Sudarshana Jayanti

Sudarshana Jayanti 2026 Date And Time: सुदर्शन जयंती भगवान विष्णु के अजेय अस्त्र की सम्पूर्ण जानकारी….

Sudarshana Jayanti 2026 Mein Kab Hai : सनातन धर्म और हमारी अत्यंत प्राचीन वैदिक संस्कृति में भगवान श्री हरि विष्णु को इस सम्पूर्ण जगत का रक्षक और पालनहार माना गया है। जब-जब इस धरती पर अधर्म का अंधकार गहराता है और दुष्ट शक्तियों का प्रभाव बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। भगवान विष्णु के इन्ही सबसे प्रमुख और अचूक अस्त्रों में से एक है उनका अत्यंत प्रिय और दिव्य ‘सुदर्शन चक्र’। यह कोई साधारण हथियार नहीं है, बल्कि यह स्वयं परमात्मा की सर्वोच्च शक्तियों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का साक्षात प्रतीक है। इसी महाशक्तिशाली चक्र के प्राकट्य दिवस या अवतरण दिवस को Sudarshana Jayanti के रूप में बहुत ही हर्षोल्लास, गहरी आस्था और भक्ति भाव के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। कब है 2026 में सुदर्शन जयंती पवित्र पर्व : When is the holy festival of Sudarshan Jayanti in 2026 हिंदू पंचांग और वैदिक गणनाओं के अनुसार, सुदर्शन चक्र के जन्म का यह पावन पर्व हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पूरी निष्ठा के साथ मनाया जाता है। दक्षिण भारत में, विशेषकर तमिल पंचांग के अनुसार, इस पर्व को ‘आदी’ (जुलाई-अगस्त के मध्य) महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। अगर हम आगामी वर्ष की बात करें, तो वर्ष 2026 में Sudarshana Jayanti का यह महान उत्सव 24 जुलाई 2026, दिन शुक्रवार को पूरे विधि-विधान से मनाया जाएगा। इस दिन दक्षिण भारत और विभिन्न वैष्णव संप्रदायों के प्रमुख मंदिरों में अत्यंत विशेष और भव्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। क्या है सुदर्शन चक्र और इसका गहरा अर्थ : What is the Sudarshan Chakra, and what is its profound significance? संस्कृत भाषा के महान व्याकरण और व्युत्पत्ति के अनुसार ‘सुदर्शन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘सु’ जिसका अर्थ है शुभ या श्रेष्ठ, और ‘दर्शन’ जिसका अर्थ है दृष्टि। कुल मिलाकर इसका अर्थ है ‘भ्रम रहित दर्शन’ या वह दिव्य दृष्टि जो अज्ञानता के हर अंधकार को पूरी तरह से मिटा देती है। सुदर्शन चक्र में हज़ारों तीलियाँ मौजूद होती हैं और इसे सृष्टि के मूल आधार के रूप में देखा जाता है। धर्म ग्रंथों में इसे दुनिया के सबसे घातक अस्त्र माने जाने वाले ‘ब्रह्मास्त्र’ से भी कहीं अधिक श्रेष्ठ, शक्तिशाली और अचूक शस्त्र बताया गया है। Sudarshana Jayanti का यह शुभ अवसर हमें यह याद दिलाता है कि यह चक्र केवल विनाश का साधन नहीं है, बल्कि यह अंधकार का सर्वनाश करने वाला और भगवान की भक्ति सेवा के महान कौशल का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण है। यह समाज में खोए हुए धार्मिक सिद्धांतों की फिर से स्थापना करने का एक सबसे बड़ा साधन है Sudarshana Jayanti और हर प्रकार की अधार्मिक गतिविधियों का घोर नाशक है। यह माना जाता है कि सुदर्शन चक्र की दया और सुरक्षा के बिना, इस विशाल ब्रह्मांड को बनाए रखना पूरी तरह से असंभव है। सुदर्शन चक्र की उत्पत्ति की अद्भुत पौराणिक कथाएं : Fascinating mythological tales regarding the origin of the Sudarshan Chakra. हमारे प्राचीन वेदों और पुराणों में सुदर्शन चक्र की उत्पत्ति को लेकर कई अत्यंत रोचक और जाग्रत कथाएं वर्णित हैं। Sudarshana Jayanti भगवान विष्णु ने कई बार अत्यंत भयंकर राक्षसों और दानवों का शीश काटने के लिए इस जाग्रत चक्र का उपयोग किया है। एक बहुत ही प्रसिद्ध और प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने श्री हरि विष्णु की अत्यंत कठोर और घोर तपस्या से अत्यधिक प्रसन्न होकर उन्हें यह सुदर्शन चक्र दैत्यों और असुरों का संहार करने के लिए एक परम उपहार के रूप में भेंट किया था। वहीं एक अन्य पौराणिक प्रसंग में यह भी बताया गया है कि देवताओं के मुख्य शिल्पकार और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा जी ने सूर्य देव की तेज दीप्ति (चमक) को थोड़ा कम करके, उसी सूर्य की चमक के कुछ अत्यंत शक्तिशाली हिस्सों का उपयोग करके इस अजेय सुदर्शन चक्र का निर्माण किया था। आज के समय में Sudarshana Jayanti के दिन इन दोनों ही कथाओं का श्रवण करना और इन्हें दूसरों को सुनाना एक बहुत ही महान और पुण्य का कार्य माना जाता है। दसों अवतारों का पुण्य और जगन्नाथ धाम की अनोखी परंपरा : The spiritual merit of the ten avatars and the unique traditions of Jagannath Dham. सुदर्शन चक्र की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि केवल इस चक्र की विधिपूर्वक पूजा करने मात्र से ही भक्त को भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों (दशावतार) की पूर्ण पूजा करने के बराबर का असीम फल और आशीर्वाद अपने आप ही प्राप्त हो जाता है। Sudarshana Jayanti जो भी भक्त सच्चे मन से Sudarshana Jayanti का पावन उपवास रखता है, उसके जीवन की सारी मनोकामनाएं बहुत ही शीघ्र पूर्ण हो जाती हैं। इस चक्र का विशेष सम्मान और अत्यंत भव्य रूप ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध पुरी जगन्नाथ मंदिर में देखने को मिलता है। Sudarshana Jayanti पुरी के इस अत्यंत पवित्र मंदिर में सुदर्शन चक्र की पूजा भगवान की एक चलंती (गतिशील) प्रतिमा के रूप में अत्यंत श्रद्धा से की जाती है। यहां एक बहुत ही अनोखी और विशेष धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। किसी भी बड़े त्योहार या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान, पुजारी द्वारा सबसे पहली पूजा सुदर्शन चक्र की ही संपन्न की जाती है, और उसके बाद ही मंदिर के अन्य देवी-देवताओं की पूजा का विधान है। Sudarshana Jayanti यहां तक कि भव्य रथ यात्रा के विशाल उत्सव में भी इसी समान परंपरा को दोहराया जाता है और सुदर्शन जी को सबसे आगे रखा जाता है। महासुदर्शन यज्ञ: दुखों के अंत का अचूक अनुष्ठान : Mahasudarshan Yajna: A surefire ritual to end suffering. जब भी Sudarshana Jayanti का पावन पर्व आता है, तो कई सिद्ध मंदिरों और आध्यात्मिक केंद्रों पर सामूहिक ‘महासुदर्शन यज्ञ’ का अत्यंत विशाल आयोजन किया जाता है। इस अत्यंत जाग्रत महायज्ञ के माध्यम से सुदर्शन चक्र की अलौकिक और चिकित्सीय शक्ति का विशेष रूप से आवाहन किया जाता है। चूँकि यह अजेय चक्र सर्वोच्च धन और संपदा के स्वामी भगवान श्री हरि विष्णु के हाथों में साक्षात विराजमान रहता है, इसलिए इस यज्ञ के प्रभाव से इंसान के जीवन

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Om

Om in a Dream : अगर सपने में ॐ का चिन्ह दिखे तो समझिए होने वाला है बड़ा चमत्कार….

