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Masik Shivratri 2025: चैत्र माह में कब है मासिक शिवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त और शिव जी की पूजा विधि

Masik Shivratri 2025:इस बार मासिक शिवरात्रि दुर्लभ संयोग में मनाई जाने वाली है। शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग बनने जा रहे हैं। Masik Shivratri 2025:शिवरात्रि व्रत साल मे 12/13 बार आने वाला मासिक व्रत का त्यौहार है, अतः इस व्रत को मासिक शिवरात्रि भी कहा जाता है। जोकि अमावस्या से पहिले कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन आता है। Masik Shivratri 2025 मासिक शिवरात्रियों में से दो सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, फाल्गुन त्रियोदशी महा शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है और दूसरी सावन शिवरात्रि के नाम से जानी जाती है। यह त्यौहार भगवान शिव-पार्वती को समर्पित है, इस दिन भक्तभगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। यह लोकप्रिय हिंदू व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। कोई भी व्रत या पूजा तभी उत्तम फल देती है जब उसे सही विधि से किया जाता है। तो आइए जानते हैं क्या है Masik Shivratri 2025 मासिक शिवरात्रि व्रत करने की सही विधि और अनुष्ठान। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती जी की पूजा-अर्चना की जाती है। चैत्र माह की शुरुआत हो चुकी है। Masik Shivratri 2025 ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस माह में मासिक शिवरात्रि कब मनाई जाएगी और इसका पूजा मुहूर्त क्या रहने वाला है। मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त (Masik Shivratri Puja Muhurat) Masik Shivratri 2025:पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 27 मार्च को रात 11 बजकर 03 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 28 मार्च को शाम 07 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में चैत्र माह की मासिक शिवरात्रि का व्रत गुरवार, 27 मार्च 2025 को किया जाएगा। मासिक शिवरात्रि की पूजा मध्य रात्रि में की जाती है। इसलिए इस दिन शिव जी की पूजा का मुहूर्त इस प्रकार रहेगा – मासिक शिवरात्रि पूजा मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 03 से 28 मार्च 12 बजकर 49 मिनट तक शिव जी की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवितृ हो जाएं। मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर शिव जी और पार्वती माता की मूर्ति स्थापित करें। कच्चे दूध, गंगाजल, और शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, और भांग आदि अर्पित करें। भगवान शिव को मखाने की खीर, फल, हलवा या फिर चावल की खीर का भोग लगाएं। साथ ही माता पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करें। दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। शिव चालीसा और शिव जी के मंत्रों का जप करें। अंत में सभी लोगों में पूजा का प्रसाद बांटें। शिव जी के मंत्र – शिव मूल मंत्र – ॐ नमः शिवाय॥ भगवान शिव का गायत्री मंत्र – ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ महामृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् || ध्यान मंत्र – करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा। श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं। विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व। जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥ रुद्र मंत्र – ॐ नमो भगवते रुद्राये।। शीघ्र विवाह के लिए मंत्र – ओम कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥

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Matsya Jayanti 2025: कब है मत्स्य जयंती? 3 शुभ योग में होगी ​विष्णु पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

