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कैसे हुआ सरस्वती का जन्म | saraswati ka janam kaise hua | माता सरस्वती के जन्म की कहानी |

Saraswati जब सृष्टि का निर्माण हुआ तो हर और अव्यवस्था थी। ब्रह्मा को यह समझ में नहीं आ रहा था कि सृष्टि में व्यवस्था कैसे बनाई जाए। समस्या पर विचार करते समय उन्हें एक आवाज सुनाई पड़ी कि ज्ञान ही सृष्टी में व्यवस्था बनाने में सहायता कर सकता है। तभी ब्रह्मा के मुख से सरस्वती (Saraswati) की चमत्कारी आकृति प्रकट हुई जो ज्ञान और बुद्धि की देवी थी, श्वेत वस्त्र धारण किए वह हंस पर सवार थी। उसके एक हाथ में पुस्तक और दूसरे में वीणा थी। विचार, समझ और संवाद के जरिए उन्होंने ब्रह्मा को यह समझाने में सहायता की की किस तरह से सृष्टि में व्यवस्था कायम की जाए। जब उसने वीणा बजाई तो हल्ला गुल्ला शांत होने लगा सूर्य, चंद्रमा और तारों का जन्म हुआ। समुंद्र भर गए और ऋतु परिवर्तन होने लगा। ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर सरस्वती का नाम वाग्देवी रख दिया जिसका अर्थ शब्द और ध्वनि की देवी होता है। इस प्रकार ब्रह्मा, सरस्वती के ज्ञान की बदौलत सृष्टि के रचयिता बन गए। सरस्वती जी के जन्म की कथा हिंदू धर्म में बहुत प्रसिद्ध है। इस कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का कार्य संपन्न कर दिया तो उन्होंने पाया कि सृष्टि में सबकुछ है, लेकिन सब मूक, शांत और नीरस है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल निकाला और छिड़क दिया, जिससे मां सरस्वती वहां पर प्रकट हो गईं। उन्होंने अपने हाथों में वीणा, माला और पुस्तक धारण कर रखा था। सृष्टि के रचयिता ब्रम्ह देव के 4 सिर क्यों है, जानें इसकी पौराणिक कथा वीणा से निकलने वाले मधुर स्वर से सृष्टि में ध्वनि का संचार हुआ। माला से निकलने वाले सुगंध से सृष्टि में सुगंध का संचार हुआ। और पुस्तक से निकलने वाले ज्ञान से सृष्टि में ज्ञान का संचार हुआ। मां सरस्वती को ज्ञान, कला, संगीत, और विद्या की देवी माना जाता है। वे सृष्टि में ज्ञान और कला का प्रसार करती हैं। मां सरस्वती का जन्म वसंत पंचमी के दिन हुआ था। इसलिए वसंत पंचमी को सरस्वती (saraswati )पूजा का पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन लोग मां सरस्वती की पूजा करते हैं और उनसे ज्ञान, कला और सफलता की कामना करते हैं। सरस्वती जी के जन्म की कुछ अन्य कथाएँ भी प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सृष्टि का निर्माण किया तो उन्होंने देखा कि सृष्टि में ज्ञान और कला का अभाव है। तब उन्होंने अपने नाभि से एक कमल उत्पन्न किया, जिस पर विराजमान होकर मां सरस्वती प्रकट हुईं। एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने सृष्टि का निर्माण किया तो उन्होंने देखा कि सृष्टि में ज्ञान और कला का विकास नहीं हो रहा है। तब उन्होंने अपने-अपने तेज से एक शक्ति उत्पन्न की, जिससे मां सरस्वती प्रकट हुईं। इन सभी कथाओं से स्पष्ट है कि मां सरस्वती ज्ञान, कला और विद्या की देवी हैं। वे सृष्टि में ज्ञान और कला का प्रसार करती हैं।

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Pauranik katha : कैसे हुई सूर्य देव की उत्पत्ति, जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

आज रविवार है और सूर्यदेव का दिन है। आज जागरण आध्यात्म के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि भगवान सूर्य की उत्पति कैसे हुई। पृथ्वी के दो साक्षात देव हैं सूर्य और चंद्र। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं। Pauranik katha आज रविवार है और सूर्यदेव का दिन है। आज जागरण आध्यात्म के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि भगवान सूर्य की उत्पति कैसे हुई। पृथ्वी के दो साक्षात देव हैं सूर्य और चंद्र। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं और उनके सर्वोच्च दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं। वेदों के अनुसार, सूर्य को जगत की आत्मा माना गया है। इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य से ही है। हिंदू धर्म में लोग सूर्य को जल का अर्घ्य देते हैं। पुराणों में सूर्य की उत्पत्ति, प्रभाव, स्तुति, मन्त्र इत्यादि के बारे में बताया गया है। नवग्रहों में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है। आइए जानते हैं कैसे हुई सूर्य देव की उत्पत्ति। नाग पंचमी पौराणिक कथा (Nag Panchami Pauranik Katha) Pauranik katha : हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना गया हैं और इनकी पूजा अर्चना भी की जाती हैं। पृथ्वी के दो साक्षात देवता हैं सूर्य और चंद्रमा। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं और उनके सर्वोच्च दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं वेदों के मुताबिक सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया हैं इस पृथ्वी पर हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना गया हैं और इनकी पूजा अर्चना भी की जाती हैं। पृथ्वी के दो साक्षात देवता हैं सूर्य और चंद्रमा। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं और उनके सर्वोच्च दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं वेदों के मुताबिक सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया हैं इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य से ही हैं हिंदू धर्म में सूर्य को जल का अर्घ्य दिया जाता हैं। हिंदू धर्म पुराणों में सूर्य की उत्पत्ति, प्रभाव, स्तुति, मंत्र आदि के बारे में बताया गया हैं नवग्रहों में सूर्य को राजा का पद मिलता हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख में सूर्य देव की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं। हिंदू धर्म के मार्कंडेय पुराण के मुताबिक सारा जगत पहले प्रकाश रहित था। उस वक्त कमलयोनि ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी के मुंह से सबसे पहला शब्द जो निकला वो था ॐ, यह सूर्य का तेज रूप सूक्ष्म रूप था। इसके बाद ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट हुए। यह चारों ॐ के तेज में एकाकार हो गए। यह विश्व का अविनाशी कारण हैं सूर्य ही सृष्टि की उत्पत्ति, पालन व संहार का कारण हैं ब्रह्मा जी ने प्रार्थना की जिससे सूर्य ने अपने महातेज को समेट कर स्वल्प तेज को धारण किया। वही सृष्टि की रचना की गई तब ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि हुए। मरीचि के पुत्र ​ऋषि कश्यप का विवाह अदिति से हुआ। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए अदिति ने घोर तप किया। फिर सुषुम्ना नाम की किरण ने अदिति के गर्भ में प्रवेश किया। इस अवस्था में भी अदिति ने चान्द्रायण जैसे कठिन व्रतों का पालन किया। इस ऋषि राज कश्यप क्रोधित हो गए। उन्होंने अदिति से कहा कि तुम इस तरह व्रत रख कर गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचा रही हो। इस तरह तुम शिशु को क्यों करना चा​हती हो। वही जब देवी अदिति ने यह सुना तो अदिति ने गर्भ के बालक को उदर से बाहर कर दिया जो अपने अत्यंत दिव्य तेज से प्रज्वल्लित हो रहा था। फिर सूर्य देव शिशु रूप में अदिति के गर्भ में प्रगट हुए। अदिति को मारिचम अन्डम कहा जाता था। इसके चलते ही इस बालक का नाम मार्तंड पड़ा। ब्रह्मपुराण में अदिति के गर्भ से जन्मे सूर्य के अंश को विवस्वान कहा गया हैं।

