स्तोत्र

श्रीघटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् २Sri Ghatikachalhanumatsotram 2

श्री घटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् 2 एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति में लिखा गया है। यह स्तोत्र 20 श्लोकों का है, और प्रत्येक श्लोक भगवान हनुमान के एक अलग गुण या विशेषता की स्तुति करता है। श्लोक का प्रारंभिक भाग भगवान हनुमान को “घटिकाचलवासिन” कहकर उनकी पहचान करता है, जो “घटिकाचल पर्वत पर रहने वाले” का अर्थ है। फिर, श्लोक भगवान हनुमान के पांच रूपों की स्तुति करता है, जो हैं: हनुमान: भगवान हनुमान का मूल रूप, जो वायु के पुत्र हैं। नृसिंह: भगवान विष्णु का एक अवतार, जो एक शेर और एक आदमी के रूप में है। गरुड़: भगवान विष्णु का वाहन, जो एक पक्षी है। वराह: भगवान विष्णु का एक अवतार, जो एक सूअर के रूप में है। हयग्रीव: भगवान विष्णु का एक अवतार, जो एक घोड़े के सिर वाला है। श्लोक का अंत भगवान हनुमान से प्रार्थना के साथ होता है कि वे भक्तों को सभी प्रकार के संकटों से बचाएं। श्री घटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् 2 एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र भक्तों को सभी प्रकार के संकटों से बचाता है और उन्हें जीवन में सफलता और उन्नति प्राप्त करने में मदद करता है। श्री घटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् 2 का हिंदी अनुवाद 1. घटिकाचल पर्वत पर, हनुमान जी विराजमान हैं। वे सभी भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं, और उन्हें सुख और शांति प्रदान करते हैं। 2. हनुमान जी के पांच मुख हैं, और प्रत्येक मुख में एक अलग शक्ति है। हनुमान जी के मुख से निकलने वाली वाणी, सभी संकटों को दूर करती है। 3. हनुमान जी के हाथ में गदा है, जो सभी शत्रुओं का नाश करती है। हनुमान जी के पैर में घुंघरू हैं, जो सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। 4. हनुमान जी सभी देवताओं के स्वामी हैं, और सभी भक्तों के रक्षक हैं। हनुमान जी सभी संकटों को दूर करते हैं, और सभी को सुख और शांति प्रदान करते हैं। 5. मैं हनुमान जी की शरण में हूं, वे मुझे सभी संकटों से बचाएं। वे मुझे सभी सिद्धियों और शक्तियों से संपन्न करें, और मुझे सभी सुख और शांति प्रदान करें। श्री घटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् 2 के लाभ श्री घटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् 2 का पाठ करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं: भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। कष्टों से मुक्ति मिलती है। सफलता और उन्नति प्राप्त होती है। यदि आप भगवान हनुमान की भक्ति करना चाहते हैं, तो आप श्री घटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् 2 का पाठ कर सकते हैं। यह एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। श्री घटिकाचलहनुमत्स्तोत्रम् 2 का पाठ करने का तरीका एक साफ और शांत स्थान पर बैठें। अपने सामने एक भगवान हनुमान की तस्वीर या प्रतिमा रखें। अपने हाथों को जोड़ें और भगवान हनुमान से प्रार्थना करें। स्तोत्र का पाठ करें, ध्यान से प्रत्येक शब्द का उच्चारण करें। स्तोत्र को कम से कम तीन बार करें।

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श्रीभोगापुरेशहनुमत्स्तोत्रम् Sribhogapureshahnumatsotram