Sapne Mein Om Ka Nisan Dekhna : सपनों की अद्भुत, रहस्यमयी और असीम दुनिया हमेशा से ही मानव जाति के लिए एक बहुत बड़ा कौतूहल और गहरे शोध का विषय रही है। हम अपनी रात की गहरी नींद में जो कुछ भी देखते हैं, उसका हमारे वास्तविक जीवन, हमारी आध्यात्मिक यात्रा और आने वाले भविष्य से बहुत ही सीधा और गहरा संबंध होता है। सनातन धर्म और स्वप्न शास्त्र में पवित्र प्रतीकों, मंत्रों और ध्वनियों का अपना एक बहुत ही जाग्रत और गहरा महत्व माना गया है। ‘ॐ’ (Om) केवल कोई साधारण शब्द या अक्षर नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड की असीम ध्वनि, निर्माण का मूल सार और सभी जीवन की परस्पर संबद्धता का सर्वोच्च प्रतीक है। जब यह अत्यंत पवित्र और अलौकिक प्रतीक हमारी नींद की अवस्था में हमारे सामने आता है, तो इसके कई असीम और जाग्रत अर्थ होते हैं। अगर आपको अपनी शांत नींद में Om in a Dream दिखाई देता है, तो यह कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि यह इस बात का एक स्पष्ट ईश्वरीय संकेत है कि आपके जीवन की सभी जटिल समस्याओं का असली समाधान आध्यात्मिकता, आत्म-निरीक्षण और शांत ध्यान (Meditation) में ही गहराई से छिपा हुआ है। Om in a Dream : अगर सपने में ॐ का चिन्ह दिखे तो समझिए…. स्वप्न शास्त्र और अध्यात्म के अनुसार Om in a Dream का अनुभव करना एक अत्यंत ही सकारात्मक, दुर्लभ और अत्यधिक शुभ स्वप्न माना जाता है। यह इस बात का एकदम स्पष्ट और अचूक प्रमाण है कि आप एक अत्यंत भाग्यशाली और ‘चुने हुए’ (rare and selected) महान इंसान हैं, और साक्षात परमात्मा (Supreme Soul) आपके साथ पूरी तरह से जुड़ चुके हैं। इस जाग्रत अवस्था का मतलब है कि ईश्वर अब आपके लिए कोई दूर की या बाहरी शक्ति नहीं रह गए हैं, बल्कि वे आपके एक सच्चे आध्यात्मिक भागीदार (Spiritual partner) बन चुके हैं जो हर पल आपका सही मार्गदर्शन कर रहे हैं और आपके जीवन का पोषण कर रहे हैं। यह महान सपना यह भी दर्शाता है कि आपके विचार और आपकी गहरी चिंताएं अब सीधे परमात्मा की चिंताएं बन गई हैं और दिल के मामलों में आपको ईश्वरीय स्वीकृति पूरी तरह से मिल चुकी है। जो भी असीम आध्यात्मिक शक्तियां या वरदान भगवान द्वारा आपको दिए जाएंगे, वे समाज की भलाई के काम आएंगे और भगवान आपको एक सेवक (servant) के रूप में नहीं बल्कि एक साझेदार (partner) के रूप में देखते हैं। सपनों की दुनिया के अपने कुछ खास नियम होते हैं और अलग-अलग अवस्थाओं में ॐ का प्रतीक अलग-अलग शुभ फल देता है। यदि आप बहुत खुश हैं और Om in a Dream देखते हैं, तो यह इस बात का बहुत ही शक्तिशाली संकेत है कि आपके जीवन में चल रही किसी बहुत ही पेचीदा और मुश्किल समस्या का एकदम सटीक समाधान जल्द ही आपके सामने आने वाला है। यह आपके लिए एक महान शांति और जीवन के विभिन्न पहलुओं की कहीं अधिक बेहतर समझ लेकर आता है। वहीं अगर आप Om in a Dream के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को ॐ का जाप करते हुए या उस पर पूरी एकाग्रता के साथ ध्यान लगाते हुए देखते हैं, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि भविष्य में आपको किसी बहुत ही अच्छे और सच्चे मित्र का साथ मिलेगा या फिर आप किसी महान गुरु और ज्ञानी मार्गदर्शक से जल्द ही मिल सकते हैं। सपनों की जादुई दुनिया में जब Om in a Dream अत्यंत चमकदार (glowing) और तेज प्रकाशवान रूप में दिखाई देता है, तो यह आपके जीवन में एक बहुत बड़ी आध्यात्मिक सफलता (Spiritual breakthrough) के आने और ज्ञान प्राप्ति की दिशा में एक दैवीय उपस्थिति का अचूक संकेत देता है। ॐ ध्वनि की अपनी एक कंपन गुणवत्ता (vibrational quality) होती है, जिसे गहरी चिकित्सा (healing) और सफाई ऊर्जा (cleansing energy) से सीधे तौर पर जोड़ा जाता है। यदि आप ॐ को प्राकृतिक स्थानों जैसे कि खुले आसमान, पानी या किसी विशाल पेड़ पर देखते हैं, तो यह ब्रह्मांड के साथ आपके गहरे संबंध और प्रकृति के साथ आपकी ‘एकात्मकता’ (oneness) का सबसे बड़ा प्रतीक है। जो लोग ध्यान और योग का नियमित अभ्यास करते हैं, उनके लिए यह सपना एक खुला निमंत्रण है कि वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और गहरा करें, क्योंकि उनके भीतर की असीम शक्तियां अब जाग्रत हो रही हैं और उनके जीवन में एक गहरा संतुलन (balance) आ रहा है। हिंदू रहस्यवाद (Hindu mysticism) और योग विज्ञान के अनुसार, Om in a Dream का आना आपके भीतर गहराई में छिपी हुई उच्च चेतना (higher consciousness) और पवित्र ज्ञान के ‘कुंडलिनी ऊर्जा’ (kundalini energy) के रूप में ऊपर उठने का एक बहुत ही बड़ा और जाग्रत संकेत है। इस उच्च आध्यात्मिक स्थिति के अचानक बढ़ने के कारण यह संभव है कि आपके अजना चक्र (Third Eye Chakra / तीसरा नेत्र) और सहस्रार चक्र (Crown Chakra / क्राउन चक्र) के पूरी तरह से सक्रिय होने की वजह से आपको कुछ दिनों तक हल्का सिरदर्द या नींद न आने (sleeplessness) की समस्या का सामना करना पड़े। यह केवल आपकी आध्यात्मिक स्थिति और ऊर्जा के अचानक बढ़ने का परिणाम है, हालांकि इस दौरान आपको कोई भी जोखिम न लेते हुए चिकित्सीय सलाह (medical advice) भी जरूर लेनी चाहिए। अगर आप सोने से ठीक पहले किसी खास व्यक्ति या नए व्यापारिक प्रोजेक्ट के बारे में गहराई से सोच रहे थे और आपको Om in a Dream आ जाए, तो यह कोई मामूली संयोग बिल्कुल नहीं है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि उस विशेष व्यक्ति या आपके उस नए प्रोजेक्ट को अब सीधे भगवान का पूरा समर्थन और आशीर्वाद (Divine backup) प्राप्त हो चुका है। आपकी सभी मनोकामनाएं, इरादे और शुद्ध विचार ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ पूरी तरह से मेल खा रहे हैं (aligned with the universe) और वे अब बहुत जल्द भौतिक रूप में हकीकत में बदलने वाले हैं। हालांकि, यदि आप Om in a Dream में बहुत सारे ओम प्रतीकों को अपने चारों ओर बस यूँ ही घूमते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ थोड़ा अलग और चेतावनी भरा हो सकता है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि निकट भविष्य में आपको अपनी जिंदगी की सांसारिक गतिविधियों और

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Hanuman Stotra

Bandi Mochan Hanuman Stotra : बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र….

Bandi Mochan Hanuman Stotra बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र : बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र भगवान हनुमान जी को समर्पित है। जो व्यक्ति बिना किसी गलती के कोर्ट केस में फंसा हो और उसे सज़ा मिलने का डर हो या सज़ा सुनाई जा चुकी हो, उसे बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। Hanuman Stotra ऐसा करने से साधक सज़ा से मुक्त होकर सम्मान के साथ वापस लौटता है। कहा जाता है कि बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र का पाठ करने से साधक को मानसिक शांति मिलती है और मानसिक पीड़ा से राहत महसूस होती है। साधक के खिलाफ रची गई साज़िशों का पर्दाफ़ाश होता है और साज़िश करने वाला बेनकाब हो जाता है। Hanuman Stotra साथ ही, दुश्मन नष्ट हो जाते हैं और साधक भविष्य की समस्याओं से सुरक्षित रहता है। जब कोई व्यक्ति खुद को या अपने परिवार को किसी तरह के बंधन में पाता है, या दुश्मन उसे धोखाधड़ी और बेईमानी के कोर्ट केस में फंसा देते हैं, Hanuman Stotra या उसके किसी निर्दोष परिवार के सदस्य को झूठे आरोप में सज़ा मिलने वाली होती है, तो उसे बार-बार बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यह किसी भी तरह के जादू-टोने, तंत्र-मंत्र और बुरी नज़र आदि के असर से बचने का सबसे आसान उपाय है। अक्सर सुनने में आता है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे आरोपों में दोषी ठहराया गया है और इसके कारण उसका पूरा परिवार परेशान है। ऐसी स्थिति में, बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र बहुत अद्भुत लाभ देता है, लेकिन इसे कभी भी अकेले या बिना सही मार्गदर्शन के या अपनी मर्जी से नहीं करना चाहिए। Hanuman Stotra बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र का पाठ केवल किसी योग्य गुरु या जानकार व्यक्ति के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। Hanuman Stotra बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र के बारे में बस इतना ही कहा जा सकता है Hanuman Stotra कि हमारे शास्त्रों में मुश्किल में फंसे लोगों के लिए इसकी बहुत ज़रूरत बताई गई है, इसलिए लोगों को समझाने के लिए इसे सबके सामने लाना ज़रूरी है। Bandi Mochan Hanuman Stotra Ke Labh: बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र के लाभ: किसी भी तरह के तंत्र-मंत्र, जादू-टोने और काले जादू के असर से बचने का आसान उपाय।सभी बुरे प्रभावों और जादू-टोने से मुक्ति।कोर्ट केस से बचाव।कोर्ट केस में जीत दिलाने में सहायक।धोखाधड़ी से बचाव।विश्वासघात का शिकार होने से बचाव। किसे करना चाहिए इस स्तोत्र का पाठ: जो लोग काले जादू, तंत्र-मंत्र और अन्य बुरी शक्तियों से परेशान हैं, उन्हें बुरे प्रभावों से बचने के लिए बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र का पाठ ज़रूर करना चाहिए। बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र पाठ : Bandi Mochan Hanuman Stotra in Hindi यदि आप किसी कोर्ट कचहरी के मामले मे बेवजाह फंस गये है। और सजा होने की स्थिति है। या सजा हो चुकी है। या कोई व्यक्ति जेल मे बंद हो, तो यह प्रयोग अवश्य करे। इस प्रयोग से व्यक्ति निश्चय ही सजा से मुक्त हो कर सम्मान सहित वापिस आ जायेगे। लेकिन आप इस प्रयोग को तभी करे, जब आप सामाजिक और न्यायिक दृष्टि से सही हो। दोष युक्त होने पर यह प्रयोग कोई फल नही देगा।  “ॐ ह्रीं ह्रूं बन्दी देव्यै नम:” इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करे तथा इस स्तोत्र का नित्य पाठ करे। स्तोत्रम् बन्दी देव्यै नमस्कृत्य वरदाभय शोभितम् ।तदाज्ञांशरणं गच्छत् शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥ बन्दी कमल पत्राक्षी लौह श्रृंखला भंजिनीम् ।प्रसादं कुरू मे देवि! शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥ त्वं बन्दी त्वं महा माया त्वं दुर्गा त्वं सरस्वती ।त्वं देवी रजनी चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥ त्वं ह्रीं त्वमोश्वरी देवि ब्राम्हणी ब्रम्हा वादिनी ।त्वं वै कल्पक्षयं कर्त्री शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥ देवी धात्री धरित्री च धर्म शास्त्रार्थ भाषिणी ।दु: श्वासाम्ब रागिणी देवी शीघ्रं मोचं ददातु मे । नमोस्तुते महालक्ष्मी रत्न कुण्डल भूषिता ।शिवस्यार्धाग्डिनी चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥ नमस्कृत्य महा-दुर्गा भयात्तु तारिणीं शिवां ।महा दु:ख हरां चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥ इंद स्तोत्रं महा-पुण्यं य: पठेन्नित्यमेव च ।सर्व बन्ध विनिर्मुक्तो मोक्षं च लभते क्षणात् ॥ यदि आप पूर्णतः निर्दोष है। तो निश्चित……….