Matsya Jayanti 2025:मत्स्य अवतार भगवान विष्णु के दस अवतारों मे से पहले अवतार हैं, जो राक्षस हयग्रीव से ब्रह्मांड को बचाने के लिए अवतरित हुए थे। मत्स्य जयन्ती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। Matsya Jayanti 2025:मत्स्य पुराण के अनुसार इस दिन मत्स्य अवतार में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसे हयपंचमी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने मध्याह्नोत्तर बेला में पुष्पभद्रा तट पर मत्स्यावतार धारण कर जगत् कल्याण किया था। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मत्स्य जयंती मनाई जाती है. इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा करते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने सबसे पहला अवतार मत्स्य के रूप में लिया था. Matsya Jayanti 2025 इस अवतार में भगवान विष्णु ने एक मछली का रूप धारण किया था और संकट से संसार की रक्षा की थी. कि इस बार मत्स्य जयंती के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं कि इस साल मत्स्य जयंती कब है? मत्स्य जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? मत्स्य जयंती का महत्व क्या है? Matsya Jayanti 2025:मत्स्य जयंती के दौरान अनुष्ठान Matsya Jayanti 2025:इस दिन भक्त भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। मत्स्य जयंती का व्रत पिछली रात से ही शुरू हो जाता है और इस व्रत को करने वाला व्यक्ति कुछ भी खाने या पानी का एक घूंट भी पीने से परहेज करता है। यह व्रत अगले दिन सूर्योदय तक जारी रहता है और भक्त भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद ही अपना व्रत तोड़ते हैं। मत्स्य जयंती के दिन पूरी रात जागकर वैदिक मंत्रों का जाप करना फलदायी माना जाता है। ‘मत्स्य पुराण’ और ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है। मत्स्य पुराण के दिन दान-पुण्य करना बहुत लाभकारी होता है। Matsya Jayanti 2025 इस दिन ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना चाहिए तथा गरीबों और जरूरतमंदों में बांटना चाहिए। कब है मत्स्य जयंती 2025? मत्स्य जयन्ती 2025: सोमवार, 31 मार्च 2025मत्स्य जयन्ती मुहूर्त – 1:40 PM – 4:09 PM तृतीया तिथि : 31 मार्च 2025 9:11 AM – 1अप्रैल 2025 5:42 AM मत्स्य जयंती महत्व मत्स्य जयंती का हिंदू उत्सव भगवान मत्स्य के जन्मोत्सव का जश्न मनाता है , जिन्हें सत्य युग के दौरान मछली के रूप में भगवान विष्णु का मुख्य प्रतीक माना जाता है । हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ‘ मत्स्य अवतार ‘ एक सींग वाली मछली है जो ‘महाप्रलय’ के दौरान प्रकट हुई थी। हिंदू तिथि-पुस्तक में, मत्स्य जयंती ‘चैत्र’ के महीने में ‘शुक्ल पक्ष’ (चंद्रमा का उज्ज्वल पखवाड़ा) के दौरान ‘तृतीया’ (तीसरे दिन) को मनाई जाती है। यह त्यौहार ‘चैत्र नवरात्रि’ (देवी दुर्गा के लिए निर्धारित 9-दिवसीय समय अवधि) के बीच आता है और शानदार ‘गणगौर उत्सव’ से मेल खाता है। मत्स्य जयंती हिंदू भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन पूरे देश में Matsya Jayanti 2025 भगवान विष्णु के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की जाती है। आंध्र प्रदेश राज्य में तिरुपति के पास स्थित ‘नागलपुरम वेद नारायण स्वामी मंदिर’ Matsya Jayanti 2025 भारत का एकमात्र मंदिर है जो भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार को समर्पित है। यहां के त्यौहार अत्यंत भव्य होते हैं और इस दिन असाधारण परियोजनाएं आयोजित की जाती हैं। मत्स्य जयंती के दौरान अनुष्ठान इस दिन भक्त भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। मत्स्य जयंती का व्रत पिछली रात से ही शुरू हो जाता है और इस व्रत को करने वाला व्यक्ति कुछ भी खाने या पानी का एक घूंट भी पीने से परहेज करता है। यह व्रत अगले दिन सूर्योदय तक जारी रहता है और भक्त भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद ही अपना व्रत तोड़ते हैं। मत्स्य जयंती के दिन पूरी रात जागकर वैदिक मंत्रों का जाप करना फलदायी माना जाता है। ‘मत्स्य पुराण’ और ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है। मत्स्य पुराण के दिन दान-पुण्य करना बहुत लाभकारी होता है। Matsya Jayanti 2025 इस दिन ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना चाहिए तथा गरीबों और जरूरतमंदों में बांटना चाहिए। मत्स्य जयंती का महत्व हिंदू किंवदंतियों के अनुसार, मत्स्य अवतार श्री हरि विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) में से पहला था। मत्स्य एक सींग वाली मछली का प्रतिनिधित्व करते थे, और इस अवतार में भगवान विष्णु ने राजा मनु को ब्रह्मांडीय जलप्रलय के बारे में चेतावनी दी और यहां तक ​​कि ब्रह्मांड को ‘दमनका’ नामक राक्षस से भी बचाया। Matsya Jayanti 2025 हिंदू धर्म के गैर-धर्मनिरपेक्ष अभिलेखों के अंदर, मत्स्य अवतार की पूजा में किए जाने वाले अनुष्ठानों, परंपराओं और रीति-रिवाजों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन मत्स्य जयंती के दिन हिंदू भक्त भगवान विष्णु के इस स्वरूप की अपार श्रद्धा और दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ पूजा करते हैं। यह त्यौहार पूरे देश में भगवान विष्णु के मंदिरों में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। वैष्णव और इस्कॉन मंदिरों में उत्सव बहुत भव्य होता है। भगवान विष्णु ने क्यों ​लिया मत्स्य अवतार? पौराणिक कथा में बताया गया है कि भगवान श्री हरि विष्णु ने अपना सबसे पहला अवतार मछली के रूप में लिया था. उन्होंने मत्स्य अवतार पुष्पभद्रा नदी के किनारे लिया था. इस अवतार में भगवान विष्णु एक विशाल मछली के रूप में थे. उनके मुख पर एक बड़ी सी सींग थी. उस समय सृष्टि को प्रलय से खतरा था. तब उस संकट की घड़ी में वे संकटमोचन बनकर आए. सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए एक बड़ी नाव बनाई गई. उसमें सभी जीव, जंतु, पशु, पक्षी, पेड़, पौधों को रखा गया. प्रलय के समय भगवान विष्णु ने अपने मत्स्य अवतार से उस नाव की सुरक्षा की, जिससे जीवन आगे बढ़ा.

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Gudi Padwa 2025: कब है गुड़ी पड़वा? क्यों खास है ये पर्व ? जानिए इससे जुड़े रोचक तथ्य

Gudi Padwa 2025: गुड़ी पड़वा केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सभी पहलु जुड़े हुए हैं।ह दिन न केवल महाराष्ट्र में रह रहे लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नई शुरुआत, खुशी और समृद्धि के आगमन का संदेश लेकर आता है। Gudi Padwa 2025:गुड़ी पड़वा का महत्व गुड़ी पड़वा Gudi Padwa 2025 हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखता है। ऐसा माना जाता है कि गुड़ी को घर पर फहराने से घर से नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और जीवन में सौभाग्य और समृद्धि आती है। यह दिन वसंत की शुरुआत का भी प्रतीक है और इसे फसल उत्सव के रूप में माना जाता है। कई अन्य राज्यों में इस पर्व को संवत्सर पड़वो, उगादि, चेती, नवारेह, साजिबु नोंगमा पानबा चीरोबा आदि नामों से जाना जाता है। कई लोगों का मानना ​​है कि इस दिन सोना या नई कार खरीदना शुभ होता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो खासतौर पर महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा वसंत ऋतु का त्यौहार है Gudi Padwa 2025 जो मराठी हिंदुओं के लिए पारंपरिक नए साल का प्रतीक है। यह चैत्र महीने (मार्च-अप्रैल) के पहले दिन चंद्र-सौर हिंदू कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार रंगोली, एक विशेष गुड़ी ध्वज (फूलों, आम और नीम के पत्तों की माला, ऊपर से उलटे हुए मुकुट) के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि इसमें कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी छिपा हुआ है।  Gudi Padwa 2025:गुड़ी पड़वा 2025: तिथि और मुहूर्त गुड़ी पड़वा 30 मार्च 2025, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन को खास बनाती है इसकी तिथि, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार एक नए साल की शुरुआत होती है। यह दिन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद अहम है, क्योंकि यह मराठी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 मार्च को सायं  04 बजकर 27 मिनट पर होगी और 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि गणना अनुसार 30 मार्च को गुड़ी पड़वा मनाया जाएगा। इस दिन से चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ होगा। Gudi Padwa 2025 गुड़ी पड़वा की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता गुड़ी पड़वा के दिन के साथ जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं। इनमें से एक प्रमुख कथा है छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी, जो इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाने का कारण बनती है। कहा जाता है कि इसी दिन शिवाजी महाराज ने विदेशी घुसपैठियों को पराजित कर विजय प्राप्त की थी। विजय के प्रतीक स्वरूप उन्होंने विजय ध्वज फहराया, जो गुड़ी पड़वा के दिन की परंपरा बन गई। क्यों मनाया जाता है गुड़ी पड़वा? Gudi Padwa 2025:गुड़ी पड़वा का महत्व न केवल धार्मिक रूप से है, बल्कि यह जीवन के हर पहलु में शुभता और समृद्धि की प्रतीक भी है। इस दिन घरों में पताका (झंडा) फहराया जाता है, जो यह दर्शाता है कि इस घर में समृद्धि और सुख का आगमन होने वाला है। इस दिन से चैत्र नवरात्रि भी प्रारंभ होती है, जिसमें देवी भगवती की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा करना भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वह सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं।इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह नए साल की शुरुआत का प्रतीक है, और लोग इस दिन को हर्षोल्लास, परिवार के साथ समय बिताने और नए साल के साथ जीवन में नई ऊर्जा और आशा लेकर मनाते हैं। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी व्रत की जनवरी से दिसंबर की लिस्ट, देखें गणेश उत्सव कब होगा शुरू

