Panchakam Stotram

Sadhana Panchakam Stotram : साधना पंचकं स्तोत्रम….

Sadhana Panchakam Stotram साधना पंचकम स्तोत्रम: साधना पंचकम स्तोत्रम की रचना श्री आदि शंकराचार्य ने अपने 32 साल के छोटे से जीवन के आखिरी समय में की थी। उनके शिष्यों ने उनसे अनुरोध किया था कि वे आध्यात्मिक जीवन के प्रति अपने नज़रिए को संक्षेप में बताने वाली कोई रचना लिखें। अपने सारे अनुभवों का इस्तेमाल करते हुए, महान भाष्यकार ने यह कविता लिखी, जो इन चर्चाओं का आधार है। साधना पंचकम का नाम इसमें शामिल पाँच श्लोकों से पड़ा है, और हर श्लोक आध्यात्मिक साधनाओं के बारे में बताता है। हर श्लोक में 8 निर्देश हैं, यानी कुल मिलाकर 40 निर्देश हैं। छोटे होने के बावजूद, ये निर्देश आध्यात्मिक विकास के हर चरण में साधना के असली सार को उजागर करने वाली गहरी समझ के लिए अद्भुत हैं। इन निर्देशों को बहुत कीमती और अमूल्य माना जाता है, और इनमें साधना के अभ्यास के सिद्धांत शामिल हैं। Panchakam Stotram इसी वजह से इस रचना का एक और नाम ‘उपदेश पंचरत्नम’ भी है, जिसका अर्थ है “सलाह या शिक्षा के पाँच अनमोल रत्न”। इसके अलावा, ये निर्देश बेतरतीब ढंग से नहीं, बल्कि एक तार्किक क्रम में दिए गए हैं, उसी क्रम में जिनका पालन किया जाना है। ये रेल यात्रा के दौरान आने वाले स्टेशनों की तरह हैं, जहाँ हर स्टेशन हमें हमारी मंज़िल के और करीब ले जाता है। रचना के इस क्रमिक स्वरूप के कारण इसे तीसरा नाम ‘सोपान आरोहण न्याय’ मिला है। त्याग की शुरुआत हमारे कर्मों के फलों के त्याग से होती है। जब ऐसा होता है, तो हमारे जीवन का पूरा स्वरूप ही बदल जाता है। हम खोज के एक नए दायरे में प्रवेश करते हैं। यहीं से भगवद गीता शुरू होती है। Panchakam Stotram भगवान कृष्ण अर्जुन के अपनी समझ में इस स्तर तक पहुँचने का इंतज़ार कर रहे थे। जैसे ही अर्जुन ने त्याग के लक्षण दिखाए – जो भगवान कृष्ण के प्रति उनके समर्पण से ज़ाहिर हुए – भगवान ने उन्हें सत्य के एक योग्य साधक के रूप में स्वीकार कर लिया। अर्जुन कृष्ण के शिष्य बन गए, और सच्चे आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत हुई। त्याग – अपने कई पहलुओं के साथ – वह प्रवेश शुल्क है जो कोई व्यक्ति सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक जीवन शुरू करने के लिए चुकाता है ? Panchakam Stotram साधना पंचकम जीवन के ब्रह्मचर्य चरण में भी इसके कुछ अभ्यास को शामिल करके त्याग के महत्व को दर्शाता है। 12वें चरण में, यानी जीवन के वानप्रस्थ पड़ाव में, हम त्याग का एक बहुत ऊँचा रूप देखते हैं, जो हमें आध्यात्मिक रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद करता है। Panchakam Stotram : साधना पंचकम स्तोत्र के फ़ायदे: इच्छाओं से मुक्ति।अहंकार से मुक्ति।बेचैनी से मुक्ति।अज्ञानता से मुक्ति। Panchakam Stotram : स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए: जो व्यक्ति तनाव-मुक्त, परेशानी-मुक्त और चिंता-मुक्त जीवन जीना चाहता है, उसे साधना पंचकम स्तोत्र का पालन करना चाहिए और नियमित रूप से इसका पाठ करना चाहिए। साधना पंचकं स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Sadhana Panchakam Stotram in Hindi वेदो नित्यमधीयतां तदुदितं कर्म स्वनुष्ठीयतांतेनेशस्य विधीयतामपचितिः काम्ये मनस्त्यज्यताम् ।पापौघः परिभूयतां भवसुखे दोषोऽनुसन्धीयता-मात्मेच्छा व्यवसीयतां निजगृहात्तूर्णं विनिर्गम्यताम् ॥ १ ॥ सङ्गः सत्सु विधीयतां भगवतो भक्तिर्दृढाऽऽधीयतांशान्त्यादिः परिचीयतां दृढतरं कर्माशु सन्त्यज्यताम् ।सद्विद्वानुपसर्प्यतां प्रतिदिनं तत्पादुका सेव्यतांब्रह्मैवाक्षरमर्थ्यतां श्रुतिशिरोवाक्यं समाकर्ण्यताम् ॥ २ ॥ वाक्यार्थश्च विचार्यतां श्रुतिशिरःपक्षः समाश्रीयतांदुस्तर्कात्सुविरम्यतां श्रुतिमतस्तर्कोऽनुसन्धीयताम् ।ब्रह्मैवस्मि विभाव्यतामहरहो गर्वः परित्यज्यतांदेहोऽहम्मतिरुज्झ्यतां बुधजनैर्वादः परित्यज्यताम् ॥ ३ ॥ क्षुद्व्याधिश्च चिकित्स्यतां प्रतिदिनं भिक्षौषधं भुज्यतांस्वाद्वन्नं न च याच्यतां विधिवशात्प्राप्तेन सन्तुष्यताम् ।शीतोष्णादि विषह्यतां न तु वृथा वाक्यं समुच्चार्यता-मौदासीन्यमभीप्स्यतां जनकृपानैष्ठुर्यमुत्सृज्यताम् ॥ ४ ॥ एकान्ते सुखमास्यतां परतरे चेतः समाधीयतांपूर्णात्मा सुसमीक्ष्यतां जगदिदं तद्बाधितं दृश्यताम् ।प्राक्कर्म प्रविलाप्यतां चितिबलान्नाप्युत्तरैश्श्लिष्यतांप्रारब्धं त्विह भुज्यतामथ परब्रह्मात्मना स्थीयताम् ॥ ५ ॥ यः श्लोकपञ्चकमिदं पठते मनुष्यःसञ्चिन्तयत्यनुदिनं स्थिरतामुपेत्य ।तस्याशु संसृतिदवानलतीव्रघोरतापः प्रशान्तिमुपयाति चितिप्रभावात् ॥ ॥ इति साधना पंचकं………

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Yogini Ekadashi

Yogini Ekadashi Vrat Niyam And Puja Vidhi : योगिनी एकादशी पापों से मुक्ति और असीम पुण्य का महामार्ग…..