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Bajrang Baan

Bajrang Baan : बजरंग बाण….

Bajrang Baan (बजरंग बाण) : भौतिक मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये बजरंग बाण Bajrang Baan का अमोघ विलक्षण प्रयोग करे, अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार के दिन हनुमानजी के सामने लाल आसन पर बैठकर 108 बार पाठ करे। जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें।  “श्रीराम” से लेकर “सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है। Bajrang Baan गूगुल की सुगन्ध देकर जिस घर में बगरंग बाण/Bajrang Baan का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं सकते, समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य Bajrang Baan पाठ करने में असमर्थ हो, उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए। दीप दान हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। Bajrang Baan पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। Bajrang Baan अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। Bajrang Baan इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। Bajrang Baan समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए। Bajrang Baan हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें। Bajrang Baan : बजरंग बाण ध्यान श्रीराम अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं ।दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं ।रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि ।। दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान ।तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ।। चौपाई जय हनुमन्त सन्त हितकारी ।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ।। जन के काज विलम्ब न कीजै ।आतुर दौरि महा सुख दीजै ।। जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा ।सुरसा बदन पैठि विस्तारा ।। आगे जाय लंकिनी रोका ।मारेहु लात गई सुर लोका ।। जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।सीता निरखि परम पद लीन्हा ।। बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा ।अति आतुर यम कातर तोरा ।। अक्षय कुमार को मारि संहारा ।लूम लपेटि लंक को जारा ।। लाह समान लंक जरि गई ।जै जै धुनि सुर पुर में भई ।। अब विलंब केहि कारण स्वामी ।कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी ।। जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता ।आतुर होई दुख करहु निपाता ।। जै गिरधर जै जै सुख सागर ।सुर समूह समरथ भट नागर ।। ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले ।वैरहिं मारू बज्र सम कीलै ।। गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ ।महाराज निज दास उबारों ।। सुनि हंकार हुंकार दै धावो ।बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो ।। ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा ।ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा ।। सत्य होहु हरि सत्य पाय कै ।राम दुत धरू मारू धाई कै ।। जै हनुमन्त अनन्त अगाधा ।दुःख पावत जन केहि अपराधा ।। पूजा जप तप नेम अचारा ।नहिं जानत है दास तुम्हारा ।। वन उपवन जल-थल गृह माहीं ।तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।। पाँय परौं कर जोरि मनावौं ।अपने काज लागि गुण गावौं ।। जै अंजनी कुमार बलवन्ता ।शंकर स्वयं वीर हनुमंता ।। बदन कराल दनुज कुल घालक ।भूत पिशाच प्रेत उर शालक ।। भूत प्रेत पिशाच निशाचर ।अग्नि बैताल वीर मारी मर ।। इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी ।राखु नाथ मर्याद नाम की ।। जनक सुता पति दास कहाओ ।ताकी शपथ विलम्ब न लाओ ।। जय जय जय ध्वनि होत अकाशा ।सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा ।। उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई ।पाँय परौं कर जोरि मनाई ।। ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता ।ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता ।। ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल ।ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ।। अपने जन को कस न उबारौ ।सुमिरत होत आनन्द हमारौ ।। ताते विनती करौं पुकारी ।हरहु सकल दुःख विपति हमारी ।। ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा ।कस न हरहु दुःख संकट मोरा ।। हे बजरंग, बाण सम धावौ ।मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ ।। हे कपिराज काज कब ऐहौ ।अवसर चूकि अन्त पछतैहौ ।। जन की लाज जात ऐहि बारा ।धावहु हे कपि पवन कुमारा ।। जयति जयति जै जै हनुमाना ।जयति जयति गुण ज्ञान निधाना ।। जयति जयति जै जै कपिराई ।जयति जयति जै जै सुखदाई ।। जयति जयति जै राम पियारे ।जयति जयति जै सिया दुलारे ।। जयति जयति मुद मंगलदाता ।जयति जयति त्रिभुवन विख्याता ।। ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा ।पावत पार नहीं लवलेषा ।। राम रूप सर्वत्र समाना ।देखत रहत सदा हर्षाना ।। विधि शारदा सहित दिनराती ।गावत कपि के गुन बहु भाँति ।। तुम सम नहीं जगत बलवाना ।करि विचार देखउं विधि नाना ।। यह जिय जानि शरण तब आई ।ताते विनय करौं चित लाई ।। सुनि कपि आरत वचन हमारे ।मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे ।। एहि प्रकार विनती कपि केरी ।जो जन करै लहै सुख ढेरी ।। याके पढ़त वीर हनुमाना ।धावत बाण तुल्य बनवाना ।। मेटत आए दुःख क्षण माहिं ।दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं ।। पाठ करै बजरंग बाण की ।हनुमत रक्षा करै प्राण की ।। डीठ, मूठ, टोनादिक नासै ।परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे ।। भैरवादि सुर करै मिताई ।आयुस मानि करै सेवकाई ।। प्रण कर पाठ करें मन लाई ।अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई ।। आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै ।ताकी छाँह काल नहिं चापै ।। दै गूगुल की धूप हमेशा ।करै पाठ तन मिटै कलेषा ।। यह बजरंग बाण जेहि मारे ।ताहि कहौ फिर कौन उबारे ।। शत्रु समूह मिटै सब आपै ।देखत ताहि सुरासुर काँपै ।। तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई ।रहै सदा कपिराज सहाई ।। दोहा प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै ।सदा धरैं उर ध्यान ।। तेहि के कारज तुरत ही ।सिद्ध करैं हनुमान ।। ।। इति बजरंग बाण सम्पूर्णम् ।।

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Crocodile

Crocodile In Dream : सपने में मगरमच्छ का दिखना किस बात का संकेत….