Vinayak Chaturthi 2025:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Vinayak Chaturthi 2025: गणेश जी बुद्धि और विद्या के देवता हैं, Vinayak Chaturthi 2025 इनकी कृपा से व्यक्ति सुख, समृद्धि और ज्ञान पाता है. गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए विनायक चतुर्थी व्रत करना फलदायी माना गया है. Vinayak Chaturthi 2025: विनायकी चतुर्थी के दिन श्रद्वालू अपने बुरे समय व जीवन की कठिनाईओं को दूर करने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं. माना जाता है कि Vinayak Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है और साधक के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है. अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है.इस दिन लोग सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत करते हैं. शाम को गणेशजी के वरद Vinayak Chaturthi 2025 विनायक रुप की पूजा करने के बाद व्रत खोला जाता है.आज नए साल की पहली विनायक चतुर्थी है. आइए जानते हैं साल 2025 में विनायक चतुर्थी कब-कब है. Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती विनायक चतुर्थी 2025 लिस्ट (Vinayak Chaturthi 2025 List) 3 जनवरी 2025 – पौष विनायक चतुर्थी 1 फरवरी 2025 – माघ विनायक चतुर्थी (गणेश जयंती) 3 मार्च 2025 – फाल्गुन विनायक चतुर्थी 1 अप्रैल 2025 – चैत्र विनायक चतुर्थी 1 मई 2025 – वैशाख विनायक चतुर्थी 30 मई 2025 – ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी 28 जून 2025 – आषाढ़ विनायक चतुर्थी 28 जुलाई 2025 – सावन विनायक चतुर्थी 27 अगस्त 2025 – भाद्रपद विनायक चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) 25 सितंबर 2025 – अश्विन विनायक चतुर्थी 25 अक्टूबर 2025 – कार्तिक विनायक चतुर्थी 24 नवंबर 2025 – मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी 24 दिसंबर 2025 – पौष विनायक चतुर्थी Vinayak Chaturthi 2025:विनायक चतुर्थी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है गणपति की कृपा से उसे बल-बुद्धि, सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. Vinayak Chaturthi 2025 गणपति की कृपा से उसके सारे काम सिद्ध होते हैं. इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है. विनायक चतुर्थी गणपति के विनायक रूप को समर्पित है. इस दिन व्रत पूजन करने से उनका आशीर्वाद मिलता है. गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) Vinayak Chaturthi 2025:विनायक चतुर्थी पर व्रत पूजा की विधि Vinayak Chaturthi 2025 Puja Mantra गणपति पूजा मंत्र प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्। तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।। प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्। अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Papavimocani Ekadashi 2025:पापमोचनी एकादशी कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण मुहूर्त

Papavimocani Ekadashi 2025:हिंदू धर्म में हर महीने के कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत रखा जाता है। जानें मार्च में पापमोचिनी एकादशी कब है- Papmochani ekadashi 2025 kab hai: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी व्रत करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। पापमोचनी एकादशी के दिन लक्ष्मीनारायण की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि व धन-धान्य का वास रहता है। जानें मार्च में पापमोचनी एकादशी व्रत कब है, पूजन मुहूर्त व व्रत पारण मुहूर्त पापमोचनी एकादशी कब है 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 25 मार्च 2025 को सुबह 05 बजकर 05 मिनट पर प्रारंभ होगी और 26 मार्च 2025 को सुबह 03 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में Papavimocani Ekadashi 2025 पापमोचनी एकादशी व्रत 25 मार्च 2025, मंगलवार को रखा जाएगा पापमोचनी एकादशी शुभ योग (Papmochani Ekadashi Shubh Yoga) Papavimocani Ekadashi 2025 चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर शिव और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शिव और सिद्ध योग को बेहद शुभ मानते हैं। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। साथ ही शुभ काम में सफलता मिलेगी। साथ ही शिववास योग का भी संयोग बन रहा है। शिववास योग पूर्ण रात्रि तक है। इस दिन भगवान शिव कैलाश पर जगत की देवी मां पार्वती के साथ रहेंगे। पापमोचनी एकादशी 2025 पूजन मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त- 04:45 ए एम से 05:32 ए एम अभिजित मुहूर्त- 12:03 पी एम से 12:52 पी एम विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:19 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 06:34 पी एम से 06:57 पी एम सायाह्न सन्ध्या- 06:35 पी एम से 07:45 पी एम अमृत काल- 05:41 पी एम से 07:15 पी एम Papavimocani Ekadashi 2025:पापमोचनी एकादशी पारण समय Papavimocani Ekadashi 2025 साधक 26 मार्च को दोपहर 01 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 08 मिनट के मध्य व्रत खोल सकते हैं। इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके पश्चात ब्राह्मणों को अन्न दान देकर व्रत खोलें। Papavimocani Ekadashi 2025 एकादशी व्रत नियम– हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इस दिन वाद-विवाद से दूरी बनाकर रखें। एकादशी के दिन ज्यादा से ज्यादा भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। व्रत पारण के दिन सबसे पहले अनजाने में हुए पाप या गलतियों के लिए भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी से माफी मांगनी चाहिए।