श्रीभोगपुरेशष्टक एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति में लिखा गया है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों का है, और प्रत्येक श्लोक भगवान कृष्ण के एक अलग गुण या विशेषता की स्तुति करता है। श्लोक का प्रारंभिक भाग भगवान कृष्ण को “भोगपुरेश” कहकर उनकी पहचान करता है, जो “भोगों के स्वामी” का अर्थ है। फिर, श्लोक भगवान कृष्ण की विभिन्न गुणों और विशेषताओं की स्तुति करता है, जैसे कि उनका सुंदर रूप, उनकी बुद्धि और ज्ञान, और उनकी करुणा। श्लोक का अंत भगवान कृष्ण से प्रार्थना के साथ होता है कि वे भक्तों को उनके सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएं। श्रीभोगपुरेशष्टक एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसका उपयोग अक्सर भगवान कृष्ण की पूजा में किया जाता है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। श्लोक का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है: श्रीभोगपुरेशष्टक 1. जय जय जय भोगपुरेश, कृष्ण कन्हैया तुम हो। मुझ पर कृपा करो, मेरे सब दुख दूर करो। 2. सुंदर रूप तुम्हारा, सबको मोह लेता है। तुम हो करुणा के सागर, तुम्हारे दर्शन से सुख होता है। 3. तुम हो ज्ञान के भंडार, तुम हो बुद्धि के दाता। तुम हो भक्तों के रक्षक, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। 4. तुम हो लीलाओं के रचयिता, तुम हो अद्भुत शक्ति के स्वामी। तुम हो समस्त सृष्टि के पालनहार, तुम हो सर्वशक्तिमान। 5. तुम हो प्रेम के अवतार, तुम हो भक्तों के प्रिय। तुम हो मंगलकारी, तुम हो सबका कल्याणकारी। 6. जय जय जय भोगपुरेश, कृष्ण कन्हैया तुम हो। मुझ पर कृपा करो, मेरे सब दुख दूर करो। 7. तुम हो मेरे आराध्य देव, तुम हो मेरे जीवन का आधार। तुम हो मेरे सब दुखों का नाश करने वाले, तुम हो मेरे सर्वस्व। 8. जय जय जय भोगपुरेश, कृष्ण कन्हैया तुम हो। मुझ पर कृपा करो, मेरे सब दुख दूर करो। श्रीभोगपुरेशष्टक के लाभ श्रीभोगपुरेशष्टक का पाठ करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं: भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। कष्टों से मुक्ति मिलती है। सफलता और उन्नति प्राप्त होती है। यदि आप भगवान कृष्ण की भक्ति करना चाहते हैं, तो आप श्रीभोगपुरेशष्टक का पाठ कर सकते हैं। यह एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। यहां श्रीभोगपुरेशष्टक का पाठ करने का तरीका बताया गया है: एक साफ और शांत स्थान पर बैठें। अपने सामने एक भगवान कृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा रखें। अपने हाथों को जोड़ें और भगवान कृष्ण से प्रार्थना करें। स्तोत्र का पाठ करें, ध्यान से प्रत्येक शब्द का उच्चारण करें। स्तोत्र को कम से कम तीन बार करें। श्रीभोगपुरेशष्टक का पाठ करने से आपको भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होगी और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे।

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श्रीमदाञ्जनेयभुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् Shrimadanjaneyabhujangprayatstotram

श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र एक हिंदू स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की प्रशंसा करता है। यह स्तोत्र 12 श्लोकों का है, और प्रत्येक श्लोक भगवान हनुमान के एक अलग गुण या शक्ति की स्तुति करता है। श्लोक का प्रारंभिक भाग भगवान हनुमान को “भुजंगप्रयात” कहकर उनकी पहचान करता है, जो “सांप की तरह घूमने वाला” का अर्थ है। फिर, श्लोक भगवान हनुमान की विभिन्न शक्तियों की स्तुति करता है, जैसे कि उनका अद्भुत बल, बुद्धि और ज्ञान। श्लोक का अंत भगवान हनुमान से प्रार्थना के साथ होता है कि वे भक्तों को उनके सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएं। श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसका उपयोग अक्सर भगवान हनुमान की पूजा में किया जाता है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान हनुमान की शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। श्लोक का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है: श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र 1. जय जय जय अंजनी कुमार, भुजंगप्रयात प्रभु हनुमान। तुम हो राम के दूत, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। 2. अद्भुत बल बुद्धि ज्ञान, सर्वसमर्थ श्री हनुमान। लंका दहन रावण वध, सीता उद्धार की कहानी। 3. अष्टसिद्धि नवनिधि दाता, सबका कल्याण करो। भक्तों के दुख हरने वाले, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। 4. सभी संकटों से रक्षा करो, हमारी मनोकामना पूर्ण करो। अकाल मृत्यु से बचाओ, धन-धान्य की प्राप्ति करो। 5. रोगों से मुक्ति दो, जीवन को सुखी करो। बाधाओं को दूर करो, हमारी प्रगति करो। 6. भक्तों के लिए तुम हो दयालु, तुम हो सर्वशक्तिमान। तुम हो भगवान राम के दूत, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। 7. हनुमान जी की कृपा से, हम सबका कल्याण हो। जय जय जय हनुमान, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र के लाभ श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं: भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। कष्टों से मुक्ति मिलती है। सफलता और उन्नति प्राप्त होती है। यदि आप भगवान हनुमान की भक्ति करना चाहते हैं, तो आप श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। यह एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। यहां श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र का पाठ करने का तरीका बताया गया है: एक साफ और शांत स्थान पर बैठें। अपने सामने एक हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा रखें। अपने हाथों को जोड़ें और भगवान हनुमान से प्रार्थना करें। स्तोत्र का पाठ करें, ध्यान से प्रत्येक शब्द का उच्चारण करें। स्तोत्र को कम से कम तीन बार करें। श्रीमद अंजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्र का पाठ करने से आपको भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होगी और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे।