Yogini Ekadashi Vrat Niyam And Puja Vidhi : सनातन धर्म और हमारी अत्यंत प्राचीन भारतीय वैदिक संस्कृति में भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित व्रतों का अत्यधिक और गहरा आध्यात्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार मनाए जाने वाले सभी उपवासों में एकादशी के व्रत को सर्वोपरि और सबसे श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार एक वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं, और इन सभी में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। Yogini Ekadashi यह अत्यंत पवित्र और जाग्रत उपवास है जो इंसान के शरीर और मन को गहरा संयम सिखाता है। पद्मपुराण और विष्णु पुराण में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जो भी व्यक्ति पूरी निष्ठा से इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन के सभी ज्ञात और अज्ञात पाप जड़ से नष्ट हो जाते हैं। इस साल 2026 में इस पवित्र व्रत को लेकर भक्तों के बीच बहुत उत्साह है। लेकिन किसी भी व्रत का अचूक और शत-प्रतिशत फल इंसान को तभी प्राप्त होता है जब वह पूरी श्रद्धा के साथ Yogini Ekadashi Vrat Niyam का पालन करे। आज हम आपको इस व्रत के अत्यंत कठोर नियमों, शुभ मुहूर्तों और पारण की सही विधि के बारे में विस्तार से बताएंगे। योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi 2026 Date & Time) अक्सर हिंदू त्योहारों में अलग-अलग पंचांगों के भेदों के कारण तिथियों को लेकर संशय बन जाता है। साल 2026 में योगिनी एकादशी की तिथि को लेकर भी कुछ ऐसी ही दुविधा दिखाई दे रही है कि यह 10 जुलाई को है या 11 जुलाई को। पंचांग की एकदम सटीक गणना के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 9 जुलाई 2026 की शाम 7 बजकर 46 मिनट से शुरू हो जाएगी (जिसका सूर्योदय काल 10 जुलाई को सुबह 8 बजकर 10 मिनट से शुरू होगा) और इसका पूर्ण समापन 10 जुलाई की शाम 4 बजकर 52 मिनट पर (जिसका अगला सूर्योदय 11 जुलाई की सुबह 5:23 बजे होगा) होगा। हमारे वैदिक धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को मुख्य माना जाता है। इसलिए 10 जुलाई, शुक्रवार को ही गृहस्थ लोग यह व्रत रखेंगे। सही तिथि के चुनाव के साथ-साथ एकदम सही Yogini Ekadashi Vrat Niyam को समझना भी बहुत जरूरी है ताकि भगवान नारायण की पूर्ण कृपा आप पर बरस सके। दशमी तिथि से शुरू होने वाले सात्विक नियम (Dashami Rules) बहुत से नए व्रती यह गलती करते हैं कि वे उपवास के नियम केवल एकादशी के दिन से ही मानते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, इस पवित्र व्रत की शुरुआत एक दिन पहले यानी दशमी की रात से ही हो जाती है, जो Yogini Ekadashi Vrat Niyam का पहला और सबसे अहम चरण है। दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भारी भोजन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। दशमी के दिन केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। Yogini Ekadashi इस दिन रात के समय मूंग की दाल, मसूर, गेहूं, जौ और बैंगन का सेवन पूरी तरह से वर्जित बताया गया है। साथ ही, व्रती को जमीन पर साफ बिस्तर लगाकर सोना चाहिए और किसी भी प्रकार के कामुक या तामसिक विचारों से खुद को दूर रखना चाहिए। एकादशी की सुबह और संकल्प के नियम (Morning Rituals) व्रत के पावन दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में (सूर्योदय से पहले) जल्दी उठना सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह बिस्तर छोड़ने के बाद सबसे पहले धरती माता को प्रणाम करें और फिर शुद्ध जल से स्नान करें। सुबह के समय Yogini Ekadashi Vrat Niyam के अनुसार स्नान करने के बाद साफ, स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र धारण करने चाहिए (पीले रंग के वस्त्र सबसे शुभ माने जाते हैं)। इसके बाद घर के स्वच्छ पूजा स्थल के सामने खड़े होकर, दाहिने हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत और पीले पुष्प लेकर भगवान श्री हरि विष्णु का ध्यान करते हुए अपने पूरे 24 घंटे के उपवास का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। भगवान विष्णु की भव्य और अचूक पूजा विधि (Puja Vidhi) भगवान श्री विष्णु की पूजा करते समय आपको Yogini Ekadashi Vrat Niyam का अत्यंत कड़ाई से पालन करना चाहिए। घर के ईशान कोण में एक साफ लकड़ी की चौकी पर नया पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की सुंदर प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके पास ही एक तांबे का कलश स्थापित करें। भगवान को अत्यंत आदरपूर्वक पीले फूल, ताजे फल, कुमकुम, अक्षत, सुगंधित चंदन और नैवेद्य व पंचामृत अर्पित करें। भगवान विष्णु का कोई भी भोग तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) के बिना अधूरा माना जाता है। Yogini Ekadashi लेकिन यहां एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम है कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए; इसलिए पूजा के लिए एक दिन पहले (दशमी को) ही तुलसी के पत्ते तोड़कर सुरक्षित रख लें। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और दिन भर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” महामंत्र का जाप करें। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम या श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। आहार और भोजन से जुड़े अत्यंत कड़े नियम (Dietary Restrictions) आहार और भोजन को लेकर Yogini Ekadashi Vrat Niyam बहुत ही स्पष्ट और अत्यंत सात्विक हैं। इस दिन किसी भी परिस्थिति में चावल का सेवन नहीं करना चाहिए; यहाँ तक कि शास्त्रों में यह नियम व्रत न करने वाले परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पूरी तरह से लागू होता है। एकादशी के पूरे दिन किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है। Yogini Ekadashi आप अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार इस व्रत को निर्जला (बिना अन्न-जल के), केवल जल ग्रहण करके, या फिर फलाहार (ताजे फल, दूध और मेवे खाकर) रख सकते हैं। व्रत के दिन तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, और मांस-मदिरा से पूरी तरह से दूर रहना चाहिए। मानसिक संयम और आध्यात्मिक आचरण के नियम (Behavioral Rules) केवल भूखे-प्यासे रहना ही काफी नहीं है, बल्कि विचारों और आचरण के भी कुछ विशेष Yogini Ekadashi Vrat Niyam होते हैं, जिनका पालन करना हर सच्चे भक्त के लिए अनिवार्य है। व्रत के पूरे समय के दौरान इंसान को पूर्ण सात्विकता का कड़ाई से पालन करना चाहिए। इस दिन किसी पर भी क्रोध करना,

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deer

Dreaming of a deer : सपने में हिरन देखना सौंदर्य, स्वतंत्रता और जीवन के मिल सकते है यह संकेत….