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Tulsi Vivah 2023: तुलसी विवाह कब है? जानें डेट, तिथि, शुभ मुहूर्त व महत्व

Tulsi Vivah 2023:हिंदू पंचांग के अनुसार, तुलसी विवाह हमेशा देवउठनी एकादशी के दिन किया जाता है. इस दिन तुलसी माता और शालिग्राम भगवान का विवाह किया जाता है. यह हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. आइए जानते हैं इस बार तुलसी विवाह कब है और इसका क्या महत्व है. Tulsi Vivah 2023: हिंदू रीति-रिवाजों में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है. इस दिन विष्णु भगवान के शालिग्राम स्वरुप के साथ तुलसी जी के विवाह का विधान है. मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक तुलसी माता का विवाह संपन्न कराता है उसके दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहती हैं. सारी मनोकामनाएं पूरी होती है और संतान सुख का भी वरदान मिलता है. पंचांग के अनुसार, तुलसी विवाह प्रति वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के एक दिन बाद रचाई जाती है. इस दिन देशभर में तुलसी विवाह का धूमधाम से आयोजन किया जाता है. इसके साथ हीं, शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त की भी शुरुआत हो जाती है. तो चलिए जानते हैं इस साल तुलसी विवाह कब है और इसका क्या महत्व है. कब है तुलसी विवाह? तुलसी विवाह हर साल हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के एक दिन बाद मनाई जाती है. लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, इस बार 23 नवंबर को एकादशी है और अगले दिन 24 नवंबर को द्वादशी तिथि है. द्वदशी तिथि पर घरों में तुलसी माता और शालिग्राम भगवान का विवाह रचाने का विधान है. कहते हैं, ऐसा करने से व्यक्ति जीवन में खूब तरक्की करते हैं और भाग्य में भी वृद्धि होती है. तुलसी विवाह की शुभ मुहूर्त तुलसी विवाह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर किया जाता है. पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि 23 नवंबर, गुरुवार की शाम 9 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ होगी. वहीं इसका समापन 24 नवंबर, शुक्रवार की शाम 7 बजकर 06 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को मानते हुए तुलसी विवाह 24 नवंबर को ही मनाया जाएगा. कहते हैं, इस शुभ संयोग में अपने घर तुलसी-शालिग्राम के विवाह रचाने से घर में अपार धन का आगमन होता है और वैवाहिक जीवन में भी खुशियां आती हैं. Tulsi Vivah katha तुलसी विवाह की पौराणिक कथा, जानें क्यों कराया जाता है प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह तुलसी विवाह पूजा विधि- व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें और व्रत संकल्प लें।इसके बाद भगवान विष्णु की अराधना करें।अब भगवान विष्णु के सामने दीप-धूप जलाएं। फिर उन्हें फल, फूल और भोग अर्पित करें।मान्यता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरुरी अर्पित करनी चाहिए। शाम को विष्णु जी की अराधना करते हुए विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। पूर्व संध्या को व्रती को सिर्फ सात्विक भोजन करना चाहिए। व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता।व्रत खोलने के बाद ब्राहम्णों को दान-दक्षिणा दें। तुलसी विवाह सामग्री लिस्ट पूजा में मूली, शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, बेर, मूली, सीताफल, अमरुद और अन्य ऋतु फल चढाएं जाते हैं।   तुलसी पूजा में लगाएं ये चीजें देवउठनी एकादशी पर पूजा स्थल में गन्नों से मंडप सजाया जाता है। उसके नीचे भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान कर मंत्रों से भगवान विष्णु को जगाने के लिए पूजा की जाती है।तुलसी विवाह के दिन व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत करने से जन्म और जन्म के पूर्व के पापों से मुक्ति मिल जाती है। कार्तिक मास की एकादशी को तुलसी विवाह का त्यौहार बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी को विष्णुप्रिया नाम से भी जाना जाता है। तुलसी विवाह का महत्व Tulsi Vivah 2023 सनातन धर्म में तुलसी विवाह का खास महत्व होता है. इस दिन तुलसी माता के साथ भगवान विष्णु के शालिग्राम अवतार की शादी रचाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से तुलसी-शालिग्राम के विवाह रचाने से जीवन में सकारात्मकता आती है. साथ ही विवाह में आ रही अड़चने भी दूर होती. कहते हैं जो व्यक्ति जीवन में एकबार भी तुलसी विवाह विधिपूर्वक कर लेता है तो उसे कन्यादान के बराबर फल मिल जाता है.

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Bhai Dooj 2023 Date: भाई दूज 2023 में कब? 14 या 15 नंवबर जानें भाई दूज ही सही डेट

Bhai Dooj 2023 Date: भाई दूज का पर्व भाई बहन के पवित्र रिश्ते है प्रतीक है. कार्तिक मास में मनाया जाने वाला ये पर्व दिवाली के दूसरे दिन आता है. आइये जानते हैं साल 2023 में किस दिन पड़ेगा भाई दूज. Bhai Dooj 2023 Date: भाई दूज का पर्व कार्तिक मास में दिवाली के बाद मनाया जाता है. कार्तिक मास में हिंदू धर्म में बहुत से त्योहार पड़ते हैं.करवाचौथ, धनतेरस, दिवाली, छठ पूजा आदि. इसी मास में भाई दूज का पर्व भी पड़ता है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की  द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है. साल 2023 में किस दिन मनाई जाएगा भाई दूज का पर्व आइये जानते हैं. भाई दूज भाई बहन का पवित्र त्योहार है. इस दिन बहने अपने भाईयों को टीका करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती है. साल 2023 में भाई दूज 15 नंवबर के दिन मनाया जाएगा. Diwali 2023 Date: इस साल कब है दिवाली, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त भाई दूज की सही डेट (When is Bhai Dooj in 2023?) इस लिहाज से आप दोनों ही दिन भाई दूज का पर्व मना सकते हैं. 14 नंवबर को दोपहर के बाद से आप टीका कर सकते हैं. ये पर्व भाई- बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है. इस दिन भाई अपने बहन के पास जाकर टीका करवाते हैं. 15 नवंबर 2023 को क्यों मनाई जाएगी भाई दूज?हिंदू धर्म में कोई भी त्योहार उदया तिथि पर ही मनाया जाता है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार भाई दूज का पर्व 15 नवंबर 2023 को मनाया जाएगा। इस दिन भाई को टीका करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक है। तिलक करने की विधिपौराणिक मान्यता है कि इस दिन यम अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे। ऐसे में भाईयों को अपनी बहन के ससुराल जाना चाहिए। वहीं कुंवारी लड़कियां घर पर ही भाई का तिलक करें। भाई दूज के दिन सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पूजा अवश्य करनी चाहिए। वहीं भाई का तिलक करने के लिए पहले थाली तैयार करें उसमें रोली, अक्षत और गोला रखें तत्पश्चात भाई का तिलक करें और गोला भाई को दें। फिर प्रेमपूर्वक भाई को मनपसंद का भोजन करवाएं। उसके बाद भाई अपनी बहन से आशीर्वाद लें और उन्हें भेंट स्वरूप कुछ उपहार जरूर दें। भाई दूज का महत्व हिंदू धर्म में भाई दूज के पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि ये पर्व भाइयों और बहनों के बीच के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। भाई दूज पर बहनें अपने भाई के माथे पर हल्दी और रोली का तिलक लगाती हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि भाई बहन यमुना नदी के किनारे बैठकर भोजन करते हैं तो जीवन में समृद्धि आती है। कैसे करें भाई दूज पर पूजा ? (Kaise Karen Bhai Dooj Par Pooja)भाई दूज पर बहने अपने भाईयों को टीका लगाती है. टीका लगाने के बाद भाई की आरती उतारती हैं. ऐसा माना जाता है कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर यमुना जी ने यमराज को अपने घर पर टीका किया और भोजन कराया था और इसी पूजा के बाद यमराज को सुख की प्राप्ति हुई. तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है. इसीलिए इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है.