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Bhalchandra Sankashti Chaturthi:कब है चैत्र महीने की संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Bhalchandra Sankashti Chaturthi:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। Bhalchandra Sankashti Chaturthi:सनातन धर्म में पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए हर माह में दो चतुर्थी तिथियां अत्यंत जरूरी मानी जाती हैं. इन्हीं में से चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी को विशेष शुभ और मंगलकारी माना जाता है. Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2025: चतुर्थी व्रत को हिंदू धर्म में अत्यंत मंगलकारी माना जाता है. यह व्रत भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित होता है. हर माह दो बार चतुर्थी तिथि आती है—शुक्ल पक्ष में विनायक चतुर्थी और Bhalchandra Sankashti Chaturthi कृष्ण पक्ष में संकष्टी चतुर्थी. हर संकष्टी (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2025 Significance) चतुर्थी का अलग नाम और विशेष महत्व होता है. इस बार भालचंद्र संकष्टी (Bhalchandra Sankashti Chaturthi) चतुर्थी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में 17 मार्च 2025, सोमवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश (Ganesh Puja on Sankashti Chaturthi) की विधिपूर्वक पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है. आइए, इस तिथि से जुड़ी कुछ खास जानकारी जानते हैं. भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Sankashti Chaturthi 2025 Muhurat And Timings) हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 17 मार्च 2025 को रात 07:33 बजे होगी और इसका समापन 18 मार्च 2025 को रात 10:09 बजे होगा.इस दिन चंद्रोदय के समय भगवान गणेश की पूजा करने का विशेष महत्व होता है. इसलिए, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 17 मार्च 2025, सोमवार को मनाई जाएगी. भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025: पूजा विधि (Sankashti Chaturthi March 2025 puja vidhi) भगवान गणेश जिन्हें रिद्धि-सिद्धि और बुद्धि के देवता माना जाता है, उन्हें प्रसन्न करने के लिए हर माह लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजन किया जाता है. विशेष रूप से, महिलाएं यह व्रत संतान की सलामती और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं. पूजा को पूर्ण और सफल बनाने के लिए सही और संपूर्ण पूजा सामग्री का होना जरूरी है. इसलिए, संकष्टी चतुर्थी की पूजा के लिए जरूरी सामग्रियां जान लें… इन सभी सामग्रियों के साथ विधिपूर्वक गणपति बप्पा की पूजा करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025: शुभ योग (Bhalchandra Sankashti Chaturthi Shubh Yog) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है, जो दोपहर 03:45 बजे तक रहेगा. इस योग में भगवान गणेश की पूजा करने से शुभ कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है.इसके अलावा, इस दिन भद्रावास योग भी बन रहा है, जो शाम 07:33 बजे तक रहेगा. साथ ही, भद्रावास योग के बाद शिव वास योग का संयोग बन रहा है. इन विशेष योगों में भगवान गणेश की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. शुभ मुहूर्त भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर इन बातों का रखें ध्यान (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Holi Kab Hai 2025: होली कब है 14 या 15, जानें क्यों है होली की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन, देखें होलिका दहन और रंगोत्‍सव की सही डेट

Holi Kab Hai 2025:होली को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई है। Holi Kab Hai 2025 हिंदू पंचांग के अनुसार होली का त्योहार पूर्णिमा के अगले दिन यानि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को मनाते हैं, जबकि होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रा रहित मुहूर्त में रात के समय करते हैं। होली का त्‍योहार जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे वैसे इस बात की चर्चा और गरम होती जा रही है कि होली कब मनाई जाएगी। होली की सही डेट को लेकर लोगों के मन में भारी असमंजस बना है। होली 14 मार्च को होगी या फिर 15 मार्च को, इस बात को लेकर लोगों के बीच में आपस में भारी कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा हो गई है। आइए हम आपको बताते हैं होली जलाने और होली खेलने की सही डेट। Holi 2025 Kab Hai :होली कब मनाई जाएगी, इस बात को लेकर हर साल की तरह इस साल भी भारी कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। होली 14 मार्च को मनाई जाएगी या फिर 15 मार्च को, इस वक्‍त यह काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ स्‍थानों पर होली 14 मार्च को मनाने की बात कर रहे हैं तो कुछ स्‍थानों पर होली 15 मार्च को मनाई जाएगी। आइए आपको बताते हैं कि होली को लेकर कन्फ्यूजन क्‍यों बना, साथ ही जानते हैं होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट क्‍या है। होलिका दहन पर करें ये काम Holi Kab Hai 2025 – होलिका दहन के दिन होलिका की पूजा में अक्षत, गंगाजल, रोली-चंदन, मौली, हल्दी, दीपक, मिष्ठान आदि से पूजा के बाद उसमें आटा, गुड़, कपूर, तिल, धूप, गुगुल, जौ, घी, आम की लकड़ी, गाय के गोबर से बने उपले या गोइठा डाल कर सात बार परिक्रमा करने से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि में वृद्धि, नकारात्मकता का ह्रास होता है। रोग-शोक से मुक्ति मिलती है व मनोकामना की पूर्ति होती है। होलिका के जलने के बाद उसमें चना या गेहूं की बाली को सेंक या पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से स्वास्थ्य अनुकूल होता है। Holi Kab Hai 2025:होली कब मनाई जाएगी होली के त्योहार को लेकर इस साल भी कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। कई स्थानों पर होली का त्योहार 14 मार्च और 15 मार्च को लेकर लोग उलझन में हैं। लेकिन आपको बता दें कि इस बार आपको इन उलझनों में फंसने की जरूरत नहीं है। होली का त्योहार यानी रंगोत्सव हर साल चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को मनाया है। इस साल चैत्र कृष्‍ण प्रतिपदा तिथि का आरंभ 14 मार्च को दिन में 12 बजकर 25 मिनट के बाद हो जा रहा है। इससे पहले तक फाल्गुन पूर्णिमा तिथि रहेगी। ऐसे में 14 मार्च को दिन में प्रतिपदा तिथि लग जाने से रंगोत्सव इसी दिन मनाया जाएगा। जहां लोग होली रंगोत्सव की तारीख को लेकर कन्फ्यूज हैं वहीं उलझन की वजह यह है कि लोग उदया तिथि को मान रहे हैं। यानी 14 मार्च को सुबह 12 बजकर 25 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। इसलिए लोग अगले दिन यानी 15 तारीख को उदया तिथि में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा होने से रंगोत्सव मनाने की बात कर रहे हैं। लेकिन आपको बता दें कि होली और रंगोत्सव का नियम है कि जिस दिन प्रदोष काल में फाल्गुन पूर्णिमा तिथि होती है उसी रात में होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है। Holi Kab Hai 2025 इस नियम के अनुसार होलिका दहन इस वर्ष 13 मार्च को किया जाएगा और 14 मार्च को रंगोत्सव धुलैंडी का त्योहार मनाया जाएगा। प्रतिपदा में 15 मार्च को खेली जाएगी होली उदयातिथि के आधार पर होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और होली फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा में मनाने का विधान है। जहां पर उदयातिथि के अनुसार पर्व मनाया जाता है वहां पर प्रतिपदा तिथि के अनुसार 15 मार्च को होली मनाई जाएगी। मिथिला क्षेत्र में भी होली 15 मार्च को मनाई जाएगी। 14 मार्च को इस बार आतर रहेगा। 14 मार्च शुक्रवार को उदयातिथि को लेकर दोपहर तक पूर्णिमा ही है, इस कारण रंगोत्सव होली नहीं मनायी जाएगी। इसलिए इस बार होली 15 मार्च को मनायी जाएगी।