Sapne Mein Crocodile Dekhna : सपनों की जादुई और रहस्यमयी दुनिया में आपका एक बार फिर से बहुत-बहुत स्वागत है! रात के अंधेरे में गहरी नींद सोते समय हर इंसान कोई न कोई सपना जरूर देखता है। कुछ सपने मन को अपार शांति देने वाले और बहुत ही सुखद होते हैं, तो वहीं कुछ सपने इतने भयानक और डरावने होते हैं कि इंसान पसीने से तर-बतर होकर अचानक घबराकर उठ जाता है। स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) और प्राचीन भारतीय ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, हमारे द्वारा देखे गए हर एक सपने का हमारे वास्तविक जीवन और आने वाले भविष्य से कोई न कोई गहरा अर्थ जरूर जुड़ा होता है। जब हम अपने सपने में पशु-पक्षियों या किसी विशेष जीव को देखते हैं, तो वह हमारी जिंदगी की किसी बड़ी घटना का पूर्व संकेत होता है। यदि आपको नींद में मगरमच्छ दिखाई देता है, तो सुबह उठते ही आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि यह शुभ है या अशुभ। आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि सपने में Crocodile को देखने का असल मतलब क्या होता है और यह आपको क्या ईश्वरीय संकेत देना चाहता है। मगरमच्छ देखना धोखे और चुनौतियों का सबसे बड़ा संकेत : Seeing a crocodile: The greatest sign of deception and challenges. Sapne mein Magarmach Dekhna : भारतीय संस्कृति और प्राचीन स्वप्न विज्ञान में मगरमच्छ को एक बेहद चालाक, खूंखार और धैर्यवान जीव माना गया है जो बहुत ही सावधानी से अपने शिकार को दबोचता है। आपने असल जिंदगी में “मगरमच्छ के आंसू” वाली मशहूर कहावत तो जरूर सुनी होगी, जो सीधे तौर पर इंसानी धोखे, अविश्वास और छल-कपट का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए, नींद में Crocodile का दिखाई देना इंसान को भविष्य के प्रति बहुत अधिक सतर्क रहने की एक बड़ी चेतावनी देता है। यह सपना इस बात का एकदम साफ संकेत है कि निकट भविष्य में आपको किसी बहुत ही करीबी व्यक्ति (जैसे कोई अच्छा दोस्त, रिश्तेदार या परिचित) से कोई बहुत बड़ा धोखा मिल सकता है। इसके साथ ही, यह सपना आपके जीवन में मौजूद उन छिपे हुए शत्रुओं (दुश्मनों) के भयंकर प्रभाव को भी दर्शाता है, जो आपको नुकसान पहुंचाने की घात लगाए बैठे हैं। ऐसे में आपको अपनी आर्थिक, मानसिक और सामाजिक स्थिति को लेकर बहुत सावधान रहने और सोच-समझकर निर्णय लेने की सख्त जरूरत है। विभिन्न अवस्थाओं में मगरमच्छ देखने के अचूक स्वप्न फल : Accurate dream results of seeing crocodile in different positions सपनों का सटीक अर्थ इस बात पर सबसे अधिक निर्भर करता है कि आपने उस विशेष जीव को किस स्थिति और अवस्था में देखा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अलग-अलग परिस्थितियों में मगरमच्छ के दर्शन का क्या अर्थ होता है….. 1. रोता हुआ मगरमच्छ देखना (Sapne Mein Rota Huaa Magarmach Dekhna) क्या आपने कभी अपनी गहरी नींद में किसी रोते हुए Crocodile को देखा है? अगर हाँ, तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार, मगरमच्छ को इस प्रकार रोते हुए देखना इस बात का अचूक संकेत है कि आप अपनी असल जिंदगी में किसी गहरी मानसिक चिंता या बहुत भारी तनाव से बुरी तरह घिरे हुए हैं। यह सपना स्पष्ट रूप से बताता है कि आपको अपने मन के अंदर की उलझनों को सुलझाने के लिए अपने परिवार और प्रियजनों के साथ थोड़ा अधिक समय बिताना चाहिए, ताकि आपके मन का बोझ कम हो सके। 2. मगरमच्छ की सवारी करना (Riding on it) सपनों की दुनिया हमारी हकीकत से एकदम उलट हो सकती है। यदि आप सपने में खुद को अत्यंत निडरता के साथ किसी Crocodile की सवारी करते हुए या उसके ऊपर शांति से बैठे हुए देखते हैं, तो यह आपके लिए एक बेहद ही शुभ और सकारात्मक संकेत माना जाता है। इसका सीधा सा अर्थ है कि भविष्य में आपकी सफलता और तरक्की के मार्ग में कई बड़ी बाधाएं तो आएंगी, लेकिन आप अपने फौलादी आत्मविश्वास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के बल पर उनका डटकर सामना करेंगे। यह सपना आपको यह भी बेहतरीन सलाह देता है कि जीवन के अहम फैसलों में दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय हमेशा अपनी खुद की बुद्धि और विवेक पर ही पूरा भरोसा रखें। 3. मगरमच्छ का आक्रामक होना या काटना : Crocodile becoming aggressive or biting अगर सपने में कोई बहुत ही आक्रामक Crocodile आपका पागलों की तरह पीछा कर रहा है या आप पर जानलेवा हमला कर रहा है, तो इसे स्वप्न शास्त्र में बिल्कुल भी अच्छा सपना नहीं माना जाता है। यह डरावना दृश्य आपको अपने और अपने पूरे परिवार के स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहने की बहुत बड़ी चेतावनी देता है और यह भी बताता है कि जीवन में भारी धैर्य रखने की जरूरत है। इसके अलावा, अगर सपने में मगरमच्छ आपको अपने दांतों से काट लेता है, तो यह दर्शाता है कि आप अपनी जिंदगी के किसी बहुत करीबी इंसान से अंदर ही अंदर भयंकर रूप से असंतुष्ट हैं और आपके रिश्तों में कोई भारी तनाव पनप रहा है। 4. एक साथ बहुत सारे मगरमच्छ देखना : Seeing many crocodiles together यदि आप अपनी नींद में किसी नदी या तालाब के पास एक साथ बहुत सारे Crocodile का विशाल झुंड देखते हैं, तो स्वप्न शास्त्र इसे एक बेहद नकारात्मक और चेतावनी भरा संकेत मानता है। यह सपना इस ओर बिल्कुल साफ इशारा करता है कि आपके आस-पास मौजूद कुछ लोग आपके असली हितैषी या शुभचिंतक नहीं हैं; इसलिए आपको अपनी संगत पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। यह सपना आपको यह भी स्पष्ट रूप से बताता है कि भविष्य में आपको एक साथ कई बड़ी और कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए आपको अभी से हिम्मत जुटानी होगी। 5. मगरमच्छ का शिकार करना या उसे मारना : Hunting or killing a crocodile एक विशालकाय मगरमच्छ को मारना असल जिंदगी में भले ही बहुत डरावना और असंभव सा लगे, लेकिन अगर आप सपने में पूरे साहस के साथ एक Crocodile को मारते हुए खुद को देखते हैं, तो यह बहुत ही अत्यंत शुभ और मंगलकारी संकेत होता है। इसका अर्थ है कि आप भविष्य में आने वाली हर बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। यह सपना

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Hanuman Stotra

Vibhishan Krit Hanuman Stotra : विभीषणकृत हनुमान स्तोत्र…

Vibhishan Krit Hanuman Stotra : विभीषणकृत हनुमान स्तोत्र: श्री सुदर्शन संहिता में, भक्त विभीषण ने भगवान हनुमान की महिमा का गुणगान करते हुए उनकी स्तुति की है। यह स्तुति श्री हनुमान जी की है, जो सभी प्रकार के भय, बाधाओं, क्रोध और बुरी प्रवृत्तियों को दूर करते हैं। यदि कल्याण की इच्छा रखने वाला व्यक्ति इसका प्रतिदिन पाठ करता है, तो वह सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है और मारुति (हनुमान जी) की कृपा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करता है। यह स्तोत्र रावण के भाई विभीषण द्वारा गाया गया था। विभीषणकृत हनुमान स्तोत्र भगवान हनुमान को प्रसन्न करने और उनके दर्शन पाने का एक शक्तिशाली मंत्र है। शुरुआत में, विभीषणकृत हनुमान स्तोत्र श्री हनुमान जी के गुणों और उनकी अपार शक्ति की प्रशंसा के साथ शुरू होता है। Hanuman Stotra फिर बहुत समझदारी से, भगवान हनुमान से जीवन से सभी बीमारियों, खराब स्वास्थ्य और हर तरह की परेशानियों को दूर करने का अनुरोध किया जाता है। इसके बाद, भगवान हनुमान से सभी प्रकार के भय और संकटों से रक्षा करने तथा हमें सभी बुरी चीजों से मुक्त करने की प्रार्थना की जाती है। अंत में, भगवान हनुमान से आशीर्वाद, सफलता, उत्तम स्वास्थ्य और वह सब कुछ देने का अनुरोध किया जाता है जो हम उनसे मांगते हैं। Hanuman Stotra ऊपर बताए गए लाभों को प्राप्त करने के लिए कृपया 41 दिनों तक लगातार इस स्तोत्र का पाठ करें। Hanuman Stotra कहा जाता है कि रावण के भाई विभीषण के घर के ऊपर श्रीराम का नाम लिखा हुआ था और राम की शरण में जाने से पहले विभीषण ने सबसे पहले हनुमान जी की पूजा की थी। मान्यता के अनुसार, देवताओं के बाद विभीषण पृथ्वी पर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हनुमान जी की स्तुति की थी। इसके बाद विभीषण को हनुमान जी की तरह ही चिरंजीवी होने का वरदान मिला। विभीषण ने हनुमान Hanuman Stotra जी की स्तुति में एक बहुत ही अद्भुत और उत्तम स्तोत्र की रचना की है। विभीषणकृत हनुमान स्तोत्र के लाभ : विभीषण द्वारा रचित यह स्तोत्र भगवान हनुमान जी को समर्पित है। नियमित रूप से विभीषणकृत हनुमान स्तोत्र का पाठ करने से सभी प्रकार की बाधाओं, भय, भूत-प्रेत के कष्टों, क्रोध, शत्रुओं की बाधाओं, Hanuman Stotra बीमारियों और बुरी प्रवृत्तियों को दूर करने में बहुत लाभ मिलता है। Hanuman Stotra विभीषण कृत हनुमान स्तोत्र का पाठ कई तरह के प्रयोगों में काम आता है, जैसे सभी तरह की बीमारियों से बचाव, शत्रुओं से रक्षा, दर्द से राहत, अनुष्ठानों से जुड़ी बाधाओं को दूर करना, और राजसी सुख या सम्मान की प्राप्ति आदि। किन्हें यह स्तोत्र करना चाहिए : जो लोग बुरी शक्तियों या नकारात्मकता से घिरे हैं और जीवन में तरक्की नहीं कर पा रहे हैं, Hanuman Stotra उन्हें वैदिक नियमों के अनुसार Hanuman Stotra विभीषण कृत हनुमान स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। विभीषण कृत हनुमान स्तोत्र हिंदी पाठ : Vibhishan Krit Hanuman Stotra in Hindi नमो हनुमते तुभ्यं नमो मारुतसूनवे ।नमः श्रीराम भक्ताय शयामास्याय च ते नमः।। नमो वानर वीराय सुग्रीवसख्यकारिणे ।लङ्काविदाहनार्थाय हेलासागरतारिणे ।। सीताशोक विनाशाय राममुद्राधराय च ।रावणान्त कुलचछेदकारिणे ते नमो नमः ।। मेघनादमखध्वंसकारिणे ते नमो नमः ।अशोकवनविध्वंस कारिणे भयहारिणे ।। वायुपुत्राय वीराय आकाशोदरगामिने ।वनपालशिरश् छेद लङ्काप्रसादभजिने ।। ज्वलत्कनकवर्णाय दीर्घलाङ्गूलधारिणे ।सौमित्रिजयदात्रे च रामदूताय ते नमः ।। अक्षस्य वधकर्त्रे च ब्रह्म पाश निवारिणे ।लक्ष्मणाङग्महाशक्ति घात क्षतविनाशिने ।। रक्षोघ्नाय रिपुघ्नाय भूतघ्नाय च ते नमः ।ऋक्षवानरवीरौघप्राणदाय नमो नमः ।। परसैन्यबलघ्नाय शस्त्रास्त्रघ्नाय ते नमः ।विषघ्नाय द्विषघ्नाय ज्वरघ्नाय च ते नमः ।। महाभयरिपुघ्नाय भक्तत्राणैककारिणे ।परप्रेरितमन्त्रणाम् यन्त्रणाम् स्तम्भकारिणे ।। पयःपाषाणतरणकारणाय नमो नमः ।बालार्कमण्डलग्रासकारिणे भवतारिणे ।। नखायुधाय भीमाय दन्तायुधधराय च ।रिपुमायाविनाशाय रामाज्ञालोकरक्षिणे ।। प्रतिग्राम स्तिथतायाथ रक्षोभूतवधार्थीने ।करालशैलशस्त्राय दुर्मशस्त्राय ते नमः ।। बालैकब्रह्मचर्याय रुद्रमूर्ति धराय च ।विहंगमाय सर्वाय वज्रदेहाय ते नमः ।। कौपीनवासये तुभ्यं रामभक्तिरताय च ।दक्षिणाशभास्कराय शतचन्द्रोदयात्मने ।। कृत्याक्षतव्यधाघ्नाय सर्वकळेशहराय च ।स्वाभ्याज्ञापार्थसंग्राम संख्ये संजयधारिणे ।। भक्तान्तदिव्यवादेषु संग्रामे जयदायिने ।किलकिलाबुबुकोच्चारघोर शब्दकराय च ।। सर्पागि्नव्याधिसंस्तम्भकारिणे वनचारिणे ।सदा वनफलाहार संतृप्ताय विशेषतः ।। महार्णव शिलाबद्धसेतुबन्धाय ते नमः ।वादे विवादे संग्रामे भये घोरे महावने ।। सिंहव्याघ्रादिचौरेभ्यः स्तोत्र पाठाद भयं न हि ।दिव्ये भूतभये व्याघौ विषे स्थावरजङ्गमे ।। राजशस्त्रभये चोग्रे तथा ग्रहभयेषु च ।जले सर्पे महावृष्टौ दुर्भिक्षे प्राणसम्प्लवे ।। पठेत् स्तोत्रं प्रमुच्येत भयेभ्यः सर्वतो नरः ।तस्य क्वापि भयं नास्ति हनुमत्स्तवपाठतः ।। सर्वदा वै त्रिकालं च पठनीयमिदं स्तवं ।सर्वान् कामानवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ।। विभीषण कृतं स्तोत्रं ताक्ष्येर्ण समुदीरितम् ।ये पठिष्यन्ति भक्तया वै सिद्धयस्तत्करे सि्थताः ।। ।। इति विभीषणकृत हनुमान स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Bhujanga Stotram