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Chandra Grahan 2023 date, time in India: भारत में कल कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें सूतक काल लगेगा या नहीं

Chandra Grahan 2023 on 28 October, date, time in India: साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28-29 अक्टूबर की मध्यरात्रि, शनिवार को लगने जा रहा है. यह चंद्र ग्रहण मेष राशि में लगेगा. साथ ही यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा और इसका असर देश दुनिया और मानव जीवन पर पड़ेगा. तो आइए जानते हैं कि साल 2023 के दूसरे चंद्र ग्रहण का सूतक मान्य होगा या नहीं. Chandra Grahan 2023 कब है: साल का पहला चंद्र ग्रहण लग चुका है. साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 और 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि को लगने जा रहा है. साथ ही इस दिन शरद पूर्णिमा भी है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण लगना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण आंशिक होगा. यह ग्रहण मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में लगने जा रहा है. साल 2023 के आखिरी चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा और आखिर क्या इसका समय होगा. चलिए जानते हैं.  भारत में 28 अक्टूबर को कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2023 kitne baje lagega in India) ज्योतिष की मानें तो विश्व परिदृश्य में एक ही महीने में लगने वाले दो ग्रहण उत्पातकारी योग लेकर आए हुए है. इस महीने 28-29 अक्टूबर की रात में लगने वाला चंद्र ग्रहण पूरे भारतवर्ष में दृष्टिगोचर होगा. वैसे तो 28 अक्टूबर की रात 11.30 बजे से चांद पर हल्की छाया पड़ना शुरू हो जाएगी. इसे चंद्र ग्रहण का पेनब्रा स्टेज भी कहा जाता है. हालांकि, सूतक काल इसके हिसाब से नहीं बल्कि गहरी छाया पड़ने के 9 घंटे पहले ही माना जाता है. चंद्र ग्रहण के मुख्य चरण (अम्ब्रा स्टेज) या गहरी छाया पड़ने की बात की जाए तो ये 29 अक्टूबर की रात 1 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा यानी ये एक घंटा 19 मिनट का होगा. ग्रहण का आरंभ मध्य रात्रि 1 बजकर 5 मिनट, मध्य 1 बजकर 44 मिनट और ग्रहण का मोक्ष 2 बजकर 40 मिनट पर होगा.  यह ग्रहण मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में लगने जा रहा है. ग्रहण जब भी लगता है तो इसका भौतिक, आध्यात्मिक और व्यक्तिगत जीव-जगत पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ता है.  चंद्र ग्रहण के सूतक काल की टाइमिंग (Chandra Grahan 2023 sutak timings) 28-29 अक्टूबर को खंडग्रास चंद्र ग्रहण चूंकि रात 1 बजकर 5 मिनट पर लग रहा है इसलिए इसका सूतक काल 9 घंटे पहले यानी 28 अक्टूबर की शाम 04 बजकर 05 मिनट से लग जाएगा.  कहां कहां दिखेगा ये चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2023 When and where to watch)   यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा देगा. इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका, उत्तर व पूर्व दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक महासागर, हिन्द महासागर, अंटार्कटिका में भी दिखेगा. साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कितने बजे से शुरू होगा: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में 28 अक्टूबर की रात 01 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 02 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण 1 घंटे और 19 मिनट तक रहेगा चंद्र ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा: चंद्र ग्रहण को भारत के अलावा  पश्चिमी प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, यूरोप, अफ्रीका, पूर्वी दक्षिण अमेरिका, उत्तरपूर्वी उत्तरी अमेरिका, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर में भी देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण कब लगता है: चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही होता है जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है। पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है, जिससे यह कुछ घंटों के लिए धुंधला हो जाता है और कभी-कभी लाल रंग का भी दिखाई देने लगता है।  चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब से शुरू होगा: चंद्र ग्रहण का सूतक काल 09 घंटे पूर्व से प्रारंभ हो जाता है। इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल 28 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगा। किस समय चंद्र ग्रहण होगा अपने चरम पर: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण यानी परमग्रास चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर की देर रात 01:44 बजे अपने चरम पर होगा। भारत के किन शहरों में दिखेगा चंद्र ग्रहण: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरु, अहमदाबाद, कोलकाता और वाराणसी में दिखाई देगा।  

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सपने में कभी गाय देखी है,सपने में गाय दिखना माना जाता है बहुत शुभ

सपने में गाय देखना एक खास संकेत देता है. गाय दिखना बहुत शुभ माना जाता है. ये इस पर भी निर्भर करता है कि आपको सपने में किस तरह की गाय दिखाई देती है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार रात के समय गहरी नींद में आने वाले सपने हमें अपने भविष्य में होने वाले शुभ या अशुभ संकेतों के बारे में बताते हैं. कई बार हमें ऐसे सपने दिखाई देते हैं, जो उठने के बाद भी हमारे दिमाग में रह जाते हैं और कुछ जिन्हें हम पूरी तरह से भूल जाते हैं. ऐसे सपनों को जानने के लिए हम उत्सुक रहते हैं कि आखिर उस सपने के पीछे का अर्थ क्या है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार आने वाला हर सपना अपने साथ कोई ना कोई संकेत जरूर लेकर आता है. हर सपने का कोई ना कोई अर्थ जरूर निकलता है. अगर आप उस अर्थ को जान लें तो हो सकता है कि आने वाला समय आपके लिए शुभ हो जाए, इसलिए हर व्यक्ति को अपने आने वाले सपनों को नजरअंदाज करने के बजाय, उसके मतलब को समझने की कोशिश करनी चाहिए. यदि आपको सपने में गाय दिखाई देती है तो इस सपने का क्या अर्थ है? यदि सपने में व्यक्ति गाय को खुद की ओर आता देखता है तो इस स्वप्न को शुभ मानिए। इस सपने को देखने के बाद सुबह आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि भी आती है। मालूम हो कि ऐसी स्थिति में गाय देखना धन आगमन का भी संदेश होता है। Dream Interpretation अगर आपको सपने में सफेद गाय दिखाई देती है तो इसका मतलब है कि भविष्य में आपको कई तरह की खुशियां मिलने वाली हैं. आपके परिवार में कुछ अच्छी खबर सुनने को मिलने वाली है. सपने में सफेद गाय दिखना बेहद शुब संकेत माना जाता है. सपने में गाय का बछड़ा देखना भी बहुत अच्छा माना जाता है. यह सपना बताता है कि आने वाले दिनों में आपकी आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत होने वाली है. आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे उसमें आपको सफलता मिलेगी. यह सपना बताता है कि आपके जीवन से परेशानियां जल्दी ही समाप्त होने वाली हैं. गाय का सपने में आना एक गंभीर अर्थ लिए हुए है. शास्त्रों के मुताबिक गाय को एक पवित्र पशु माना गया है. साथ ही इसे कामधेनु का रूप भी मानते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ 14 अन्य रत्नों की प्राप्ति हुई थी, जिनमें से एक कामधेनु गाय थी, इसलिए गाय को पशुधन भी कहा जाता है और हिंदू धर्म में इसे विशेष दर्जा दिया गया है.

