LAKSHMI

Lakshmanakritam

shrIlakShmInArAyaNakavacham:श्रीलक्ष्मीनारायणकवचम्

shrIlakShmInArAyaNakavacham: श्रीलक्ष्मीनारायणकवचम् श्रीगणेशाय नमः ।श्रीभैरव उवाच ।अधुना देवि वक्ष्यामि लक्ष्मीनारायणस्य ते ।कवचं मन्त्रगर्भं च वज्रपञ्जरकाख्यया ॥ १॥ श्रीवज्रपञ्जरं नाम कवचं परमाद्भुतम् ।रहस्यं सर्वदेवानां साधकानां विशेषतः ॥ २॥ यं धृत्वा भगवान् देवः प्रसीदति परः पुमान् ।यस्य धारणमात्रेण ब्रह्मा लोकपितामहः ॥ ३॥ ईश्वरोऽहं शिवो भीमो वासवोऽपि दिवस्पतिः ।सूर्यस्तेजोनिधिर्देवि चन्द्रर्मास्तारकेश्वरः ॥ ४॥ वायुश्च बलवांल्लोके वरुणो यादसाम्पतिः ।कुबेरोऽपि धनाध्यक्षो धर्मराजो यमः स्मृतः ॥ ५॥ यं धृत्वा सहसा विष्णुः संहरिष्यति दानवान् ।जघान रावणादींश्च किं वक्ष्येऽहमतः परम् ॥ ६॥ कवचस्यास्य सुभगे कथितोऽयं मुनिः शिवः ।त्रिष्टुप् छन्दो देवता च लक्ष्मीनारायणो मतः ॥ ७॥ रमा बीजं परा शक्तिस्तारं कीलकमीश्वरि ।भोगापवर्गसिद्ध्यर्थं shrIlakShmInArAyaNakavacham विनियोग इति स्मृतः ॥ ८॥ ॐ अस्य श्रीलक्ष्मीनारायणकवचस्य शिवः ऋषिः ,त्रिष्टुप् छन्दः , श्रीलक्ष्मीनारायण देवता ,श्रीं बीजं , ह्रीं शक्तिः , ॐ कीलकं ,भोगापवर्गसिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः ।अथ ध्यानम् ।पूर्णेन्दुवदनं पीतवसनं कमलासनम् ।लक्ष्म्या श्रितं चतुर्बाहुं लक्ष्मीनारायणं भजे ॥ ९॥ shrIlakShmInArAyaNakavacham: अथ कवचम् ।ॐ वासुदेवोऽवतु मे मस्तकं सशिरोरुहम् ।ह्रीं ललाटं सदा पातु लक्ष्मीविष्णुः समन्ततः ॥ १०॥ ह्सौः नेत्रेऽवताल्लक्ष्मीगोविन्दो जगतां पतिः ।ह्रीं नासां सर्वदा पातु लक्ष्मीदामोदरः प्रभुः ॥ ११॥ श्रीं मुखं सततं पातु देवो लक्ष्मीत्रिविक्रमः ।लक्ष्मी कण्ठं सदा पातु देवो लक्ष्मीजनार्दनः ॥ १२॥ नारायणाय बाहू मे पातु लक्ष्मीगदाग्रजः ।नमः पार्श्वौ सदा पातु लक्ष्मीनन्दैकनन्दनः ॥ १३॥ अं आं इं ईं पातु वक्षो ॐ लक्ष्मीत्रिपुरेश्वरः ।उं ऊं ऋं ॠं पातु कुक्षिं ह्रीं लक्ष्मीगरुडध्वजः ॥ १४॥ लृं लॄं एं ऐं पातु पृष्ठं ह्सौः लक्ष्मीनृसिंहकः ।ओं औं अं अः पातु नाभिं ह्रीं लक्ष्मीविष्टरश्रवः ॥ १५॥ कं खं गं घं गुदं पातु श्रीं लक्ष्मीकैटभान्तकः ।चं छं जं झं पातु शिश्र्नं लक्ष्मी लक्ष्मीश्वरः प्रभुः ॥ १६॥ टं ठं डं ढं कटिं पातु नारायणाय नायकः ।तं थं दं धं पातु चोरू नमो लक्ष्मीजगत्पतिः ॥ १७॥ पं फं बं भं पातु जानू ॐ ह्रीं लक्ष्मीचतुर्भुजः ।यं रं लं वं पातु जङ्घे ह्सौः लक्ष्मीगदाधरः ॥ १८॥ शं षं सं हं पातु गुल्फौ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीरथाङ्गभृत् ।ळं क्षः पादौ सदा पातु मूलं लक्ष्मीसहस्रपात् ॥ १९॥ ङं ञं णं नं मं मे पातु लक्ष्मीशः सकलं वपुः ।इन्द्रो मां पूर्वतः पातु वह्निर्वह्नौ सदावतु ॥ २०॥ यमो मां दक्षिणे पातु नैरृत्यां निरृतिश्च माम् ।वरुणः पश्चिमेऽव्यान्मां वायव्येऽवतु मां मरुत् ॥ २१॥ उत्तरे धनदः shrIlakShmInArAyaNakavacham पायादैशान्यामीश्वरोऽवतु ।वज्रशक्तिदण्डखड्ग पाशयष्टिध्वजाङ्किताः ॥ २२॥ सशूलाः सर्वदा पान्तु दिगीशाः परमार्थदाः ।अनन्तः पात्वधो नित्यमूर्ध्वे ब्रह्मावताच्च माम् ॥ २३॥ दशदिक्षु सदा पातु लक्ष्मीनारायणः प्रभुः ।प्रभाते पातु मां विष्णुर्मध्याह्ने वासुदेवकः ॥ २४॥ दामोदरोऽवतात् सायं निशादौ नरसिंहकः ।सङ्कर्षणोऽर्धरात्रेऽव्यात् प्रभातेऽव्यात् त्रिविक्रमः ॥ २५॥ अनिरुद्धः सर्वकालं विश्वक्सेनश्च सर्वतः ।रणे राजकुले द्युते विवादे शत्रुसङ्कटेॐ ह्रीं ह्सौः ह्रीं श्रीं मूलं लक्ष्मीनारायणोऽवतु ॥ २६॥ ॐॐॐरणराजचौररिपुतः पायाच्च मां केशवःह्रींह्रींह्रींहह्हाह्सौः ह्सह्सौः वह्नेर्वतान्माधवः ।ह्रींह्रींह्रींजलपर्वताग्निभयतः पायादनन्तो विभुःश्रींश्रींश्रींशशशाललं प्रतिदिनं लक्ष्मीधवः पातु माम् ॥ २७॥ इतीदं कवचं दिव्यं वज्रपञ्जरकाभिधम् ।लक्ष्मीनारायणस्येष्टं shrIlakShmInArAyaNakavacham चतुर्वर्गफलप्रदम् ॥ २८॥ सर्वसौभाग्यनिलयं सर्वसारस्वतप्रदम् ।लक्ष्मीसंवननं तत्त्वं परमार्थरसायनम् ॥ २९॥ मन्त्रगर्भं जगत्सारं रहस्यं त्रिदिवौकसाम् ।दशवारं पठेद्रात्रौ रतान्ते वैष्णवोत्तमः ॥ ३०॥ स्वप्ने वरप्रदं पश्येल्लक्ष्मीनारायणं सुधीः ।त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं कवचं मन्मुखोदितम् ॥ ३१॥ स याति परमं धाम वैष्णवं वैष्णवेश्वरः ।महाचीनपदस्थोऽपि यः पठेदात्मचिन्तकः ॥ ३२॥ आनन्दपूरितस्तूर्णं लभेद् मोक्षं स साधकः ।गन्धाष्टकेन विलिखेद्रवौ भूर्जे जपन्मनुम् ॥ ३३॥ पीतसूत्रेण संवेष्ट्य सौवर्णेनाथ वेष्टयेत् ।धारयेद्गुटिकां मूर्ध्नि लक्ष्मीनारायणं स्मरन् ॥ ३४॥ रणे रिपुन् विजित्याशु कल्याणी गृहमाविशेत् ।वन्ध्या वा काकवन्ध्या वा मृतवत्सा च याङ्गना ॥ ३५॥ सा बध्नीयान् कण्ठदेशे लभेत् पुत्रांश्चिरायुषः ।गुरुपदेशतो धृत्वा गुरुं ध्यात्वा मनुं जपन् ॥ ३६॥ वर्णलक्षपुरश्चर्या shrIlakShmInArAyaNakavacham फलमाप्नोति साधकः ।बहुनोक्तेन किं देवि कवचस्यास्य पार्वति ॥ ३७॥ विनानेन न सिद्धिः स्यान्मन्त्रस्यास्य महेश्वरि ।सर्वागमरहस्याढ्यं तत्त्वात् तत्त्वं परात् परम् ॥ ३८॥ अभक्ताय न दातव्यं कुचैलाय दुरात्मने ।दीक्षिताय कुलीनाय स्वशिष्याय महात्मने ॥ ३९॥ महाचीनपदस्थाय दातव्यं कवचोत्तमम् ।गुह्यं गोप्यं महादेवि लक्ष्मीनारायणप्रियम् ।वज्रपञ्जरकं वर्म गोपनीयं स्वयोनिवत् ॥ ४०॥ ॥ इति श्रीरुद्रयामले तन्त्रे श्रीदेवीरहस्येलक्ष्मीनारायणकवचं सम्पूर्णम् ॥

