स्तोत्र

श्रीहंसाष्टकस्तोत्रम् Srihansashtakstotram

श्रीहंसष्टकस्तोत्रम् एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के रूप और गुणों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण को एक हंस के रूप में वर्णित करता है, जो ज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। श्रीहंसष्टकस्तोत्रम् की रचना श्रीमदभागवत पुराण में श्रीकृष्ण भक्त उद्धव द्वारा की गई थी। श्रीहंसष्टकस्तोत्रम् में 8 श्लोक हैं। प्रत्येक

श्रीहंसाष्टकस्तोत्रम् Srihansashtakstotram Read More »

स्फुरत्कृष्णप्रेमामृतस्तोत्रम् Sphuratkrishnapremamritstotram

स्फुरत्कृष्णप्रेममृतस्तोत्रम् एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के प्रेम की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के प्रेम को एक अमृत के रूप में वर्णित करता है जो भक्तों के जीवन को आनंद और पूर्णता से भर देता है। स्फुरत्कृष्णप्रेममृतस्तोत्रम् की रचना श्रीकृष्ण भक्त स्वामी युगल शरण जी द्वारा की गई

स्फुरत्कृष्णप्रेमामृतस्तोत्रम् Sphuratkrishnapremamritstotram Read More »

आनन्दस्तोत्रम् Anandstotram

आनंदस्तोत्रम् एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के रूप और गुणों का वर्णन करता है। आनंदस्तोत्रम् की रचना श्रीरूप गोस्वामी द्वारा की गई थी। आनंदस्तोत्रम् में 12 श्लोक हैं। प्रत्येक श्लोक में, भक्त भगवान कृष्ण की एक अलग विशेषता की स्तुति करते हैं। प्रथम श्लोक में,

आनन्दस्तोत्रम् Anandstotram Read More »

गुरुमरुत्पुराधीशस्तोत्रम् Gurumarutpuradheeshstotram

गुरुमारुतपुरधीशस्तोत्रम एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के गुरुवायुर रूप की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु को गुरुवायुर के मंदिर के स्वामी के रूप में दर्शाता है। स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है: नमस्ते गुरुवायुरनाथाय, सर्वलोकनाथाय। सर्वव्यापी रूपधारिणे, सर्वमंगलदायक। नमस्ते हरिहरस्वरूपाय, सर्वपापनाशिणे। शत्रुघ्नाय नमस्ते, सर्वार्थ साधक। नमस्ते नृसिंहस्वरूपाय, सर्वज्ञो नमस्ते। नमस्ते वामनस्वरूपाय,

गुरुमरुत्पुराधीशस्तोत्रम् Gurumarutpuradheeshstotram Read More »

गुरुवायुपुरेशभुजङ्गस्तोत्रम् Guruvayupureshbhujangastotram

गुरुवायुपुरेश्वरभुजंगास्तोत्रम एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के गुरुवायुर रूप की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के भुजंगों की विशेष रूप से स्तुति करता है। स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है: नमस्ते गुरुवायुपुरेश्वराय, सर्वव्यापी रूपधारिणे। भुजङ्गेच्छामयं वपुः, दृष्ट्वा भवति चैतन्यं। नमस्ते भुजङ्गेश्वराय, भक्तजननाथाय। विश्वस्य पालकाय, सर्वमंगलदायक। नमस्ते भुजङ्गेश्वराय, सर्व रोग हरिणे। शत्रुघ्नाय

गुरुवायुपुरेशभुजङ्गस्तोत्रम् Guruvayupureshbhujangastotram Read More »

गुरुवायुरप्प अथवा नारायणीय तथा रोगहरसहस्रनामस्तोत्रम् Guruvayurap or Narayaniya and Rogaharasahasranamastotram

गुरुवायुरप्पा, नारायणीया और रोगहरसहस्रनामस्तोत्रम तीन अलग-अलग भक्तिपूर्ण ग्रंथ हैं जो भगवान विष्णु की स्तुति करते हैं। गुरुवायुरप्पा एक छोटा सा भक्तिपूर्ण गीत है जो भगवान विष्णु के गुरुवायुर रूप की स्तुति करता है। यह गीत भगवान विष्णु को गुरुवायुर के मंदिर में उनकी मूर्ति के रूप में वर्णित करता है। यह गीत भगवान विष्णु की

