श्रीमुकुन्दस्तोत्रम् shreemukundastotram
श्रीमुकुंदस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के बाल रूप, श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है। यह स्तोत्र अष्टपदी छंद में रचित है, जिसमें प्रत्येक चरण में आठ अक्षर होते हैं। श्रीमुकुंदस्तोत्रम् की पहली दो पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: shreemukundastotram श्रीमुकुंदस्तोत्रम् श्रीमुकुंद, श्रीमुकुंद, हे बालगोपाल, तेरी महिमा अपार, तेरी लीला अपरंपार। इस स्तोत्र में, विद्यापति भगवान कृष्ण को “श्रीमुकुंद” कहते हैं, जिसका अर्थ है “मुकुंद भगवान”। वे उन्हें “बालगोपाल” कहते हैं, जिसका अर्थ है “बाल कृष्ण”। वे उनकी महिमा को “अपार” और उनकी लीला को “अपरंपार” कहते हैं। इस स्तोत्र में, विद्यापति भगवान कृष्ण के बाल रूप की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हैं। वे उनकी माखन चोरी करने की लीला, उनकी अक्रूर से द्वारका जाने के लिए रोने की लीला, और उनकी गोपियों के साथ रासलीला करने की लीला का वर्णन करते हैं। श्रीमुकुंदस्तोत्रम् एक अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक अमूल्य निधि है। यहाँ श्रीमुकुंदस्तोत्रम् की पूरी स्तोत्र दी गई है: श्रीमुकुंद, श्रीमुकुंद, हे बालगोपाल, तेरी महिमा अपार, तेरी लीला अपरंपार। माखन चोरी कर, तूने कंस को छकाया, और अक्रूर से द्वारका, जाने के लिए रोया। गोपियों के साथ, तूने रासलीला की, और कंस का वध कर, तूने धर्म की रक्षा की। तू हो सर्वव्यापी, तू हो सर्वशक्तिमान, तू हो सर्वज्ञ, तू हो परमेश्वर। हे बालगोपाल, हे श्यामसुंदर, हम तेरे चरणों में, सदा शीश झुकाते हैं। अरे श्यामसुंदर, तेरी श्यामली छवि, हमारी मन को मोहित करती है। तेरे श्याम भुजाएं, हमारी मन में, अपार आनंद का संचार करती हैं। तेरी श्यामली आँखें, हमारी मन को, अनंत प्रेम में डुबो देती हैं। हे श्यामसुंदर, हम तेरे चरणों में, सदा शीश झुकाते हैं। श्रीमुकुंदस्तोत्रम् की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र अष्टपदी छंद में रचित है। यह स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचित है। यह स्तोत्र संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है। श्रीमुकुंदस्तोत्रम् एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है।
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