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Rishi Panchami 2024 Date: कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व

Rishi Panchami 2024 Date:ऋषि पंचमी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा कहा जाता है कि इस गति को बनाए रखने से आप उन त्रुटियों को समाप्त कर देंगे जिनके बारे में आपको जानकारी नहीं होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को धार्मिक कार्य करने की मनाही है। उनका कहना है कि जब अवचेतन रूप से भी इस कानून का पालन नहीं किया जाता तो उन्हें बड़ा अपराध बोध होता है। इसी कमी को दूर करने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। इसके अलावा इस व्रत को करने से आपकी मनोकामनाएं भी पूरी होंगी। आइए जानते है ऋषि पंचमी की तिथि, पूजा मुहूर्त,मंत्र और महत्व के बारे में।  ऋषि पंचमी 2024: तिथि, शुभ योग, पूजा विधि और महत्व ऋषि पंचमी 2024 हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष ऋषि पंचमी 8 सितंबर, 2024 को मनाई जा रही है। यह व्रत ऋषियों की पूजा करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। ऋषि पंचमी 2024 पंचमी तिथि आरंभ:  7 सितम्बर 2024, सायं 05:37  पर पंचमी तिथि समाप्त: 8 सितम्बर 2024 को सायं 07:58 परउदया तिथि के आधार पर ऋषि पंचमी 8 सितंबर 2024, रविवार को मनाई जाएगी। ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त: प्रातः  11:03 से दोपहर 01:34 तक ।ऋषि पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:31 से 05:17 तक। ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:53  से  दोपहर12:43 तक ऋषि पंचमी 2024 शुभ योगइस वर्ष ऋषि पंचमी के दिन दो शुभ योग बन रहे हैं। सबसे पहले इंद्र योग का प्रशिक्षण दिया जाता है, जो सुबह से देर शाम तक और 12:05 बजे तक  है। वहीं रवि योग दोपहर 3:31 बजे से अगले दिन 9 सितंबर सुबह 6:31 बजे तक रहेगा।रवि योग सभी प्रकार के दोष को दूर करने की क्षमता रखता है क्योंकि यह सूर्य के प्रभाव को अधिक ध्यान में रखता है। ऋषि पंचमी पर स्वाति और विशाखा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र सुबह से 15:31 बजे तक रहेगा।  ऋषि पंचमी पूजा विधि  Rishi Panchami 2024:महत्व ऋषि पंचमी का व्रत करने से कई लाभ होते हैं, जैसे: Rishi Panchami 2024:ऋषि पंचमी 2024 पूजा मंत्रकश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः दहंतु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः॥ Rishi Panchami 2024 के दिन निम्नलिखित कार्य करने से बचना चाहिए Rishi Panchami 2024 के दिन निम्नलिखित कार्य करने की प्रथा है: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Hartalika Teej 2024: पत्नी के व्रत के दौरान पति जरूर करें ये काम, न करें ऐसी गलती

Hartalika Teej 2024: व्रत के दौरान महिलाएं कई अन्य नियमों का भी पालन करती हैं. इस दिन पतियों को भी कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस साल हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा. जानते हैं इस लेख में हरतालिका तीज के दिन पति को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Hartalika Teej:हरतालिका तीज एक ऐसा पर्व है जो पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत बनाता है। इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। ऐसे में पति को भी कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। Hartalika Teej 2024: विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अपने पति की दीर्घायु के लिए हरतालिका तीज व्रत रखती हैं. यह एक कठिन व्रत है क्योंकि महिलाएं व्रत के दिन सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन सूर्योदय तक अन्न, जल और फल ग्रहण नहीं करती हैं. इस कठिन नियम के अलावा महिलाएं कई अन्य नियमों का भी पालन करती हैं. इस दिन पतियों को भी कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस साल हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा. जानते हैं इस लेख में हरतालिका तीज के दिन पति को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Hartalika Teej 2024: तीज पर करें छोटा सा उपाय, वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां होगी दूर Hartalika Teej:हरतालिका तीज के दिन पति क्या करें और न करें पति को क्या नहीं करना चाहिए: क्यों महत्वपूर्ण है पति का सहयोग: Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि प्रारंभ: 5 सितंबर, गुरुवार, दोपहर 12:21 बजे सेभाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त: 6 सितंबर, शुक्रवार, दोपहर 3:01 बजे तकतीज पूजा का समय: सुबह 06:02 बजे से 8:33 बजे तकप्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:36 बजे से कब है Hartalika Teej हरतालिका तीज 2024? इस साल 6 सितंबर को मनाया जाएगा हरतालिका तीज Hartalika Teej:हरतालिका तीज 2024 का शुभ मुहुर्त क्या है? हरतालिका तीज का शुभ मुहुर्त सुबह 06:02 बजे से 8:33 बजे तक है.