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ShrImahAlakShmI kavacham: श्रीमहालक्ष्मीकवचम्

ShrImahAlakShmI kavacham: श्रीमहालक्ष्मीकवचम् श्री गणेशाय नमः ।अस्य श्रीमहालक्ष्मीकवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्री छन्दःमहालक्ष्मीर्देवता महालक्ष्मीप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।इन्द्र उवाच । समस्तकवचानां तु तेजस्वि कवचोत्तमम् ।आत्मरक्षणमारोग्यं सत्यं त्वं ब्रूहि गीष्पते ॥ १॥ श्रीगुरुरुवाच । महालक्ष्म्यास्तु कवचं प्रवक्ष्यामि समासतः ।चतुर्दशसु लोकेषु रहस्यं ब्रह्मणोदितम् ॥ २॥ ब्रह्मोवाच । शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटममृतोद्भवा ।चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागराम्बुजा ॥ ३॥ घ्राणं पातु वरारोहा जिह्वामाम्नायरूपिणी ।मुखं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं वैकुण्ठवासिनी ॥ ४॥ स्कन्धौ मे जानकी पातु भुजौ भार्गवनन्दिनी ।बाहू द्वौ द्रविणी पातु करौ हरिवराङ्गना ॥ ५॥ वक्षः पातु च श्रीर्देवी हृदयं हरिसुन्दरी ।कुक्षिं च वैष्णवी पातु नाभिं भुवनमातृका ॥ ६॥ कटिं च पातु वाराही सक्थिनी देवदेवता ।ऊरू नारायणी पातु जानुनी चन्द्रसोदरी ॥ ७॥ इन्दिरा पातु जंघे मे पादौ भक्तनमस्कृता ।नखान् तेजस्विनी पातु सर्वाङ्गं करुणामयी ॥ ८॥ ब्रह्मणा लोकरक्षार्थं निर्मितं कवचं श्रियः ।ये पठन्ति महात्मानस्ते च धन्या जगत्त्रये ॥ ९॥ कवचेनावृताङ्गनां ShrImahAlakShmI जनानां जयदा सदा ।मातेव सर्वसुखदा भव त्वममरेश्वरी ॥ १०॥ भूयः सिद्धिमवाप्नोति पूर्वोक्तं ब्रह्मणा स्वयम् ।लक्ष्मीर्हरिप्रिया पद्मा एतन्नामत्रयं स्मरन् ॥ ११॥ नामत्रयमिदं जप्त्वा स याति परमां श्रियम् ।यः पठेत्स च धर्मात्मा सर्वान्कामानवाप्नुयात् ॥ १२॥ ॥ इति श्रीब्रह्मपुराणे इन्द्रोपदिष्टं महालक्ष्मीकवचं सम्पूर्णम् ॥

