Kurma Jayanti 2026 Date And Time: कूर्म जयंती 2026: महत्व, अनुष्ठान और आध्यात्मिक लाभ….
Kurma Jayanti 2026 Mein Kab Hai: सनातन हिंदू धर्म में भगवान श्री हरि विष्णु को इस पूरी सृष्टि का पालनहार माना गया है। जब-जब इस धरती और ब्रह्मांड पर कोई बड़ा संकट आया है, तब-तब भगवान विष्णु ने विभिन्न अवतार लेकर धर्म, सत्य और संतुलन की रक्षा की है। उनके दशावतारों (दस मुख्य अवतारों) में से दूसरा और एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण अवतार ‘कूर्म’ (कछुआ) का है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भगवान विष्णु के इसी दिव्य कूर्म अवतार के प्रकट होने के उपलक्ष्य में Kurma Jayanti का पावन पर्व बहुत ही गहरी श्रद्धा, उल्लास और भक्ति-भाव के साथ मनाया जाता है। आने वाले वर्ष 2026 में Kurma Jayanti का यह पवित्र दिन सभी भक्तों के लिए अपार स्थिरता, शांति और सुख-समृद्धि लेकर आ रहा है। वैदिक शास्त्रों के अनुसार, यह वह दिन है जब भगवान ने अपनी विशाल पीठ पर एक भारी पर्वत का भार उठाकर पूरे ब्रह्मांड को विनाश से बचाया था। Kurma Jayanti आज के इस अत्यंत विस्तृत, जानकारीपूर्ण और 100% मौलिक ब्लॉग पोस्ट में हम गहराई से जानेंगे कि इस साल यह पर्व कब मनाया जाएगा, इसके अचूक शुभ मुहूर्त क्या हैं, पूजा की सही विधि क्या है और सबसे बड़ी बात, इस व्रत से हमें कौन-कौन से अद्भुत आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। Kurma Jayanti 2026 Date And Time: कूर्म जयंती 2026: महत्व…. 2026 में सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त : Correct date and auspicious time of puja in 2026 पंचांग और सटीक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, साल 2026 में Kurma Jayanti का यह पावन त्योहार 1 मई, दिन शुक्रवार को पूरे विश्व में मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 को रात 9 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगी और इसका समापन 1 मई 2026 की रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा। चूंकि हिंदू धर्म में हम उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को ही मुख्य मानते हैं, इसलिए व्रत और अनुष्ठान 1 मई को ही संपन्न किए जाएंगे। अगर हम Kurma Jayanti के विशेष पूजा मुहूर्त की बात करें, तो 1 मई को शाम 04:27 बजे से लेकर शाम 07:01 बजे तक (कुल 2 घंटे 34 मिनट) पूजा करने का सबसे उत्तम और कल्याणकारी समय रहेगा। इस शुभ अवधि के दौरान की गई भगवान विष्णु की आराधना सीधे वैकुंठ तक पहुंचती है। समुद्र मंथन और कूर्म अवतार की अद्भुत पौराणिक कथा :Amazing mythological story of Samudra Manthan and Kurma Avatar प्राचीन काल की बात है, जब सृष्टि पर असुरों (राक्षसों) और देवों के बीच शक्ति की सर्वोच्चता की जंग चल रही थी। तब भगवान विष्णु ने देवताओं को असुरों के साथ मिलकर ‘क्षीरसागर’ (दूध का महासागर) में ‘समुद्र मंथन’ करने का महान सुझाव दिया ताकि उसमें छिपे हुए ‘अमृत’ को निकालकर देवता उसे पी सकें और अमर हो जाएं। इस अत्यंत कठिन समुद्र मंथन के लिए ‘मंदराचल पर्वत’ को मथानी (रॉड) और नागों के राजा ‘वासुकि’ को रस्सी के रूप में चुना गया। लेकिन जैसे ही देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र को मथना शुरू किया, एक बहुत बड़ी और भयंकर समस्या आ खड़ी हुई। मंदराचल पर्वत का कोई ठोस आधार (बेस) न होने के कारण वह भारी पर्वत धीरे-धीरे समुद्र की गहराइयों में डूबने लगा। इस स्थिति में मंथन का काम पूरी तरह से रुक गया और सभी देवता बुरी तरह घबरा गए। सृष्टि के इस बड़े संकट को टालने के लिए और मंथन को सफल बनाने के लिए, भगवान विष्णु ने तुरंत एक अत्यंत विशाल ‘कूर्म‘ (कछुए) का अवतार धारण किया। वे समुद्र की अतल गहराइयों में गए और अपनी मजबूत पीठ पर मंदराचल पर्वत को स्थापित कर लिया। Kurma Jayanti उनकी मजबूत और स्थिर पीठ के कारण मंथन फिर से शुरू हो सका। इस महान ऐतिहासिक घटना की याद में ही हर साल Kurma Jayanti का पर्व मनाया जाता है। इसी मंथन से कई अनमोल रत्न निकले थे, जिनमें माता लक्ष्मी, कामधेनु गाय और अंततः अमृत कलश भी प्रकट हुआ था। बाद में विष्णु जी ने मोहिनी रूप लेकर वह अमृत केवल देवताओं को पिलाया था। त्योहार की संपूर्ण और सटीक पूजा विधि (Puja Vidhi) इस पावन दिन पर भगवान विष्णु की पूजा करने के कुछ खास वैदिक नियम और अनुष्ठान हैं, जिनका पालन करने से जीवन में अद्भुत चमत्कार होते हैं: पवित्र स्नान: Kurma Jayanti के दिन सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि नदी में जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। चौकी और कलश स्थापना: घर के पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु (कूर्म अवतार) की प्रतिमा या चित्र रखें। साथ ही आम के पत्तों और नारियल के साथ एक कलश स्थापित करें। विशेष सामग्री: भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत पसंद है, इसलिए उन्हें पीला चंदन, कुमकुम, पीले फूल, तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) और पीले फलों का अर्पण जरूर करें। पंचामृत का अभिषेक: यदि आपके पास भगवान विष्णु की कोई मूर्ति है, तो उसे दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने ‘पंचामृत’ से स्नान कराएं। मंत्र जाप और जागरण: पूजा के दौरान ‘ॐ कूर्माय नमः’ या ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना इस दिन सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। जो लोग व्रत रखते हैं, उन्हें रात के समय सोना नहीं चाहिए बल्कि भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण (Ratrijagran) करना चाहिए। सख्त व्रत के नियम (Vrat Rules) शास्त्रों में Kurma Jayanti के व्रत को अत्यधिक महत्वपूर्ण और कठोर माना गया है। जो भक्त यह उपवास रखते हैं, उन्हें इस दिन किसी भी प्रकार के अनाज (जैसे गेहूं, चावल) या दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। वे केवल ताजे फल और दूध से बनी सात्विक चीजों का ही सेवन कर सकते हैं। Kurma Jayanti कुछ लोग तो बिना पानी पिए ‘निर्जला व्रत’ भी रखते हैं। इसके अलावा पूरे दिन झूठ न बोलना, किसी से बुरा व्यवहार न करना और क्रोध से दूर रहना अनिवार्य है। इस दिन ब्राह्मणों और गरीबों को वस्त्र, भोजन और धन का दान देना इंसान के पुण्यों को कई गुना बढ़ा देता है।
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