श्रीकृष्ण

श्रीगोकुलेशद्वात्रिंशन्नामाष्टकम् Srigokuleshadvatrinshannamashtakam

श्रीगोकुलकाननमामावाले स्तोत्र एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र १३ श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के बाल रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोकुलकाननमामावाले स्तोत्र की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी।

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श्रीगोकुलेशनामावलिः shreegokatokanamaaaavalee

श्रीगोकुलकाननमामावाले स्तोत्र एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र १३ श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के बाल रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोकुलकाननमामावाले स्तोत्र की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी।

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श्रीगोकुलेशस्तवः shreegokuleshastvah

श्रीगोकुलेशस्तव एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के गोकुल के स्वामी रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र आठ श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के गोकुल के स्वामी रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोकुलेशस्तव की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने

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श्रीगोकुलेशाष्टकम् Srigokulesashtakam

श्रीगोकुलेशशतक एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के गोकुल के स्वामी रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र आठ श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के गोकुल के स्वामी रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोकुलेशशतक की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने

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श्रीगोकुलेशाष्टकम् ४ Shrigokulesashtakam 4

श्रीगोकुलेशशतकम् ४ एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के गोकुल के स्वामी रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र चार श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के गोकुल के स्वामी रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोकुलेशशतकम् ४ की रचना श्री कृष्णदास

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श्रीगोकुलेशाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Srigokuleshotsavavarnanam

श्रीगोपालदेवशतक एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के देव रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र दस श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के देव रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोपालदेवशतक की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी। यह स्तोत्र

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श्रीगोकुलेशोत्सववर्णनम् Srigokuleshotsavavarnanam

श्रीगोपालदेवशतक एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के देव रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र दस श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के देव रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोपालदेवशतक की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी। यह स्तोत्र

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श्रीगोपालदेवाष्टकम् Shrigopaldevashtakam

श्रीगोपालदेवशतक एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के देव रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र दस श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के देव रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोपालदेवशतक की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी। यह स्तोत्र

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श्रीगोपालराजस्तोत्रम् Srigopalrajasotram

श्रीगोपालराजस्तोत्रम् एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के राजा रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 24 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के राजा रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोपालराजस्तोत्रम् की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी। यह स्तोत्र

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श्रीगोपाललालाष्टकम् Shrigopalalalashtakam

श्रीगोपाललालाशतक एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र आठ श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के बाल रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोपाललालाशतक की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी। यह स्तोत्र

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श्रीगोपालशतनामावलिः Shrigopalshatanamavalih

श्रीगोपालशतनामावली एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के 108 नामों की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 108 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के एक अलग नाम की स्तुति की गई है। श्रीगोपालशतनामावली की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण और उनके भक्तों

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श्रीगोपालसहस्रनामस्तोत्रम् २ अथवा बालकृष्णसहस्रनामस्तोत्रम् Srigopalasahasranamastotram 2

श्रीगोपाल सहस्रनामस्तोत्रम् 2 एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के एक हजार नामों की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र श्री गोपाल सहस्रनामस्तोत्रम् का एक संस्करण है, जिसकी रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी। श्रीगोपाल सहस्रनामस्तोत्रम् 2 की रचना श्री मधुसूदन गोस्वामी ने की थी। यह स्तोत्र श्री गोपाल सहस्रनामस्तोत्रम् के समान

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