उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भारतीय कवि और संत, मम्मट द्वारा लिखा गया था।
उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र में 9 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग रूप या गुण का वर्णन किया गया है।
उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र का पहला श्लोक इस प्रकार है:
नमस्ते नमस्ते नमोस्तु ते, महादेवि! नमोस्तु ते ! नमस्ते हिमालय-सूनवे, नमस्ते पार्वती! नमोस्तु ते !
इस श्लोक में, मम्मट देवी पार्वती को "महादेवि" कहते हैं, जिसका अर्थ है "महान देवी"। वे उन्हें "हिमालय-सूनवे" भी कहते हैं, जिसका अर्थ है "हिमालय की पुत्री"।
उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र के 9 श्लोकों का अर्थ है:
- श्लोक 1: हे देवी पार्वती, आपको नमस्कार। आप महादेवि हैं, और आप हिमालय की पुत्री हैं।
- श्लोक 2: आप ज्ञान और विवेक की दाता हैं।
- श्लोक 3: आप करुणा और दया के सागर हैं।
- श्लोक 4: आप भक्तों के रक्षक हैं।
- श्लोक 5: आप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
- श्लोक 6: आप ब्रह्मांड की कर्ता, धर्ता और हर्ता हैं।
- श्लोक 7: आप सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ हैं।
- श्लोक 8: आप भक्तों के लिए एक आदर्श हैं।
- श्लोक 9: हे देवी पार्वती, आपकी स्तुति करने के लिए हमें शक्ति दें।
उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र एक शक्तिशाली भक्ति भजन है जो भक्तों के दिलों में देवी पार्वती के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह भजन देवी पार्वती की महिमा और गुणों को दर्शाता है।
उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र के 9 श्लोकों का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
- हे देवी पार्वती, आपको नमस्कार। आप महादेवि हैं, और आप हिमालय की पुत्री हैं।
- आप ज्ञान और विवेक की दाता हैं।
- आप करुणा और दया के सागर हैं।
- आप भक्तों के रक्षक हैं।
- आप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
- आप ब्रह्मांड की कर्ता, धर्ता और हर्ता हैं।
- आप सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ हैं।
- आप भक्तों के लिए एक आदर्श हैं।
- हे देवी पार्वती, आपकी स्तुति करने के लिए हमें शक्ति दें।
उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसे अक्सर पूजा और अनुष्ठानों के दौरान पढ़ा जाता है। यह भजन भक्तों को देवी पार्वती की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह से सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।
यहां उमाष्टोत्तराष्टक स्तोत्र का एक उदाहरण है:
नमस्ते नमस्ते नमोस्तु ते, महादेवि! नमोस्तु ते !
इस श्लोक का अर्थ है:
हे देवी पार्वती, आपको नमस्कार। आप महादेवि हैं, और आप हिमालय की पुत्री हैं।
यह श्लोक देवी पार्वती की महिमा और величा को दर्शाता है। यह भक्तों को आशा और प्रेरणा देता है कि देवी पार्वती उन्हें अपने जीवन में सफलता और खुशी प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं।
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