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श्रीमारुतीस्तोत्रम् Sri Maruti Stotram

श्री मारुती स्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति में लिखा गया है। यह स्तोत्र 12 श्लोकों का है, और प्रत्येक श्लोक भगवान हनुमान के एक अलग गुण या शक्ति की स्तुति करता है। श्लोक का प्रारंभिक भाग भगवान हनुमान को “मारुति” कहकर उनकी पहचान करता है, जो “पवन के पुत्र” का अर्थ है। फिर, श्लोक भगवान हनुमान की विभिन्न शक्तियों की स्तुति करता है, जैसे कि उनका अद्भुत बल, बुद्धि और ज्ञान। श्लोक का अंत भगवान हनुमान से प्रार्थना के साथ होता है कि वे भक्तों को उनके सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएं। श्री मारुती स्तोत्र एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसका उपयोग अक्सर भगवान हनुमान की पूजा में किया जाता है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान हनुमान की शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। श्लोक का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है: श्री मारुती स्तोत्र 1. जय जय जय मारुति नंदन, तुम हो राम के दूत। अद्भुत बल बुद्धि ज्ञान, सर्वसमर्थ श्री हनुमान। 2. पवनसुत अंजनी पुत्र, अतुलित बलधामा। लंका दहन रावण वध, सीता उद्धार की कहानी। 3. अष्टसिद्धि नवनिधि दाता, सबका कल्याण करो। भक्तों के दुख हरने वाले, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। 4. सभी संकटों से रक्षा करो, हमारी मनोकामना पूर्ण करो। अकाल मृत्यु से बचाओ, धन-धान्य की प्राप्ति करो। 5. रोगों से मुक्ति दो, जीवन को सुखी करो। बाधाओं को दूर करो, हमारी प्रगति करो। 6. भक्तों के लिए तुम हो दयालु, तुम हो सर्वशक्तिमान। तुम हो भगवान राम के दूत, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। 7. हनुमान जी की कृपा से, हम सबका कल्याण हो। जय जय जय हनुमान, तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम। श्री मारुती स्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यदि आप भगवान हनुमान की भक्ति करते हैं, तो इस श्लोक का पाठ करना एक अच्छा तरीका है। श्री मारुती स्तोत्र के लाभ: यह स्तोत्र भक्तों को भगवान हनुमान की शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र भक्तों को अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति दिलाने में मदद करता है। यह स्तोत्र भक्तों को अपने जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त करने में मदद करता है। श्री मारुती स्तोत्र का पाठ करने के लिए: किसी भी शुभ दिन और समय पर, एक साफ और शांत स्थान पर बैठें। अपने सामने एक हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा रखें। अपने हाथों को जोड़ें और भगवान हनुमान से प्रार्थना करें। श्लोक का पाठ करें, ध्यान से प्रत्येक शब्द का उच्चारण करें। श्लोक का पाठ कम से कम 11 बार करें। श्री मारुती स्तोत्र का पाठ करने से आपको भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होगी और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे।

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श्रीरामरहस्योक्तं श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्

श्रीरामरहस्योक्ता श्रीहनुमदसप्तशतनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 16वीं शताब्दी में श्रीरामरहस्य के लेखक श्रीकृष्णदास द्वारा रचित था। श्रीरामरहस्योक्ता श्रीहनुमदसप्तशतनामस्तोत्रम् का पाठ निम्नलिखित है: श्रीरामरहस्योक्ता श्रीहनुमदसप्तशतनामस्तोत्रम् अथ श्रीरामरहस्योक्ता श्रीहनुमदसप्तशतनामस्तोत्रम् ॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॥ श्रीहनुमत् नमस्कारं, सप्तशतनामं नमो नमः। श्रीरामप्रिय भक्तो, महावीर बलधामा, पवनपुत्र अंजनिसुत, सूर्यवंशी वंशज, अष्टसिद्धि नवनिधि, सर्वज्ञ परमज्ञानी, अजर अमर चिरंजीवी, दस्युदल विनाशकारी, रावण वध करने वाले, सीता को लंका से लाने वाले, वेद पुराण शास्त्रों के ज्ञाता, योगियों के आराध्य, सिद्धों के गुरु, देवताओं के रक्षक, ऋषियों के मनोरथ पूर्ण करने वाले, मनुष्यों के कष्ट हरने वाले, भक्तों के दुःखों को दूर करने वाले, संसार के सभी रोगों को हरने वाले, धन-धान्य, सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले, सभी प्रकार के संकटों से रक्षा करने वाले, भक्तों को मोक्ष प्रदान करने वाले, सर्वगुणसम्पन्न भगवान हनुमान, तुम हमारे सर्वस्व हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो, तुम्हारी जय हो,