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ShrIdIpalakShmIstotram: श्रीदीपलक्ष्मीस्तोत्रम्

ShrIdIpalakShmIstotram: श्रीदीपलक्ष्मीस्तोत्रम् दीपस्त्वमेव जगतां दयिता रुचिस्ते,दीर्घं तमः प्रतिनिवृत्यमितं युवाभ्याम् ।स्तव्यं स्तवप्रियमतः शरणोक्तिवश्यंस्तोतुं भवन्तमभिलष्यति जन्तुरेषः ॥ दीपः पापहरो नॄणां दीप आपन्निवारकःदीपो विधत्ते सुकृतिं दीपस्सम्पत्प्रदायकः ।देवानां तुष्टिदो दीपः पितॄणां प्रीतिदायकःदीपज्योतिः परम्ब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ॥ दीपो हरतु मे पापं सन्ध्यादीप नमोऽस्तु ते ॥ फलश्रुतिःया स्त्री पतिव्रता लोके गृहे दीपं तु पूरयेत् ।दीपप्रदक्षिणं कुर्यात् सा भवेद्वै सुमङ्गला ॥ इति श्रीदीपलक्ष्मीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

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Vilakku Puja Date 2025: विलक्कु पूजा विधि, महत्त्व और लाभ

Vilakku Puja: विलक्कु पूजा, भाग्य और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी का प्रतीक है। एक समय में बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से महालक्ष्मी की पूजा दीप जलाकर किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और दुनिया में शांति आती है। थिरु विलक्कु पूजा, ज्यादातर शुक्रवार को या तो सुबह या शाम को दीपक जलाकर की जाती है। यह मुख्य रूप से तमिल महीनों, चिथिरई और वैगासी के दौरान की जाती है, और यह पवित्र दीप पूजा अमावस और पूर्णिमा के दिनों में भी की जा सकती है। Vilakku Puja : विलक्कु पूजा विलक्कु पूजा में एक पारंपरिक दीपक (कुथु विलक्कु) को सजाकर, उसमें घी या तिल का तेल भरकर, दीपक जलाया जाता है। यह पूजा घर में या मंदिर में एकल या सामूहिक रूप से की जा सकती है। विशेष अवसरों पर, 108 या 1008 दीपकों के साथ सामूहिक पूजा का आयोजन भी होता है। Vilakku Puja Kya Hota Hai: कुथु विलक्कू क्या होता है? कुथु विलक्कू का मतलब है खड़ा हुआ तेल का दीपक, जो कि अज्ञानता को दूर करने और हमारे भीतर दिव्य प्रकाश के जागरण का प्रतीक है। Vilakku Puja 2025 Dates: विलक्कु पूजा 2025 की तिथियाँ विलक्कु पूजा मुख्यतः शुक्रवार को की जाती है, और 2025 में इसकी प्रमुख तिथियाँ निम्नलिखित हैं:​ 108 पोत्री (स्तुति) विलक्कु पूजा के दौरान 108 पोत्री का पाठ किया जाता है, जिसमें देवी की विभिन्न रूपों में स्तुति की जाती है। यह पाठ श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाना चाहिए। विलक्कु पूजा एक सरल और प्रभावशाली पूजा विधि है जो देवी लक्ष्मी और शक्ति की आराधना के माध्यम से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है। इस पूजा को नियमित रूप से करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। Who performs Vilakku puja?: विलक्कु पूजा कौन करता है? दक्षिण भारत – तमिलनाडु में, अधिकांश गृहिणियां इस तिरुविलक्कू पूजा को 108 जाप के साथ घर पर नियमित रूप से करतीं हैं। दीपक की मंद-मंद चमक मंदिर तथा मंदिर के कमरे को रोशन करती है, जिससे वातावरण शुद्ध और निर्मल रहता है। Why is Vilakku puja performed?: विलक्कु पूजा क्यों की जाती है? दक्षिण भारतीय हिंदुओं के घरों में थिरु-विलक्कू प्रतिदिन जलाया जाता है, क्योंकि थिरु-विलक्कू को माँ महालक्ष्मी का रूप माना जाता है, जो भाग्य और धन की देवी हैं। दिव्य मां लक्ष्मी देवी की कृपा पाने के लिए महिला भक्तों द्वारा थिरुविलक्कू पूजा की जाती है। यह पूजा परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए की जाती है और यह प्रत्येक सदस्य के लिए अच्छाई लाती है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग ईमानदारी से मंदिरों में दीया जलाकर थिरु विलक्कू पूजा करते हैं, मां महालक्ष्मी भी उस शुभ कार्यक्रम में उपस्थित होंगी, और वह दीप पूजा में भाग लेने वालों को आशीर्वाद देती हैं। How to perform Vilakku puja?: विलक्कु पूजा कैसे करें? पूजा की विधि 1. पूर्व तैयारी 2. दीपक की स्थापना 3. पूजा की प्रक्रिया प्रदक्षिणा और नमस्कार: दीपक के चारों ओर तीन बार घूमकर नमस्कार करें। दीप प्रज्वलन: दीपक में तेल या घी भरकर बाती जलाएं। मंत्रोच्चार: “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” या अन्य देवी मंत्रों का जाप करें। अर्चना: फूल, कुमकुम, चंदन अर्पित करें और 108 पोत्री (स्तुति) का पाठ करें। नैवेद्य अर्पण: देवी को नैवेद्य अर्पित करें। आरती: कपूर जलाकर देवी की आरती करें।

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108 Names of Laxmi ji:मां लक्ष्मी जी के 108 नाम पूर्ण करेंगे सारे काम,दुख और दरिद्रता हो जाएगी दूर

