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Published November 2, 2023
Updated November 2, 2023

Shivshiromalikastutih

हाँ, शिवशिरोमालिकास्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव के सिर पर स्थित त्रिशूल, चंद्रमा, नाग, और अन्य प्रतीकों की प्रशंसा करता है।

स्तोत्र के 10 श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में एक विशेष प्रतीक है।

श्लोक 1

त्रिशूलेन त्रिलोकम वशीकृतं भवान्।

महादेवो भवासुरारि।

अर्थ:

हे महादेव, आपने त्रिशूल से त्रिलोक को वश में कर लिया है।

आप असुरों के शत्रु हैं।

श्लोक 2

चंद्रमंडलमाली चन्द्रशेखरः।

शिवः सदा मंगलप्रदः।

अर्थ:

चंद्रमा को माला के रूप में धारण करने वाले चंद्रशेखर शिव हैं।

शिव हमेशा मंगलदायी होते हैं।

श्लोक 3

गंगाधरः गिरिजापतिः।

शिवः सदा भक्तवत्सलः।

अर्थ:

गंगा को धारण करने वाले, पार्वती के पति शिव हैं।

शिव हमेशा भक्तों के प्रिय होते हैं।

श्लोक 10

त्रिनेत्रः त्रिपुरारीः।

शिवः सदा सर्वशक्तिमानः।

अर्थ:

तीन आंखों वाले, त्रिपुरारी शिव हैं।

शिव हमेशा सर्वशक्तिमान होते हैं।

शिवशिरोमालिकास्तुति एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र ध्यान और साधना के लिए भी उपयोग किया जाता है।

स्तोत्र का हिंदी अनुवाद:

शिवशिरोमालिकास्तुति

भगवान शिव की स्तुति

हे महादेव, आपने त्रिशूल से त्रिलोक को वश में कर लिया है।

आप असुरों के शत्रु हैं।

चंद्रमा को माला के रूप में धारण करने वाले चंद्रशेखर शिव हैं।

शिव हमेशा मंगलदायी होते हैं।

गंगा को धारण करने वाले, पार्वती के पति शिव हैं।

शिव हमेशा भक्तों के प्रिय होते हैं।

तीन आंखों वाले, त्रिपुरारी शिव हैं।

शिव हमेशा सर्वशक्तिमान होते हैं।

श्लोक 1 से 10 तक, भक्त भगवान शिव के सिर पर स्थित विभिन्न प्रतीकों की प्रशंसा करता है।

भक्त यह विश्वास करता है कि भगवान शिव की कृपा से वह सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त हो सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

स्तोत्र के रचयिता अज्ञात हैं।

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