श्रीगोकुलेशद्वात्रिंशन्नामाष्टकम् Srigokuleshadvatrinshannamashtakam
श्रीगोकुलकाननमामावाले स्तोत्र एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र १३ श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान कृष्ण के बाल रूप के एक अलग गुण या उपलब्धि की स्तुति की गई है। श्रीगोकुलकाननमामावाले स्तोत्र की रचना श्री कृष्णदास कविराज ने की थी।
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