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Dussehra 2024: दशहरा पर घर में रावण की अस्थियां लाना क्यों माना जाता है शुभ, जानिए इसके पीछे का कारण

आज दशहरे का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाता है। सनातन धर्म में यह दिन अधर्म पर धर्म की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हर साल लोग रावण का पुतला जलाकर बुराई के प्रतीक को जलाते हैं, लेकिन साथ ही रावण एक महान विद्वान और विद्वान था। रावण के ज्ञान और विद्वता की प्रशंसा स्वयं भगवान श्री राम ने की थी। विजयादशमी की तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है और इस दिन शस्त्र पूजन का भी विधान है। इसके अलावा भी इस तिथि को लेकर कई मान्यताएं हैं, उनमें से एक है रावण के दहन के बाद बची राख को अपने घर ले जाना। यह बहुत ही शुभ माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि रावण की राख को घर ले जाना क्यों शुभ माना जाता है और कैसे शुरू हुई यह परंपरा। अधर्म और असत्य पर सत्य और सत्य की जीत के उपलक्ष्य में रावण का पुतला दहन किया जाता है। इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था और माता सीता को रावण से मुक्त कराया था। हर साल नवरात्रि से लेकर दशहरा तक देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण के अंत को याद करने के लिए रामलीला का मंचन किया जाता है और दशहरे पर रावण दहन का त्योहार मनाया जाता है, लेकिन दिल्ली से सटे नोएडा के एक गांव बिसरख में रामलीला का मंचन किया जाता है. न तो किया जाता है और न ही रावण दहन। इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी यहां रामलीला का आयोजन होता है या रावण दहन किया जाता है तो यहां किसी की मृत्यु हो जाती है। इस वजह से रामलीला हमेशा अधूरी रहती है, इसलिए लोगों ने रामलीला और रावण दहन का आयोजन हमेशा के लिए बंद कर दिया। शिव पुराण में भी बिसरख गांव का उल्लेख है। पुराणों के अनुसार त्रेता युग में इसी गांव में ऋषि विश्रवा का जन्म हुआ था। उन्होंने इसी गांव में शिवलिंग की स्थापना की थी। रावण का जन्म ऋषि विश्वास के घर हुआ था। रावण ने इस गांव में भगवान शिव की तपस्या भी की थी और इससे प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें बुद्धिमान और पराक्रमी होने का वरदान दिया था। दानव जाति बच गई यहां रहने वाले लोगों का तर्क है कि रावण ने राक्षस जाति को बचाने के लिए माता सीता का हरण किया था। इसके अलावा रावण को कहीं भी बुरा नहीं कहा गया है। रावण ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से अपनी लंका भगवान शिव से छीन ली थी। इसलिए यह माना जाता है कि राख को लोगों के और हमारे जीवन से नकारात्मकता को दूर करके समृद्धि में वृद्धि के संकेत के रूप में लेना चाहिए। इस कथा से जुड़ी है रावण की अस्थियां घर लाने की परंपराप्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्री राम ने रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त कर ली थी, तब उनकी सेना रावण वध और लंका पर विजय प्राप्ति के प्रमाण स्वरूप लंका की राख अपने साथ ले आई थी। यही वजह है कि लोग आज भी लंका और रावण दहन के बाद अवशेषों को अपने घर ले जाते हैं। क्या कहती हैं मान्यताएंपौराणिक ग्रंथों में जानकारी मिलती है कि स्वर्ग के कोषाध्यक्ष कुबेर रावण के भाई थे, और उन्होंने ही स्वर्ण की लंका बनाई गई थी, जिसमें रावण निवास करता था। इसलिए माना जाता है कि रावण की अस्थियां व लंका अवशेषों को घर में लाने से धन-धान्य की कमी नहीं रहती है और धन कोषाध्यक्ष कुबेर के द्वारा बनाई गई लंका के अवशेष घर में रखने से स्वयं कुबेर वास करते हैं, जिससे घर में धन स्थाई रूप से टिका रहता है। नकारात्मक ऊर्जा रहती है दूररावण के ज्ञान की प्रशंसा स्वयं भगवान श्री राम ने भी की थी और यही वजह थी कि उन्होंने अपने छोटे भ्राता लक्ष्मण को मृत्यु शैय्या पर लेटे रावण से ज्ञान लेने को को कहा था। कहा जाता है कि आज तक को रावण जैसा महाज्ञानी, पराक्रमी नहीं है। इसलिए मान्यता है कि यदि घर में रावण की अस्थियां हो तो भय से मुक्ति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है।

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Dream:सपने में जीवनसाथी से रिश्ता टूटना देता है ये संकेत