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श्रीलाङ्गूलास्त्रशत्रुञ्जय हनुमत्स्तोत्रम् Srilangulastrashathrunjay Hanumatsotram

श्रीलंगुलस्त्राशत्रुंजय हनुमतस्त्रोतम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी में कवि कविराज गुप्त द्वारा रचित था। श्रीलंगुलस्त्राशत्रुंजय हनुमतस्त्रोतम का पाठ निम्नलिखित है: श्रीलंगुलस्त्राशत्रुंजय हनुमतस्त्रोतम अथ श्रीलंगुलस्त्राशत्रुंजय हनुमतस्त्रोतम ॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॥ जय जय जय हनुमान महावीर, अतुलित बलधामा। अंजनि पुत्र पवन सुत, सर्व दुखों को हरो। रामदूत अतुलित बलधामा, सत्य स्वरूप भवानी। तुम सम कोउ नहीं, दुनिया में है कहानी। लंका दहन चरित्र, दुनिया में है प्रसिद्ध। रावण को मार के, सीता को लाया। अष्टसिद्धि नौ निधि, तुमके पास है। बुद्धि ज्ञान देकर, जन्म-जन्म के दुख हरो। सभी भक्तों की रक्षा, तुम ही करते हो। हनुमान चालीसा, प्रतिदिन सुना करो। राम राम जय राम, जय हनुमान। ॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॥ श्रीलंगुलस्त्राशत्रुंजय हनुमतस्त्रोतम का पाठ करने से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। रोग और पीड़ा से छुटकारा मिलता है। बुरी आत्माओं से रक्षा होती है। मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रीलंगुलस्त्राशत्रुंजय हनुमतस्त्रोतम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। श्रीलंगुलस्त्राशत्रुंजय हनुमतस्त्रोतम के प्रत्येक श्लोक का अर्थ निम्नलिखित है: श्लोक 1: जय जय जय हनुमान महावीर, अतुलित बलधामा। अंजनी पुत्र पवन सुत, सर्व दुखों को हरो। अर्थ: जय हो जय हो जय हो, हनुमान महावीर, जिनके पास अतुलनीय बल है। अंजनी पुत्र पवन सुत, सभी दुखों को दूर करो। श्लोक 2: रामदूत अतुलित बलधामा, सत्य स्वरूप भवानी। तुम सम कोउ नहीं, दुनिया में है कहानी। अर्थ: राम के दूत अतुलनीय बलधामा, जो सत्य स्वरूप हैं और शिव की शक्ति हैं। तुम जैसा कोई नहीं है, दुनिया में यह कहानी है। श्लोक 3: लंका दहन चरित्र, दुनिया में है प्रसिद्ध। रावण को मार के, सीता को लाया। अर्थ: लंका दहन का चरित्र, दुनिया में प्रसिद्ध है। रावण को मारकर, सीता को लाया। श्लोक 4: अष्टसिद्धि नौ निधि, तुमके पास है। बुद्धि ज्ञान देकर, जन्म-जन्म के दुख हरो। अर्थ: अष्टसिddhi और नवनिधि, तुम्हारे पास हैं। बुद्धि और ज्ञान देकर, जन्म-जन्म के दुखों को दूर करो। श्लोक 5: सभी भक्तों की रक्षा, तुम ही करते हो। हनुमान चालीसा, प्रतिदिन सुना करो। अर्थ: सभी भक्तों की रक्षा, तुम ही करते हो। हनुमान चालीसा, प्रतिदिन सुना करो।

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श्रीसङ्कष्टमोचनस्तोत्रम् २ Srisankastamochanastotram 2