Dreaming of a deer : सपनों की जादुई, रहस्यमयी और असीम दुनिया हमेशा से ही मानव जाति के लिए एक बहुत बड़ा कौतूहल और शोध का विषय रही है। जब हम रात के अंधेरे में एक गहरी नींद के आगोश में होते हैं, तो हमारा अवचेतन मन (Subconscious mind) उन सभी यादों, इच्छाओं और भविष्य के अनदेखे पन्नों को पलटने लगता है, जिन्हें हम अपने जाग्रत अवस्था में आसानी से महसूस नहीं कर पाते। प्राचीन स्वप्न शास्त्र, ज्योतिष और आधुनिक मनोविज्ञान के अनुसार, हम अपनी नींद में जो भी दृश्य देखते हैं, उनका हमारे वास्तविक जीवन की परिस्थितियों और आने वाले कल से एक बहुत ही गहरा और सीधा अलौकिक संबंध होता है। इन्हीं अत्यंत अद्भुत, सुंदर और अर्थपूर्ण सपनों में से एक है Dreaming of a deer का अनुभव करना। प्राचीन भारतीय ग्रंथों और स्वप्न विज्ञान में हिरन ( Hiran ) को अत्यंत चंचल, सौम्य, सुंदर और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर जानवर माना गया है। अगर आपको रात की शांत नींद में Dreaming of a deer का दृश्य दिखाई देता है, तो इसे यूं ही एक आम सपना समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके पीछे ब्रह्मांड के बहुत गहरे और महत्वपूर्ण अर्थ छिपे होते हैं। आज हम हिरन के सपने के विभिन्न रूपों, उनके मनोवैज्ञानिक रहस्यों और ज्योतिषीय प्रभावों के बारे में बहुत ही गहराई से चर्चा करेंगे। ज्योतिष और मनोविज्ञान के अनुसार हिरन के सपने का गहरा महत्व : According to astrology and scriptures, dreaming of a deer holds great significance… यदि हम ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विचार करें, तो Dreaming of a deer का सीधा संबंध नवग्रहों में चंद्रमा (Moon) और शुक्र (Venus) ग्रह से माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, तीव्र आकर्षण, सौंदर्य और भावनात्मक संतुलन का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है, जबकि चंद्रमा इंसान के मन की शांति और चंचलता का प्रतिनिधित्व करता है। मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि Dreaming of a deer आपकी आंतरिक कोमलता, मासूमियत, प्राकृतिक संवेदनशीलता और जीवन में आज़ादी (स्वतंत्रता) की चाह को दर्शाता है। यह सपना इस बात का मजबूत प्रमाण है कि आप अपने वर्तमान जीवन की उथल-पुथल से दूर एक ठहराव, संतुलन और मानसिक शांति की तलाश कर रहे हैं। इस जानवर की फुर्ती और इसकी बड़ी-बड़ी खूबसूरत आंखें इंसान के मन की सजगता को भी दर्शाती हैं। विभिन्न अवस्थाओं में हिरन को देखने के सटीक और अचूक अर्थ : The precise and unerring meanings of seeing a deer in various states. सपनों की दुनिया के अपने कुछ खास नियम होते हैं। किसी भी सपने का एकदम सटीक और स्पष्ट अर्थ इस बात पर बहुत अधिक निर्भर करता है कि आपने उस जीव को किस विशेष अवस्था, रंग या रूप में देखा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जीवन की अलग-अलग स्थितियों में Dreaming of a deer का क्या अर्थ होता है: 1. हिरन का पीछा करना या उसे तेजी से भागते हुए देखना: Chasing a deer or watching it run at high speed अगर आप सपने में खुद को किसी हिरन के पीछे पागलों की तरह भागते हुए या उसका निरंतर पीछा करते हुए देखते हैं, तो यह असल जिंदगी में आपके कड़े संघर्ष का एक सीधा इशारा है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह के Dreaming of a deer का मतलब है कि आप अपनी वास्तविक जिंदगी में किसी बहुत बड़े लक्ष्य, कामयाबी या इच्छा को पाने के लिए दौड़ रहे हैं, लेकिन आपकी मंजिल अभी आपसे काफी दूर है। आपको अपना वह मुकाम हासिल करने के लिए पहले से कहीं अधिक धैर्य, फोकस और अत्यंत कठिन परिश्रम (Hard work) की आवश्यकता होगी। 2. हिरन का प्यारा सा बच्चा (Fawn) देखना: Seeing a cute baby deer (fawn) Sapne mein Hiran dekhna : सपनों की रहस्यमयी दुनिया में हिरन के एक छोटे, मासूम और प्यारे से बच्चे को देखना अत्यंत ही शुभ, दुर्लभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ माना गया है। यह अत्यंत सुंदर दृश्य यह दर्शाता है कि आपके जीवन में किसी नए विचार, रचनात्मकता (Creativity) और कई नई असीम संभावनाओं का जन्म होने वाला है। यदि आप किसी नए व्यापार, पढ़ाई या किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो यह Dreaming of a deer आपको एक नई दिशा, नया आइडिया और बेहतरीन ईश्वरीय मार्गदर्शन मिलने का स्पष्ट संकेत देता है। 3. हिरन का विशाल झुंड (Herd of Deer) देखना:Seeing a huge herd of deer: एक साथ बहुत सारे हिरनों को किसी जंगल या मैदान में देखना इंसान के लिए अपार खुशियों का प्रतीक है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हिरनों का बड़ा झुंड देखने का मतलब है कि आप जल्द ही जिस भी नए कार्य की शुरुआत करेंगे, उसमें आपको भारी और शानदार सफलता मिलेगी। यह सपना सीधे तौर पर आपकी आर्थिक वृद्धि, व्यापार में जबरदस्त तरक्की और आपके पूरे परिवार में अगाध खुशियों व सुख-समृद्धि के स्थायी आगमन का एक बहुत ही मंगलकारी संकेत है। 4. सफ़ेद हिरन (White Deer) या बर्फीले पहाड़ों पर हिरन देखना:Seeing a white deer or a deer on snowy mountains सफ़ेद रंग हमेशा से ही मानसिक शांति, दिव्यता और पवित्रता का परम प्रतीक रहा है। किसी सफ़ेद रंग के जीव के साथ Dreaming of a deer का अनुभव करना आध्यात्मिक उन्नति, हृदय की शुद्धता और किसी बहुत ही दुर्लभ व बड़े ईश्वरीय आशीर्वाद के प्राप्त होने का पूर्व संकेत है। वहीं दूसरी ओर, अगर आप अपनी नींद में हिरन को ऊंचे और बर्फीले पहाड़ों पर विचरण करते हुए देखते हैं, तो यह साफ़ दर्शाता है कि आपकी जिंदगी की सारी मानसिक चिंताएं अब हमेशा के लिए दूर होने वाली हैं। आपके जीवन में अपार शीतलता, मानसिक शांति और भारी आर्थिक समृद्धि का वास होने वाला है। 5. हिरन को पकड़ना या उसे अपने पीछे आते देखना: Catching a deer or seeing it follow you: अगर आप सपने में खुद को हिरन पकड़ते हुए देखते हैं, तो यह आपके उच्च आत्मविश्वास और मजबूत आत्मबल का प्रतीक है। इस विशिष्ट प्रकार के Dreaming of a deer का अर्थ है कि आप अपनी खुद की सूझ-बूझ, मेहनत और बलबूते पर अपनी मंजिल को सफलतापूर्वक हासिल कर लेंगे और आपको किसी की बाहरी मदद की कोई खास आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके

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Lakshmi Stotram

Sarvadeva Krutha Lakshmi Stotram : सर्वदेव कृत लक्ष्मी स्तोत्र….