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Hartalika Teej 2024: तीज पर करें छोटा सा उपाय, वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां होगी दूर

Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस त्योहार पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।  Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज के दिन पूजा पूरी करने के बाद पांच बुजुर्ग सुहागिन महिलाओं को साड़ी और बिछिया दान करें. साथ ही उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है. Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज का त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. यह व्रत इस साल 6 सितंबर को रखा जा रहा है. हरतालिका तीज के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत और पूजा करती हैं. Hartalika Teej:कुवांरी लड़किया क्यों रखती हैं व्रत…. अविवाहित लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं. इस व्रत के दौरान सुहागिन महिलाएं माता गौरी से सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं. पूजा के अलावा इस दिन कुछ उपाय भी किए जाते हैं, जिन्हें करने से आप वैवाहिक जीवन में सुख प्राप्त कर सकती हैं. आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में… तीज के दिन करें ये उपाय हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को सोलह श्रृंगार करके शिव मंदिर में जल चढ़ाती हैं. साथ ही माता पार्वती को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं. इसके बाद ‘ॐ गौरी शंकराय नमः मंत्र’ का जाप करें. अपनी श्रद्धा के अनुसार चुनरी में 7, 11 या 21 रुपए बांधें. पूजा पूरी करने के बाद चुनरी में बंधे पैसों को अपने पास रख लें. मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है. पूजा के बाद जरूर करें काम हरतालिका तीज व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. अंत में व्रत कथा सुनें और इसके बाद माता पार्वती को खीर का भोग लगाएं. इस खीर को प्रसाद के रूप में अपने पति को भी खिलाएं. इससे पति-पत्नी के बीच संबंध मजबूत होते हैं. साथ ही दांपत्य जीवन खुशहाल होता है. Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय Hartalika Teej 2024:गौरी शंकर की पूजा के बाद सुहागिन महिलाओं को दें ये चीज Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज के दिन पूजा पूरी करने के बाद पांच बुजुर्ग सुहागिन महिलाओं को साड़ी और बिछिया दान करें. साथ ही उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है. Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज की पूजा विधि Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज का महत्व अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Somvati Amavasya 2024 पर पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय, नहीं सताएगा पितृ दोष का डर

Somvati Amavasya सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करना और दान करना बहुत शुभ माना जाता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने और पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं।इस साल भाद्रपद की अमावस्या सोमवार 02 सितंबर 2024 को पड़ रही है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती आमवस्या भी कहा जाएगा है। इस तिथि पर व्रत पूजा-पाठ और स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। इसी के साथ पितरों के निमित्त कुछ उपाय करने से आप इस तिथि पर जीवन में शुभ परिणाम देख सकते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों के लिए समर्पित मानी गई है। ऐसे में आप इस तिथि पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखते हैं। तो चलिए जानते हैं कि भाद्रपद में आने वाली सोमवती अमवास्या (Somvati Amavasya 2024) पर आप किस तरह पितरों को तृप्त कर सकते हैं। जरूर करें ये काम (Pitron ko kaise Khush kare) सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान जरूर करें। अगर आपके आसपास कोई नदी या तालाब नहीं है, तो ऐसे में आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इसी के साथ सोमवती अमावस्‍या पर पीपल के पेड़ का पूजा भी जरूर करें। पूजन के दौरान पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करें और पेड़ के नीचे सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाएं। शुभ फलों की प्राप्ति के लिए आप पितृ चालीसा (Somvati Amavasya 2024 date) का पाठ कर भी कर सकते हैं। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जरूर करें ये काम (works to get ancestors blessings) सोमवती अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद अपनी क्षमता अनुसार, दान-दक्षिणा जरूर देनी चाहिए। Somvati Amavasya इसी के साथ आप जरूरमंद लोगों में काले तिल, जल, दही, शहद, गाय का दूध, गंगाजल, वस्त्र, अन्न का भी दान कर सकते हैं। पितृदोष निवारण हेतु पिंडदान करते समय मंत्रों का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी अवश्य करें। Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi) Somvati Amavasya:पितृ दोष निवारण मंत्र पितरों की शांति के लिए उपाय: दान के लिए शुभ वस्तुएं: Kyu Mnai Jati Hai Somvati Amavasya:क्यों मनाई जाती है सोमवती अमावस्या? सोमवती अमावस्या को चंद्रमा का दिन माना जाता है और चंद्रमा को पितरों का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन पितरों की पूजा करना और उन्हें याद करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। पितृ दोष क्या होता है? पितृ दोष एक ज्योतिषीय दोष है जो पितरों के असंतुष्ट होने के कारण होता है। यह दोष व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है, जैसे कि विवाह में बाधाएं, धन हानि, स्वास्थ्य समस्याएं आदि। Somvati Amavasya सोमवती अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?