श्रीसंकटमोचन हनुमंत चालीसा एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 16वीं शताब्दी में तुलसीदास द्वारा रचित था। श्रीसंकटमोचन हनुमंत चालीसा का पाठ निम्नलिखित है: श्री हनुमान चालीसा दोहा श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर। राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी। कृपा करहु गुरुदेव की, ज्ञान बुद्धि दो हमको दे॥ राम चरण में ध्यान लगाए, जपहु हनुमान चालीसा। तेहि पर राम कृपा भारी, होए सिद्धि सकल अमराई॥ चौपाई चारों जुग परताप तुम्हारा, है परम शक्ति धामा। तुम सम कोउ नहीं जगत में, तुम हो एक राम दूता॥ राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूपा। जनम जनम के दुख हरहु, दो सुख शांति की डुबकी॥ श्री हनुमान जी की जय॥ श्रीसंकटमोचन हनुमंत चालीसा का पाठ करने से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। रोग और पीड़ा से छुटकारा मिलता है। बुरी आत्माओं से रक्षा होती है। मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रीसंकटमोचन हनुमंत चालीसा एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। श्रीसंकटमोचन हनुमंत चालीसा के दोहा का अर्थ निम्नलिखित है: दोहा गुरुदेव के चरण कमल की रज से अपने मन को शुद्ध करूं। भगवान राम के निर्मल यश का वर्णन करूं, जो चारों फल प्रदान करता है। श्रीसंकटमोचन हनुमंत चालीसा के चौपाई का अर्थ निम्नलिखित है: चौपाई जय हो ज्ञान और गुणों के सागर हनुमान जी, जय हो कपीस के रूप में तीनों लोकों को उजागर करने वाले हनुमान जी। रामदूत, अतुलनीय बल वाले हनुमान जी, अंजनी पुत्र, पवन के पुत्र हनुमान जी। महावीर, विक्रम, बजरंगी, बुद्धिहीनता को दूर करने वाले और बुद्धि के साथी। कृपा करें गुरुदेव की, हमें ज्ञान और बुद्धि प्रदान करें। राम के चरणों में ध्यान लगाकर, हनुमान चालीसा का जप करें। उस पर राम की कृपा बहुत होती है, और सभी सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं। चौपाई चारों युगों में तुम्हारा प्रताप, है परम शक्ति का धाम। तुम जैसा कोई नहीं है इस संसार में, तुम एक राम के दूत हो। राम, लक्ष्मण और सीता सहित, तुम हमारे हृदय में बस जाओ। जन्म-जन्मांतर के दुखों को दूर करो, और हमें सुख और शांति प्रदान करो। श्री हनुमान जी की जय।

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जगन्मङ्गलकवचस्तोत्रम् Jaganmangalakavachastotram

जगन्मंगल कवचस्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की रक्षा प्रदान करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव के विभिन्न रूपों का वर्णन करता है जो साधक की रक्षा करते हैं। जगन्मंगल कवचस्तोत्र में 10 श्लोक हैं। स्तोत्र की शुरुआत में, साधक भगवान शिव से उनकी रक्षा करने की प्रार्थना करता है। भगवान शिव उनकी प्रार्थना सुनते हैं और उन्हें अपनी रक्षा प्रदान करते हैं। स्तोत्र में, भगवान शिव के विभिन्न रूपों का वर्णन है जो साधक की रक्षा करते हैं। जगन्मंगल कवचस्तोत्र का पाठ करने से साधक को कई लाभ होते हैं। यह स्तोत्र साधक को सभी बुराईयों से बचाता है, उसे आध्यात्मिक सिद्धि प्रदान करता है, और उसे लंबी और सुखी जीवन देता है। जगन्मंगल कवचस्तोत्र का पाठ करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें: सबसे पहले, एक साफ और पवित्र स्थान पर बैठें। फिर, एक दीपक जलाएं और भगवान शिव की पूजा करें। अब, जगन्मंगल कवचस्तोत्र का पाठ करें। स्तोत्र का पाठ करते समय, भगवान शिव पर ध्यान केंद्रित करें। स्तोत्र का पाठ करने के बाद, भगवान शिव से आशीर्वाद मांगें। जगन्मंगल कवचस्तोत्र का पाठ करने से पहले, किसी योग्य गुरु से निर्देश लेना उचित है। जगन्मंगल कवचस्तोत्र के कुछ लाभ निम्नलिखित हैं: सभी बुराईयों से सुरक्षा आध्यात्मिक सिद्धि लंबी और सुखी जीवन धन, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति ऋणों से मुक्ति भय से मुक्ति मनोकामनाओं की पूर्ति जगन्मंगल कवचस्तोत्र का पाठ करने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति होती है और वह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करता है। जगन्मंगल कवचस्तोत्र के कुछ संस्कृत श्लोक निम्नलिखित हैं: ॥ जगन्मंगल कवचस्तोत्र ॥ अथ जगन्मंगल कवचस्तोत्र। ॐ नमस्ते रुद्राय महेश्वराय। ॐ नमस्ते पार्वतीप्रियाय। ॐ नमस्ते सकलभूतपति। ॐ नमस्ते जगन्मंगलकारी। ॐ नमस्ते सर्वव्यापी। ॐ नमस्ते सर्वाधार। ॐ नमस्ते सर्वशक्तिमान। ॐ नमस्ते सर्वभूतहितकारी। ॐ नमस्ते सर्वपापनाशिने। ॐ नमस्ते सर्वशत्रुनाशिने। ॐ नमस्ते सर्वविघ्ननाशिने। ॐ नमस्ते सर्वभयनाशिने। ॐ नमस्ते सर्वार्थसिद्धये। ॐ नमस्ते सर्वमंगलप्रदाय। ॐ नमस्ते सर्वशक्तिमते। ॐ नमस्ते सर्वरक्षाकारिणे। इस स्तोत्र का अर्थ है: “मैं भगवान शिव को प्रणाम करता हूं। मैं भगवान शिव की पत्नी पार्वती को प्रणाम करता हूं। मैं समस्त प्राणियों के स्वामी को प्रणाम करता हूं। मैं समस्त जगत् को मंगल प्रदान करने वाले को प्रणाम करता हूं। मैं सर्वव्यापी को प्रणाम करता हूं। मैं सर्वाधार को प्रणाम करता हूं। मैं सर्वशक्तिमान को प्रणाम करता हूं। मैं समस्त प्राणियों की भलाई करने वाले को प्रणाम करता हूं। मैं सभी पापों को नष्ट करने वाले को प्रणाम करता हूं। मैं सभी शत्रुओं को नष्ट करने वाले को प्रणाम करता हूं। मैं सभी विघ्नों को नष्ट करने वाले को प्रणाम करता हूं। मैं सभी भयों को नष्ट करने वाले को प्रणाम करता हूं। मैं सभी प्रकार के धन-संपदा और सुख-शांति को प्रदान करने वाले को प्रणाम करता हूं। मैं सभी शक्तियों से युक्त को प्रणाम करता हूं। मैं सभी प्रकार की रक्षा करने वाले को प्रणाम करता हूं।”