सर्वदेव कृत लक्ष्मी स्तोत्र हिंदी पाठ : Sarvadeva Krutha Lakshmi Stotram in Hindi क्षमस्व भगवत्यंब क्षमा शीले परात्परे ।शुद्ध सत्व स्वरूपेच कोपादि परि वर्जिते ॥ उपमे सर्व साध्वीनां देवीनां देव पूजिते ।त्वया विना जगत्सर्वं मृत तुल्यंच निष्फलम् । सर्व संपत्स्वरूपात्वं सर्वेषां सर्व रूपिणी ।रासेश्वर्यधि देवीत्वं त्वत्कलाः सर्वयोषितः ॥ कैलासे पार्वती त्वंच क्षीरोधे सिंधु कन्यका ।स्वर्गेच स्वर्ग लक्ष्मी स्त्वं मर्त्य लक्ष्मीश्च भूतले ॥ वैकुंठेच महालक्ष्मीः देवदेवी सरस्वती ।गंगाच तुलसीत्वंच सावित्री ब्रह्म लोकतः ॥ कृष्ण प्राणाधि देवीत्वं गोलोके राधिका स्वयम् ।रासे रासेश्वरी त्वंच बृंदा बृंदावने वने ॥ कृष्ण प्रिया त्वं भांडीरे Lakshmi Stotram चंद्रा चंदन कानने ।विरजा चंपक वने शत शृंगेच सुंदरी । पद्मावती पद्म वने मालती मालती वने ।कुंद दंती कुंदवने सुशीला केतकी वने ॥ कदंब माला त्वं देवी कदंब काननेऽपिच ।राजलक्ष्मीः राज गेहे गृहलक्ष्मी र्गृहे गृहे ॥ इत्युक्त्वा देवतास्सर्वाः मुनयो मनवस्तथा ।रूरूदुर्न म्रवदनाः शुष्क कंठोष्ठ तालुकाः ॥ इति लक्ष्मी स्तवं पुण्यं सर्वदेवैः कृतं शुभम्।यः पठेत्प्रातरुत्थाय सवैसर्वं लभेद्ध्रुवम्॥ अभार्यो लभते भार्यां विनीतां सुसुतां सतीम् ।सुशीलां सुंदरीं रम्यामति सुप्रियवादिनीम् ॥ पुत्र पौत्र वतीं शुद्धां कुलजां Lakshmi Stotram कोमलां वराम् ।अपुत्रो लभते पुत्रं वैष्णवं चिरजीविनम् ॥ परमैश्वर्य युक्तंच विद्यावंतं यशस्विनम् ।भ्रष्टराज्यो लभेद्राज्यं भ्रष्ट श्रीर्लभेते श्रियम् ॥ हत बंधुर्लभेद्बंधुं धन भ्रष्टो धनं लभेत् ॥कीर्ति हीनो लभेत्कीर्तिं प्रतिष्ठांच लभेद्ध्रुवम् ॥ सर्व मंगलदं स्तोत्रं शोक संताप नाशनम् ।हर्षानंदकरं शाश्वद्धर्म मोक्ष सुहृत्पदम् ॥ ॥ इति सर्वदेव कृत लक्ष्मी……

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Kawad Yatra

Sapne Mein Kawad Yatra Dekhna : अटूट शिव भक्ति और सपने में कांवड़ यात्रा देखने का असली रहस्य….

Sapne Mein Kawad Yatra Dekhna : सनातन धर्म और हमारी वैदिक संस्कृति में भगवान शिव और सावन के पावन महीने का एक बेहद ही अनूठा, रहस्यमयी और जाग्रत स्थान माना गया है। शिवभक्तों के लिए कांवड़ यात्रा केवल एक साधारण धार्मिक कर्मकांड या पुरानी परंपरा नहीं है, बल्कि यह उनकी आत्मा को सीधे परमात्मा (साक्षात भोलेनाथ) से जोड़ने का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माध्यम है। हर साल सावन और फाल्गुन के पवित्र महीने में लाखों-करोड़ों की संख्या में शिवभक्त नंगे पांव चलकर गोमुख, गंगोत्री, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे पावन स्थलों से शुद्ध गंगाजल लाते हैं। आगामी Kawad Yatra 2026 की तैयारियां भी अभी से शिवभक्तों के मन में एक अलग ही स्तर का असीम उत्साह और ऊर्जा जगा रही हैं। इस महायात्रा में हमें अक्सर कुछ ऐसी असाधारण और प्रेरणादायक कहानियाँ देखने को मिलती हैं, जो इंसान की सोच को पूरी तरह से बदल देती हैं और उसे अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं। आज हम आपको दिल्ली की एक ऐसी दृष्टिबाधित (नेत्रहीन) महिला शिवभक्त की अद्भुत और दर्दभरी दास्तां सुनाएंगे, जिसे गहराई से पढ़कर Kawad Yatra 2026 के लिए आपकी श्रद्धा कई हजार गुना बढ़ जाएगी। इसके साथ ही हम मनोविज्ञान और प्राचीन स्वप्न शास्त्र के नजरिए से यह भी जानेंगे कि आखिर सपने में कांवड़ यात्रा देखने का असली और अचूक मतलब क्या होता है। Sapne Mein Kawad Yatra Dekhna : अटूट शिव भक्ति ….. महादेव आए सपने में: दृष्टिहीन सपना की दर्दभरी और प्रेरणादायक कहानी आगामी Kawad Yatra 2026 में जाने वाले हर शिवभक्त को दिल्ली के कालकाजी (गोविंदपुरी) इलाके में रहने वाली 33 वर्षीय सपना की यह अद्भुत कहानी जरूर जाननी और समझनी चाहिए। सपना कोई आम या साधारण महिला नहीं हैं; बल्कि जीवन के बहुत बड़े संघर्षों से गुजर रही हैं क्योंकि उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह से जा चुकी है। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि बचपन से ही वे अपनी एक आंख से बिल्कुल नहीं देख पाती थीं, और किस्मत ने उनके साथ ऐसा क्रूर मजाक किया कि लगभग 10 साल पहले उनकी दूसरी सही आंख की रोशनी भी हमेशा के लिए चली गई। उनके जीवन में चारो तरफ सिर्फ एक घना और डरावना अंधेरा छा गया था, लेकिन उनके मन में देवों के देव भगवान भोलेनाथ के प्रति एक ऐसी अटूट और जाग्रत आस्था जगी, जिसने उन्हें जिंदगी की इतनी बड़ी चुनौती के सामने कभी हार नहीं मानने दी। सपना भावुक होकर बताती हैं कि एक रात साक्षात महादेव उनके सपनों की दुनिया में आए थे और उन्हें एक अलौकिक दर्शन दिए थे। उसी अत्यंत जाग्रत और रहस्यमयी सपने को देखने के ठीक बाद उन्होंने यह अटल प्रण लिया था कि वह सावन के महीने में बहुत ही दुर्गम पहाड़ियों वाले गंगोत्री धाम से अपनी कठिन कांवड़ यात्रा शुरू करेंगी और हरिद्वार होते हुए पवित्र जल लेकर पैदल दिल्ली लौटेंगी, जहाँ वे महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगी। अगर आप भी Kawad Yatra 2026 में शामिल होने का विचार कर रहे हैं, तो सपना का यह अटूट संकल्प और उनका यह भयंकर संघर्ष आपके लिए एक बहुत बड़ा मोटिवेशन (Motivation) साबित हो सकता है। पिता बने सबसे बड़ा सहारा और ‘मन की आंखों’ से देखी दुनिया : Father became the greatest support, and the world was seen through the ‘eyes of the mind’. कांवड़ियों के इस विशाल और केसरिया रेले में जब देश भर के लोगों ने इस पूरी तरह से दृष्टिबाधित सपना का गजब का उत्साह और महादेव के प्रति उनकी यह सच्ची भक्ति देखी, तो हर कोई पूरी तरह से हैरान और नतमस्तक रह गया। Kawad Yatra इस सैकड़ों किलोमीटर लंबी और अत्यंत कठिन यात्रा में उनके पिता रविंद्र गुप्ता जी उनका सबसे बड़ा और मजबूत सहारा बनकर उनके साथ-साथ पैदल चले। रविंद्र जी बहुत ही गर्व और भावुकता के साथ बताते हैं कि वे अपनी बेटी सपना की इस गहरी धार्मिक जिद और उसके आत्मबल के आगे पूरी तरह से हार गए थे। पूरा परिवार सपना की इस असीम हिम्मत पर बहुत अधिक गर्व महसूस करता है। सपना एक शादीशुदा महिला हैं और उनके दो बहुत ही प्यारे बच्चे भी हैं। जब रास्ते में उनसे पूछा गया कि बिना आंखों की रोशनी के वे इतनी लंबी और भयंकर दर्दभरी कठिन यात्रा कैसे कर पा रही हैं, तो उनका जवाब किसी भी आम इंसान का दिल पिघला सकता है। Kawad Yatra सपना का बहुत ही शांति से यह कहना है कि भगवान की बनाई यह दुनिया बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है; पहले वे इसे सिर्फ अपनी एक आंख से ही देख पाती थीं, लेकिन अब दृष्टि जाने के बाद वे अपनी “मन की आंखों” (inner spiritual vision) से इस पूरी दुनिया की असली खूबसूरती को बहुत ही गहराई से महसूस करती हैं। Kawad Yatra उनका यह फौलादी हौसला हम सभी को यह अहम पाठ पढ़ाता है कि Kawad Yatra 2026 जैसी महान और कठोर धार्मिक यात्राओं के लिए केवल आपके शारीरिक बल की नहीं, बल्कि आपके आंतरिक आत्मिक बल, शुद्ध मन और अत्यंत मजबूत इच्छाशक्ति की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। स्वप्न शास्त्र: सपने में कांवड़ यात्रा देखने का असली और अचूक अर्थ क्या है : Dream Interpretation: What is the true and unerring meaning of seeing a Kanwar Yatra in a dream ? जिस प्रकार सपना के सपने में खुद भोलेनाथ आए थे और उन्हें जल लाने की प्रेरणा दी थी, उसी प्रकार कई बार हम जैसे आम लोगों को भी गहरी नींद में पूरी की पूरी कांवड़ यात्रा के दर्शन होते हैं। जो लोग बेसब्री से Kawad Yatra 2026 की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उनके मन और अवचेतन मस्तिष्क में अक्सर ऐसे दिव्य सपने आते रहते हैं।Kawad Yatra स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) और मनोविज्ञान के बहुत ही गहरे विश्लेषण के अनुसार, यदि आपको कभी भी अपने सपने में कांवड़ यात्रा दिखाई देती है, तो आप वास्तव में ब्रह्मांड के बहुत ही भाग्यशाली और चुनिंदा इंसानों में से एक हैं। सपनों के बड़े जानकारों और ज्योतिषियों का यह स्पष्ट मानना है कि सपने में कांवड़ यात्रा देखने का सीधा सा आध्यात्मिक अर्थ यह है कि साक्षात भगवान शिव जी आपसे बहुत अधिक प्रसन्न हैं और आपको उनका विशेष, जाग्रत आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है।