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Diwali 2025 Date: दिवाली 2025 में कब है ? अभी से जान लें डेट, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

Diwali 2025 Date: दिवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है. अगले साल 2025 में दिवाली कब मनाई जाएगी, इसकी सही तारीख क्या है, पांच दिन का दिवाली कैलेंडर सब यहां देखें. Diwali 2025 Date: हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार को विशेष माना गया है. Diwali 2025 Date कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विधान है. कहा जाता है कि इस दिन लक्ष्मी मां की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. पौराणिक मान्यता है कि इस दिन श्रीराम 14 साल का वनवास कर अयोध्या लौटे थे इस खुशी में दीपावली मनाई गई. दिवाली के 5 दिन का त्योहार धनतेरस से शुरू हो जाता है और भाई दूज तक रहता है. 2025 में दिवाली कब मनाई जाएगी, अभी से जान लें सही तारीख मुहूर्त. दिवाली 2025 में कब है (Diwali 2025 date in India) दिवाली 20 अक्टूबर 2025 में है. इस दिन लक्ष्मी पूजा सूर्यास्त के बाद करने का विधान है. दीपावली को दीप उत्सव भी कहा जाता है, क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दिवाली का त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है. दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Diwali 2025 Muhurat) पंचागं के अनुसार कार्तिक अमावस्या (Kartik amavasya) तिथि 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी. दिवाली 2025 कैलेंडर (Diwali 2025 Calendar) Diwali 2025 Date दिवाली के दिन करें ये शुभ काम दीवाली या लक्ष्मी पूजा के दिन, हिन्दु अपने घरों और दुकानों को गेंदे के फूल की लड़ियों व अशोक, आम तथा केले के पत्तों से सजाते हैं. इस दिन कलश में नारियल स्थापित कर, उसे घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर रखने को शुभ माना जाता है. दिवाली के दिन सफाई का भी विशेष महत्व है. क्योंकि लक्ष्मी मां भी उसी घर में प्रवेश करती हैं जिस घर में साफ-सफाई होती है. लक्ष्मी पूजा के लिए, पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर, Diwali 2025 Date उस पर श्री गणेश और देवी लक्ष्मी की सुन्दर रेशमी वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित मूर्तियों को स्थापित किया जाता है और फिर पूजन करें. शाम को लक्ष्मी पूजा के साथ ही जलते हुए दीपकों की भी पूजा की जाती है. घर और आंगन में सब जगह दीपक लगाएं. कैसे करें लक्ष्मी जयंती की पूजा: लक्ष्मी जयंती Diwali 2025 Date के दिन भक्त प्रातः काल स्नानादि समाप्त कर देवी लक्ष्मी की मूर्ति को वेदी पर रखें और चार बत्तियों का दीपक जलाएं, वेदी के ऊपर शंख भी रखे जाते हैं।फिर लक्ष्मी मां का अभिषेक रोली और चावल से करें और फूल माला अर्पित करें।देवी लक्ष्मी की स्तुति गान करके देवी की आरती करें। इसके बाद देवी लक्ष्मी को भोग के रूप में मिठाई चढ़ाएं और प्रार्थना के बाद भोग सभी भक्तों में वितरित करें।लक्ष्मी जयंती पर भक्त लक्ष्मी होमम करते हैं, होम के दौरान देवी लक्ष्मी सहस्रनामावली और श्री सूक्तम के 1008 नामों का पाठ किया जाता है।लक्ष्मी जयंती के दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए आहुति के लिए कमल के फूलों को शहद में डुबोकर उपयोग किया जाता है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Bhaum Pradosh Vrat:भौम प्रदोष व्रत कथा, इस कथा के पढ़ने व सुनने से भगवान शिव और हनुमानजी की मिलेगी कृपा