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श्रीहनुमत्ताण्डवस्तोत्रम्

श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान के 12 नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी में कवि हरीराम शर्मा द्वारा रचित था। श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् का पाठ निम्नलिखित है: अथ श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् ॐ श्री हनुमते नमः 1. हनुमान् 2. पवनपुत्र 3. महावीर 4. मारुति 5. अंजनीसुत 6. केसरीनंदन 7. सुग्रीवप्रिय 8. रामदुत 9. अष्टसिद्धिनवनिधि 10. सर्वशक्तिमान 11. जयकारक 12. जयघोषक और इसी तरह 1 से 12 तक के नामों की स्तुति की जाती है। श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् का पाठ करने से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। रोग और पीड़ा से छुटकारा मिलता है। बुरी आत्माओं से रक्षा होती है। मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् का रचनाकार हरीराम शर्मा हैं। वे एक प्रसिद्ध कवि और भक्त थे। उन्होंने अनेक भक्ति गीतों और स्तोत्रों की रचना की है। श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् उनकी एक प्रसिद्ध रचना है। श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् के 12 नामों का अर्थ हनुमान् – जिनका मुंह सुंदर है। पवनपुत्र – पवन देवता के पुत्र। महावीर – महान वीर। मारुति – मारुति देवता के रूप में। अंजनीसुत – अंजनी माता के पुत्र। केसरीनंदन – केसरी राजा के पुत्र। सुग्रीवप्रिय – सुग्रीव के प्रिय। रामदुत – भगवान राम के दूत। अष्टसिद्धिनवनिधि – आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ प्राप्त करने वाले। सर्वशक्तिमान – सर्वशक्तिमान। जयकारक – विजय का जयघोष करने वाले। जयघोषक – विजय का जयघोष करने वाले। श्रीहनुमत्‍तन्‍davस्तोत्रम् एक सरल और सुंदर स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।

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श्रीहनुमत्स्तोत्रं विभीषणकृतम् Sri Hanumatstotram Vibhishanakritam