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Dead Father

Sapne Me Mare Hue Pita (Dead Father) Ko Dekhna : सपने में स्वर्गवासी पिता को देखने का क्या मतलब होता है ? जानें इसके पीछे के 5 रहस्यमयी संकेत….

Dream of Dead Father Meaning : सपनों की दुनिया बहुत ही रहस्यमयी और अजीबोगरीब होती है। हम जब रात के अंधेरे में गहरी नींद में होते हैं, तो हमारा अचेतन मन (Subconscious mind) उन यादों, दबी हुई भावनाओं और अनदेखे भविष्य के पन्नों को पलटने लगता है, जिन्हें हम अपनी जाग्रत अवस्था में महसूस नहीं कर पाते। Dead Father स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हमारे द्वारा देखा गया हर एक सपना हमारे जीवन के किसी न किसी हिस्से या भविष्य में होने वाली किसी बड़ी घटना से सीधे तौर पर जुड़ा होता है। जब बात हमारे उन सबसे करीब और प्रियजनों की आती है जो अब इस दुनिया में हमारे साथ नहीं हैं, तो ऐसे सपने इंसान को अंदर तक बहुत भावुक कर देते हैं। अक्सर जब हमें Dream of Dead Father आता है, तो हम अचानक नींद से उठ जाते हैं और हमारे मन में सैकड़ों उलझे हुए सवाल घूमने लगते हैं। इंसान सोचने लगता है कि क्या वे उस दुनिया में ठीक हैं ? क्या वे मुझसे कुछ जरूरी बात कहना चाहते हैं ? या यह किसी आने वाली परेशानी का कोई पूर्व संकेत है ? Sapne Me Mare Hue Pita (Dead Father) Ko Dekhna : सपने में स्वर्गवासी पिता को देखने का क्या मतलब होता है….. पिता का साया एक इंसान के लिए किसी घने और विशाल पेड़ की ठंडी छांव जैसा होता है, जो हर धूप और तूफान से हमें बचाता है। उनके इस दुनिया से चले जाने के बाद भी हमारा उनसे गहरा मोह और आत्मिक जुड़ाव इतनी आसानी से खत्म नहीं होता। स्वप्न ग्रंथ और स्वप्न शास्त्र में बहुत ही स्पष्ट रूप से यह बात बताई गई है कि ऐसे सपने बेवजह या यूं ही नहीं आते, बल्कि इनके पीछे बहुत गहरे अर्थ छिपे होते हैं। 1. पिता की कोई अधूरी इच्छा (Unfulfilled Desires का संकेत)….. पिता के स्वर्गवास के बाद कई बार इंसान उन्हें बार-बार अपने सपनों की दुनिया में देखता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आपको लगातार Dream of Dead Father आ रहा है, तो इसका एक बहुत ही गहरा और आध्यात्मिक अर्थ हो सकता है। यह इस बात का एक बहुत ही मजबूत संकेत है कि आपके स्वर्गवासी पिता की शायद कोई ऐसी खास इच्छा रह गई है जो उनके जीते जी पूरी नहीं हो सकी। उनका बार-बार आपके सपने में आना दरअसल एक अलौकिक संदेश है कि वे अपनी उस अधूरी इच्छा को आपके जरिए (एक संतान के रूप में) पूरा करवाना चाहते हैं। Dead Father इस स्थिति में आपको बहुत ही शांत मन से बैठना चाहिए और यह विचार करना चाहिए कि आपके पिता अपने जीवन में क्या ऐसा करना चाहते थे जो अधूरा रह गया। फिर एक जिम्मेदार संतान के रूप में आपको उनके उस काम या इच्छा को पूर्ण करने का हर संभव और सच्चा प्रयास करना चाहिए। 2. सपने में पिता को रोते हुए या उदास देखना : Seeing one’s father crying or sad in a dream. यह एक बहुत ही भावुक कर देने वाला और दिल दहला देने वाला सपना होता है, जब आप Dream of Dead Father की स्थिति में उन्हें फूट-फूट कर रोते हुए या बहुत ही उदास अवस्था में देखते हैं। स्वप्न शास्त्र इस तरह के सपने को बहुत गंभीरता से लेता है। अगर आपके सपने में मृत पिता रोते हुए दिखाई देते हैं, तो इसका सीधा सा अर्थ यह है कि वे किसी बात को लेकर आपसे या परिवार से बहुत दुखी हैं। यह सपना एक ईश्वरीय चेतावनी भी हो सकता है कि आपके या आपके पूरे परिवार के साथ निकट भविष्य में कुछ बहुत बुरा या अप्रिय हो सकता है। Dead Father ऐसे डरावने सपने आने पर सभी बड़े विद्वान और ज्योतिषी यह सलाह देते हैं कि पिता की आत्मा की असीम शांति और उनकी पूरी संतुष्टि के लिए आपको विधि-विधान से उनका श्राद्ध, तर्पण या किसी योग्य ब्राह्मण को धार्मिक दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। 3. सपने में पिता को मुस्कुराते और खुश देखना : Seeing one’s father smiling and happy in a dream. इसके बिल्कुल विपरीत, यदि आपको Dream of Dead Father मुस्कुराते हुए, आशीर्वाद देते हुए या बहुत ही प्रसन्न अवस्था में दिखाई देता है, तो आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है; बल्कि यह खुशियां मनाने का समय है। स्वप्न शास्त्र में इसे एक बेहद ही सकारात्मक, शुभ और मंगलकारी सपना माना जाता है। इसका मतलब है कि आपके जीवन में बहुत ही जल्द ढेर सारी खुशियां और मनचाही सफलता दस्तक देने वाली है। यह सपना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आपका भविष्य एकदम उज्ज्वल है और आप प्रगति की ओर तेजी से अग्रसर हैं। साथ ही, यह सपना यह भी दर्शाता है Dead Father कि आपके परिवार में आपसी प्रेम, आदर और सम्मान लगातार बढ़ेगा और आप अपने जीवन में जो भी नेक काम या तरक्की कर रहे हैं, उससे आपके स्वर्गवासी माता-पिता बेहद प्रसन्न और पूरी तरह से संतुष्ट हैं। 4. सपने में स्वर्गवासी पिता से शांति से बात करना : Calmly conversing with one’s deceased father in a dream. कई बार लोग सुबह उठकर बताते हैं कि उन्होंने Dream of Dead Father के दौरान उनसे बहुत ही लंबी और सुकून भरी बातचीत की है। इस तरह का सपना भी एक बहुत ही शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ संकेत माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, ऐसा सपना यह बताता है कि वे स्वर्ग से आपको जीवन की किसी बड़ी उलझन में कोई सही सलाह, रास्ता या मार्गदर्शन देना चाहते हैं। इसका सीधा सा अर्थ है कि आपका जीवन बिल्कुल सही दिशा में है और आप प्रगति की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अक्सर ऐसे जाग्रत सपने इस बात का भी पूर्व संकेत होते हैं कि जल्द ही आपके परिवार में कोई बहुत बड़ा उत्सव, मांगलिक कार्य या शादी-विवाह जैसा शुभ आयोजन होने वाला है, जिसमें आपको अपने पूरे परिवार का भरपूर सहयोग और बिना शर्त प्यार मिलेगा। 5. सपने में पिता को खोजना और व्याकुल महसूस करना : Searching for one’s father in a dream and feeling distressed. अगर आप Dream of Dead Father में खुद को उन्हें किसी अनजान जगह