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Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi)

Ekadashi 2025: एकादशी तिथि भगवान श्री हरि विष्णु भगवान जी की पूजा अर्चना करने के लिए सबसे शुभ दिन होता है. तो चलिए जानते है साल 2025 में आने वाली समस्त एकादशी तिथियों के बारे में (जनवरी से दिसंबर तक) Ekadashi 2025 एक हिंदू त्योहार है जो हर महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत करने का दिन माना जाता है, जिससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। Ekadashi 2025: एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. प्रत्येक माह में 2 एकादशी तिथि आती है शुक्ल पक्ष की एकादशी,और कृष्ण पक्ष की एकादशी। हिन्दू कैलेंडर में एकादशी तिथि 11वीं तिथि को बोला जाता है.Ekadashi 2025 इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना करना से तथा व्रत धारण करने से व्यक्ति समस्त पापों का नाश होता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है. साल में लगभग 24 या 25 एकादशी तिथि आती हैं Ekadashi 2025और प्रत्येक एकादशी का नाम अलग अलग होता है और कथा भी अलग अलग होती हैं। ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा की स्थिति के कारण व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब और अच्छी होती है. चंद्रमा की स्थिति को सही करने के लिए एकादशी का व्रत रखा जाता है. Ekadashi 2025 एकादशी व्रत का प्रभाव मन और शरीर दोनों पर पड़ता है।तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का है. Ekadashi 2025 तो चलिए जानते है साल 2025 में पड़ने वाले समस्त एकादशी तिथियों के बारे में. 2025 में लगभग 25 एकादशी आएँगी तो आप यहां पे हर महीने में आने वाली एकादशी तिथि के बारे में जान सकते है. 2025 में जनवरी से दिसंबर (2025 Ekadashi January To December) माह तक आने वाली प्रत्येक एकादशी की सही डेट और समय. साल 2025 की सभी एकादशी (Ekadashi 2025 Date and Time) जनवरी 2025 में एकादशी (10 जनवरी 2025, शुक्रवार) पौष पुत्रदा एकादशी / वैकुण्ठ एकादशी: पौष, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 12:22 अपराह्न, 09 जनवरी, समाप्त – प्रातः 10:19 बजे, 10 जनवरी) (25 जनवरी 2025, शनिवार) षटतिला एकादशी: माघ, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 07:25 अपराह्न, 24 जनवरी, समाप्त – 25 जनवरी, रात्रि 08:31 बजे) फरवरी 2025 एकादशी (8 फ़रवरी 2025, शनिवार) जया एकादशी : माघ, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – रात्रि 09:26 बजे, 07 फरवरी समाप्त – रात्रि 08:15 बजे, फरवरी 08) (24 फरवरी 2025, सोमवार) विजया एकादशी: फाल्गुन, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – 01:55 अपराह्न, 23 फरवरी समाप्त – 01:44 अपराह्न, 24 फरवरी) मार्च 2025 एकादशी 10 मार्च 2025, सोमवार) आमलकी एकादशी: फाल्गुन, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 07:45, मार्च 09 समाप्त – प्रातः 07:44, मार्च 10) (25 मार्च 2025, मंगलवार) पापमोचनी एकादशी: चैत्र, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 05:05, मार्च 25 समाप्त – प्रातः 03:45, मार्च 26) (26 मार्च 2025, बुधवार) वैष्णव पापमोचनी एकादशी: चैत्र, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 05:05, मार्च 25 समाप्त – प्रातः 03:45, मार्च 26) अप्रैल 2025 में एकादशी (8 अप्रैल 2025, मंगलवार) कामदा एकादशी: चैत्र, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – 08:00 अपराह्न, 07 अप्रैल समाप्त – रात्रि 09:12 बजे, अप्रैल 08) (24 अप्रैल, 2025, गुरुवार) वरुथिनी एकादशी: वैशाख, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 04:43 अपराह्न, 23 अप्रैल समाप्त – 02:32 अपराह्न, 24 अप्रैल) मई2025 में एकादशी (8 मई 2025, गुरूवार) मोहिनी एकादशी: वैशाख, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 10:19 बजे, 07 मई समाप्त – 12:29 PM, 08 मई) (23 मई 2025, शुक्रवार) अपरा एकादशी: ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 01:12 AM, 23 मई समाप्त – रात्रि 10:29 बजे, 23 मई) जून 2025 में एकादशी (6 जून 2025, शुक्रवार) निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 02:15 पूर्वाह्न, 06 जून समाप्त – प्रातः 04:47, जून 07) (21 जून 2025, शनिवार) योगिनी एकादशी: आषाढ़, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:18 बजे, 21 जून समाप्त – प्रातः 04:27, जून 22) (22 जून 2025, रविवार) गौना योगिनी एकादशी / वैष्णव योगिनी एकादशी: आषाढ़, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:18 बजे, 21 जून समाप्त – प्रातः 04:27 बजे, 22 जून) जुलाई 2025 में एकादशी (6 जुलाई 2025, रविवार) देवशयनी एकादशी: आषाढ़, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – सायं 06:58 बजे, 05 जुलाई समाप्त – रात्रि 09:14 बजे, 06 जुलाई) (21 जुलाई 2025, सोमवार) कामिका एकादशी: श्रावण, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:12 अपराह्न, 20 जुलाई समाप्त – प्रातः 09:38 बजे, 21 जुलाई) अगस्त2025 में Ekadashi 2025 (5 अगस्त 2025, मंगलवार) श्रावण पुत्रदा एकादशी: श्रावण, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 11:41 पूर्वाह्न, 04 अगस्त, समाप्त – 01:12 अपराह्न, 05 अगस्त) (19 अगस्त 2025, मंगलवार) अजा एकादशी: भाद्रपद, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 05:22 अपराह्न, 18 अगस्त समाप्त – 03:32 अपराह्न, 19 अगस्त) सितम्बर 2025 एकादशी (3 सितम्बर 2025, बुधवार) पार्श्व एकादशी: भाद्रपद, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 03:53 पूर्वाह्न, 03 सितंबर समाप्त – प्रातः 04:21, सितम्बर 04) (17 सितम्बर 2025, बुधवार) इन्दिरा एकादशी: आश्विन, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:21 पूर्वाह्न, 17 सितंबर समाप्त – रात्रि 11:39 बजे, 17 सितम्बर) अक्टूबर 2025 में एकादशी (3 अक्टूबर 2025, शुक्रवार) पापांकुशा एकादशी: आश्विन, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 07:10 अपराह्न, 02 अक्टूबर, समाप्त – 06:32 अपराह्न, 03 अक्टूबर) (17 अक्टूबर 2025, शुक्रवार) रमा एकादशी: कार्तिक, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 10:35 बजे, 16 अक्टूबर समाप्त – 11:12 पूर्वाह्न, 17 अक्टूबर) नवंबर 2025 में एकादशी (2 नवंबर 2025, रविवार) देवउत्थान एकादशी: कार्तिक, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 09:11 बजे, 01 नवम्बर, समाप्त – प्रातः 07:31 बजे, 02 नवम्बर) (15 नवंबर 2025, शनिवार) उत्पन्ना एकादशी: मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:49 पूर्वाह्न, 15 नवंबर,समाप्त – 02:37 पूर्वाह्न, 16 नवंबर) दिसंबर 2025 में Ekadashi (1 दिसंबर 2025, सोमवार) मोक्षदा एकादशी: मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी (आरंभ – रात्रि 09:29 बजे, 30 नवंबर, समाप्त – 07:01 अपराह्न, 01 दिसम्बर) (15 दिसंबर 2025, सोमवार) सफला एकादशी: पौष, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 06:49 अपराह्न, 14 दिसंबर, समाप्त – रात्रि 09:19 बजे, 15 दिसम्बर) (31 दिसंबर 2025, बुधवार) पौष पुत्रदा एकादशी: पौष, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:50 बजे, 30 दिसम्बर, समाप्त – प्रातः 05:00 बजे, 31 दिसम्बर)