108 Names of Laxmi ji:धार्मिक मान्यता है कि हर शुक्रवार के दिन 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं 108 Names of Laxmi ji तो हर शुक्रवार के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी के 108 नामों का मंत्र जाप अवश्य करें। Maa Lakshmi ke 108 Naam: सनातन धर्म में हर शुक्रवार के दिन धन की देवी 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है 108 Names of Laxmi ji कि हर शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती है। साथ ही आय और सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। 108 Names of Laxmi ji अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो हर शुक्रवार के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी के 108 नामों का मंत्र जाप अवश्य करें। 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी के 108 नामों के मंत्र जाप से दुख और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है। 108 Names of Laxmi ji:मां लक्ष्मी के 108 नाम 1 प्रकृति –  प्रकृति  2 विकृति – दो रूपी प्रकृति 3 विद्या  – बुद्धिमत्ता 4 सर्वभूतहितप्रदा- ऐसा व्यक्ति जो संसार के सारे सुख दे सके  5 श्रद्धा- जिसकी पूजा होती है  6 विभूति-धन की देवी 7 सुरभि- सुगंधा 8 परमात्मिका- सर्वव्यापी देवी 9 वाची- अमृतमयी वाणी  10 पद्मालया- जो कमल पर रहती हैं   11 पद्मा- कमल 12 शुचि- पवित्रता की देवी 13 स्वाहा- शुभ 14 स्वधा- जो अशुभता को दूर करे  15 सुधा – अमृत की देवी 16 धन्या-  17 हिरण्मयी-जो स्वर्ण के समान है  18 लक्ष्मी- धन और समृद्धि की देवी 19 नित्यपुष्ट-जिनसे नित्य शक्ति मिलती है  20 विभा- जिनका चेहरा दीप्तिमान है  21 अदिति- जिनकी चमक सूर्य की तरह है  22 दीत्य-जो प्रार्थना का जवाब देती हैं    23 दीप्ता- लौ की तरह जगमगाने वाली  24 वसुधा-पृथ्वी की देवी 25 वसुधारिणी- पृथ्वी की रक्षक 26 कमला- कमलगंधा 27 कांता- भगवान विष्णु की पत्नी 28 कामाक्षी-आकर्षक आंखों वाली देवी 29 कमलसम्भवा- 108 Names of Laxmi ji जो कमल में से उपस्थित होती है  30 अनुग्रहप्रदा-जो शुभकामनाओं का आशीर्वाद देती है  31 बुद्धि-बुद्धि की देवी 32 अनघा-निष्पाप या शुद्ध  33 हरिवल्लभी-भगवान विष्णु की पत्नी 34 अशोका-दुःख को दूर करने वाली 35 अमृता- अमृत की देवी 36 दीपा- प्रकाशमयी 37 लोकशोकविनाशिनी-सांसारिक संकटों का नाश करने वाली  38 धर्मनिलया-धर्मरक्षिणी  39 करुणा – ममता की मूर्ति  40 लोकमात्रिका-जन-जन की देवी   41 पद्मप्रिया-जिन्हें कमल प्रिय है 42 पद्महस्ता-जिनके हाथ में कमल हैं, और जिनके हाथ कमल की तरह हैं  43 पद्माक्ष्य -जिनकी आंखें कमल के समान है  44 पद्मसुन्दरी- कमल के समान सुंदर 45 पद्मोद्भवा- कमल से उत्पन्न होने वाली देवी  46 पद्ममुखी- कमल के सदृश मुख वाली  47 पद्मनाभप्रिया-पद्मनाभ(भगवान विष्णु) की प्रेमिका  48 रमा- भगवान विष्णु के साथ रमण करने वाली  49 पद्ममालाधरा- कमल की माला पहनने वाली 50 देवी- देवी 51 पद्मिनी- कमल की तरह 52 पद्मसुगन्धिनी- कमल की तरह सुगंध वाली  53 पुण्यगन्धा-दिव्य सुगंधित देवी 54 सुप्रसन्ना- अनुकंपा करने वाली, सदा प्रसन्न चित्त रहने वाली  55 प्रसादाभिमुखी- वरदान और इच्छाओं को अनुदान देने वाली 56 प्रभा- देवी  जिनका आभामंडल दिव्य और चमकदार हो  57 चंद्रवंदना – जिनकी दीप्ति चंद्र के समान हो  58 चंदा- चन्द्र की तरह शांत  59 चन्द्रसहोदरी- चंद्रमा की बहन 60 चतुर्भुजा- चार भुजाओं वाली   61 चन्द्ररूपा-चंद्रमा के समान रूप वाली  62 इंदिरा- सूर्य की तरह चमक वाली  63 इन्दुशीतला-चांद की तरह शीतल  64 अह्लादजननी- प्रसन्नता देने वाली  65 पुष्टि- स्वास्थ्य की देवी 66 शिवा-शुभ देवी 67 शिवाकारी-शुभ का अवतार 68 सत्या-सच्चाई 69 विमला- शुद्ध 70 विश्वजननी- समस्त ब्रह्माण्ड की देवी  71 तुष्टी- तुरंत प्रसन्न होने वाली    72 दारिद्र्यनाशिनी – दरिद्रता दूर करने वाली  73 प्रीता पुष्करिणी –  देवी जिनकी आंखें सुखदायक हैं  74 शांता- शांतिपूर्ण देवी 75 शुक्लांबरा-श्वेत वस्त्र धारण करने वाली  76 भास्करी – सूर्य के समान तेजस्वी  77 बिल्वनिलया- बिल्व वृक्ष में निवास करने वाली  78 वरारोहा – हर वरदान पूर्ण करने वाली  79 यशस्विनी-यश, सुख, प्रसिद्धि और भाग्य की देवी 80 वसुंधरा-धरती माता की बेटी 81 उदरंगा- जिनकी देह सुंदर है  82 हरिनी- जो हिरण की तरह चंचला है  83 हेमामालिनी-स्वर्ण का हार धारण करने वाली  84 धनधान्यकी- स्वास्थ्य प्रदान करने वाली  85 सिद्धि- रक्षक 86 सौम्या : कोमल और आकर्षक   87 शुभप्रभा-जो शुभता प्रदान करे  88 नृपवेशवगाथानंदा- जो महलों में रहती है  89 वरलक्ष्मी- समृद्धि की दाता  90 वसुप्रदा-धन को प्रदान करने वाली 91 शुभा- शुभ देवी 92 हिरण्यप्रका – स्वर्ण प्रिया  93 समुद्रतनया – समुद्र की बेटी 94 जया -विजय की देवी 95 मंगला-मंगल करने वाली  96 देवी –  देवता या देवी 97 विष्णुवक्षा- भगवान विष्णु के सान्निध्य में रहने वाली, उनके ह्रदय में निवास करने वाली    98 विष्णुपत्नी-भगवान विष्णु की पत्नी 99 प्रसन्नाक्षी –  खूबसूरत आंखों वाली  100 नारायण समाश्रिता- नारायण के साथ रहने वाली  101 दारिद्र्य ध्वंसिनी- गरीबी समाप्त करने वाली 102 लक्ष्मी – देवी 103 सर्वोपद्रवनिवारिणी — हर उपद्रव और संकट का निवारण करने वाली  104 नवदुर्गा-नौ दुर्गा के सभी रूप  105 महाकाली- काली देवी 106 ब्रह्मा-विष्णु-शिवात्मिका- ब्रह्मा, विष्णु, शिव की आराध्या  107 त्रिकालज्ञानसम्पन्ना- जिन्हें तीनों कालों की जानकारी हो  108 भुवनेश्वरी- अखिल भुवन यानी ब्रह्मांड की स्वामिनी 

