स्तोत्र

श्रीहनूमत्स्तोत्रम् १ Srihanumatsotram 1

श्रीहनुमत्सोत्रम 1 एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की आराधना के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित है। इस स्तोत्र में भगवान हनुमान की शक्तियों और गुणों का वर्णन किया गया है। श्रीहनुमत्सोत्रम 1 का पाठ निम्नलिखित है: श्लोक: जय जय हनुमंत बलवान। दुष्टदलन चतुर वीर। कपि रूप धरि

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श्रीहनूमत्स्तोत्रम् २ Srihanumatsotram 2

श्रीहनुमत्सोत्रम 2 एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की आराधना के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित है। इस स्तोत्र में भगवान हनुमान की शक्तियों और गुणों का वर्णन किया गया है। श्रीहनुमत्सोत्रम 2 का पाठ निम्नलिखित है: श्लोक: जय अंजनि कुमार बलवन्ता। जय कपीस तिहुं लोक विख्याता। रामचन्द्रजी

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श्रीहनूमत्स्तोत्रम् ३ Srihanumatsotram 3

श्रीहनुमत्सोत्रम 3 एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की आराधना के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित है। इस स्तोत्र में भगवान हनुमान की शक्तियों और गुणों का वर्णन किया गया है। श्रीहनुमत्सोत्रम 3 का पाठ निम्नलिखित है: श्लोक: जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।

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हनुमत्पञ्चरत्नस्तोत्रम् Hanumatpancharatnastotram

हनुमत्पञ्चरत्नस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हनुमान जी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, जो रामायण के लेखक भी हैं। स्तोत्र का अर्थ इस प्रकार है: हे हनुमान, आप भगवान राम के परम भक्त हैं। आप भगवान राम की भक्ति में लीन हैं। आप भगवान राम के कार्यों में हमेशा

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श्रीरामसर्वस्वस्तोत्रम् Shriramsarvasvastotram

श्रीरामसर्वस्वस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान राम की सर्वव्यापकता की प्रशंसा करता है। यह स्तोत्र तुलसीदास द्वारा रचित है, और यह श्रीरामचरित मानस के अयोध्या कांड के अंत में पाया जाता है। श्रीरामसर्वस्वस्तोत्रम् 18 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक भगवान राम के एक अलग पहलू की प्रशंसा करता है। स्तोत्र की शुरुआत

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हनुमदष्टाविंशतिनामस्तोत्रं Hanumadashtavinshatinamastotram

हनुमदसत्तरसातनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हनुमान जी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, जो रामायण के लेखक भी हैं। स्तोत्र का अर्थ इस प्रकार है: हे हनुमान, आप भगवान राम के परम भक्त हैं। आप भगवान राम की भक्ति में लीन हैं। आप भगवान राम के कार्यों में हमेशा

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श्रीरामरक्षास्तोत्रम् पद्ममहापुराणान्तर्गतम् Shri Ramrakshastotram Padma Mahapuranantargatam

रामरक्षास्तोत्रम् एक संस्कृत स्त्रोत्र है जो भगवान राम की रक्षा के लिए लिखा गया है। यह स्त्रोत्र बुध कौशिक ऋषि द्वारा रचित है, और यह श्रीरामचरित मानस के अयोध्या कांड के अंत में पाया जाता है। रामरक्षास्तोत्रम् 40 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक भगवान राम की एक अलग विशेषता या गुण का वर्णन

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हनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ३ Hanumadashtottarashatanamastotram 3

हनुमदसत्तरसातनामस्तोत्रम् ३ एक संस्कृत स्तोत्र है जो हनुमान जी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, जो रामायण के लेखक भी हैं। स्तोत्र का अर्थ इस प्रकार है: हे हनुमान, आप भगवान राम के परम भक्त हैं। आप भगवान राम के कार्यों में हमेशा तत्पर हैं। आप भगवान राम की कृपा

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सूर्यकवचस्तोत्रम् २ Suryakavachastotram 2

श्री सूर्यकवचस्तोत्रम् २ ॐ नमो भगवते सूर्याय ध्यानम् घृणिर्मे शीर्षकं पातु सूर्यः पातु ललाटकम् । आदित्यःपातु नेत्रे द्वे श्रोत्रे पातु दिवाकरः ॥ १ ॥ मूल मंत्रम् ॐ नमो भगवते सूर्याय । प्रणव मंत्रम् ॐ ह्रीं सूर्याय नमः । अर्थः हे भगवान सूर्य, मैं आपको नमन करता हूं। आपके सिर की रक्षा घृणि से होती है,

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हनूमद्भुजङ्गस्तोत्रम् Hanumadbhujangastotram

हनुमद्भुजंगस्तोत्र भगवान हनुमान की स्तुति करने वाला एक शक्तिशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र हनुमान के भुजंग रूप की स्तुति करता है। भुजंग रूप में हनुमान एक विशालकाय सांप के समान हैं, जिनके सिर पर भगवान राम और लक्ष्मण विराजमान हैं। हनुमद्भुजंगस्तोत्र का पाठ करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं: भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती

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श्रीसूर्यदिव्यकवचस्तोत्रम् ५ Sri SuryaDivyakavchastotram 5

श्रीसूर्य दिव्य कवच स्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र भगवान सूर्य के स्वरूप और शक्तियों का वर्णन करता है। श्रीसूर्य दिव्य कवच स्तोत्र का पाठ करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं: भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है। सभी प्रकार के भय और

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श्रीसुब्रह्मण्यकवचस्तोत्रम् Srisubrahmanyakavachastotram

श्रीसुब्रमण्य कवचस्तोत्र एक शक्तिशाली मंत्र है जो भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त करता है। यह एक स्तोत्र है जो भगवान कार्तिकेय के स्वरूप और शक्तियों का वर्णन करता है। श्रीसुब्रमण्य कवचस्तोत्र का पाठ करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं: भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त होती है। सभी प्रकार के भय और खतरों से सुरक्षा प्राप्त

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