Hanuman Bhujanga Stotram : श्री हनुमत् भुजङ्ग स्तोत्रम्….

श्री हनुमत् भुजङ्ग स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Hanuman Bhujanga Stotram in Hindi स्फुरद्विद्‌युदुल्लासवालाग्रघण्टा-झणत्कारनादप्रवृद्धाट्टहासम् ।भजे वायुसूनुं भजे रामदूतं भजेवज्रदेहं भजे भक्तबन्धुम् ॥ १ ॥ प्रपन्नानुरागं प्रभाकाञ्चनाङ्गंजगद्गीतशौर्यं Bhujanga Stotram तुषाराद्रिशौर्यम् ।तृणीभूतहेतिं रणोद्यद्विभूतिं भजेवायुपुत्रं पवित्रात् पवित्रम् ॥ २ ॥ भजे रामरम्भावनीनित्यवासं भजेबालभानुप्रभाचारुहासम् ।भजे चन्द्रिकाकुन्दमन्दारभासं भजेसन्ततं रामभूपालदासम् ॥ ३ ॥ भजे लक्ष्मणप्राणरक्षातिदक्षं भजेतोषितानेकगीर्वाणपक्षम् ।भजे घोरसंग्रामसीमाहताक्षं भजेरामनामातिसंप्राप्तरक्षम् ॥ ४ ॥ मृगाधीशनाथं क्षितिक्षिप्तपादंघनाक्रान्तजङ्घं कटिस्थोडुसङ्घम् ।वियद्व्याप्तकेशं भुजाश्लेषिताशंजयश्रीसमेतं भजे रामदूतम् ॥ ५ ॥ चलद्वालघातभ्रमच्चक्रवालंकठोराट्टहासप्रभिन्नाब्धिकाण्डम् ।महासिंहनादाद्विशीर्णत्रिलोकं भजेचाञ्जनेयं प्रभुं वज्रकायम् ॥ ६ ॥ रणे भीषणे मेघनादे सनादेसरोषं समारोप्यसौमित्रिमंसे ।घनानां खगानां सुराणां च मार्गेनटन्तं ज्वलन्तं हनूमन्तमीडे ॥ ७ ॥ नखध्वस्तजंभारिदम्भोलिधारंभुजाग्रेण निर्धूतकालोग्रदण्डम् ।पदाघातभीताहिजाताऽधिवासंरणक्षोणिदक्षं भजे पिङ्गलाक्षम् ॥ ८ ॥ महाभूतपीडां महोत्पातपीडांमहाव्याधिपीडां Bhujanga Stotram महाधिप्रपीडाम् ।हरत्याशु ते पादपद्मानुरक्तिःनमस्ते कपिश्रेष्ठ रामप्रियाय ॥ ९ ॥ सुधासिन्धुमुल्लङ्घ्य सान्द्रे निशीथेसुधा चौषधीस्ताः प्रगुप्तप्रभावाः ।क्षणे द्रोणशैलस्य पृष्ठे प्ररूढाः त्वयावायुसूनो किलानीय दत्ताः ॥ १० ॥ समुद्रं तरङ्गादिरौद्रं विनिद्रोविलङ्घ्योडुसङ्घं स्तुतो मर्त्यसंघैः ।निरातङ्कमाविश्य लङ्कां विशङ्कोभवानेव सीतावियोगापहारी ॥ ११ ॥ नमस्ते महासत्वबाहाय नित्यंनमस्ते महावज्रदेहाय तुभ्यम् ।नमस्ते पराभूतसूर्याय तुभ्यं नमस्तेकृतामर्त्यकार्याय तुभ्यम् ॥ १२ ॥ नमस्ते सदा ब्रह्मचर्याय तुभ्यंनमस्ते सदा वायुपुत्राय तुभ्यम् ।नमस्ते सदा पिङ्गलाक्षाय तुभ्यंनमस्ते सदा रामभक्ताय तुभ्यम् ॥ १३ ॥ हनूमत्भुजङ्गप्रयातं प्रभातेप्रदोषे दिवा चार्द्धरात्रेऽपि मर्त्यः ।पठन् भक्तियुक्तः प्रमुक्ताघजालःनराः सर्वदा रामभक्तिं प्रयान्ति ॥ १४ ॥ ॥ इति श्री हनुमत् भुजङ्ग स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

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Sawan

Sawan Month Auspicious Dreams : सपने में सावन का असली मतलब और 5 सबसे शुभ संकेत जो बदल देंगे आपकी किस्मत….