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Laxmi prapti upay : रूठी लक्ष्मी को मनाकर घर कैसे लाऐं, लक्ष्मी आओ हमारे द्वार, दूर करो दरिद्रता, भर दो घर को धन-धान्य से

Laxmi prapti upay : आज दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है और शाम के समय भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाएगी। रूठी लक्ष्मी को मनाने और घर पर बुलाने के लिए अनेक उपाय तंत्र-मंत्र के ग्रंथों से लेकर लाल किताब, वास्तु शास्त्र एवं धार्मिक ग्रंथों में वर्णित हैं। दीपावली के दिन इन उपायों को अवश्य करें। दीपावली के दिन सर्वप्रथम घर की अच्छी प्रकार से सफाई करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मुख्य द्वार को स्वच्छ और साफ करके उसकी सजावट करें तथा रंगोली फूलों और दीयों से सजाऐं। लक्ष्मी जी का स्वागत करने के लिए प्रवेश द्वार पर कमल का फूल या रंगोली में श्री का चिन्ह बनाना शुभकारी है। प्रदोषकाल में स्थिर लग्न का चयन कर लक्ष्मी पूजन हेतु संपूर्ण पूजा सामग्री एकत्रित करके लक्ष्मी गणेश जी की मूर्तियों को सम्मुख रखकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके साफ कपड़े से पोंछ कर पूजा घर में शुद्ध आसन पर स्थापित करें। कम से कम पांच अथवा ग्यारह, दीपक जलाकर पूजा स्थल पर भगवान के सम्मुख रखें, जिसके पश्चात् पूरे घर में दीपमालिका प्रज्जविलत करें। धूप-दीप से पूजा करें, नैवेद्य मिठाई खील, बताशे फल आदि का भोग लगाएं, तथा दक्षिणा अर्पण करें। कपूर से आरती करें तथा पूजा आदि में कोई त्रुटि आदि हो गई हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना करें । लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिए पूरे परिवार के साथ गणेश, लक्ष्मी, हनुमान जी, सरस्वती जी, काली एवं कुबेर आदि देवों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। धन, भवन, वाहन, स्त्री, कन्या, यश, एकता, सद्बुद्धि, आठ रूपों में लक्ष्मी का वास माना गया है। धन लक्ष्मी, सौभाग्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, यश लक्ष्मी आदि स्वरूपों में लक्ष्मी का पूजन करें। दीपावली देने का त्योहार है, जो व्यक्ति जरूरतमंदों को दान-पुण्य करता है, उसके इस पुण्य कार्य से मां लक्ष्मी उस पर प्रसन्न होकर उसे और ज्यादा धन-दौलत देती हैं। जैसे मान लीजिए आप दस लोगों को रोज़ भोजन कराने का संकल्प करते हैं, अगर आप उन्हें भोजन नहीं भी कराते तो किसी न किसी माध्यम से वे भोजन करेंगे ही, भूखे नहीं रहेंगे, लेकिन जब आप उन्हें भोजन कराते हैं, तो उनसे संबंधित भाग्य, धन-लाभ आपको प्राप्त होता है। ये देने का नियम है, इसलिए जो व्यक्ति नियमित रूप से दान-पुण्य, भण्डारा आदि कराते रहते हैं, उनका धनकोष कभी खाली नहीं होता, बल्कि और बढ़ता जाता है। यह लक्ष्मीजी की कृपा और दान-पुण्य की महिमा है।

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शुक्रवार के ये उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत! घर में दौड़ी आएंगी मां लक्ष्मी

