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Published November 8, 2023
Updated July 29, 2024

Sridakshinamurthystotram

श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के दक्षिणामूर्ति रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक दक्षिणामूर्ति के एक विशेष गुण या स्वरूप की प्रशंसा करता है।

श्लोक 1:

नमस्ते दक्षिणामूर्ति नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते शिवाय नमस्ते नमस्ते ॥ १ ॥

अर्थ:

हे दक्षिणामूर्ति, हे शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 2:

नमस्ते नमस्ते अर्धनारीश्वराय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ २ ॥

अर्थ:

हे अर्धनारीश्वर, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 3:

नमस्ते नमस्ते चंद्रशेखराय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ ३ ॥

अर्थ:

हे चंद्रशेखर, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 4:

नमस्ते नमस्ते गंगाधराय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ ४ ॥

अर्थ:

हे गंगाधर, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

Sridakshinamurthystotram

श्लोक 5:

नमस्ते नमस्ते त्रिशूलधारिणे । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ ५ ॥

अर्थ:

हे त्रिशूलधारी, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 6:

नमस्ते नमस्ते नंदीश्वराय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ ६ ॥

अर्थ:

हे नंदीश्वर, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 7:

नमस्ते नमस्ते सर्वदेवेश्वराय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ ७ ॥

अर्थ:

हे सर्वदेवेश्वर, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 8:

नमस्ते नमस्ते सर्वज्ञाय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ ८ ॥

अर्थ:

हे सर्वज्ञ, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 9:

नमस्ते नमस्ते सर्वशक्तिमानाय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ ९ ॥

अर्थ:

हे सर्वशक्तिमान, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 10:

नमस्ते नमस्ते जगन्नाथाय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥ १० ॥

अर्थ:

हे जगन्नाथ, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र अक्सर प्रार्थना और ध्यान में किया जाता है।

श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र के प्रमुख प्रसंग:**

  • स्तोत्र का प्रारंभिक श्लोक भगवान शिव के प्रमुख नामों से उनकी महिमा का वर्णन करता है।
  • स्तोत्र के अगले नौ श्लोक भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और गुणों की प्रशंसा करते हैं।
  • स्तोत्र का अंतिम श्लोक भगवान शिव की सर्वोच्चता की घोषणा करता है।

श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र सभी कामनाओं की पूर्ति के लिए सहायक है। यह स्तोत्र मानसिक शांति और समृद्धि प्रदान करता है।

श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र के कुछ महत्वपूर्ण नाम:**

  • दक्षिणामूर्ति - दक्षिण दिशा में स्थित शिव
  • अर्धनारीश्वर - अर्धा शरीर पुरुष और अर्धा शरीर स्त्री के रूप में शिव
  • चंद्रशेखर - चंद्रमा को मुकुट में धारण करने वाले

श्रीदक्षिणामूर्तिस्तोत्रम् २ Sridakshinamurthystotram 2

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