Bhaum Pradosh Vrat:माह की त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल मे होना, प्रदोष व्रत होने का सही कारण है। प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहिले प्रारम्भ होकर सूर्यास्त के बाद 45 मिनट होता है। प्रदोष का दिन जब साप्ताहिक दिवस सोमवार को होता है उसे सोम प्रदोष कहते हैं, मंगलवार को होने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष तथा शनिवार के दिन प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं। प्रदोष व्रत कब है? – Pradosh Kab Hai फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्रत: मंगलवार, 11 मार्च 2025  भौम प्रदोष व्रत – ऋण मोचनभौम प्रदोष व्रत कथा प्रदोष काल – 6:27 PM से 8:53 PM फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी तिथि : 11 मार्च 2025 8:13 AM – 12 मार्च 2025 9:11 AM प्रदोष व्रत की पूजा कब करनी चाहिए? प्रदोष व्रत की पूजा अपने शहर के सूर्यास्त होने के समय के अनुसार प्रदोष काल मे करनी चाहिए। प्रदोष में क्या न करें? भगवान शिव की प्रदोष काल में पूजा किए बिना भोजन ग्रहण न करें. व्रत के समय में अन्न, नमक, मिर्च आदि का सेवन नहीं करें। प्रदोष व्रत मे पूजा की थाली में क्या-क्या रखें? पूजा की थाली में अबीर, गुलाल, चंदन, काले तिल, फूल, धतूरा, बिल्वपत्र, शमी पत्र, जनेऊ, कलावा, दीपक, कपूर, अगरबत्ती एवं फल के साथ पूजा करें। Bhaum Pradosh Vrat katha:भौम प्रदोष व्रत कथा Bhaum Pradosh Vrat:सूतजी बोले- अब मैं मंगल त्रयोदशी प्रदोष व्रत का विधि विधान कहता हूं। मंगलवार का दिन व्याधियों का नाशक है। इस व्रत में एक समय व्रती को गेहूं और गुड़ का भोजन करना चाहिए। इस व्रत के करने से मनुष्य सभी पापों व रोगों से मुक्त हो जाता है इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं है। अब मैं आपको उस बुढ़िया की कथा सुनाता हूं, जिसने यह व्रत किया व मोक्ष को प्राप्त हुई। अत्यन्त प्राचीन काल की घटना है। एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी। उसके मंगलिया नाम का एक पुत्र था। Bhaum Pradosh Vrat वृद्धा को हनुमानजी पर बड़ी श्रद्धा थी। वह प्रत्येक मंगलवार को हनुमानजी का व्रत रखकर यथाविधि उनका भोग लगाती थी। इसके अलावा मंगलवार को एक न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी। इसी प्रकार से व्रत रखते हुए जब उसे काफी दिन बीत गए तो हनुमानजी ने सोचा कि चलो आज इस वृद्धा की श्रद्धा की परीक्षा करें। वे साधु का वेष बनाकर उसके द्वार पर जा पहुंचे और पुकारा “है कोई हनुमान का भक्त जो हमारी इच्छा पूरी करे।” वृद्धा ने यह पुकार सुनी तो बाहर आई और महाराज क्या आज्ञा है? साधु वेषधारी हनुमान जी बोले कि ‘मैं बहुत भूखा हूं भोजन करूंगा। Bhaum Pradosh Vrat तू थोड़ी सी जमीन लीप दे।’ वृद्धा बड़ी दुविधा में पड़ गई। अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना की- हे महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त जो काम आप कहें वह मैं करने को तैयार हूं। साधु ने तीन बार परीक्षा करने के बाद कहा- “तू अपने बेटे को बुला मैं उसे औंधा लिटाकर, उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा।” वृद्धा ने सुना तो पैरों तले की धरती खिसक गई, मगर वह वचन हार चुकी थी। Bhaum Pradosh Vrat उसने मंगलिया को पुकार कर साधु महाराज के हवाले कर दिया। मगर साधु ऐसे ही मानने वाले न थे। उन्होंने वृद्धा के हाथों से ही मंगलिया को ओंधा लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलवाई। आग जलाकर, दुखी मन से वृद्धा अपने घर के अंदर जा घुसी। साधु जब भोजन को बुलाकर कहा कि वह मंगलिया को पुकारे ताकि वह भी आकर भोग लगा ले। वृद्धा में आंसू भरकर कहने लगी कि अब उसका नाम लेकर मेरे हृदय को और न दुखाओ, लेकिन साधु महाराज न माने वृद्धा को भोजन के लिए मंगलिया को पुकारना पड़ा। Bhaum Pradosh Vrat पुकारने की देर थी कि मंगलिया बाहर से हंसता हुआ घर में दौड़ा आया। मंगलिया को जीता जागता देखकर वृद्धा को सुखद आश्चर्य हुआ। वह साधु महाराज के चरणों में गिर पड़ी। Bhaum Pradosh Vrat साधु महाराज ने उसे अपने असली रूप में दर्शन दिए। हनुमानजी को अपने आंगन में देखकर वृद्धा को लगा कि जीवन सफल हो गया। Bhaum Pradosh Vrat ki vidhi:प्रदोष व्रत की विधि प्रदोष व्रत करने के लिए मनुष्य को त्रयोदशी के दिन प्रात: सूर्य उदय से पूर्व उठना चाहिए।नित्यकर्मों से निवृ्त होकर, भगवान श्री भोले नाथ का स्मरण करें।इस व्रत में आहार नहीं लिया जाता है।पूरे दिन उपावस रखने के बाद सूर्यास्त से एक घंटा पहले, स्नान आदि कर श्वेत वस्त्र धारण किए जाते है। पूजन स्थल को गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करने के बाद, गाय के गोबर से लीपकर, मंडप तैयार किया जाता है।अब इस मंडप में पांच रंगों का उपयोग करते हुए रंगोली बनाई जाती है।प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है।इस प्रकार पूजन की तैयारियां करके उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए।पूजन में भगवान शिव के मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते हुए शिव को जल चढ़ाना चाहिए। प्रदोष व्रत का महत्व मान्यता और श्रध्दा के अनुसार स्त्री-पुरुष दोनों यह व्रत करते हैं। कहा जाता है Bhaum Pradosh Vrat कि इस व्रत से कई दोषों की मुक्ति तथा संकटों का निवारण होता है. यह व्रत साप्ताहिक महत्त्व भी रखता है।रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत से आयु वृद्धि तथा अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है।सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर किया जाने वाला व्रत आरोग्य प्रदान करता है और इंसान की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत हो तो उस दिन के व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।बुधवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो, उपासक की Bhaum Pradosh Vrat सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़े तो इस दिन के व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है।शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है।संतान प्राप्ति की कामना हो तो शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए।अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किए जाते हैं तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृ्द्धि होती है।

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होलाष्टक 2025 प्रारंभ तिथि और समय, महत्व, क्या करें और क्या न करें, और इस अवधि के दौरान क्या न करें