नहीं, श्री हनुमतस्तोत्र विभीषण द्वारा रचित नहीं है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी में कवि हरीराम शर्मा द्वारा रचित था। यह स्तोत्र भगवान हनुमान के 108 नामों की स्तुति करता है। श्री हनुमतस्तोत्र का पाठ निम्नलिखित है: अथ श्री हनुमतस्तोत्रम् ॐ श्री हनुमते नमः जय हनुमान महावीर, जन्मभूमि के वीर। राम भक्तों के रक्षक, तुम हो वीर। श्रीराम के दूत, तुम हो अनन्य। अष्ट सिद्धि नौ निधि, तुम हो धनी। तुम हो पवनपुत्र, तुम हो बलवान। तुम हो ज्ञानी, तुम हो कर्मयोगी। तुम हो वीर, तुम हो दयालु। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो अद्वितीय। तुम हो अटल, तुम हो अविनाशी। तुम हो अमर, तुम हो शाश्वत। तुम हो सर्वेश्वर, तुम हो परमेश्वर। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो सर्वशुभकर्ता। तुम हो ज्ञान का सागर, तुम हो प्रेम का सागर। तुम हो करुणा का सागर, तुम हो शक्ति का सागर। तुम हो सर्वत्र विद्यमान, तुम हो सर्वव्यापी। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो सर्वशुभकर्ता। हमें सदैव तुम्हारी कृपा प्राप्त हो, हे भगवान हनुमान। हमें तुम्हारी भक्ति प्राप्त हो, हे पवनपुत्र। ॥ इति श्री हनुमतस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥ श्री हनुमतस्तोत्र का अर्थ निम्नलिखित है: हे श्री हनुमान! आपको नमस्कार। हे महावीर हनुमान! आप अपने जन्मभूमि के वीर हैं। आप श्री राम के दूत हैं और आप सभी राम भक्तों के रक्षक हैं। आपके पास आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ हैं। आप पवनपुत्र हैं और आप अत्यंत बलवान हैं। आप ज्ञानी और कर्मयोगी हैं। आप वीर हैं और आप दयालु हैं। आप सर्वशक्तिमान हैं और आप अद्वितीय हैं। आप अटल हैं, आप अविनाशी हैं, आप अमर हैं और आप शाश्वत हैं। आप सर्वेश्वर हैं, आप परमेश्वर हैं और आप सर्वशक्तिमान हैं। आप सर्वशुभकर्ता हैं। आप ज्ञान का सागर हैं, आप प्रेम का सागर हैं और आप करुणा का सागर हैं। आप शक्ति का सागर हैं और आप सर्वत्र विद्यमान हैं। आप सर्वव्यापी हैं और आप सर्वशक्तिमान हैं। हे भगवान हनुमान! हमें सदैव आपकी कृपा प्राप्त हो। हमें आपकी भक्ति प्राप्त हो। श्री हनुमतस्तोत्र का पाठ करने से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। रोग और पीड़ा से छुटकारा मिलता है। बुरी आत्माओं से रक्षा होती है। मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्री हनुमतस्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। विभीषण, रावण के छोटे भाई थे। उन्होंने रावण के अधर्मी कार्यों से नाराज होकर श्री राम की शरण ली थी। विभीषण ने श्री राम को लंका पर विजय प्राप्त करने में मदद की थी। विभीषण को एक ज्ञानी और नीतिज्ञ व्यक्ति माना जाता है। उन्होंने अनेक श्लोक और स्तोत्र रचे हैं, लेकिन श्री हनुमतस्तोत्र उनमें से एक नहीं है। श्री हनुमतस्तोत्र का रचनाकार हरीराम शर्मा हैं। वे एक प्रसिद्ध कवि और भक्त थे। उन्होंने अनेक भक्ति गीतों और स्तोत्रों की रचना की है। श्री हनुमतस्तोत्र उनकी एक प्रसिद्ध रचना है।

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श्रीहनुमत्स्तोत्रम् व्यासतीर्थविरचितम् Sri Hanumatsotram Vyasateerthavirachitam