अगर आपको सपने में कभी अपने जीवनसाथी से रिश्ता टूटता हुआ  दिखे तो ये अलग बातों के संकेत देता है। आइए जानें ऐसे सपने से जुड़े मतलब के बारे में और इससे मिलने वाले सकेतों के बारे में।  हर सपने का एक आध्यात्मिक अर्थ भी होता है और यह सामान्य से अलग हो सकता है। कई बार सपने में कुछ ऐसी चीजें दिखती हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता है और कुछ सपने आपके भूत, वर्तमान और भविष्य का आइना दिखाते हैं। ऐसे ही एक सपना है जीवनसाथी से रिश्ता टूटने का सपना। ऐसा सपना आपके जीवन में कई संकेत देता है। दरअसल, ये इस बात का संकेत नहीं है कि आपका वास्तव में रिश्ता टूट रहा है बल्कि ये अन्य पहलुओं के बारे में भी बताता है। अगर आपको बार-बार ऐसे सपने दिखते हैं तो ये आपको बताते हैं कि आपको अपने रिश्ते के बारे में ज्यादा सोचने और उसे समय देने की आवश्यकता है। आइए ज्योतिषाचार्य डॉ आरती दहिया जी से जानें ऐसे सपने से मिलने वाले संकेतों के बारे में जिससे आपका पार्टनर से रिश्ता टूटता हुआ दिखाई देता है। असुरक्षा की भावना कई बार आप वही सोने में देखते हैं जो वास्तव में सोचते हैं। यदि आपको ऐसा सपना दिखे जिसमें जीवनसाथी से रिश्ता टूटने जैसी बातें दिखाई दें तो ये आपकी असुरक्षा की भावना को दिखाता है। हो सकता है कि असल जिंदगी में आपको इस बात का डर बना रहता हो कि आपके रिश्ते में कहीं दरार न पड़ जाए। ऐसा सपना आने का मतलब है कि आपको पार्टनर के साथ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है जिससे आप उन्हें अच्छी तरह से समझ सकें। बेवजह जीवनसाथी पर शक करना कई बार आपका अपने पार्टनर पर शक करना ऐसे सपने की वजह हो सकता है जिसमें आपका पार्टनर के साथ ब्रेकअप हो रहा हो। हो सकता है कि आपको असल जिंदगी में पार्टनर पर भरोसा नहीं है और आपको ऐसा लगता है कि वो आपको कभी भी धोखा दे सकता है। हालांकि ऐसा वास्तविक जीवन में भी हो ये जरूरी नहीं है। इसलिए ऐसे सपने से घबराने के बजाय पार्टनर पर भरोसा करें। कोई काम बिगड़ सकता है अगर सपने में आपको जीवनसाथी से रिश्ता टूटता हुआ दिखाई देता है तो समझें कि भविष्य में कोई बना हुआ काम बिगड़ सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि इससे वास्तव में आपका रिश्ता टूटने वाला है बल्कि कोई और काम भी बिगड़ सकता है। आपको हर एक काम सोच-समझकर करने की जरूरत है और ध्यान रखें कि कोई भी बड़ा निर्णय सोच समझकर ही लें। पारिवारिक कलह हो सकती है अगर आपको कभी ऐसा सपना दिखे कि आपका पार्टनर से ब्रेकअप हो गया है तो ये वास्तव में पारिवारिक कलह का संकेत भी हो सकता है। आपको सभी सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत है और झगड़ों से बचने की भी आवश्यकता है। पार्टनर से नाखुश होना ऐसा हो सकता है कि वास्तविक जीवन में भी आप पार्टनर से खुश न हों, इसलिए आपको ऐसे सपने दिखाई देते हों। सपने में रिश्ता टूटना इस बात का संकेत है कि आपको अपने रिश्ते को ज्यादा समय देने की जरूरत है। एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें और बेवजह मनमुटाव से बचें। नई शुरुआत ब्रेकअप का सपना देखना यह दर्शाता है कि आप अपने असल जीवन में अधिक स्वतंत्र होने की इच्छा रखती हैं। यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि आपके साथी ने आप पर कई सीमाएं लगाई हैं, जिनसे आप मुक्त होना चाहती हैं। साथ ही, हो सकता है कि आप अपने साथी पर बहुत अधिक निर्भर हो गए हों और अब आप सीमाओं से मुक्त जीवन जीने की इच्छा रखते हों। रिश्ते में अनिश्चितता आपके प्रेम या वैवाहिक जीवन में आपके लिए भविष्य क्या है, इसका स्पष्ट दृष्टिकोण न होने पर भी आपको ऐसे सपने दिखाई देते हैं। ऐसा सपना दिखने पर आपको यह सुनिश्चित करने के लिए बैठकर अपने रिश्ते का फिर से विश्लेषण करने की आवश्यकता है कि आप रिश्ते से संतुष्ट क्यों नहीं हैं। इस सपने का यह भी मतलब हो सकता है कि आप अपने पार्टनर के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अगर आपको भी रिश्ता टूटने जैसा कोई सपना दिखाई देता है तो ये आपके जीवन में मिले-जुले संकेत देता है। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर भेजें। सपने में शादी का टूटना कैसा होता है? दोस्तों यदि आपको कुछ ऐसा सपना आता है जहां सपने में शादी टूट जाती है या शादी के मंडप में दूल्हा या दुल्हन नहीं आते इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपके हाथों से शुभ कार्य होने वाला था वह सफल नहीं होता | आपके हाथों शुभ कार्य होते होते रह जाता है जिसके चलते आप पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है और आप क्रोधित भी हो सकते हैं | सपने में शादी का टुकड़ा जो भी दर्शाता है कि आपका वैवाहिक जीवन कुछ अच्छा नहीं चल रहा और आप में मतभेद होने की शंका है | यदि आप सिंगल हो तो हो सकता है कि आने वाले लंबे समय तक आपको अपना जीवन साथी नहीं मिलेगा और अपना मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए आपको और भी वेट करना पड़ेगा | सपने में शादी का टूटना का क्या मतलब होता है? दोस्तों यदि आपको कुछ ऐसा सपना आता है जहां सपने में शादी टूट जाती है या शादी के मंडप में दूल्हा या दुल्हन नहीं आते इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपके हाथों से शुभ कार्य होने वाला था वह सफल नहीं होता | आपके हाथों शुभ कार्य होते होते रह जाता है जिसके चलते आप पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है और आप क्रोधित भी हो सकते हैं | सपने में शादी का टुकड़ा जो भी दर्शाता है कि आपका वैवाहिक जीवन कुछ अच्छा नहीं चल रहा और आप में मतभेद होने की शंका है | यदि आप सिंगल हो तो हो सकता है कि आने वाले लंबे समय तक आपको अपना

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निधिवन का रहस्य, क्या सच में रास रचाने आते हैं रात में राधा कृष्ण ?