Sawan Month Auspicious Dreams : सनातन धर्म, वैदिक पंचांग और हमारी अत्यंत प्राचीन भारतीय संस्कृति में सावन (श्रावण) के महीने का एक बहुत ही खास, अलौकिक और जाग्रत महत्व होता है। यह पूरा का पूरा पवित्र महीना देवों के देव महादेव, भगवान शिव को पूरी तरह से समर्पित होता है। इस अत्यंत पावन महीने में शिव भक्त अत्यंत अगाध श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान पड़ने वाले सावन के सोमवार के व्रत, पवित्र कांवड़ यात्रा और सावन शिवरात्रि जैसे महा-अनुष्ठान भक्तों के जीवन में अत्यंत फलदायी और चमत्कारी माने जाते हैं। दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद जब हम रात में सोते हैं, तो हम अक्सर कई तरह के सपने देखते हैं। स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) और प्राचीन ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, हमारे द्वारा देखे गए हर एक सपने का हमारे वास्तविक जीवन से कोई ना कोई गहरा और सीधा मतलब जरूर होता है। Sawan Month इस समय सावन का पवित्र महीना चल रहा है Sawan और ऐसे में देखे गए सपनों का आध्यात्मिक महत्व कई हजार गुना अधिक बढ़ जाता है। जब बात Sawan in Dreams की आती है, तो ये सपने महज कोई साधारण दिमागी कल्पना नहीं होते, बल्कि ये हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं, अपार खुशियों और गुड लक (Good Luck) का एक बहुत ही विशेष और अचूक संकेत देते हैं। Sawan आज हम बहुत ही गहराई से जानेंगे कि Sawan in Dreams का अनुभव आपके लिए कितना ज्यादा भाग्यशाली हो सकता है, और धन-दौलत व सुख-समृद्धि के लिए इसका क्या अर्थ होता है। Sawan Month Auspicious Dreams : सपने में सावन का असली मतलब और 5 सबसे शुभ संकेत….. 1. सपने में भोलेनाथ का आना या शिवलिंग के दर्शन होना : Seeing Lord Bhole-nath or a Shivling in a dream. सावन के इस अत्यंत पावन और चमत्कारी महीने में भगवान शिव (भोलेनाथ) को साक्षात अपने सपने में देखना एक बहुत ही दुर्लभ, जाग्रत और शुभ ईश्वरीय संकेत माना जाता है। यदि आपको Sawan in Dreams के दौरान ध्यान मग्न भोलेनाथ के दर्शन होते हैं, तो यह इस बात का बिल्कुल स्पष्ट और अचूक प्रमाण है कि आप पर शिव जी की विशेष कृपा और असीम आशीर्वाद बरसने वाला है। यह सपना इंसान के जीवन में आने वाली जबरदस्त तरक्की और सभी रुके हुए कार्यों के पूर्ण होने का सीधा संकेत देता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, ऐसा अत्यंत शुभ सपना आने पर आपको सुबह उठकर तुरंत स्नान करना चाहिए और शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर पूरी श्रद्धा के साथ शुद्ध जल जरूर चढ़ाना चाहिए। यह Sawan in Dreams आपको यह बताता है कि शंकर भगवान की दया से आपके जीवन के सारे दुख, मानसिक तनाव और बड़ी से बड़ी परेशानियां अब बहुत जल्द हमेशा के लिए दूर होने वाली हैं। 2. नाग देवता या नाग-नागिन का अद्भुत जोड़ा देखना : Seeing the Serpent Deity or a wondrous pair of male and female serpents. हम अक्सर रात में सोते वक्त कई प्रकार के सपने देखते हैं, लेकिन अगर सावन के महीने में आपको स्वप्न में साक्षात नाग देवता दिखाई देते हैं, तो यह कोई आम स्वप्न बिल्कुल भी नहीं है। नाग देवता का भगवान शिव के गले का हार होने के कारण इनका दिखना कई प्रकार के गहरे संकेत देता है। स्वप्न शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को Sawan in Dreams में फन उठाए हुए नाग देवता साक्षात दिख जाएं, तो यह इंसान के लिए बहुत ही बड़ा और शुभ संकेत होता है। इसका सीधा सा अर्थ है कि आपको भविष्य में जल्द ही कोई बहुत ही सुखद समाचार मिल सकता है और इसे पैतृक संपत्ति (Property) से जुड़े भारी लाभ का अचूक संकेत भी माना जाता है। ऐसे में अगले दिन सुबह जल्दी उठकर शिव जी की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा, इस पवित्र महीने में अगर आपको Sawan in Dreams में नाग-नागिन का पूरा जोड़ा एक साथ दिखाई देता है, तो स्वप्न शास्त्र की दुनिया में यह आपके लिए बहुत ही अच्छी और बड़ी खबर लेकर आया है। नाग-नागिन का जोड़ा देखने का मतलब है कि आपके जीवन के प्रेम संबंध (Love Life) पूरी तरह से सफल होने वाले हैं। यह सपना आपके वैवाहिक जीवन में असीम मधुरता और खुशहाली के आने का भी एक बहुत बड़ा संकेत है। यदि यह सपना किसी ऐसे इंसान को आता है जो अभी तक अविवाहित है, तो यह बहुत ही शुभ है क्योंकि बहुत संभव है कि जल्द ही उनका एक अच्छा विवाह तय हो जाए। 3. शिवलिंग के पास सांप (Snake near Shivling) का दिखाई देना : Sighting of a snake near the Shivling. सावन के महीने में शिवजी की कठोर पूजा करने और सात्विक नियम पालने का अपना एक अलग और खास महत्व होता है। वहीं, इस अत्यंत शुभ अवधि के दौरान अगर सपने में आपको साक्षात शिवलिंग के पास कोई सांप लिपटा हुआ या बैठा हुआ नजर आ जाए, तो स्वप्न शास्त्र में इसे एक बेहद ही शक्तिशाली और शुभ संकेत माना जाता है। इस विशेष प्रकार के Sawan in Dreams का सीधा सा अर्थ होता है कि आपका बहुत ही अच्छा और सोया हुआ भाग्य अब शुरू होने वाला है, और आपको अपनी जिंदगी के पुराने दुखों से पूरी तरह निजात मिलने वाली है। यह सपना देखने का असल मतलब यह भी होता है कि आपके रास्ते में आने वाली सारी बाधाएं अब हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी और आपको अपने करियर व नौकरी में एक शानदार सफलता हासिल होगी। इसके साथ ही, यह इस बात का भी पक्का संकेत है कि भगवान शिव की कृपा आप पर पूरी तरह से बनी हुई है और आपकी कोई बहुत पुरानी इच्छा जल्द ही पूर्ण होने वाली है। 4. पवित्र नदी में खुद को स्नान करते या गंगा की धार देखना : Bathing in a holy river or seeing the flow of the Ganges. भगवान शिव को जल अत्यंत प्रिय है। शिव के इस प्रिय महीने में यदि आप अपने सपने में साक्षात मां गंगा की निर्मल धार देखते हैं, तो इसे इंसान के लिए बहुत ही ज्यादा शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस तरह के Sawan in

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Hanuman Bahuk

Hanuman Bahuk : हनुमान बाहुक

Hanuman Bahuk हनुमान बाहुक: भगवान हनुमान को भगवान राम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माता सीता के आशीर्वाद से भगवान हनुमान अमर हैं। माना जाता है कि आज भी जब-जब हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, रामचरितमानस या रामायण का पाठ किया जाता है, भगवान हनुमान वहां जरूर आते हैं। Hanuman Bahuk हनुमान बाहुक, हनुमान जी को समर्पित एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली प्रार्थना है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा था। श्री तुलसीदास ने हनुमान बाहुक तब लिखा था जब उन्हें हाथ में असहनीय दर्द हो रहा था और किसी भी दवा या मंत्र से उन्हें आराम नहीं मिल रहा था; फिर भगवान हनुमान जी की कृपा से वह भयानक दर्द दूर हो गया। इसमें 44 छंद हैं। माना जाता है कि 40 दिनों तक लगातार इस बाहुक का पाठ करने से कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों को ठीक करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है। एक बार, तुलसीदास को अपने एक हाथ और कंधे में असहनीय दर्द हुआ था और वात (वायु दोष) तथा त्वचा पर निकले दानों के कारण वे बहुत कष्ट में थे। दवा, ताबीज और मंत्र जैसे कई उपाय किए गए, लेकिन हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती गई। Hanuman Bahuk तब उन्होंने हनुमान जी की महिमा और महानता का गुणगान करते हुए हनुमान बाहुक की रचना की और उनसे अपने शारीरिक कष्टों को दूर करने की प्रार्थना की। चमत्कारिक रूप से हनुमान जी की कृपा से तुलसीदास को उस असहनीय दर्द से तुरंत राहत मिल गई। इसे हनुमान बाहुक के नाम से जाना जाता है। इसमें 44 छंद हैं। इसमें छप्पय, झूलना, सवैया और घनाक्षरी छंदों में क्रमशः दो, एक, पांच और 36 छंद हैं। हनुमान चालीसा को ध्यान से पढ़ने और समझने पर पता चलता है Hanuman Bahuk कि हनुमान इस कलयुग के जागृत देवता हैं, जो भक्तों के सभी प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। शर्त यह है कि भक्त को अपने कर्मों के प्रति सावधान रहना चाहिए। Hanuman Bahuk बुरे काम करने वाले का कोई साथ नहीं दे सकता। हनुमान बाहुक के लाभ: जब कलयुग शुरू हुआ और तुलसीदास को दर्द हुआ, तब उन्होंने हनुमान बाहुक लिखा। माना जाता है Hanuman Bahuk कि यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में बहुत फायदेमंद है। दर्द में इससे कई लाभ मिल सकते हैं। Hanuman Bahuk यह तब भी फायदेमंद है जब आपको चलने-फिरने में समस्या हो। Hanuman Bahuk यह किसी भी ऐसी बीमारी या छिपी हुई बीमारी में फ़ायदेमंद है जो आपकी मेडिकल रिपोर्ट में नहीं आती है। किसे करना चाहिए इस ‘बाहुक’ का पाठ: जो लोग पुरानी बीमारियों से परेशान हैं, Hanuman Bahuk उन्हें नियमित रूप से हनुमान बाहुक का पाठ करना चाहिए। हनुमान बाहुक : Hanuman Bahuk ।। श्रीगणेशाय नमः ।। श्रीजानकीवल्लभो विजयतेश्रीमद्-गोस्वामि-तुलसीदास-कृतहनुमान बाहुक: सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु ।भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ।। गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव ।जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव ।। कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित सन्तत निकट ।गुन-गनत, नमत, सुमिरत, जपत समन सकल-संकट-विकट ।। 1 ।। भावार्थ/हनुमान बाहुक: जिनके शरीर का रंग उदयकाल के सूर्य के समान है, जो समुद्र लाँघकर श्रीजानकीजी के शोक को हरने वाले, आजानु-बाहु, डरावनी सूरत वाले और मानो काल के भी काल हैं। लंका-रुपी गम्भीर वन को, जो जलाने योग्य नहीं था, उसे जिन्होंने निःसंक जलाया और जो टेढ़ी भौंहो वाले तथा बलवान् राक्षसों के मान और गर्व का नाश करने वाले हैं, Hanuman Bahuk तुलसीदास जी कहते हैं – वे श्रीपवनकुमार सेवा करने पर बड़ी सुगमता से प्राप्त होने वाले, अपने सेवकों की भलाई करने के लिये सदा समीप रहने वाले तथा गुण गाने, प्रणाम करने एवं स्मरण और नाम जपने से सब भयानक संकटों को नाश करने वाले हैं ।। 1 ।। स्वर्न-सैल-संकास कोटि-रबि-तरुन-तेज-घन ।उर बिसाल भुज-दंड चंड नख-बज्र बज्र-तन ।। पिंग नयन, भृकुटी कराल रसना दसनानन ।कपिस केस, करकस लँगूर, खल-दल बल भानन ।। कह तुलसिदास बस जासु उर मारुतसुत मूरति बिकट ।संताप पाप तेहि पुरुष पहिं सपनेहुँ नहिं आवत निकट ।। 2 ।। भावार्थ:/हनुमान बाहुक वे सुवर्ण-पर्वत (सुमेरु) – के समान शरीरवाले, करोड़ों मध्याह्न के सूर्य के सदृश अनन्त तेजोराशि, विशाल-हृदय, अत्यन्त बलवान् भुजाओं वाले तथा वज्र के तुल्य नख और शरीरवाले हैं, भौंह, जीभ, दाँत और मुख विकराल हैं, Hanuman Bahuk बाल भूरे रंग के तथा पूँछ कठोर और दुष्टों के दल के बल का नाश करने वाली है। तुलसीदासजी कहते हैं – श्रीपवनकुमार की डरावनी मूर्ति जिसके हृदय में निवास करती है, उस पुरुष के समीप दुःख और पाप स्वप्न में भी नहीं आते ।। 2 ।। झूलना – पञ्चमुख-छमुख-भृगु मुख्य भट असुर सुर,सर्व-सरि-समर समरत्थ सूरो ।बाँकुरो बीर बिरुदैत बिरुदावली,बेद बंदी बदत पैजपूरो ।। जासु गुनगाथ रघुनाथ कह, जासुबल,बिपुल-जल-भरित जग-जलधि झूरो ।दुवन-दल-दमनको कौन तुलसीस है,पवन को पूत रजपूत रुरो ।। 3 ।। भावार्थ:/हनुमान बाहुक शिव, स्वामि-कार्तिक, परशुराम, दैत्य और देवता-वृन्द सबके युद्ध रुपी नदी से पार जाने में योग्य योद्धा हैं । वेदरुपी वन्दीजन कहते हैं – Hanuman Bahuk आप पूरी प्रतिज्ञा वाले चतुर योद्धा, बड़े कीर्तिमान् और यशस्वी हैं । Hanuman Bahuk जिनके गुणों की कथा को रघुनाथ जी ने श्रीमुख से कहा तथा जिनके अतिशय पराक्रम से अपार जल से भरा हुआ संसार-समुद्र सूख गया । तुलसी के स्वामी सुन्दर राजपूत (पवनकुमार) – के बिना राक्षसों के दल का नाश करने वाला दूसरा कौन है ? (कोई नहीं) ।। 3 ।। घनाक्षरी भानुसों पढ़न हनुमान गये भानु मन-अनुमानिसिसु-केलि कियो फेरफार सो ।पाछिले पगनि गम गगन मगन-मन,क्रम को न भ्रम, कपि बालक बिहार सो ।। कौतुक बिलोकि लोकपाल हरि हर बिधि,लोचननि चकाचौंधी चित्तनि खभार सो ।बल कैंधौं बीर-रस धीरज कै, साहस कै,तुलसी सरीर धरे सबनि को सार सो ।। 4 ।। भावार्थ:/हनुमान बाहुक सूर्य भगवान् के समीप में हनुमान् जी विद्या पढ़ने के लिये गये, सूर्यदेव ने मन में बालकों का खेल समझकर बहाना किया ( कि मैं स्थिर नहीं रह सकता और Hanuman Bahuk बिना आमने-सामने के पढ़ना-पढ़ाना असम्भव है) । हनुमान् जी ने भास्कर की ओर मुख करके पीठ की तरफ पैरों से प्रसन्न-मन आकाश-मार्ग में बालकों के खेल के समान गमन किया और उससे पाठ्यक्रम में किसी प्रकार का भ्रम नहीं हुआ । Hanuman Bahuk इस अचरज के खेल को देखकर इन्द्रादि लोकपाल, विष्णु, रुद्र और ब्रह्मा की आँखें चौंधिया गयीं तथा चित्त में खलबली-सी उत्पन्न हो गयी