गुरुवायुरप्प अथवा नारायणीय तथा रोगहरसहस्रनामस्तोत्रम् Guruvayurap or Narayaniya and Rogaharasahasranamastotram Read More »

चतुरशीतिवैष्णवनामावलीस्तोत्रम् Chaturshittivaishnavanamvalistotram

चतुर्शिष्टिवैष्णवानवलिस्तोत्रम् एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के चार रूपों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र अष्टम शताब्दी के वैष्णव संत श्री शंकराचार्य द्वारा रचित है। स्तोत्र में, श्री शंकराचार्य भगवान विष्णु के चार रूपों की महिमा का वर्णन करते हैं: नारायण: भगवान विष्णु के चार रूपों में से पहला रूप नारायण है। नारायण

चतुरशीतिवैष्णवनामावलीस्तोत्रम् Chaturshittivaishnavanamvalistotram Read More »

नवरत्नस्तोत्रम् Navaratnastotram

नवरात्र स्तोत्रम, जिसे हिंदी में “नौ देवियों की स्तुति” भी कहा जाता है, एक संस्कृत स्तोत्र है जो नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की स्तुति में रचित है। यह स्तोत्र 40 श्लोकों में देवी के विभिन्न नामों और गुणों का वर्णन करता है। नवरात्र स्तोत्रम की रचना 14वीं शताब्दी में हुई थी।

नवरत्नस्तोत्रम् Navaratnastotram Read More »

नामरत्नमालावलिस्तोत्रम् Naamratnamalavalistotram

नामरत्नामालविलोष्टोत्रम्, जिसे हिंदी में “नाम रत्नमाला विलोष्टोत्र” भी कहा जाता है, एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति में रचित है। यह स्तोत्र 24 श्लोकों में शिव के विभिन्न नामों और गुणों का वर्णन करता है। नामरत्नामालविलोष्टोत्रम् की रचना 13वीं शताब्दी में हुई थी। इसका रचनाकार अज्ञात है, लेकिन यह माना जाता है

नामरत्नमालावलिस्तोत्रम् Naamratnamalavalistotram Read More »

नित्यानन्दाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Nityanandashottarashatanamastotram

नित्यानंदशोत्तरशतनामास्तोत्रम्, जिसे हिंदी में “नित्यानंद के 128 नामों का स्तवन” भी कहा जाता है, एक संस्कृत स्तोत्र है जो चैतन्य महाप्रभु के प्रथम शिष्य, नित्यानंद प्रभु की स्तुति में रचित है। यह स्तोत्र 128 श्लोकों में नित्यानंद प्रभु के विभिन्न नामों और गुणों का वर्णन करता है। नित्यनंदशोत्तरशतनामास्तोत्रम् की रचना 16वीं शताब्दी में हुई थी।

नित्यानन्दाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Nityanandashottarashatanamastotram Read More »

श्रीमार्तण्डभैरवस्तोत्रम् Shrimartandbhairavastotram

श्रीमृर्तंड़भैरवस्तोत्रम् एक स्तोत्र है जो भगवान शिव के एक रूप, मृर्तंड़भैरव की स्तुति करता है। मृर्तंड़भैरव भगवान शिव के एक उग्र रूप हैं, जो मृत्यु और विनाश के देवता हैं। स्तोत्र का प्रारंभ भगवान मृर्तंड़भैरव की स्तुति से होता है। भक्त भगवान मृर्तंड़भैरव से अपनी रक्षा और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं। स्तोत्र का पाठ

श्रीमार्तण्डभैरवस्तोत्रम् Shrimartandbhairavastotram Read More »

श्रीरुद्रद्वादशनामस्तोत्रं Srirudravadashnamstotram

श्रीरुद्रदशनामस्तोत्रम् एक स्तोत्र है जो भगवान शिव के दश नामों की स्तुति करता है। ये नाम हैं: रुद्र शम्भू शिव भव कपाली महाकाल महेश्वर त्रिलोचन नीलकंठ श्मशानवासी स्तोत्र का प्रारंभ भगवान शिव के दश नामों की स्तुति से होता है। भक्त इन नामों का उच्चारण करते हैं और भगवान शिव से अपनी रक्षा और आशीर्वाद

श्रीरुद्रद्वादशनामस्तोत्रं Srirudravadashnamstotram Read More »

App Download