धार्मिक नगरी वृन्दावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, रहस्यमयी धार्मिक स्थान है। मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं। रास के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। रंग महल में आज भी प्रसाद (माखन मिश्री) प्रतिदिन रखा जाता है। शयन के लिए पलंग लगाया जाता है। सुबह बिस्तरों के देखने से प्रतीत होता है कि यहां निश्चित ही कोई रात्रि विश्राम करने आया तथा प्रसाद भी ग्रहण किया है। लगभग दो ढ़ाई एकड़ क्षेत्रफल में फैले निधिवन के वृक्षों की खासियत यह है कि इनमें से किसी भी वृक्ष के तने सीधे नहीं मिलेंगे तथा इन वृक्षों की डालियां नीचे की ओर झुकी तथा आपस में गुंथी हुई प्रतीत हाते हैं। निधिवन परिसर में ही संगीत सम्राट एवं धुपद के जनक श्री स्वामी हरिदास जी की जीवित समाधि, रंग महल, बांके बिहारी जी का प्राकट्य स्थल, राधारानी बंशी चोर आदि दर्शनीय स्थान है। निधिवन दर्शन के दौरान वृन्दावन के पंडे-पुजारी, गाईड द्वारा निधिवन के बारे में जो जानकारी दी जाती है, उसके अनुसार निधिवन में प्रतिदिन रात्रि में होने वाली श्रीकृष्ण की रासलीला को देखने वाला अंधा, गूंगा, बहरा, पागल और उन्मादी हो जाता है ताकि वह इस रासलीला के बारे में किसी को बता ना सके। सुबह मिलती है गीली दातून इसी कारण रात्रि 8 बजे के बाद पशु-पक्षी, परिसर में दिनभर दिखाई देने वाले बन्दर, भक्त, पुजारी इत्यादि सभी यहां से चले जाते हैं। और परिसर के मुख्यद्वार पर ताला लगा दिया जाता है। उनके अनुसार यहां जो भी रात को रुक जाते है वह सांसारिक बन्धन से मुक्त हो जाते हैं और जो मुक्त हो गए हैं, उनकी समाधियां परिसर में ही बनी हुई है। इसी के साथ गाईड यह भी बताते हैं कि निधिवन में जो 16000 आपस में गुंथे हुए वृक्ष आप देख रहे हैं, वही रात में श्रीकृष्ण की 16000 रानियां बनकर उनके साथ रास रचाती हैं। रास के बाद श्रीराधा और श्रीकृष्ण परिसर के ही रंग महल में विश्राम करते हैं। सुबह 5:30 बजे रंग महल का पट खुलने पर उनके लिए रखी दातून गीली मिलती है और सामान बिखरा हुआ मिलता है जैसे कि रात को कोई पलंग पर विश्राम करके गया हो। निधिवन के रहस्य का असली कारण सच तो यह है, कि निधिवन का वास्तु ही कुछ ऐसा है, जिसके कारण यह स्थान रहस्यमय-सा लगता है और इस स्थिति का लाभ उठाते हुए अपने स्वार्थ के खातिर इस भ्रम तथा छल को फैलाने में वहां के पंडे-पुजारी और गाईड लगे हुए हैं, जबकि सच इस प्रकार है – अनियमित आकार के निधिवन के चारों तरफ पक्की चारदीवारी है। परिसर का मख्यद्वार पश्चिम दिशा में है। परिसर का नऋत्य कोण बढ़ा हुआ है और पूर्व दिशा तथा पूर्व ईशान कोण दबा हुआ है। गाइर्ड जो 16000 वृक्ष होने की बात करते हैं वह भी पूरी तरह झूठ है क्योंकि परिसर का आकार इतना छोटा है कि 1600 वृक्ष भी मुश्किल से होंगे और छतरी की तरह फैलाव लिए हुए कम ऊँचाई के वृक्षों की शाखाएं इतनी मोटी एवं एवं मजबूत भी नहीं है कि दिन में दिखाई देने वाले बंदर रात्रि में इन पर विश्राम कर सकें इसी कारण वह रात्रि को यहाँ से चले जाते हैं। इसलिए मिलती है गीली दातून इस परिसर की चारदीवारी लगभग 10 फीट ऊंची है और बाहर के चारों ओर रिहायशी इलाका है जहां चारों ओर दो-दो, तीन-तीन मंजिला ऊँचे मकान बने हुए है और इन घरों से निधिवन की चारदीवार के अन्दर के भाग को साफ-साफ देखा जा सकता है। वह स्थान जहाँ रात्रि के समय रासलीला होना बताया जाता है वह निधिवन के मध्य भाग से थोड़ा दक्षिण दिशा की ओर खुले में स्थित है। यदि सच में रासलीला देखने वाला अंधा, गूंगा, बहरा हो जाए या मर जाए तो ऐसी स्थिति में निश्चित ही आस-पास के रहने वाले यह इलाका छोड़कर चले गए हाते। निधिवन के अन्दर जो 15-20 समाधियां बनी हैं वह स्वामी हरिदास जी और अन्य आचार्यों की समाधियां हैं जिन पर उन आचार्यों  के नाम और मृत्यु तिथि के शिलालेख लगे है। इसका उल्लेख निधिवन में लगे उत्तरप्रदेश पर्यटन विभाग के शिलालेख पर भी किया गया है। इन्हीं समाधियों की आड़ में ही गाईड यह भम्र फैलाते है कि जो रासलीला देख लेता है वह सांसारिक बन्धन से मुक्त हो जाता है और यह सभी उन्हीं की समाधियां हैं। रंगमहल के अन्दर जो दातून गीली और सामान बिखरा हुआ मिलता है। यह भ्रम इस कारण फैला हुआ है कि रंग महल के नैऋत्य कोण में रंग महल के अनुपात में बड़े आकार का ललित कुण्ड है जिसे विशाखा कुण्ड भी कहते हैं। जिस स्थान पर नैऋत्य कोण में यह स्थिति होती है वहां इस प्रकार का भ्रम और छल आसानी से निर्मित हो जाता है। यहां जो वृक्ष आपस में गुंथे हुए हैं इसी प्रकार के वृक्ष वृन्दावन में सेवाकुंज एवं यमुना के तटीय स्थानों पर भी देखने को मिलते है। निधिवन के प्रसिद्घ होने के कारण वास्तुशास्त्र के अनुसार किसी भी स्थान की प्रसिद्धि के लिए उसकी उत्तर दिशा में नीचाई होना आवश्यक होता है और यदि इस नीचाई के साथ वहां पानी भी आ जाता है तो पानी प्रसिद्धि को बढ़ाने में बूस्टर की तरह काम करता है। विश्व में जो भी स्थान प्रसिद्धि प्राप्त किया हुआ है उसकी उत्तर दिशा में नीचाई के साथ-साथ भारी मात्रा में पानी का जमाव या बहाव अवश्य होता है। यदि उत्तर दिशा के साथ पूर्व दिशा और ईशान कोण में नीचाई एवं पानी आ जाए तो यह सभी मिलकर उस स्थान को और अधिक प्रसिद्धि दिलाने के साथ-साथ आस्था बढ़ाने में भी सहायक होता है। यहां यमुना नदी वृंदावन की उत्तर दिशा से पूर्व दिशा की ओर घुमकर दक्षिण दिशा की ओर निकल गई है। वृंदावन की उत्तर दिशा में यमुना नदी के होने से वृन्दावन प्रसिद्ध है। और निधिवन वृन्दावन नगर के उत्तरी भाग में स्थित है जहां से यमुना नदी लगभग 300 मीटर दूरी पर स्थित है। उत्तर दिशा की वास्तुनुकूलता के कारण निधिवन प्रसिद्ध है। इसी के साथ निधिवन परिसर को उत्तर ईशान, पूर्व ईशान और दक्षिण आग्नेय का मार्ग प्रहार हो रहा

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आखिर हम 90 फीसदी सपने देखने के बाद उन्हें भूल क्यों जाते हैं, जान लीजिए कारण