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Tandav Stotram

Hanuman Tandav Stotram : श्री हनुमत तांडव स्तोत्र….

श्री हनुमत तांडव स्तोत्र हिंदी पाठ : Hanuman Tandav Stotram in Hindi वन्दे सिन्दूरवर्णाभं लोहिताम्बरभूषितम् ।रक्ताङ्गरागशोभाढ्यं शोणापुच्छं कपीश्वरम् ॥ भजे समीरनन्दनं, सुभक्तचित्तरञ्जनं,दिनेशरूपभक्षकं, समस्तभक्तरक्षकम् ।सुकण्ठकार्यसाधकं, विपक्षपक्षबाधकं,समुद्रपारगामिनं, नमामि सिद्धकामिनम् ॥ १ ॥ सुशङ्कितं सुकण्ठभुक्तवान् हि यो हितंवचस्त्वमाशु धैर्य्यमाश्रयात्र वो भयं कदापि न ।इति प्लवङ्गनाथभाषितं Tandav Stotram निशम्य वानराऽधिनाथआप शं तदा, स रामदूत आश्रयः ॥ २ ॥ सुदीर्घबाहुलोचनेन, पुच्छगुच्छशोभिना,भुजद्वयेन सोदरीं निजांसयुग्ममास्थितौ ।कृतौ हि कोसलाधिपौ, कपीशराजसन्निधौ,विदहजेशलक्ष्मणौ, स मे शिवं करोत्वरम् ॥ ३ ॥ सुशब्दशास्त्रपारगं, विलोक्य रामचन्द्रमाः,कपीश नाथसेवकं, Tandav Stotram समस्तनीतिमार्गगम् ।प्रशस्य लक्ष्मणं प्रति, प्रलम्बबाहुभूषितःकपीन्द्रसख्यमाकरोत्, स्वकार्यसाधकः प्रभुः ॥ ४ ॥ प्रचण्डवेगधारिणं, नगेन्द्रगर्वहारिणं,फणीशमातृगर्वहृद्दृशास्यवासनाशकृत् ।विभीषणेन सख्यकृद्विदेह जातितापहृत्,सुकण्ठकार्यसाधकं, नमामि यातुधतकम् ॥ ५ ॥ नमामि पुष्पमौलिनं, सुवर्णवर्णधारिणंगदायुधेन भूषितं, किरीटकुण्डलान्वितम् ।सुपुच्छगुच्छतुच्छलङ्कदाहकं सुनायकंविपक्षपक्षराक्षसेन्द्र-सर्ववंशनाशकम् ॥ ६ ॥ रघूत्तमस्य सेवकं नमामि लक्ष्मणप्रियंदिनेशवंशभूषणस्य Tandav Stotram मुद्रीकाप्रदर्शकम् ।विदेहजातिशोकतापहारिणम् प्रहारिणम्सुसूक्ष्मरूपधारिणं नमामि दीर्घरूपिणम् ॥ ७ ॥ नभस्वदात्मजेन भास्वता त्वया कृतामहासहा यता यया द्वयोर्हितं ह्यभूत्स्वकृत्यतः ।सुकण्ठ आप तारकां रघूत्तमो विदेहजांनिपात्य वालिनं प्रभुस्ततो दशाननं खलम् ॥ ८ ॥ इमं स्तवं कुजेऽह्नि यः पठेत्सुचेतसा नरःकपीशनाथसेवको Tandav Stotram भुनक्तिसर्वसम्पदः ।प्लवङ्गराजसत्कृपाकताक्षभाजनस्सदा नशत्रुतो भयं भवेत्कदापि तस्य नुस्त्विह ॥ ९ ॥ नेत्राङ्गनन्दधरणीवत्सरेऽनङ्गवासरे ।लोकेश्वराख्यभट्टेन हनुमत्ताण्डवं कृतम् ॥ १० ॥ ॥ इति श्री हनुमत तांडव स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Gupt Navratri

Gupt Navratri 2026 Date And Time : गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू, जानें घटस्थापना का सटीक मुहूर्त, माता का वाहन और दस महाविद्याओं का महा-रहस्य….

