राक्ष
- भस्म
स्तोत्र इस प्रकार है:
Sri Maheshwara Pratah Smaranam and Pancharatna Stotram
पंचारत्न स्तोत्र
नमो हिमालयतनये
नमः पशुपतिनाथाय
नमः गंगाधराय च
नमः रुद्राक्षधारकाय
नमः भस्मधारकाय च
शिवलिंगं च नमस्ते
नमस्ते गंगे महानदी
नमस्ते नन्दिकुमाराय
नमस्ते रुद्राक्षधारकाय
नमस्ते भस्मधारकाय च
अर्थ
हे हिमालय के पुत्र, हे पशुपतिनाथ, हे गंगाधर, हे रुद्राक्षधारी, हे भस्मधारी,
मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे शिवलिंग, हे गंगा, हे नंदी, हे रुद्राक्षधारी, हे भस्मधारी,
मैं आपको प्रणाम करता हूं।
श्री महेश्वर प्रातः स्मृति और पंचारत्न स्तोत्र दोनों ही भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हैं। ये श्लोक भक्तों को भगवान शिव की भक्ति में प्रेरित करते हैं।
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