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Sawan 2026

Sawan 2026 Start Date : सावन शिव भक्तों के लिए असीम कृपा का महापर्व की सही तिथि, 4 सोमवार व्रत, मंगला गौरी और अचूक पूजा विधि….

Sawan 2026 Mein Kab Se Suru Ho Raha Hai : सनातन धर्म और हमारी अत्यंत प्राचीन भारतीय संस्कृति में भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा, पवित्र और अद्भुत उत्सव श्रावण मास यानी सावन का महीना होता है। जब झुलसा देने वाली भयंकर गर्मी के बाद मानसून अपनी चरम सीमा पर पहुँचता है और प्रकृति चारों ओर से हरियाली की एक सुंदर व ताजी चादर ओढ़ लेती है, तब हिंदू वैदिक पंचांग का यह पांचवां और सबसे अधिक पुण्यकारी महीना शुरू होता है। इस पावन महीने में चारों दिशाओं के शिवालयों में केवल ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे ही गूंजते हैं। जो भी सच्चे शिव भक्त पूरे वर्ष भर इस अलौकिक समय का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, उनके लिए Sawan 2026 का यह पावन अवसर एक नई जाग्रत आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक सुख-शांति और भगवान भोलेनाथ का असीम आशीर्वाद लेकर आ रहा है। Sawan 2026 यह महीना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि इंसान की आत्मिक शुद्धि और कर्मों के सुधार के लिए भी अत्यंत फलदायी और चमत्कारी माना जाता है। तिथियां और पंचांग की एकदम सटीक गणना (कब से शुरू होगा सावन 2026 ) : Precise calculation of dates and the almanac (when Sawan 2026 begins)….. हिंदू धर्म में किसी भी बड़े व्रत, अनुष्ठान या त्योहार की शुरुआत हमेशा पंचांग की एकदम सटीक और शास्त्रोक्त गणनाओं के आधार पर ही की जाती है। यदि हम गहराई से बात करें कि इस वर्ष सावन का यह जाग्रत महीना कब से शुरू हो रहा है, तो वैदिक ज्योतिष और उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार श्रावण मास की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात में ही लग जाएगी। लेकिन हमारे सनातन धर्म के अत्यंत कड़े और प्रामाणिक नियमों के अनुसार, सूर्योदय के समय जो तिथि मौजूद होती है (जिसे उदया तिथि कहा जाता है), उसी को सर्वमान्य और पूर्ण रूप से शुभ माना जाता है। इसी प्राचीन उदया तिथि की परंपरा का कड़ाई से पालन करते हुए, Sawan 2026 की आधिकारिक, विधिवत और शुभ शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से होगी। करीब एक महीने तक चलने वाले भक्ति और साधना के इस विशाल उत्सव का विधिवत समापन हमेशा श्रावण पूर्णिमा के शुभ दिन पर होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार Sawan 2026 का पूर्ण समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को होगा। Sawan 2026 आपको यह जानकर भी बेहद खुशी होगी कि इसी अंतिम दिन (श्रावण पूर्णिमा को) भाई-बहन के पवित्र और अटूट प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक, रक्षाबंधन का पावन पर्व भी पूरे भारतवर्ष में अपार हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जाएगा। सावन के सोमवार व्रतों का विशेष महत्व और अचूक तिथियां : The Special Significance and Auspicious Dates of the Sawan Monday Fasts…. सावन का पूरा का पूरा महीना ही भगवान शिव को पूरी तरह से समर्पित होता है, लेकिन इस महीने में पड़ने वाले हर एक सोमवार का अपना एक अलग, बहुत ही गहरा और रहस्यमयी आध्यात्मिक महत्व होता है। शिव पुराण और अन्य प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है। Sawan 2026 मान्यता है कि इस विशेष दिन व्रत रखने, सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और शिवलिंग पर शुद्ध गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, ताजे बेलपत्र, भांग, चंदन और धतूरा अत्यंत आदरपूर्वक अर्पित करने से इंसान की हर मनोकामना बहुत ही शीघ्र पूरी हो जाती है। यदि आप भी शिव जी की असीम कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए इस पावन Sawan 2026 में व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि इस साल शिव भक्ति के लिए कुल 4 विशेष सावन सोमवार व्रत पड़ेंगे। इन व्रतों की एकदम सटीक तिथियां इस प्रकार हैं: पहला सावन सोमवार व्रत: 3 अगस्त दूसरा सावन सोमवार व्रत: 10 अगस्त तीसरा सावन सोमवार व्रत: 17 अगस्त चौथा और अंतिम सावन सोमवार व्रत: 24 अगस्त इन चारों पावन दिनों में देश के सभी छोटे-बड़े, प्राचीन और सिद्ध शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी और उत्साहपूर्ण भीड़ देखने को मिलेगी, जो अपनी सच्ची निष्ठा और श्रद्धा से महादेव का पवित्र जलाभिषेक करेंगे। सुहागिन महिलाओं और कन्याओं के लिए 4 मंगला गौरी व्रत : 4 Mangala Gauri Vrats for married women and young girls. सावन का महीना केवल भगवान शिव की पूजा और आराधना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी माता पार्वती के प्रति अपनी अटूट आस्था और समर्पण प्रकट करने का भी सबसे श्रेष्ठ समय है। सावन के हर मंगलवार को माता पार्वती (मां गौरी) की एक विशेष और भव्य पूजा की जाती है, जिसे शास्त्रों में ‘मंगला गौरी व्रत’ के नाम से जाना जाता है। विशेष रूप से Sawan 2026 में पड़ने वाले ये मंगलवार के व्रत विवाहित महिलाओं के लिए किसी जाग्रत ईश्वरीय वरदान से कम नहीं हैं। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उनके उत्तम स्वास्थ्य, करियर में सफलता और अपने वैवाहिक जीवन में अगाध प्रेम व सुख-शांति बनाए रखने के लिए यह व्रत पूरे नियम और निष्ठा से रखती हैं। वहीं दूसरी ओर, अविवाहित कन्याएं भविष्य में एक अत्यंत योग्य, संस्कारी और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करने की गहरी इच्छा से इस व्रत का कठोरता से पालन करती हैं। इस वर्ष Sawan 2026 में कुल 4 मंगला गौरी व्रत अत्यंत शुभ योगों में रखे जाएंगे, जिनकी पक्की तारीखें इस प्रकार हैं: पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त कांवड़ यात्रा का अलौकिक, भव्य और भक्तिमय माहौल : The ethereal, magnificent, and devotional atmosphere of the Kanwar Yatra. सावन के महीने और कांवड़ यात्रा का रिश्ता बिल्कुल एक शरीर और उसकी आत्मा जैसा है। सावन का पावन महीना शुरू होते ही देश के विभिन्न राजमार्गों और मार्गों पर केसरिया रंग के पवित्र वस्त्र धारण किए हुए शिवभक्तों (कांवड़ियों) की लंबी और विशाल कतारें दिखाई देने लगती हैं। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्थित गंगोत्री, बिहार के सुल्तानगंज और अन्य प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थलों से शुद्ध गंगाजल भरकर पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की अत्यंत कठिन यात्रा करते हुए अपने-अपने शिव मंदिरों तक पहुँचते हैं। आगामी Sawan 2026 के इस अत्यंत पवित्र महीने में