सोने के दौरान हम कई बार रैपिड आई मूवमेंट से गुजरते हैं और इसी दौरान हमें सपने दिखाई देते हैं. यह मूवमेंट सोने के 10 मिनट बाद ही शुरू हो जाता है. सोते समय सपने देखना हमारे जीवन के काफी करीब से जुड़ा हुआ है. यूं तो सपनों पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं होता, इसी वजह से हमें अच्छे और बुरे सपने दोनों आते हैं. हालांकि, सपनों में दिखाई देने वाले दृश्य बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन थोड़े बहुत हमारी जिंदगी से अवश्य जुड़े होते हैं. अब सपनों को लेकर जो कुछ साधारण बातें हैं, उनके बारे में बताने की कोई खास जरूरत नहीं है क्योंकि आप भी सपने देखते हैं और आप अगर सपने देखते हैं तो आप ये भी जानते होंगे कि आप रात में सोते हुए जितने सपने देखते हैं, उनमें से ज्यादातर सपने नींद खुलते ही भूल जाते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि हम कुल देखे जाने वाले सपनों में से करीब 90 फीसदी सपनों को याद नहीं रख पाते और उन्हें भूल जाते हैं. लेकिन ऐसा होता क्यों है कि हम ज्यादातर सपने भूल जाते हैं? आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देंगे. सोने के दौरान रैपिड आई मूवमेंट से गुजरते हैं हम सपनों को लेकर वैज्ञानिकों ने तमाम रिसर्च और स्टडी की है. वैज्ञानिकों की मानें तो सोने के दौरान हम कई बार रैपिड आई मूवमेंट से गुजरते हैं और इसी दौरान हमें सपने दिखाई देते हैं. यह मूवमेंट सोने के 10 मिनट बाद ही शुरू हो जाता है. दरअसल, सोते वक्त के दौरान हमारा दिमाग पूरी तरह से शांत नहीं होता और एक्टिव मोड में रहता है. इस समय दिमाग में कुछ न कुछ चीजें चल रही होती हैं और यही वजह है कि हमें सपने दिखाई देते हैं. रात में सोने के बाद हर डेढ़ घंटे के अंतराल में हम में होते हैं. की ये अवधि करीब 20 से 25 मिनट तक रहती है और इसी दौरान हम तरह-तरह के सपने देखते हैं. इस तरह के लोगों को नहीं याद रहते सपने अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में नींद को लेकर स्टडी करने वाले रॉबर्ट स्टिकगोल्ड ने बीबीसी के साथ बातचीत करते हुए बताया कि कई लोग सपने में देखे गए दृश्यों को भूल जाते हैं जबकि कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें अपने सपने याद रहते हैं. स्टिकगोल्ड के मुताबिक इन दोनों परिस्थितियों के पीछे अलग-अलग वजह होती हैं. रॉबर्ट स्टिकगोल्ड की मानें तो जो लोग एक निश्चित समय पर सोते हैं और अलार्म बजने के बाद उठकर तुरंत ऑफिस जाने की तैयारियों में लग जाते हैं, ऐसे लोगों को सपने याद रखने की संभावना बहुत कम होती है. वहीं दूसरी ओर, जिन लोगों के पास ज्यादा काम नहीं होता और नींद खुलने के बाद भी आंखें बंद किए रहते हैं, उन्हें सपने भूलने की संभावना बहुत कम होती है. आपको बता दें कि कई रिपोर्ट में ये भी कहा जाता है कि जो लोग सपने भूल जाते हैं, वे मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं जबकि जिन लोगों को कई सपने याद रहते हैं वे मानसिक रूप से थोड़े अस्थिर हो सकते हैं. अधूरी नींद है कारण परेशान कर देने वाले सपनों का आना हमारी नींद के पूरी न होने से संबंध है.हमारा दिमाग नींद की कमी को पूरा करने के के लिए इस तरह के सपने दिखाता है. परेशान कर देने वाले सपने आने की यह प्रक्रिया नींद की रैपिड आई मूवमेंट स्टेज में होती है.  रैपिड आई मूवमेंट का मतलब होता है नींद के हर एक चक्र की आखिरी स्टेज पर आती है. यह वो समय है जिसमें व्यक्ति को सबसे ज्यादा सपने आते हैं.आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रात की नींद के कुल 4 से 6 चक्र होते है. तनाव है बड़ा कारण अक्सर काम का तनाव अन्य तमाम वजहों से होने वाले वाले तनाव की वजह से लोगों को नींद नहीं आती है. ऐसे में नींद के अधूरेपन के बीच व्यक्ति को जब भी गहरी और भरपूर नींद आती है तो रैपिड आई मूवमेंट नींद की स्टेज बढ़ जाती है .इसकी वजह से व्यक्ति को अधिक गहरे सपने आते हैं और कई बार ये सपने बहुत डरावने होते हैं.

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आपके सपने में कोई दूसरा व्यक्ति क्यों आता है