Gupt Navratri 2026 Mein kab Se Start ho Rahi Hai : सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा पर्व नवरात्रि को माना जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो हम सभी बहुत ही अच्छी तरह से जानते हैं और इन्हें पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास, भव्य पंडालों और डांडिया के साथ मनाया जाता है। लेकिन, हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह में आने वाली गुप्त नवरात्रि अत्यंत रहस्यमयी, असीम शक्तिशाली और प्रभावशाली मानी जाती है। आम गृहस्थों के अलावा, सनातन धर्म में कठोर साधकों और तांत्रिकों के लिए Gupt Navratri 2026 का समय किसी बहुत बड़े और जाग्रत उत्सव से कम नहीं है। इस विशेष और पवित्र नवरात्रि में केवल देवी दुर्गा के नौ साधारण रूपों की ही नहीं, बल्कि दस महाविद्याओं की बहुत ही गहरी और गुप्त साधना की जाती है। इन दस महाविद्याओं में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल हैं। Gupt Navratri 2026 Date And Time : गुप्त नवरात्रि जुलाई से शुरू, जानें घटस्थापना का सटीक मुहूर्त….. पंचांग की सटीक गणना: कब से है Gupt Navratri 2026 ? आइए सबसे पहले विस्तार से जानते हैं कि इस साल Gupt Navratri 2026 की एकदम सही और आधिकारिक तिथियां क्या हैं। पंचांग की एकदम सटीक गणनाओं के अनुसार, साल 2026 में आषाढ़ माह की यह गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 22 जुलाई तक पूरी अगाध श्रद्धा और सात्विक नियमों के साथ मनाई जाएगी। इस नौ दिनों के महाव्रत का विधिवत पारण 23 जुलाई को किया जाएगा। इस बार के पंचांग में एक बहुत ही खास और दुर्लभ बात यह सामने आ रही है कि तीसरा और चौथा नवरात्र एक ही दिन यानी 17 जुलाई को पड़ रहा है। इसलिए Gupt Navratri 2026 का यह स्वर्णिम अवसर आपकी आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बेहद दुर्लभ और फलदायी माना जा रहा है। माता का वाहन (नौका) और इसका अत्यंत शुभ संकेत : The Mother Goddess’s vehicle (the boat) and its highly auspicious significance. धार्मिक शास्त्रों में यह नियम है कि नवरात्रि किस दिन से शुरू हो रही है, उसी वार के आधार पर यह तय होता है कि माता धरती पर किस वाहन से पधारेंगी। इस वर्ष Gupt Navratri 2026 की भव्य शुरुआत बुधवार के दिन से हो रही है। ज्योतिष और देवी भागवत पुराण के कड़े नियमों के अनुसार, जब भी नवरात्रि बुधवार से शुरू होती है, तो माता दुर्गा का धरती पर आगमन ‘नौका’ (Boat) यानी नाव पर होता है। नौका पर माता का आना संसार के लिए एक बेहद शुभ और कल्याणकारी संकेत माना गया है। यह इस बात का साक्षात प्रतीक है कि इस साल अच्छी वर्षा होगी, किसानों की कृषि में भारी उन्नति होगी और चारों ओर अपार सुख-समृद्धि का वास होगा। विशेष रूप से कृषि प्रधान क्षेत्रों (जैसे महाकौशल अंचल) के लिए इसे अत्यधिक शुभ माना जा रहा है। जो भी सच्चा भक्त Gupt Navratri 2026 में सच्चे मन से माता की पूजा करेगा, मान्यता है कि माता उसके जीवन के सारे कष्टों को अपनी नौका में बिठाकर हमेशा के लिए दूर ले जाएंगी। कलश स्थापना (घटस्थापना) का अत्यंत शुभ और दुर्लभ मुहूर्त : The extremely auspicious and rare auspicious moment (Muhurat) for Kalash Sthapana (Ghatasthapana): किसी भी वैदिक व्रत का पूर्ण और अचूक फल इंसान को तभी मिलता है जब कलश स्थापना एकदम सही मुहूर्त में की जाए। Gupt Navratri 2026 में आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 03:12 (3:14) बजे से ही आरंभ हो जाएगी और इसका पूर्ण समापन अगले दिन 15 जुलाई को सुबह 11:50 (11:52) बजे होगा। हमारे धर्म में उदया तिथि की महान परंपरा को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए कलश स्थापना 15 जुलाई को ही की जाएगी। घटस्थापना का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त 15 जुलाई 2026 को सुबह 05:33 बजे से लेकर सुबह 10:09 बजे तक रहेगा। इसमें भी विशेष रूप से सुबह 08:02 बजे ‘हर्षण योग’ और ‘पुष्य नक्षत्र’ का एक अत्यंत ही दुर्लभ व चमत्कारी संयोग बन रहा है। हर्षण योग में Gupt Navratri 2026 की कलश स्थापना करने और अनुष्ठान शुरू करने से जीवन में भारी सुख, अपार आनंद और सभी रुकी हुई मनोकामनाओं की तुरंत पूर्ति होती है। Gupt Navratri 2026 का संपूर्ण 9-दिवसीय कैलेंडर : Complete 9-Day Calendar for Gupt Navratri 2026 भक्तों की सुविधा के लिए इस अत्यंत पावन Gupt Navratri 2026 का संपूर्ण और विस्तृत कैलेंडर कुछ इस प्रकार रहेगा: 15 जुलाई, बुधवार: पहला दिन – पवित्र घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा। 16 जुलाई, गुरुवार: दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी की शांत आराधना। 17 जुलाई, शुक्रवार: तीसरा व चौथा दिन (एक साथ) – मां चंद्रघंटा और मां कूष्माण्डा की पूजा। 18 जुलाई, शनिवार: पांचवां दिन – मां स्कंदमाता की पूजा। 19 जुलाई, रविवार: छठा दिन – मां कात्यायनी की पूजा। 20 जुलाई, सोमवार: सातवां दिन – मां कालरात्रि की प्रचंड पूजा। 21 जुलाई, मंगलवार: आठवां दिन (दुर्गा अष्टमी) – मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन। 22 जुलाई, बुधवार: नौवां दिन (महानवमी) – मां सिद्धिदात्री की आराधना और हवन। 23 जुलाई, गुरुवार: महाव्रत का विधिवत पारण। दस महाविद्याओं की तांत्रिक साधना और सिद्धपीठों का महत्व :The Tantric Sadhana of the Ten Mahavidyas and the Significance of Siddha Peethas प्राचीन काल में Gupt Navratri 2026 जैसे परम पावन और ऊर्जावान समय का ज्ञान केवल सिद्ध ऋषि-मुनियों और महान साधकों तक ही सीमित हुआ करता था। वे इस गुप्त काल में सांसारिक मोह माया से पूरी तरह दूर होकर दस महाविद्याओं की अत्यंत कठोर उपासना करते थे, ताकि उन्हें विशेष आध्यात्मिक और अलौकिक शक्तियां प्राप्त हो सकें। आज के आधुनिक समय में भी, इस पावन Gupt Navratri 2026 के दौरान देश के कई हिस्सों में विशेष अनुष्ठान होते हैं। उदाहरण के लिए, नर्मदा तट के कई प्राचीन मठों, भेड़ाघाट के प्रसिद्ध चौसठ योगिनी मंदिर, गौरीघाट, बाजनामठ और मदन महल स्थित शारदा देवी मंदिर जैसे प्रमुख सिद्धपीठों में बहुत ही विशेष तांत्रिक अनुष्ठान और गुप्त पूजा……

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Graha Stotra

Surya Graha Stotra : सूर्य ग्रह स्तोत्र….

Surya Graha Stotra सूर्य ग्रह स्तोत्र : सूर्य या सूर्य देव हिंदुओं द्वारा पूजे जाने वाले एक महत्वपूर्ण देवता हैं। हमारी संस्कृति में अक्सर प्रकृति की शक्तियों, जैसे हवा, पानी, धरती, आग आदि को ही देवता मानकर पूजा जाता है। इन्हीं देवताओं में से एक हैं सूर्य, जो हमारे सूर्य के अधिष्ठाता देवता हैं और जिन्हें ‘आदित्य’ (अदिति के पुत्र होने के कारण) भी कहा जाता है। Surya Graha Stotra पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने वाले के रूप में उनकी पूजा की जाती है। जिस तरह सूर्योदय दुनिया के अंधेरे को दूर करता है, उसी तरह सूर्य अज्ञानता के अंधेरे को भी मिटाते हैं और ज्ञान प्रदान करते हैं। सूर्य को समस्त ज्ञान का स्वरूप माना जाता है। वास्तव में, वे भगवान हनुमान के गुरु भी हैं। सूर्य स्तोत्र के पाठ से मिलने वाले कुछ लाभों में लंबी आयु, रोगों से मुक्ति, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, त्वचा रोगों का इलाज और दृष्टि में सुधार शामिल हैं। ऋषि अगस्त्य ने सूर्य स्तोत्र के माध्यम से श्री राम को सूर्य देव (जिन्हें सूर्य या आदित्य भी कहा जाता है) की पूर्ण महिमा और असीम शक्ति की याद दिलाई थी। वे सूर्य स्तोत्र में संपूर्ण ब्रह्मांड और प्रकृति के चक्रों का वर्णन करते हैं, साथ ही इस सृष्टि के परस्पर जुड़े घटकों को बनाए रखने में भगवान सूर्य की अभिन्न और महत्वपूर्ण भूमिका को भी बताते हैं। Surya Graha Stotra इस सूर्य स्तोत्र में पृथ्वी, सौर मंडल, जीवित प्राणियों (पौधों और जानवरों दोनों), पहाड़ों और प्रकृति की शक्तियों (जैसे आग, हवा, पानी, मिट्टी और आकाश) का जीवंत चित्रण श्री राम के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। ऋषि अगस्त्य का कहना है कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, पापों को दूर करने, चिंताओं को मिटाने और जीवन शक्ति व लंबी आयु के लिए शरीर को ऊर्जावान बनाने हेतु भगवान सूर्य की कृपा आवश्यक थी। सूर्य ग्रह स्तोत्र के लाभ: सफलता की प्राप्ति – सूर्य स्तोत्र Surya Graha Stotra का पाठ करने के बाद भगवान श्री राम ने रावण का वध किया और विजय प्राप्त की।सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि – जैसा कि भागवत में कहा गया है “तेजस्कामो विभावसुम्”, जो लोग अपने चारों ओर तेज या आभा (aura) चाहते हैं, उन्हें सूर्य स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।संतान सुख के लिए लाभकारी – भगवान सूर्य की कृपा से ही कुंती देवी को कर्ण और वानर राज को सुग्रीव के रूप में पुत्र की प्राप्ति हुई थी। खुशी और कल्याण देता है – स्कंद पुराण में कहा गया है “दिनेशं सुखार्थम्”, यानी खुशी और कल्याण के लिए सूर्य देव की प्रार्थना करनी चाहिए। अच्छी सेहत का आशीर्वाद देता है – जाम्बवती के पुत्र साम्ब ने भगवान सूर्य की पूजा करके अपने कोढ़ (leprosy) का इलाज किया था। मयूरभट्ट ने अपने शरीर को हीरे जैसा मजबूत बना लिया और बीमारियों से मुक्त हो गए।भगवान सूर्य को प्रसन्न करता है – सत्राजित ने सूर्य देव की पूजा करके स्यमंतक-मणि प्राप्त की थी। Surya Graha Stotra धर्मराज ने पूजा करके अक्षय पात्र प्राप्त किया था। किसे यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए: जो लोग व्यापार, जीवन और समाज में सफलता नहीं पा पा रहे हैं, उन्हें मुश्किलों से उबरने के लिए Surya Graha Stotra सूर्य स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। सूर्य ग्रह स्तोत्र हिंदी पाठ : Surya Graha Stotra in Hindi प्रात: स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यंरूपंहि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजूंषी ।सामानि यस्य किरणा: प्रभवादिहेतुंब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यचिन्त्यरूपम् ।। 1 ।। प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाऽमनोभिब्रह्मेन्द्रपूर्वकसुरैनतमर्चितं च ।वृष्टि प्रमोचन विनिग्रह हेतुभूतं त्रैलोक्यपालनपरंत्रिगुणात्मकं च ।। 2 ।। प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्तिंपापौघशत्रुभयरोगहरं परं चं ।तं सर्वलोककनाकात्मककालमूर्तिगोकण्ठबंधन विमोचनमादिदेवम् ।। 3 ।। ॐ चित्रं देवानामुदगादनीकंचक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्ने: ।आप्रा धावाप्रथिवी अन्तरिक्षंसूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्र्व ।। 4 ।। सूर्यो देवीमुषसं रोचमानांमत्योन योषामभ्येति पश्र्वात् ।यत्रा नरो देवयन्तो युगानिवितन्वते प्रति भद्राय भद्रम्……..

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