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Suktam Stotra

Sarpa Suktam Stotra : सर्प सूक्त स्तोत्र…..

सर्प सूक्त स्तोत्र हिंदी पाठ : Sarpa Suktam Stotra in Hindi ब्रह्मलोकुषु ये सर्पा: शेषनाग पुरोगमा: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासुकि प्रमुखादय: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। कद्रवेयाश्च ये सर्पा: मातृभक्ति Suktam Stotra परायणा ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। इंद्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखादय: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखादय: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। पृथिव्यांचैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु Suktam Stotra संच्छिता ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। ग्रामे वा यदिवारण्ये ये सर्पा प्रचरन्ति च ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। समुद्रतीरे ये सर्पा ये सर्पा जलवासिन: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। रसातलेषु या सर्पा: अनन्तादि महाबला: ।नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा ।। ।। इति सर्प सूक्त स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Rahasya Stotra

Saraswati Rahasya Stotra : श्री सरस्वती रहस्य स्तोत्रम्…….

श्री सरस्वती रहस्य स्तोत्रम् हिंदी पाठ : Saraswati Rahasya Stotra in Hindi नीहारहारघनसारसुधाकराभांकल्याणदां कनकचम्पकदामभूषाम् ।उत्तुङ्गपीनकुचकुंभमनोहराङ्गीं वाणींनमामि मनसा वचसा विभूत्यै ॥ १ ॥ या वेदान्तार्थतत्त्वैकस्वरूपा परमेश्वरी ।नामरूपात्मना व्यक्ता सा मां पातु सरस्वती ॥ २ ॥ या साङ्गोपाङ्गवेदेषु Rahasya Stotra चतुर्ष्वेकैव गीयते ।अद्वैता ब्रह्मणः शक्तिः सा मां पातु सरस्वती ॥ ३ ॥ या वर्णपदवाक्यार्थस्वरूपेणैव वर्तते ।अनादिनिधनानन्ता सा मां पातु सरस्वती ॥ ४ ॥ अध्यात्ममधिदैवं च देवानां सम्यगीश्वरी ।प्रत्यगास्ते वदन्ती या सा मां Rahasya Stotra पातु सरस्वती ॥ ५ ॥ अन्तर्याम्यात्मना विश्वं त्रैलोक्यं Rahasya Stotra या नियच्छति ।रुद्रादित्यादिरूपस्था सा मां पातु सरस्वती ॥ ६ ॥ या प्रत्यग्दृष्टिभिर्जीवैर्व्यजमानानुभूयते ।व्यापिनी ज्ञप्तिरूपैका सा मां पातु सरस्वती ॥ ७ ॥ नामजात्यादिभिर्भेदैरष्टधा या विकल्पिता ।निर्विकल्पात्मना व्यक्ता सा मां पातु सरस्वती ॥ ८ ॥ व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम् ।सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती ॥ ९ ॥ यां विदित्वाखिलं बन्धं निर्मथ्याखिलवर्त्मना ।योगी याति परं स्थानं सा मां पातु सरस्वती ॥ १० ॥ नामरूपात्मकं सर्वं यस्यामावेश्य तां पुनः ।ध्यायन्ति ब्रह्मरूपैका सा मां पातु सरस्वती ॥ ११ ॥ चतुर्मुखमुखाम्भोजवनहंसवधूर्मम ।मानसे रमतां नित्यं सर्वशुक्ला सरस्वती ॥ १२ ॥ नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि ।त्वामहं प्रार्थये नित्यं  विद्यादानं च देहि मे ॥ १३ ॥ अक्षसूत्राङ्कुशधरा पाशपुस्तकधारिणी ।मुक्ताहारसमायुक्ता वाचि तिष्ठतु मे सदा ॥ १४ ॥ कम्बुकण्ठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणभूषिता ।महासरस्वती देवी जिह्वाग्रे सन्निवेश्यताम् ॥ १५ ॥ या श्रद्धा धारणा मेधा वाग्देवी विधिवल्लभा ।भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी ॥ १६ ॥ नमामि यामिनीनाथलेखालंकृतकुन्तलां ।भवानीं भवसन्तापनिर्वापणसुधानदीम् ॥ १७ ॥ यः कवित्वं निरातन्कं भुक्तिमुक्ती च वाञ्छति ।सोऽभ्यर्च्यैनां दशश्लोक्या नित्यं स्तौति सरस्वतीम् ॥ १८ ॥ तस्यैवं स्तुवतो नित्यं समभ्यर्च्य सरस्वतीं ।भक्तिश्रद्धाभियुक्तस्य षण्मासात्प्रत्ययो भवेत् ॥ १९ ॥ ततः प्रवर्तते वाणी स्वेच्छया ललिताक्षरा ।गद्यपद्यात्मकैः शब्दैरप्रमेयैर्विवक्षितैः ॥अश्रुतो बुध्यते ग्रन्थः प्रायः सारस्वतः कविः ॥ २० ॥ ॥ इति श्री सरस्वती रहस्य……..

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एकादशी

July 2026 Vrat Tyohar : जुलाई में पड़ेंगे देवशयनी एकादशी, सावन से लेकर गुप्त नवरात्रि, देखें पूरी व्रत-त्योहार की लिस्ट…..

