श्रीकृष्ण

श्रीपार्थसारथ्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Shriparthasarthyashtottarashatanamastotram

श्रीपार्थसारथीष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के 108 नामों की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तोत्र 14वीं शताब्दी के भक्त कवि, श्री मधुसूदन सरस्वती द्वारा रचित है। श्रीपार्थसारथीष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् के श्लोक:** 1. हे कृष्ण, आप मेरे आराध्य हैं। मैं आपके 108 नामों का गुणगान करता हूँ, और आपके चरणों में लीन रहना चाहता

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श्रीपुरुषोत्तममाहात्म्यम् Shripurushottammahatmyam

श्रीपुरुषोत्तममाहात्म्यम् एक संस्कृत ग्रंथ है जो भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह ग्रंथ 11वीं शताब्दी के भक्त कवि, श्री जयदेव द्वारा रचित है। श्रीपुरुषोत्तममाहात्म्यम् में, श्री जयदेव भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान विष्णु पुरुषोत्तम में निवास करते हैं, और वे

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श्रीप्रेमसुधासत्रम् Sripremasudhasatram

श्रीप्रेमसुधासत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के प्रेम की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तोत्र 16वीं शताब्दी के भक्त कवि, श्री देवकीनंदन भट्ट द्वारा रचित है। श्रीप्रेमसुधासत्रम् में, श्री देवकीनंदन भट्ट भगवान कृष्ण के प्रेम की सुंदरता और शक्ति का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण का प्रेम अमृत

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श्रीबद्रीनाथाष्टकम् Sribadrinathashtakam

श्रीबद्रीनाथाष्टकम एक संस्कृत स्तुति है जो भगवान विष्णु के बद्रीनाथ रूप की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तुति 15वीं शताब्दी के भक्त कवि, श्री नारायण भट्ट द्वारा रचित है। श्रीबद्रीनाथाष्टकम में, श्री नारायण भट्ट भगवान विष्णु के बद्रीनाथ रूप का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान विष्णु बद्रीनाथ में निवास करते हैं,

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श्रीबालकृष्णप्रार्थनाष्टकम् Shribalkrishnaprathanashtakam

श्रीबालकृष्णप्रार्थनाष्टकम् एक संस्कृत स्तुति है जो भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तुति 14वीं शताब्दी के भक्त कवि, श्री कन्हैयालाल दास द्वारा रचित है। श्रीबालकृष्णप्रार्थनाष्टकम् में, श्री कन्हैयालाल दास भगवान कृष्ण के बाल रूप की प्रार्थना करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण उनके आराध्य हैं, और वे

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श्रीबालकृष्णाष्टकम् Shribalkrishnaashtakam

श्रीबालकृष्णाष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तोत्र 14वीं शताब्दी के भक्त कवि, श्री कन्हैयालाल दास द्वारा रचित है। श्रीबालकृष्णाष्टकम् में, श्री कन्हैयालाल दास भगवान कृष्ण के बाल रूप का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण के बाल रूप अद्भुत और

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श्रीबालकृष्णाष्टकम् २ Sribalakrishnaashtakam 2

श्रीबालकृष्णाष्टकम् 2 एक संस्कृत स्तुति है जो भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तुति श्रीकृष्ण भक्त, श्री कन्हैयालाल दास द्वारा रचित है। श्रीबालकृष्णाष्टकम् 2 में, श्री कन्हैयालाल दास भगवान कृष्ण के बाल रूप का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण के बाल रूप अद्भुत और मनमोहक

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श्रीबाललीलाष्टकम् Shreebaleelaashtakam

श्रीबाले लीलाष्टकम्, जिसे श्रीबाले लीलाष्टक भी कहा जाता है, भगवान कृष्ण के बाल लीलाओं की महिमा का वर्णन करने वाली एक स्तुति है। यह स्तुति श्रीकृष्ण भक्त, श्री हरिदास द्वारा रचित है। श्रीबाले लीलाष्टकम् में, श्री हरिदास भगवान कृष्ण के बाल लीलाओं का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण की बाल लीलाएँ

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श्रीभक्तिवैजयन्तीस्तोत्रम् Shreebhaktivaijayanteestotram

श्रीभक्तिविजयतेस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तुति है जो भगवान कृष्ण की भक्ति की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तुति श्रीमद्भागवत पुराण पर आधारित है, और इसे श्रीकृष्ण भक्त, श्री मधुकराचार्य द्वारा रचित है। श्रीभक्तिविजयतेस्तोत्रम् में, श्री मधुकराचार्य भगवान कृष्ण की भक्ति की शक्ति का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भक्ति ही मोक्ष का मार्ग

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श्रीभगवत्स्तुतिः सायङ्कालीन Shreebhagavatstutih saayangalee

श्रीभगवत्स्तुतिः सायङ्कालीन एक प्रसिद्ध भक्तिगीत है जो भगवान कृष्ण की भक्ति का वर्णन करता है। यह गीत श्रीमद्भागवत पुराण पर आधारित है, और इसे श्री विष्णु प्रसाद शर्मा ने रचा था। श्रीभगवत्स्तुतिः सायङ्कालीन के कुछ महत्वपूर्ण श्लोकों में शामिल हैं: पहला श्लोक: इस श्लोक में, भक्त भगवान कृष्ण की सुंदरता और प्रेम का वर्णन करते

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श्रीभवमङ्गलाष्टकम् Shribhavamangalashtakam

श्रीभवमंगलमष्टकम्, जिसे श्रीभवमंगलमष्टक भी कहा जाता है, भगवान शिव और माता पार्वती की आठ श्लोकों वाली एक स्तुति है। यह स्तुति भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति और प्रेम का वर्णन करती है। यह स्तुति श्री हरिदास द्वारा रचित है। श्रीभवमंगलमष्टकम् में, श्री हरिदास भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति और प्रेम की

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श्रीभुजङ्गप्रयाताष्टकम् Shribhujangprayatashtakam

श्रीभुजंगप्रयातष्टकम्, जिसे श्रीभुजंगप्रयातष्टक भी कहा जाता है, भगवान शिव की आठ श्लोकों वाली एक स्तुति है। यह स्तुति भगवान शिव के भक्त, श्री मधुकराचार्य द्वारा रचित है। श्रीभुजंगप्रयातष्टकम् में, श्री मधुकराचार्य भगवान शिव की भक्ति और शक्ति का वर्णन करते हैं। वे उन्हें पूर्ण ज्ञान और शक्ति के प्रतीक के रूप में देखते हैं, और

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