श्रीकृष्णस्तवराज एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं…
श्रीकृष्णस्तुति (4) एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते…
भावनाप्रकाशष्टकम् (1) एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के प्रेम और करुणा के गुणों का वर्णन करते हैं। वे…
श्रीकृष्णस्तुतिर्मंगलम (1) एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते…
आदिकृत्य कृष्णस्तोत्र (1) एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 14वीं शताब्दी के कवि आदिकृत्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते…
अक्रूरकृत श्रीकृष्णस्तुति (1) एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 15वीं शताब्दी के कवि अक्रूर ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते…
श्रीकृष्णस्तव (1) एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते…
श्रीकृष्णस्थावरराज एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है “भगवान श्रीकृष्ण के स्थिर राज्य”। यह एक आध्यात्मिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति भगवान कृष्ण के प्रेम और कृपा में पूरी तरह से लीन हो जाता है। श्रीकृष्णस्थावरराज की स्थिति को अक्सर एक…
श्रीकृष्णवरदाष्टकम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं…
श्रीकृष्णवर्षावलीस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को समर्पित है। इसे 15वीं शताब्दी के कवि श्रीनाथ ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के जन्म, बचपन और युवावस्था का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि…
मथुरा-मधुरता एक शब्द है जिसका प्रयोग अक्सर भगवान कृष्ण की भक्ति और प्रेम का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यह शब्द मथुरा शहर और उसमें कृष्ण के जन्म और बचपन की यादों से जुड़ा हुआ है। मथुरा-मधुरता को…
श्रीकृष्णकथामृतमंगलश्लोक एक संस्कृत श्लोक है जो श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रारंभ में आता है। इसे 10वीं शताब्दी के कवि श्रीनारदाचार्य ने लिखा था। श्लोक का अर्थ है: shreekrshnakathaamrtamangalashlokah श्रीकृष्ण की कथा अमृत के समान है, और यह मंगलकारी है। यह सभी…