July 2026 Vrat Tyohar : नमस्कार दोस्तों! हिंदू पंचांग के अनुसार, जुलाई 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होने वाला है। इस महीने आषाढ़ और श्रावण (सावन) मास का दिव्य संयोग बन रहा है। देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा, और महादेव का प्रिय सावन महीना इसी महीने में शुरू हो रहा है। त्योहारों की इस शुभ कड़ी में, यदि आप किसी भी व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, या सटीक पंचांग देखना चाहते हैं, तो आज ही अपने फोन में Karmasu App डाउनलोड करें। कर्मसु ऐप के जरिए आप घर बैठे आसान और शुद्ध तरीके से हमारे अनुभवी ‘कर्मसु आचार्यों’ द्वारा पूजा भी बुक करवा सकते हैं। आइए विस्तार से देखते हैं जुलाई 2026 के सभी प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट: 1. योगिनी एकादशी (10 – 11 जुलाई 2026) आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस बार स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय के हिसाब से व्रत 10 जुलाई और 11 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की सच्चे मन से आराधना करने से सभी पाप नष्ट होते हैं। 2. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (15 जुलाई – 23 जुलाई 2026) मां दुर्गा की गुप्त आराधना, तंत्र-मंत्र और दस महाविद्या की साधना के लिए गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) से शुरू होकर 23 जुलाई (गुरुवार) तक चलेगी। (गुप्त नवरात्रि में विशेष ‘दुर्गा सप्तशती पाठ’ या हवन करवाने के लिए आज ही Karmasu App चेक करें)। 3. श्री जगन्नाथ रथ यात्रा (16 जुलाई 2026) ओडिशा के पुरी के साथ-साथ देशभर में भगवान जगन्नाथ की विशाल रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाती है। इस साल यह आध्यात्मिक महापर्व 16 जुलाई को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। 4. देवशयनी एकादशी और चातुर्मास (25 जुलाई 2026) हिंदू धर्म में देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इस दिन से भगवान विष्णु आगामी 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा और शादी-विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। 5. गुरु पूर्णिमा और व्यास पूजा (29 जुलाई 2026) अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आभार व्यक्त करने का पावन दिन, गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाया जाएगा। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं क्योंकि इस दिन चारों वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। 6. श्रावण (सावन) मास 2026 (30 जुलाई से आरंभ) महादेव के भक्तों का सबसे प्रिय महीना ‘सावन’ 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस बार सावन में कुल 4 सोमवार पड़ेंगे: जुलाई 2026 के अन्य प्रमुख व्रत और त्योहार (संक्षिप्त सूची): अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आसान बनाएं – Karmasu App डाउनलोड करें! 📲 आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर हम पूजा के शुभ मुहूर्त या व्रत कथा भूल जाते हैं। लेकिन अब Karmasu App आपके धार्मिक जीवन को पूरी तरह से व्यवस्थित करेगा! Karmasu App पर आपको क्या-क्या मिलता है? तो देर किस बात की? अभी Google Play Store या Apple App Store पर जाएं और Karmasu App डाउनलोड करें। “कर्मसु (Karmasu) – अध्यात्म और शांति का अपना ठिकाना!”

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Gita Stotra

Saptashloki Gita Stotra : सप्तश्लोकी गीता स्तोत्र…..

Saptashloki Gita Stotra : संकटनाशन गणेश स्तोत्र: संकटनाशन गणेश स्तोत्र बहुत ही मददगार और फायदेमंद है। इसके पाठ से आप अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं, मुश्किल समय से बाहर निकल सकते हैं और अपनी ज़िंदगी को अपनी पसंद के अनुसार खुशहाल बना सकते हैं। यह भगवान गणेश के सबसे असरदार स्तोत्रों में से एक है। यह हर तरह की परेशानियों को दूर करता है। Gita Stotra रोज़ाना इस स्तोत्र का पाठ करने से इंसान सभी तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है। यह भगवान गणेश के सबसे असरदार स्तोत्रों में से एक है। Gita Stotra यह हर तरह की परेशानियों को दूर करता है। Gita Stotra रोज़ाना इस संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से इंसान सभी तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है। Gita Stotra सुबह-सुबह भगवान गणेश को दूर्वा (एक प्रकार की घास) चढ़ाने से इंसान सभी बाधाओं को पार कर सकता है। घर के मुख्य दरवाज़े पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति लगाना फायदेमंद होता है। Gita Stotra भगवान गणेश को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाने चाहिए। इससे समृद्धि आती है और इंसान कभी गरीब नहीं रहता। संकटनाशन गणेश स्तोत्र के फायदे: भगवान गणेश का संबंध ब्रह्मा, विष्णु और शिव से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बाकी सभी देवताओं की उत्पत्ति भगवान गणेश से ही हुई है। भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी मुश्किलों पर जीत हासिल करने में सक्षम होता है। भगवान गणेश अपार ज्ञान के स्वामी हैं और सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धर्म में, किसी भी काम को पूरा करने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा के कई तरीके बताए गए हैं। इन्हीं में से एक तरीका है ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, सिंदूर, घी, दीपक और मोदक ज़रूर अर्पित करने चाहिए। किसे करना चाहिए इस स्तोत्र का पाठ: जो व्यक्ति जीवन में सफलता पाना चाहता है, उसे बेहतर नतीजों के लिए इस ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। सप्तश्लोकी गीता स्तोत्र हिंदी पाठ : Saptashloki Gita Stotra in Hindi ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।य: प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ।। 1 ।। स्थाने ऋषीकेश तव प्रकीत्र्याजगत्प्रह्र्ष्यत्यनुरज्यते च ।रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वेनमस्यन्ति च सिद्धसंघा: ।। 2 ।। सर्वत: प्राणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।सर्वत:श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ।। 3 ।। कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्य: ।सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमस: परस्तात् ।। 4 ।। ऊर्ध्वमूलमध: शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् ।छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ।। 5 ।। सर्वस्यचाहं ह्रदि सन्निविष्टोमत्त: स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च ।वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्योवेदान्तक्रद्वेदविदेव चाहम् ।। 6 ।। मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायण: ।। 7 ।। ।। इति सप्तश्लोकी गीता स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Ganesh Stotra

Sankatnashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र…..

Sankatnashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र: संकट नाशन गणेश स्तोत्र एक बहुत ही मददगार और फायदेमंद स्तोत्र है। इसके पाठ से आप अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं, मुश्किल समय से बाहर निकल सकते हैं और अपनी ज़िंदगी को अपनी पसंद के अनुसार खुशहाल बना सकते हैं। यह भगवान गणेश के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह सभी तरह की परेशानियों को दूर करता है। रोज़ाना संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से इंसान हर तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। Ganesh Stotra किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है। सुबह-सुबह भगवान गणेश को दूर्वा (एक प्रकार की घास) चढ़ाने से इंसान सभी बाधाओं को पार कर सकता है। Ganesh Stotra घर के मुख्य दरवाज़े पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति लगाना फायदेमंद होता है। भगवान गणेश को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाने चाहिए। इससे समृद्धि आती है और इंसान कभी गरीब नहीं रहता। संकट नाशन गणेश स्तोत्र के फायदे: भगवान गणेश का संबंध ब्रह्मा, विष्णु और शिव से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बाकी सभी देवताओं की उत्पत्ति भगवान गणेश से ही हुई है। भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी मुश्किलों पर जीत हासिल करने में सक्षम होता है। भगवान गणेश अपार ज्ञान के स्वामी हैं और सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धर्म में, किसी भी काम को पूरा करने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। Ganesh Stotra शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा के कई तरीके बताए गए हैं। इन्हीं में से एक तरीका यह स्तोत्र है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, सिंदूर, घी, दीपक और मोदक ज़रूर अर्पित करने चाहिए। यह स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए: जो व्यक्ति जीवन में सफलता पाना चाहता है, Ganesh Stotra उसे बेहतर नतीजों के लिए ‘संकट नाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी पाठ : Sankatnashan Ganesh Stotra in Hindi नारद उवाच – प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।। 1 ।। प्रथमं वक्रतुंडं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।। 2 ।। लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाऽष्टमम् ।। 3 ।। नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।। 4 ।। द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम् ।। 5 ।। विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ।। 6 ।। जपेदगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।। 7 ।। अष्टानां ब्राम्हणानां च लिखित्वा य: समर्पयेत ।तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ।। 8 ।। ।। इति संकट नाशन गणेश…….

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