होलाष्टक 2025 आठ दिनों की अवधि है जिसे अशुभ माना जाता है क्योंकि यह होली के त्यौहार से पहले की अवधि है। यह फाल्गुन के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होता है और होलिका दहन के साथ समाप्त होता है। इस दौरान लोगों को धार्मिक गतिविधियों, दान और आत्मसंयम में संलग्न होना चाहिए, लेकिन नई शुरुआत, ग्रह शांति पूजा, बाल कटवाने या नए कपड़े खरीदने से बचना चाहिए। होली से पहले आठ दिनों की अवधि, जिसे होलाष्टक के नाम से जाना जाता है, नए उद्यम शुरू करने या महत्वपूर्ण अनुष्ठान करने के लिए अशुभ माना जाता है। इस साल होलाष्टक 7 मार्च 2025 को शुरू होगा और 13 मार्च 2025 को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। होलाष्टक 2025: तिथियां और समय अष्टमी तिथि आरंभ: 6 मार्च 2025, सुबह 10:50 बजे होलाष्टक आरंभ: 7 मार्च, 2025 होलाष्टक समाप्त: 13 मार्च, 2025 होलाष्टक महत्व होलाष्टक होलाष्टक 2025 शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। “होलाष्टक” नाम “होली” और “अष्टक” (आठ दिन) को मिलाकर बना है, जो होली के त्यौहार से इसके संबंध पर जोर देता है। इस अवधि के दौरान, लोग शुभ कार्य करने से बचते हैं क्योंकि ग्रहों का प्रभाव प्रतिकूल माना जाता है। होलाष्टक के अंत में होने वाला होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। कई लोग मंत्र जाप, उपवास और दान जैसी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में संलग्न होते हैं, क्योंकि वे इसे आंतरिक शुद्धि और भक्ति का समय मानते हैं। होलाष्टक 2025: क्या करें आध्यात्मिक गतिविधियाँ माना जाता है कि प्रार्थना, ध्यान और मंत्र जाप में शामिल होने से नकारात्मक ग्रह प्रभाव का प्रतिकार होता है। दान और परोपकार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और वित्तीय सहायता देना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु और नरसिंह की पूजा : विष्णु सहस्त्रनाम, विष्णु मंत्र और श्री हरि स्तोत्र का पाठ करने को प्रोत्साहित किया जाता है। आत्म-नियंत्रण बनाए रखें : इस अवधि के दौरान नकारात्मक भावनाओं, कठोर भाषण से बचें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। होलाष्टक 2025: क्या न करें नई शुरुआत से बचें : विवाह, घर खरीदना, गृह प्रवेश, नया व्यापार और जनेऊ संस्कार स्थगित कर देना चाहिए। ग्रह शांति पूजा न करें : प्रतिकूल ग्रहों की स्थिति के कारण ऐसे अनुष्ठानों से बचना चाहिए। बाल कटवाने और नाखून काटने से बचें : पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ये गतिविधियाँ दुर्भाग्य ला सकती हैं। संदिग्ध वस्तुओं को न छुएँ : चौराहे पर रखी गई वस्तुओं में नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है। खरीदारी से बचें : इस दौरान नए कपड़े, जूते या गहने खरीदने से मना किया जाता है। होलाष्टक होली से पहले आध्यात्मिक तैयारी का एक चरण है, जो त्योहार के समापन तक शुभ कार्यों से परहेज करते हुए भक्ति और आत्मनिरीक्षण को प्रोत्साहित करता है।

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Holashtak 2025: होलाष्टक आज से प्रारंभ, जानें कब होंगे समाप्त व इस दौरान क्या करें?

Holashtak 2025 Date: होली के त्योहार से कुछ दिन पहले होलाष्टक प्रारंभ होते हैं, ज्योतिष शास्त्र में होलाष्टक को शुभ नहीं माना गया है। Holashtak date: हिंदू धर्म में होलाष्टक का विशेष महत्व है। इस साल होलाष्टक 07 मार्च 2025, शुक्रवार से आरंभ हो गए हैं। होलाष्टक के समय शुभ व मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत से ही होलिका दहन की तैयारी शुरू होती है। यह वह समय है जब भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया था। यही कारण है कि इस दौरान विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश समेत अन्य शुभ संस्कार पर रोक होती है। मान्यता है कि इस दौरान कुछ कार्यों को करने से जीवन में सकारात्मकता व शुभता का आगमन होता है। जानें होलाष्टक के दौरान क्या करें- 1. होलाष्टक के दौरान हनुमान चालीसा का रोजाना पाठ करना अत्यंत शुभ व लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। हनुमान जी की कृपा से कार्यों में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं और संकटों से रक्षा होती है। Holi 2025 Special Tips: होली के दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना हो सकता है भारी नुकसान 2. होलाष्टक Holashtak 2025 के दौरान भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस शिव मंत्रों का जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है। 3. होलाष्टक Holashtak 2025 के दौरान दान का विशेष महत्व है। इस दौरान गरीब व जरूरतमंदों की मदद करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति व समृद्धि का आगमन होता है। Holi 2025:होली किस तारीख को है? जानें सही तिथि और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 4. होलाष्टक के दौरान पितरों का तर्पण अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है Holashtak 2025 कि ऐसा करने परिवार में सुख-शांति व समृद्धि का आगमन होता है। करियर में तरक्की के अवरोध खत्म होते हैं और संतान से जुड़ी परेशानियां खत्म होने की मान्यता है। Why Holi is celebrated:क्यों मनाई जाती है होली? यहां जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथाएं होलाष्टक Holashtak 2025 कब खत्म होंगे होलाष्टक 13 मार्च 2025 को होलिका दहन के साथ समाप्त होंगे। इसके अगले दिन रंग वाली होली खेली जाएगी। इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें I

Holashtak 2025: होलाष्टक आज से प्रारंभ, जानें कब होंगे समाप्त व इस दौरान क्या करें? Read More »

Holashtak 2025: 7 या 8 मार्च, कब से शुरू हो रहा होलाष्टक, जानें इस दौरान क्यों नहीं करने चाहिए मांगलिक कार्य

