स्तोत्र

श्रीगणेशापराधक्षमापणस्तोत्रम्

श्रीगणेशापराधक्षमापणस्तोत्रम् – प्रस्तावना भगवान गणेश, विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं। उनके आशीर्वाद के बिना कोई भी शुभ कार्य सफल नहीं होता। अक्सर अनजाने में हम भगवान गणेश से अपराध कर बैठते हैं। इस स्तोत्र में भगवान गणेश से क्षमा याचना की गई है। स्तोत्र ओम नमः शिवाय हे गणेश्वर! आप सर्वत्र व्याप्त हैं, आप

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श्रीदत्तात्रेयापराधक्षमापणस्तोत्रम् २ स्तोत्र

श्रीदत्तात्रेयापराधक्षमापणस्तोत्रम् – 2 प्रस्तावना पहले भाग में हमने देखा कि भगवान दत्तात्रेय की कृपा अपार है और वे अपने भक्तों के अपराधों को सहजता से क्षमा कर देते हैं। इस दूसरे भाग में भी हम उनके चरणों में शरणागति लेकर क्षमा याचना करेंगे। स्तोत्र ओम नमो भगवते दत्तात्रेयाय हे दत्तात्रेय! आप त्रिमूर्ति के स्वरूप हैं,

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श्रीललिता त्रिपुरसुन्दरी अपराधक्षमापणस्तोत्रम्

श्रीललिता त्रिपुरसुन्दरी – एक दिव्य स्तुति श्रीललिता त्रिपुरसुन्दरी हिंदू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं, जो शक्ति की अधिष्ठात्री हैं। वे सर्वोच्च चेतना और सृष्टि की रचनात्मक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके नाम का अर्थ है “संपूर्ण सुंदरता की देवी”। ललिता सहस्रनाम देवी ललिता के 1000 नामों का एक विशिष्ट संग्रह है जिसे “ललिता

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श्रीदत्तापराधक्षमापणस्तोत्रम्

श्रीदत्तापराधक्षमापणस्तोत्रम् प्रस्तावना श्रीदत्तात्रेय भगवान की कृपा अपार है। उनके भक्तों पर सदैव उनकी कृपादृष्टि बनी रहती है। यदि अनजाने में कोई भक्त उनसे अपराध कर बैठता है तो भी वे क्षमाशील होकर अपने भक्तों को सहज ही क्षमा कर देते हैं। इस स्तोत्र में भगवान दत्तात्रेय से अपने अपराधों की क्षमा याचना की गई है।

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Shiv Tandava Stotram शिव ताण्डव स्तोत्रम्

शिव तांडव स्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के तांडव नृत्य की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 16 श्लोकों का है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के तांडव नृत्य के एक विशेष पहलू का वर्णन किया गया है। शिव तांडव स्तोत्र का रचनाकाल निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है, लेकिन

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आपदुद्धारक श्रीहनूमत्स्तोत्रम् aapaduddhaarak shreehanumatsotram

आपदुद्धारक श्रीहनुमत्सोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना 12वीं शताब्दी के भक्तिकाल के कवि नंददास ने की थी। यह स्तोत्र हनुमान की महिमा का वर्णन करता है। स्तोत्र के अनुसार, हनुमान भगवान राम के परम भक्त हैं। वे सभी प्रकार के संकटों से रक्षा करने वाले हैं। वे अपने भक्तों को सभी प्रकार के सुखों

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प्रदोषस्तोत्राष्टकम् Pradosh Stotra Ashtakam

प्रदोष स्तोत्र अष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना 15वीं शताब्दी में भक्तिकाल के कवि, महादेवी वर्मा ने की थी। यह स्तोत्र प्रदोष काल में भगवान शिव की स्तुति करता है। प्रदोष स्तोत्र अष्टकम् के 8 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में 8 चरणों होते हैं। महादेवी वर्मा एक महान भक्ति संत थीं। वे भगवान

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शशाङ्कमौलीश्वरस्तोत्रम् Shashankamoulishwarastotram

शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10वीं शताब्दी में श्रीमच्छंकराचार्य द्वारा रचित था। शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् के कुछ प्रमुख श्लोक निम्नलिखित हैं: Shashankamoulishwarastotram श्लोक 1: शशांकमोलीश्वराय शशिमुखवल्लभाय । चन्द्रशेखराय नीलकण्ठाय नमो नमः ॥ अर्थ: हे शशांक के समान मोतियों से सुशोभित शिव! हे चंद्र के समान मुख वाले शिव!

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श्रीकृष्णस्तोत्रं ब्रह्मवैवर्तपुराणे धर्मकृतम् Srikrishna Stotram Brahmavaivartapurane Dharmakritam

Srikrishna Stotram Brahmavaivartapurane Dharmakritam नहीं, श्रीकृष्ण स्तोत्रम् ब्रह्मवैवर्त पुराण में धर्मकृत द्वारा रचित नहीं है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना 16वीं शताब्दी में हुई थी, जबकि ब्रह्मवैवर्त पुराण की रचना 10वीं शताब्दी में हुई थी। इस प्रकार, श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना ब्रह्मवैवर्त पुराण के बाद हुई थी। ब्रह्मवैवर्त पुराण में श्रीकृष्ण स्तोत्रम् के कुछ श्लोकों का

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श्रीकृष्णस्तोत्रं वसुदेवकृतं ब्रह्मवैवर्तपुराणान्तर्गतम् Srikrishna Stotram Vasudevkritam Brahmavaivartapuranantargatam

श्रीकृष्ण स्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 100 श्लोकों में विभाजित है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना का श्रेय 16वीं शताब्दी के कवि और संत श्रीमद्गोपाल भट्ट गोस्वामी को दिया जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की प्रेममय लीलाओं का वर्णन करता है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम् के कुछ प्रमुख

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श्रीकृष्णस्तोत्रम् श्रीमहादेवकृतम् Sri Krishna Stotram Sri Mahadevkritam

श्रीकृष्ण स्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 100 श्लोकों में विभाजित है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना का श्रेय 16वीं शताब्दी के कवि और संत श्रीमद्गोपाल भट्ट गोस्वामी को दिया जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की प्रेममय लीलाओं का वर्णन करता है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम् के कुछ प्रमुख

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श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Shrikrishnaashtottarashatanamastotram

श्रीकृष्णाष्टोत्तरसहस्रनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 1080 श्लोकों में विभाजित है। श्रीकृष्णाष्टोत्तरसहस्रनामस्तोत्रम् की रचना का श्रेय 14वीं शताब्दी के कवि और संत श्रीवल्लभाचार्य को दिया जाता है। यह स्तोत्र वल्लभाचार्य के प्रेम मार्ग के सिद्धांतों पर आधारित है। श्रीकृष्णाष्टोत्तरसहस्रनामस्तोत्रम् में, भगवान कृष्ण को प्रेम के सागर के

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