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पेट की गड़बड़ी के कारण भी सपने अजीबोगरीब आते हैं. यानी अगर आपका पेट गड़बड़ है तो आपको बुरे सपने आ सकते हैं. सपने हर सजीव जीव को आते हैं. खासतौर से इंसान सपने ज्यादा देखते हैं. कई बार हम ऐसे सपने देखते हैं जिनका कोई सिरपैर नहीं होता. वहीं कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिनमें हम अपने जीवन का एक हिस्सा जी रहे होते हैं. यानी उस सपने में हम वह कार्य कर रहे होते हैं, जिसके बारे में हमने सोने से पहसे सोचा था. या फिर वो बात हमारे दिमाग में काफी दिनों से चल रही थी. लेकिन इन सब के बीच एक सपना ऐसा होता है, जिसे लेकर सब हैरान होते हैं. ये सपने होते तो आपके हैं, लेकिन उनमें दिखाई दूसरे लोग देते हैं, कई बार ये दूसरे लोग आप पर हावी भी हो जाते हैं. आज इस आर्टिकल में इसी के पीछे की साइंस समझने की कोशिश करेंगे. कोई आपके सपने में क्यों आता है? द ओरेकल ऑफ नाइट: द हिस्ट्री ऑफ साइंस ऑफ ड्रीम्स के लेखक और न्यूरोसाइंटिस्ट सिद्धार्थ रिबेइरो मानते हैं कि जब आपके सपने में कोई दूसरा व्यक्ति आता है तो इसका मतलब है कि वह व्यक्ति आपके जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. आप भावनात्मक रूप से इस व्यक्ति से बहुत जुड़े हुए हैं. ये भावनात्मक जुड़ाव प्रेम, नफरत, गुस्सा किसी भी भाव का हो सकता है और जैसा भाव आपके मन में उस व्यक्ति के प्रति होगा वह उसी तरह का बर्ताव आपसे आपके सपने में करता है. जैसे कि अगर आपके मन में किसी के लिए प्रेम है तो वह व्यक्ति सपने में आपसे प्रेम करेगा और अगर आपके मन में उस व्यक्ति के लिए गुस्सा, डर या नफरत है तो वह व्यक्ति आपके सपने में आपके साथ उसी तरह का बर्ताव करेगा. क्या हम सपनों को समझ सकते हैं? मनोचिकित्सक रेचल राइट अपने एक इंटरव्यू में बताती हैं कि आप हर रोज कई तरह के सपने देखते हैं, ऐसे में उनकी व्याख्या करना और उन्हें असली जिंदगी में समझना बेहद मुश्किल होता है. कई बार हम सपने में खुद को उड़ता देखते हैं तो कई बार हम सपने में खुद को अमीर देखते हैं या फिर सपने में हम डर रहे होते हैं. ये हर भाव हमारे दिमाग की उपज होती है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पेट की गड़बड़ी के कारण भी सपने अजीबोगरीब आते हैं. यानी अगर आपका पेट गड़बड़ है तो आपको बुरे सपने आ सकते हैं. सपनों को ऐसे समझें तो सुलझ जाएगा रहस्य कभी आप सपने में  कभी आप किसी जंगल में भटक जाते हैं तो कभी आप देखते हैं कि आप एग्जाम दे रहे हैं या कभी आप सपने में देखते हैं कि आप किसी ऊंची बिल्डिंग से गिर रहे हैं.  हम सब कुछ एक सपना समझकर भूल जाते हैं लेकिन हर सपने का कुछ मतलब होता है. सपने अचेतन अवस्था में बोले गए शब्दों की तरह हैं. सपने में हम जो भी देखते हैं, उसका कोई ना कोई अर्थ जरूर होता है. हम अपने सपने पढ़ सकते हैं अगर हम उन्हें समझने की कोशिश करें तो. आइए जानते हैं आखिर ये सपने हमसे क्या कहना चाहते हैं..किसी दोस्त या रिश्तेदार की मौत को देखना:  किसी प्रिय या करीबी की मौत देखने का मतलब है कि आपके जीवन में कुछ बदलाव आने वाले हैं.  कुछ पुरानी चीजें आपकी जिंदगी से बाहर निकलेंगी और नई चीजें उनकी जगह लेंगी. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि आप किसी बुरे दौर से निकलने की कोशिश कर रहे हों.अगर आप सपने में देखते हैं कि कोई आपका पीछा कर रहा है तो इसका मतलब यह है कि आप अपनी लाइफ में किसी समस्या को सुलझाने के बजाए उससे भाग रहे हैं. आपका मस्तिष्क आपको यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि आपको अपनी जिंदगी की उलझनों का सामना करना चाहिए, उनसे भागना नहीं चाहिए. या फिर आप अगर देखते हैं कि आप भागना चाह रहे हैं लेकिन आपका कदम ही नहीं उठ रहा है तो इसके मायने यह है कि आपके अंदर आत्मविश्वास की कमी है.कई बार आप सपने में देखते हैं कि आप अंधेरे में फंसे हुए हैं. यह सपना कहता है कि आप किसी काम में बार-बार असफल हो रहे हैं. इस तरह के सपने किसी तरह के डर, बुराई, अज्ञानता, अचेतन अवस्था से है. आप अपनी जिंदगी में किसी विषय पर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं और उसे लेकर संशय में हैं. अंधेरे में भटकने का मतलब है कि आपके अंदर निराशा, असुरक्षा या अवसाद है.कई बार आप सपने में देखते हैं कि आप ऊंचाई से गिर रहे हैं. इस सपने का संकेत यह है कि आपको कोई फिक्र सता रही है. आपको सफलता की सीढ़ी चढ़ने के बाद असफलता से डर लग रहा है.सपने में रोते हैं:  सपने में खुद को रोते हुए या चिल्लाते हुए देखना यह बताता है कि आप अपने अतीत से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. इसका एक दूसरा मतलब यह है कि आपको बेचैनी, दुख, पीड़ा, उलझन, तनाव, अवसाद जैसी भावनाएं घेरे हुए हैं. अगर आपने सपने में देखा है कि आप किसी को मार रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप मर्डरर हैं. इसका मतलब है कि आपके अंदर खुद को लेकर या किसी और के प्रति गुस्सा भरा हुआ है. आपके अंदर किसी से बदला लेने की तीव्र भावना है या फिर आप अपनी किसी आदत से छुटकारा पाना चाह रहे हैं. कई बार आप बेहद अटपटे से सपने देखते हैं. आप अगर अपने सपने में देखते हैं कि आप न्यूड हैं तो इसकी सामान्य व्याख्या यह हो सकती है कि असुरक्षा, अपमान, शर्म या फिर आहत होने की भावनाएं आपको घेरे हुए हैं. एक दूसरा मतलब यह हो सकता है कि आप अपने मुखौटे को हटाकर बिल्कुल नैचुरल होना चाहते हैं. सपने में न्यूडिटी देखने को आजादी पाने और बंधन तोड़ने की इच्छा से भी देखा जा सकता है. कई बार आप देखते होंगे कि आप एग्जाम दे रहे हैं या फिर आपका एग्जाम देने जा रहे हैं. आपके व्यक्तित्व और जिंदगी का मूल्यांकन किया जा रहा

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Dream: सपने में गाय का दिखना किन बातों का है संकेत? जानें इस सपने का सही अर्थ

सपने हमारे जीवन से जुड़ी सफलता और असफलता का भी संकेत देते हैं. सपने में यदि गाय दिखाई दे तो इसका क्या अर्थ होता है? आइए जानते हैं. जीवन में घटित होने वाली अच्छी और बुरी चीजों के बारे में हमें पहले से ही संकेत मिलने लगते हैं. समय रहते यदि इन चीजों के सही अर्थ जान लें तो बड़ी असफलताओं और हानि से भी बचा जा सकता है. सोते समय हम जो भी सपना देखते हैं, उसके खास मतलब भी होते हैं. इसलिए सपने में दिखाई देने वाली चीजों को नजरअंदाज न करें. इनके अर्थ को समझने की कोशिश करें क्योंकि ये चीजें कभी-कभी आपकी किस्मत बदलने का संकेत भी हो सकती हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार गाय को यदि सपने में देखते हैं तो इसके गंभीर अर्थ होते हैं. गाय को अति पवित्र माना गया है. शास्त्रों में कामधेनु गाय का वर्णन मिलता है. पौराणिक कथा के अनुसार कामधेनु गाय की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी. समुद्र मंथन देवता और असुरों के मध्य हुआ था. समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ अन्य 14 रत्न प्राप्त हुए थे. जिसमें से एक कामधेनु गाय भी थी. हिंदू धर्म में गाय को पवित्र और वातावरण को ऊर्जामय बनाने वाला भी माना गया है. पशुधन में गाय को विशेष महत्व प्रदान किया गया है. सपने में गाय का दिखनासपने में गाय का दिखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार अत्यंत शुभ माना गया है. गाय का दिखना इस बात का भी संकेत है कि आपको जीवन में सुखों की प्राप्ति होने वाली है. इसके साथ ही सपने में सफेद रंग की गाय दिखाई दे तो इसका मतलब ये है कि सफेद रंग से जुड़ी चीजों से लाभ मिलने वाला है. जो लोग सफेद रंग से जुड़ी वस्तुओं का व्यापार आदि करते हैं, उन्हें विशेष लाभ होता है. इसके साथ ही यदि गाय के साथ बछड़ा भी दिखाई देता है तो ये अत्यंत शुभ फल देना वाला माना गया है. इस सपने का अर्थ होता है कि आने वाले दिनों में धन से जुड़ी चीजों में वृद्धि होने वाली है. इसे एक शुभ शगुन के तौर पर माना जाता है. सावन के महीने में इस सपने को देखना बहुत शुभ माना जाता है. सपने में गाय दिखना सपने में गाय या बछिया या बछड़ा देखना शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि आने वाला समय आपके अनुकूल हो सकता है। उनकी सभी समस्याओं का अंत हो सकता है और लाभ हो सकता है।  सपने में गाय के थन से दूध पीनासपने में यदि आप स्वयं को गाय के थन से दूध पीते देखते हैं तो यह एक अच्छा संकेत है। इस प्रकार का स्वप्न यह संकेत देता है कि भोजन से संबंधित जो भी समस्याएं हैं, वह जल्दी ही खत्म हो सकती हैं। इसका अर्थ है कि घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहेगी।  सपने में गाय का बछड़ा दिखनासपने में गाय का बछड़ा दिखना धनलाभ का संकेत माना गया है। इसका एक अन्य अर्थ यह भी है कि जल्द ही जीवन में खुशियां आ सकती हैं।

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