Shukrawar Ke Upay: शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-संपत्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन कुछ खास उपाय करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए आज हम आपको शुक्रवार के दिन किए जाने वाले कुछ अचूक उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे घर में धन के साथ-साथ सुख-शांति भी आएगी. हिंदू धर्म में हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को धन की देवी भी कहा जाता है।  मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। इन उपायों को करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय मां को लाल वस्त्र अर्पित करें maa ko lal bastra arpeet kare मां लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें maa laximi ko pusp arpeet kare विष्णु भगवान की पूजा करें bhagwan vishnu ki puja kare खीर का भोग लगाएं kheer ka bhog lagaye शुक्रवार के दिन श्री लक्ष्मीनारायण भगवान और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। इस उपाय को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और धन- लाभ होता है।  मंत्र जाप Mantra jap मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को इन मंत्रों का जाप करें: दिन ॐ शुं शुक्राय नम: या ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं. दान करें सफेद वस्तुएं dan kare safed bastuye शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ ही सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद कपड़े, चावल, आटा, चीनी, दूध और दही का दान करें. शास्त्रों के अनुसार सफेद रंग मां लक्ष्मी को प्रिय है. कलह-कलेश से मुक्ति अगर आपके घर में लगातार कलह-कलेश रहता है तो हर शुक्रवार को गाय को रोटी खिलाना शुरू कर दें. गाय को रोटी खिलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. अखंड ज्योति akhand jyoti अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो शुक्रवार को मां लक्ष्मी की मूर्ति के सामने 11 दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं.  ऐसा करने से आपको आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. कमल गट्टे की माला kamal gatte ki mala अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और धन की कमी से छुटकारा पाने के लिए हर शुक्रवार को कमल गट्टे की माला से देवी लक्ष्मी का नाम जपें. इससे देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी. जल चढ़ाने का उपाय jal chadane ka uppay शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ पर जल चढ़ाएं क्योंकि इसे देवी दुर्गा का एक रूप माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है.

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Vastu 2024: घर पर रखें वास्तु की ये 6 चीजें, मां लक्ष्मी की बरसेगी अनुकंपा, जीवन भर रहेगी धन-संपदा बरकरार

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में कुछ विशेष चीजें रखने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं उन 6 चीजों के बारे में जो आपके घर में रखने से जीवन भर धन-संपदा बनी रह सकती है। मां लक्ष्मी: साल 2024 आ चुका है और आज तीसरा दिन है आप सब भी यही सोच रहे होंगे बीते साल जो हुआ सो हुआ अब नया साल 2024 सुख-शांति से बीते और पूरा वर्ष धन-संपदा से संपन्न रहे। ऐसे में आप यह सोच रहे होंगे की धन-संपदा के लिए मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कौन सा उपाय करें जिससे यह वर्ष आर्थिक पक्ष के तौर पर मजबूत रहे। फिलहाल आपको इसके लिए वास्तु से जुड़ी कुछ चीजों को घर लाकर रखना होगा और यदि ये चीजें घर में पहले से मोजूद हैं तो इनकी सही दिशा सुनिश्चित कर इनको वास्तु के हिसाब से घर में रखें। ऐसा करने से आपके घर में धन-संपदा तो बनी ही रहेगी इसी के साथ साल 2024 तक आपके पास पैसों की कमी नहीं रहेगी। तो ध्यान से इन 6 चीजों के बारे में जरूर जान लें और इन्हें अपने घर में वास्तु के अनुसार व्यवस्थित कर लें। मां लक्ष्मी:कुबेर यंत्र या श्री यंत्र आप अपने घर में मां लक्ष्मी की स्थापना पूर्ण विधि वाधान से कर लें अगर मां लक्ष्मी पहले से आपके घर में विराजमान हैं। तो उनकी प्रतिमा के सम्मुख उनके प्रिय श्री यंत्र को लाल कपड़े के नीचे अवश्य रखें। आप चाहें तो अपने घर में कुबेर यंत्र की भी स्थापना कर सकते हैं। लेकिन एक बात का ध्यान रखें इन यंत्रों को किसी योग्य पंडित से सिद्ध करवा कर ही इनकी स्थापना करें। तभी यह अपना प्रभाव दिखाएंगे और आपके घर का वातावरण तो सकारात्मक होगा ही इसी के साथ आपके घर धन का आगमन साल भर होता रहेगा। इन यंत्रों की रोज पूजा करने से आपके सौभाग्य में वृद्धि होगी और हर कार्य में मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से सफलता भी मिलेगी। क्या है सनातन धर्म,कैसे प्रचलन में आया Hinduधर्म नाम, जानिए सनातन का सही अर्थ मां लक्ष्मी :चांदी का बना हाथी साल 2024 में आप अपने घर में चांदी की धातु से बना हाथी लाकर रख सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार चांदी का हाथी अपनी सूंढ़ उठाए हुए वाला ही रखना चाहिए। यह हाथी घर की प्रसिद्धि में चार चांद लगाता है। ऊंची उठी सूंढ़ के कारण यह अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाता है और इसके चलते समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि आप चांदी से बने हाथी को अपने घर में लाकर रखते हैं तो यह आपके रोजगार में आपको लाभ दिलाएगा और यह धन को भी आकर्षित करता है। मिट्टी वाला पानी का घड़ा वास्तु के अनुसार पानी का घड़ा या सुराही को धन के लिहाज से बहुत शुभ माना जाता है। यदि आप इसे घर लाकर इसमें पानी भर के उत्तर दिशा की ओर रखते हैं तो यह आपकी सभी आर्थिक परेशानियों को धीरे-धीरे समाप्त कर देगा। क्योंकि उत्तर दिशा देवताओं की मानी जाती है और जिस घर से देवता प्रसन्न होते हैं वहां मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सदैव के लिए बरकरार रहती है। धातु का बना हुआ कछुआ पौराणिक कथा के अनुसार कछुआ एक प्रकार से भगवान विष्णु का प्रतिनिधित्व करता है और जहां श्री हरि की कृपा रहती है वहां लक्ष्मी जी स्वयं निवास करती हैं। ऐसे में धन प्राप्ति के लिए साल 2024 में आप अपने घर में स्फटिक, चांदी या तांबे की धातु से बना कछुआ अपने घर लाकर रख सकते हैं। वास्तु के अनुसार जिस घर में इन धातुओं से बना कछुआ रखा होता है वहां कभी भी धन की हानी नहीं होती है और रुपयों-पैसों की वर्षा दिन रात होती रहती है। माना जाता है यह कछुआ धन को चुंबक की तरह से खेंचता है और इसे रखने की सही दिशा उत्तर है। मोर पंख आप अपने घर में मोर पंख का गुच्छा लाकर रख सकते हैं। इसे घर में रखने से भगवान श्री कृष्ण के साथ ही साथ मां लक्ष्मी की भी कृपा आपको मिलेगी। माना जाता है की भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख अति प्रिय था। नए साल में यदि आप सुख-समृद्धि चाहते हैं तो घर में मौर पंख लाकर रख सकते हैं। इसी के साथ बच्चों के पढ़ाई वाले कमरे में इसे रखने से उन पर मां सरस्वती की कृपा बनी रहेगी। क्योंकि मोर को शास्त्रों में विद्या की देवी का वाहन बताया गया है। इसी के साथ यह धनिष्ठा नक्षत्र को भी संबोधित करता है। ज्योतिष शास्त्र में धनिष्ठा नक्षत्र को अपार धन-दौलत का नक्षत्र बताया गया है। ऐसे में मौर पंख रखना धन के लिहाज से बहुत लाभदायक रहेगा। दक्षिणावर्ती शंख शंख कई प्रकार के होते हैं लेकिन यदि आप साल 2024 में चाहते हैं कि मां लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहें तो एक दक्षिणावर्ती शंख अपने घर में लाकर रख दें। माना जाता है यह शंख धन की देवी मां लक्ष्मी का सूचक होता है और जिस जगह यह रहता है वहां धन की कभी भी कमी नहीं रहती है। परिस्थिति कितनी भी खराब क्यों न हो कहीं न कहीं से धन का आगमन होता रहता है। कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें: (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Gold:सोना-चांदी शुभ क्यों होते हैं पूजा में…