Holashtak 2025 धार्मिक मान्यता के मुताबिक होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. यदि कोई इस दौरान ऐसा करता है तो उसके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है. इस दौरान किए गए मांगलिक कार्य सफल नहीं होते हैं. होलाष्टक में जप और तप करना शुभ माना जाता है. Holashtak Me Kya Karein Kya Na Karein: हिंदू धर्म में होली (Holi) का विशेष महत्व है. इस दिन गरीब हों या अमीर, सभी लोग एक होकर इस रंगों के त्योहार को मनाते हैं. इस पर्व को हर साल फाल्गुन महीने में मनाया जाता है. होली से आठ दिन पहले होलाष्टक (Holashtak) शुरू होता है और इसका समापन होलिका दहन (Holika Dahan) के दिन होता है.  होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह करने की मनाही होती है. आइए जानते हैं कब से होलाष्टक शुरू हो रहा है और इस दिन क्या करें व क्या नहीं? कब है होली Kab hai Holi वैदिक पंचांग के मुताबिक होली हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगा. उदयातिथि के कारण रंगों की होली 14 मार्च 2025 को है. होली से एक दिन पहले यानी 13 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन के लिए का शुभ मुहूर्त 13 मार्च 2025 को रात 10:45 बजे से लेकर रात 1:30 बजे तक है.  कब से शुरू होगा होलाष्टक kab se Suru Hoga Holashtak 2025 इस साल होलाष्टक 7 मार्च से शुरू होगा और इसका समापन होलिका दहन दहन के साथ 13 मार्च 2025 को होगा. होलाष्टक यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में मनाया जाता है. Holashtak 2025 होलाष्टक की परंपरा के मुताबिक इस दिन यानी फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी के दिन होलिका दहन के लिए स्थान का चयन किया जाता है. क्यों नहीं करने चाहिए होलाष्टक के समय मांगलिक कार्य  धार्मिक मान्यता है कि जो लोग होलाष्टक Holashtak 2025 के दौरान शुभ कार्य करते हैं, उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है. इस दौरान किए गए मांगलिक कार्य सफल नहीं होते हैं. होलष्टक के दौरान विवाह जैसा मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इस समय निर्मित किए गए मकान सुख नहीं देते, इसलिए गृह निर्माण भी वर्जित होता है. इस समय नया व्यवसाय भी शुरू नहीं करना चाहिए. होलाष्टक के दौरान सोना-चांदी, वाहन आदि की खरीदारी करने की मनाही होती है. होलाष्टक में जप और तप करना शुभ माना जाता है. होलाष्टक में इन संस्कारों को करने पर रहती है मनाही 1. विवाह: शादी के बंधन में बंधना.2. चूड़ाकर्म: मुंडन.3. गर्भाधानः किसी स्त्री का गर्भ धारण करना.4. पुंसवनः गर्भ धारण करने के तीन महीने के बाद किया जाने वाला संस्कार.5. सीमंतोन्नयनः गर्भ के चौथे, छठे व आठवें महीने में होने वाला संस्कार.6. जातकर्म: बच्चे के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए शहद और घी चटाना और वैदिक मंत्रों का उच्चारण करना.7. नामकरणः बच्चे का नाम रखना. 8. निष्क्रमणः यह संस्कार बच्चे के जन्म के चौथे महीने में किया जाता है.9. अन्नप्राशनः बच्चे के दांत निकलने के समय किया जाने वाला संस्कार.10. विद्यारंभः शिक्षा की शुरुआत.11. कर्णवेधः कान को छेदना.12. यज्ञोपवीतः गुरु के पास ले जाना या जनेऊ संस्कार.13. वेदारंभः वेदों का ज्ञान देना.14. केशांतः विद्यारम्भ से पहले बाल मुंडन.15. समावर्तनः शिक्षा प्राप्ति के बाद व्यक्ति का समाज में लौटना समावर्तन है.16. अन्त्येष्टिः अग्नि परिग्रह संस्कार. Holashtak 2025 होलाष्टक के दौरान क्या करें  1. होलाष्टक के दौरान जप और तप करना शुभ माना जाता है.2. हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.3. गरीबों को दान करें. भोजन कराएं. 4. पितृ तर्पण कर सकते हैं. 5. ग्रह शांति पूजा कर सकते हैं.  होलाष्टक Holashtak 2025 में क्यों रहते हैं मांगलिक कार्य बंद हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु को शत्रु मानता था. उसके पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे. हिरण्यकशिपु  नहीं चाहता था कि उसका पुत्र विष्णु की पूजा करे. उसके बार-बार मना करने और यातनाएं देने के बाद भी प्रहलाद की भक्ति भगवान विष्णु के प्रति कम नहीं होती थी. इसका कारण हिरण्यकशिपु अपने पुत्र को मारना चाहता था. Holashtak 2025 प्रहलाद को मारने के लिए उसने कई उपाय किए लेकिन सफल नहीं हुआ. इसके बाद हिरण्यकशिपु की बहन होलिका ने अपने भाई से कहा कि वरदान के मुताबिक मैं अग्नि से जल नहीं सकती हूं. मैं प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाती हूं. इससे प्रहलाद जलकर मर जाएगा. होलिका इसके बाद प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में आठ दिन के लिए बैठ गई.  Holashtak 2025 होलिका को वरदान होने के कारण वह सात दिनों तक नहीं जली लेकिन आठवें दिन वह अग्नि सहन नहीं कर पाई और जलकर उसमें भस्म हो गई. Holashtak 2025 भक्त प्रहलाद को भगवान विष्णु के आशीर्वाद से कुछ भी नहीं हुआ. होलिका के जलने के बाद अग्नि देव शांत हो गए और भक्त प्रहलद सुरक्षित निकल आए. इन आठ दिनों में भक्त प्रहलाद ने अग्नि का ताप और पीड़ा सही, जिस कारण यह आठ दिन होलाष्टक कहा जाने लगा, इसलिए इन आठ दिनों कोई भी मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है. Holashtak 2025 होलाष्टक के विषय में कई धार्मिक मान्यताएं हैं. कहते हैं कि होलाष्टक में ही शिवजी ने कामदेव को भस्म किया था. इस अवधि में हर दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं. इसलिए होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. 

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