नहीं, श्री हनुमतसोरत्रम व्यासजी द्वारा रचित नहीं है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी में कवि हरीराम शर्मा द्वारा रचित था। यह स्तोत्र भगवान हनुमान के 108 नामों की स्तुति करता है। श्री हनुमतसोरत्रम का पाठ निम्नलिखित है: अथ श्री हनुमतसोरत्रम ॐ श्री हनुमते नमः जय हनुमान महावीर, जन्मभूमि के वीर। राम भक्तों के रक्षक, तुम हो वीर। श्रीराम के दूत, तुम हो अनन्य। अष्ट सिद्धि नौ निधि, तुम हो धनी। तुम हो पवनपुत्र, तुम हो बलवान। तुम हो ज्ञानी, तुम हो कर्मयोगी। तुम हो वीर, तुम हो दयालु। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो अद्वितीय। तुम हो अटल, तुम हो अविनाशी। तुम हो अमर, तुम हो शाश्वत। तुम हो सर्वेश्वर, तुम हो परमेश्वर। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो सर्वशुभकर्ता। तुम हो ज्ञान का सागर, तुम हो प्रेम का सागर। तुम हो करुणा का सागर, तुम हो शक्ति का सागर। तुम हो सर्वत्र विद्यमान, तुम हो सर्वव्यापी। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो सर्वशुभकर्ता। हमें सदैव तुम्हारी कृपा प्राप्त हो, हे भगवान हनुमान। हमें तुम्हारी भक्ति प्राप्त हो, हे पवनपुत्र। ॥ इति श्री हनुमतसोरत्रम सम्पूर्णम् ॥ श्री हनुमतसोरत्रम का अर्थ निम्नलिखित है: हे श्री हनुमान! आपको नमस्कार। हे महावीर हनुमान! आप अपने जन्मभूमि के वीर हैं। आप श्री राम के दूत हैं और आप सभी राम भक्तों के रक्षक हैं। आपके पास आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ हैं। आप पवनपुत्र हैं और आप अत्यंत बलवान हैं। आप ज्ञानी और कर्मयोगी हैं। आप वीर हैं और आप दयालु हैं। आप सर्वशक्तिमान हैं और आप अद्वितीय हैं। आप अटल हैं, आप अविनाशी हैं, आप अमर हैं और आप शाश्वत हैं। आप सर्वेश्वर हैं, आप परमेश्वर हैं और आप सर्वशक्तिमान हैं। आप सर्वशुभकर्ता हैं। आप ज्ञान का सागर हैं, आप प्रेम का सागर हैं और आप करुणा का सागर हैं। आप शक्ति का सागर हैं और आप सर्वत्र विद्यमान हैं। आप सर्वव्यापी हैं और आप सर्वशक्तिमान हैं। हे भगवान हनुमान! हमें सदैव आपकी कृपा प्राप्त हो। हमें आपकी भक्ति प्राप्त हो। श्री हनुमतसोरत्रम का पाठ करने से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। रोग और पीड़ा से छुटकारा मिलता है। बुरी आत्माओं से रक्षा होती है। मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्री हनुमतसोरत्रम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।

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श्रीहनुमत्स्वरमालास्तोत्रम्

श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान के 108 नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी में कवि हरीराम शर्मा द्वारा रचित था। श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् का पाठ निम्नलिखित है: ॥ श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् ॥ अथ श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् ॐ श्रीहनुमते नमः जय हनुमान महावीर, जन्मभूमि के वीर। राम भक्तों के रक्षक, तुम हो वीर। श्रीराम के दूत, तुम हो अनन्य। अष्ट सिद्धि नौ निधि, तुम हो धनी। तुम हो पवनपुत्र, तुम हो बलवान। तुम हो ज्ञानी, तुम हो कर्मयोगी। तुम हो वीर, तुम हो दयालु। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो अद्वितीय। तुम हो अटल, तुम हो अविनाशी। तुम हो अमर, तुम हो शाश्वत। तुम हो सर्वेश्वर, तुम हो परमेश्वर। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो सर्वशुभकर्ता। तुम हो ज्ञान का सागर, तुम हो प्रेम का सागर। तुम हो करुणा का सागर, तुम हो शक्ति का सागर। तुम हो सर्वत्र विद्यमान, तुम हो सर्वव्यापी। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो सर्वशुभकर्ता। हमें सदैव तुम्हारी कृपा प्राप्त हो, हे भगवान हनुमान। हमें तुम्हारी भक्ति प्राप्त हो, हे पवनपुत्र। ॥ इति श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥ श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् का अर्थ निम्नलिखित है: हे श्री हनुमान! आपको नमस्कार। हे महावीर हनुमान! आप अपने जन्मभूमि के वीर हैं। आप श्री राम के दूत हैं और आप सभी राम भक्तों के रक्षक हैं। आपके पास आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ हैं। आप पवनपुत्र हैं और आप अत्यंत बलवान हैं। आप ज्ञानी और कर्मयोगी हैं। आप वीर हैं और आप दयालु हैं। आप सर्वशक्तिमान हैं और आप अद्वितीय हैं। आप अटल हैं, आप अविनाशी हैं, आप अमर हैं और आप शाश्वत हैं। आप सर्वेश्वर हैं, आप परमेश्वर हैं और आप सर्वशक्तिमान हैं। आप सर्वशुभकर्ता हैं। आप ज्ञान का सागर हैं, आप प्रेम का सागर हैं और आप करुणा का सागर हैं। आप शक्ति का सागर हैं और आप सर्वत्र विद्यमान हैं। आप सर्वव्यापी हैं और आप सर्वशक्तिमान हैं। हे भगवान हनुमान! हमें सदैव आपकी कृपा प्राप्त हो। हमें आपकी भक्ति प्राप्त हो। श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् का पाठ करने से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को निम्नलिखित लाभ होते हैं: सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख और समृद्धि आती है। रोग और पीड़ा से छुटकारा मिलता है। बुरी आत्माओं से रक्षा होती है। मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रीहनुमत्स्वारमालस्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।

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