सोना और चांदी को पूजा में शुभ मानने के कई कारण हैं: धर्मग्रंथों में सोने को सर्वश्रेष्ठ धातु स्वीकार किया गया है। इसी कारण देवी-देवताओं की मूर्तियां, आभूषण, सिंहासन आदि सोने से बनाए जाते हैं या सोने का आवरण चढ़ाया जाता है। सोने को कभी जंग नहीं लगता और न ही यह धातु विकृत होती है। इसकी कांति सदा बनी रहती है जिस कारण इसे पवित्र माना जाता है। इसी तरह चांदी को भी पवित्र धातु माना गया है। Gold सोना-चांदी आदि धातुएं केवल जल अभिषेक से ही शुद्ध हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार सोना बल और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। यद्यपि मंदिरों में तांबा, पीतल और कांसे के पात्र भी उपयोग में लाए जाते हैं, किंतु एल्युमीनियम, लोहा और स्टील के पात्र पूजा-अर्चना में पूर्णतया वर्जित हैं। Gold धार्मिक महत्व: वैज्ञानिक आधार: चमत्कारी फल देता है चांदी का प्रयोग, जानिए 17 आश्चर्यजनक बातें Gold सामाजिक महत्व: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सोने और चांदी का पूजा में उपयोग व्यक्तिगत श्रद्धा और विश्वास का विषय है। लेकिन, इन धातुओं से जुड़े धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व इनको पूजा के लिए विशेष बनाते हैं।

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Diwali से पहले और बाद कई बड़े ग्रहों का महापरिवर्तन वाला, दो ग्रहण, किन राशियों की Diwali अच्छी मनेगी, मां लक्ष्मी की कृपा मिलेगी

Diwali big planet rashi parivartan: इस अवधि में आप नया घर खरीदने पर भी विचार कर सकते हैं और आने वाला समय व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल रहेगा। कुल मिलाकर आपकी आर्थिक स्थिति काफी अनुकूल रहेगी  Diwali bih rashi parivartan: दिवाली से पहले और बाद का महीना कई बड़े ग्रहों का परिवर्तन लेकर आ रहा है। इस साल दिवाली 12 नवंबर को मनाई जाएगी। दिवाली से पहले धनतरेस और नर्क चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है, लेकिन अक्टूबर के आखिर में राहु और केतू का राशि परिवर्तन हो रहा है। इसके बाद अभी सिंह राशि में शुक्रदेव भी सभी राशियों पर सुख सुविधाओं की बरसात करेंगे। 3 नवंबर को शुक्र कन्या राशि में प्रवेश करें। वहीं 4 नवंबर के शुरू में शनि मार्गी हो रहे हैं, जो कई राशियों को लाभ पहुंचाएंगे। शनि के राशि परिवर्तन होने से कई राशियों के लिए शुभ परिणाम होंगे। शनि से  पहले 6 नवंबर को बुध भी वृश्चिक राशि में आ जाएंगे और दिवाली से पहले ही मंगल भी 6 नवंबर को वृश्चिक राशि में आ जाएंगे और फिर 17 नवंबर को सूर्य राशि बदलकर वृश्चिक राशि में आ जाएंगे। कुल मिलाकर इन राशि परिवर्तन से कई राशियों को मां लक्ष्मी की कृपा मिलेगी। Diwali 2023 Date: इस साल कब है दिवाली, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त Diwali दिवाली से पहले और बाद में ग्रहों का यह राशि परिवर्तन मेष राशि वालों के लिए अच्छा साबित होगा। इस राशि के परिवार के लोग खुश रहेंगे और उन पर धन-धान्य की बरसात होगी। इसकी के साथ हेल्थ का भी आपको थोड़ा ध्यान रखना होगा।  कन्या राशि वालों के लिए यह परिवर्तन अच्छा साबित होगा, आप जिस काम में हाथ डालेंगे सफलता मिलेगी। आपकी राशि में शुक्र आ रहे हैं, तो आपके लिए समय सोने पर सुहागा रहेगा। इस गोल्डन पीरियड का आप अच्छे से इस्तेमाल करें। कुंभ-विदेश यात्रा, धन लाभ दिवाली पर शनि और कई ग्रहों के कारण इस राशि के लोगों के लिए समय बहुत अच्छा है। इस राशि के लोग घर परिवार के साथ मिलकर रहें और सभी को वस्त्र और आभूषण दें। मां लक्ष्मी की कृपा से आपको आर्थिक लाभ होगा।

