स्तोत्र

श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Sridurgaashtottarashatanamastotram

श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी दुर्गा के 108 नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के आदिपंचकम् का हिस्सा है। स्तोत्र के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं: स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त देवी दुर्गा का ध्यान करते हैं। स्तोत्र के शेष श्लोकों में, भक्त देवी दुर्गा की महिमा और

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श्रीदुर्गा आपदुद्धाराष्टकम् अथवा दुर्गापदुद्धारस्तोत्रम् Sridurga apaduddharashtakam or durgapaduddharstotram

श्रीदुर्गा अपदुद्धारष्टकम् और दुर्गापदुद्धारकस्तोत्रम् दोनों ही हिंदू देवी दुर्गा की स्तुति करने वाले संस्कृत स्तोत्र हैं। ये दोनों स्तोत्र दुर्गा के अपदुद्धार रूप की स्तुति करते हैं, जो सभी कष्टों और परेशानियों को दूर करने वाली हैं। श्रीदुर्गा अपदुद्धारष्टकम् में आठ श्लोक हैं, जबकि दुर्गापदुद्धारकस्तोत्रम् में 16 श्लोक हैं। दोनों स्तोत्रों में, भक्त देवी दुर्गा

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श्रीचामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Sri Chamundeshwari Ashtottara Shatnam Stotram

श्री चामुंडेश्वरी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी चामुंडेश्वरी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र देवी चामुंडेश्वरी के 81 नामों की स्तुति करता है। स्तोत्र के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं: स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त देवी चामुंडेश्वरी का ध्यान करते हैं। स्तोत्र के शेष श्लोकों में, भक्त देवी चामुंडेश्वरी

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आञ्जनेयस्तोत्रम् १ Anjaneyastotram 1

अंजनेयस्तोत्र 1 एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र तुलसीदास द्वारा लिखा गया था और रामचरितमानस में पाया जाता है। स्तोत्र इस प्रकार है: अंजनीसुत केसरीनंदन, पवनसुत मारुति महावीर। रामदूत अतुलबलधाम, सर्वसृष्टि के तुम स्वामी। महाबलधिष्णु नमोस्तुते, सर्वकार्येषु जय जय जय। इस स्तोत्र में, हनुमान जी को विभिन्न नामों

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आञ्जनेयस्तोत्रम् २ Anjaneyastotram 2

अंजनेयस्तोत्र 2 एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र तुलसीदास द्वारा लिखा गया था और रामचरितमानस में पाया जाता है। स्तोत्र इस प्रकार है: सुन्दरकाण्ड में जो स्तोत्र है, हनुमान जी की स्तुति में। अंजनेयस्तोत्र कहलाता है, यह रामभक्तों को सुख देता है। अंजनी के पुत्र महावीर, पवनसुत हनुमान

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मान्धातृशैलेश्वरीस्तोत्र Mandhatrishaileshwaristotra

मंदाकिनीशैलश्वरस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव के मंदाकिनीशैलश्वर रूप की स्तुति करता है, जो हिमालय में स्थित एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। स्तोत्र के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं: स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त भगवान शिव का ध्यान करते हैं। स्तोत्र के शेष

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आञ्जनेयाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (कालिकारहस्यतः) Anjaneyaashtakotashatanaamastotram (kaalikaarahastah)

अंजनीशष्टकोटिशतनामाष्टक एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र अंजनीशष्टकोटिशतनामावली का एक छोटा रूप है, जिसमें केवल आठ नाम हैं। स्तोत्र इस प्रकार है: अंजनीसुत केसरीनंदन, पवनसुत मारुति महावीर। रामदूत अतुलबलधाम, सर्वसृष्टि के तुम स्वामी। महाबलधिष्णु नमोस्तुते, सर्वकार्येषु जय जय जय। इस स्तोत्र में, हनुमान जी को विभिन्न नामों और

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देवीक्षमापणस्तोत्रम् Devikshamapanastotram

देवीक्षमापनस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भक्तों को देवी दुर्गा से क्षमा प्राप्त करने में मदद करता है। स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त देवी दुर्गा के सामने अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। वे देवी दुर्गा को महामाया, सर्वशक्तिमान और सर्वपापकृते के रूप में नमस्कार

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आपदुद्धारक श्रीहनूमत्स्तोत्रम् Aapaduddhaarak shreehanumatsotram

आपदुद्धारक श्रीहनुमत्सोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र हनुमान जी को आपदाओं से बचाने वाला माना जाता है। स्तोत्र इस प्रकार है: श्रीरामदूत महाबल पराक्रमी, सर्वकार्ये सिद्धिप्रदाय। सर्वशत्रुविनाशकारी, जन्मजन्मान्तर दुःखहारी। अष्टसिद्धि नवनिधि दायिनी, कृपा करो महावीर हनुमान। राम भक्त के तुम रक्षक हो, सदैव मेरे साथ रहो। ॥

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आपदुद्धारक श्रीहनूमत्स्तोत्रम् Srihanumtsotram

श्री हनुमत स्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र रामायण के सुंदरकांड में पाया जाता है। स्तोत्र इस प्रकार है: अतुल बलधामौ हनुमंतकपीश। जाकी कृपा छायाँ छूटहिं पाप की बिषाद। जिनके बल से सारी दुनिया काँपती है, जिनके आशीर्वाद से पापों का नाश होता है। जाके चरित्र सुंदर,

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कीलकस्तोत्रम् keelkastotram

कीलक स्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के अंत में आता है और इसे सप्तशती के पाठ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कीलक स्तोत्रम के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं: स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त देवी दुर्गा को नमस्कार करते हैं

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स्वामिवश्यकरी शत्रुविध्वंसिनी स्तोत्रम् Swamivashyakari Shatruvidhvansini Stotram

स्वामीवशकारी शत्रुविध्वन्सिनी स्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र देवी दुर्गा से प्रार्थना करता है कि वे शत्रुओं को वश में करें और उन्हें परास्त करें। स्वामिवशकारी शत्रुविध्वन्सिनी स्तोत्र के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं: स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त देवी दुर्गा को नमस्कार करते हैं

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