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माता महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति हेतु अमोघ प्रयोग

आज मैं आपको माता महा लक्ष्मी के एक ऐसे स्तोत्र के बारे में बताने जा रहा हूँ जोकि अपने आप में अद्भुत है और जिसको केवल रोज एक बार पढ़ लेने से माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न हो जाती है. इस स्तोत्र का नाम है महालक्ष्मी अष्टकम.. जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कि यह स्तोत्र मात्र आठ छंद का है और यह स्तोत्र अत्यंत शक्तिशाली है जिससे सुनकर माता महा लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न हो जाती है. इसके पीछे एक कथा है- एक बार माता लक्ष्मी विष्णुलोक से रूठकर, पुष्कर में एक सरोवर के अन्दर एक कमल के फूल की नाल के अन्दर जाकर बैठ गयी. माता लक्ष्मी के रूठ जाने से और वहां से चले जाने से, पूरे देवलोक के साथ साथ समस्त संसार की कान्ति क्षय होने लगी. समस्त देवतागण परेशान हो गए. किसी भी देवता को माता लक्ष्मी का पता नहीं मिल रहा था. तब देवराज इन्द्र ने माता महालक्ष्मी को दूंढ़ निकाला और उस कमल के पुष्प के सामने खड़े होकर माता महा लक्ष्मी की स्तुति की और माता को प्रसन्न करने के लिए महालक्ष्मी अष्टकम नामक स्तोत्र की रचना की जिसे सुनकर माता अत्यंत प्रसन्न हुई और प्रकट हो गयी और दोबारा विष्णुलोक चली गयी. इस भगवान् इन्द्र द्वारा रचित महालक्ष्मी अष्टकम की इतनी महिमा है कि जो व्यक्ति इस स्तोत्र का नित्य एक बार भी पाठ कर ले वहां माता लक्ष्मी का वास सदैव बना रहता है. महालक्ष्मी अष्टकम नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते.‌ शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते..१. नमस्ते गरुडारुढ़े कोलासुर भयंकरी. सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते..२. सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्ट भयंकरी. सर्वदुखहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते..३. सिद्धिबुद्धिप्रदे देवी भुक्ति मुक्ति प्रदायिनी. मन्त्रपूते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते..४. आद्यंतरहिते देवी आदिशक्ति महेश्वरी. योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोस्तुते..५. स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे. महापापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते..६. पद्मासनस्थिते देवी परब्रह्मस्वरूपिणी. परमेशी जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोस्तुते..७. श्वेताम्बरधरे देवी नानालंकारभूषिते. जगतस्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोस्तुते..८. महालक्ष्मय्ष्ट्कम स्तोत्रं यः पठेदक्ति मान्नरः. सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा..९. एककाले पठेन्नित्यम महापापविनाशनम. द्विकालं यः पठेन्नित्यम धनधान्यसमन्वितः..१०. त्रिकालं यः पठेन्नित्यम महाशत्रुविनाशनम. महालक्ष्मीर्भवेंनित्यम प्रसन्ना वरदा शुभा..११.

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जानें क्यों नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका

होली का त्योहार आने में अब कुछ दिन ही बाकी हैं। होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन होलिका दहन किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इसके अगले दिन चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को रंग वाली होली खेली जाती है। इस साल होलिका दहन 17 मार्च 2022 को किया जाएगा। रंग वाली होली 18 मार्च 2022 को खेली जाएगी। होली से पहले होलिका दहन किया जाता है। ज्योतिषाचार्य रामदेव मिश्र के अनुसार, होलिका दहन की पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। किन लोगों को नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका?मान्यताओं के अनुसार, नवविवाहित स्त्रियों को जलती हुई होलिका नहीं देखनी चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है।  क्यों नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका?नवविवाहित स्त्रियों को जलती हुई होलिका की अग्नि न देखने के पीछे का कारण होलिका दहन को ही माना जाता है। कहा जाता है होलिका में आप पुराने साल को जलाते हैं। इसके अगले दिन से नए साल की शुरुआत हो जाती है। होलिका की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नवविवाहित स्त्रियों को होलिका की जलती हुई अग्नि को देखने से बचना चाहिए। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। इस बार होलिका दहन 17 मार्च को पड़ रहा है।हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल होलिका दहन भद्रा रहित की जाती है। ऐसे में इस बार भद्रा का साया है जिसके कारण इस साल होलिका दहन मध्य रात्रि को किया जाएगा।शास्त्रों के अनुसार, भद्रा को अशुभ माना जाता है। क्योंकि भद्रा के स्वामी यमराज होते हैं। इसलिए इस योग में कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। लेकिन भद्रा की पुंछ काल में होलिका दहन किया जा सकता है। क्योंकि इस समय भद्रा का प्रभाव काफी कम होता है और व्यक्ति को दोष भी नहीं लगता है।फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 17 मार्च, 13 बजकर 04 मिनट सेफाल्गुन पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 18 मार्च, दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक अतः 18 तारीख को सूर्यास्त के समय पूर्णिमा न होने के कारण 17 तारीख को होलिका दहन होगाभद्रा का प्रारंभ: 17 मार्च को दोपहर 01 बजकर 01 मिनट सेभद्रा का समापन: 17 मार्च को देर रात 12 बजकर 57 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगाहोलिका दहन का शुभ समय: 17 मार्च को रात 12 बजकर 57 मिनट के बाद किया जाएगापौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन है। ऐसे में उनका स्वभाव बिल्कुल शनिदेव की तरह ही है। इन्हें कोध्री स्वभाव का माना जाता है। इसी कारण इस स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए भगवान ब्रह्मा ने काल गणना में एक प्रमुख अंग में विष्टि करण को जगह दी है। कहा जाता है कि भद्रा हर समय तीनों लोक का भ्रमण करती रहती हैं। इसलिए जब पृथ्वी में भद्रा होती है तो उस समय किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

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