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Aja Ekadashi 2024: इन गलतियों के कारण टूट सकता है अजा एकादशी का व्रत! श्री हरि हो जाएंगे नाराज

Aja Ekadashi अजा एकादशी 2024: इन गलतियों से बचें, वरना श्री हरि हो जाएंगे नाराज Aja Ekadashi अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत को करने से कई तरह के पुण्य मिलते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन अगर इस व्रत को करते समय कुछ गलतियाँ की जाएँ तो भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और व्रत का फल नहीं मिलता है। Aja Ekadashi 2024: अजा एकादशी पर होगा पापों का नाश, जानिए शुभ मुहूर्त और दान का महत्व Aja Ekadashi अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस दिन कठिन व्रत का पालन करते हैं और विधि अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें सुख-शांति की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार अजा एकादशी 29 अगस्त को मनाई जाएगी तो आइए इस तिथि से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं। Aja Ekadashi हिंदू धर्म में सभी एकादशी का अपना एक खास महत्व है। यह बहुत विशेष मानी जाती है। यह दिन भगवान विष्णु (Vishnu ji) की आराधना के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस दौरान कठिन व्रत का पालन करते, उन्हें दोगुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही श्री हरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वहीं कुछ लोग इस दिन (Aja Ekadashi 2024 Date) ऐसी महत्वपूर्ण बातों को अनदेखा कर देते हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है, तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।अजा एकादशी का व्रत एक पवित्र व्रत है। इस व्रत को विधि-विधान से करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। इन बातों का जरूर रखें ध्यान Aja Ekadashi अजा एकादशी का महत्व: Aja Ekadashi अजा एकादशी व्रत कैसे करें कब है अजा एकादशी? (Bhadrapada Ekadashi 2024) हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ गुरुवार 29 अगस्त को देर रात 1 बजकर 19 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन शुक्रवार 30 अगस्त को देर रात 01 बजकर 37 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, अजा एकादशी 29 अगस्त 2024 को मनाई जाएगी। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Aja Ekadashi 2024: अजा एकादशी पर होगा पापों का नाश, जानिए शुभ मुहूर्त और दान का महत्व

Aja Ekadashi 2024 हिन्दू परंपरा में एकादशी बेहद महत्वपूर्ण त्यौहार है जो हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन मनाया जाता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन पड़ने वाली एकादशी को अजय एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की उपासना करने की मान्यता है। कहा जाता है कि अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने तथा दीन-दु:खी, निर्धन लोगों को दान देने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन धान्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसी भी मान्यताएं हैं कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।  Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी का महत्व Aja Ekadashi 2024 सनातन परंपरा में अजा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी पर व्रत रखने तथा दान देने वाला व्यक्ति सभी सांसारिक सुखों को भोगने के बाद विष्णुलोक को जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली तथा अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल देने वाली मानी जाती है। इस दिन विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।  इस एकादशी के बारे में बताते हुए भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था, “अजा एकादशी पर व्रत रखकर विधि विधान से पूजा करने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पा सकता है और मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।” इसलिए इस दिन व्रत रखकर पूरे मन के साथ भगवान नारायण की आराधना करने का का खास महत्व है।  Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त  आजा एकादशी की शुरुआत 29 अगस्त 2024 बह 01:18 बजे से होगी। साथ ही इस एकादशी का समापन 30 अगस्त 2024 को सुबह 01:36 बजे पर होगा। हिन्दू धर्म में उदयातिथि मान्य है, इसलिए यह एकादशी 29 अगस्त को मनाई जाएगी।  Aja Ekadashi दान का महत्व  हिन्दू धर्म शास्त्रों में दान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। सनातन संस्कृति को मानने वाले लोग सदियों से ही दान की महत्ता को समझते आ रहे हैं। लोग मन की शांति, मनोकामना पूर्ति, पुण्य की प्राप्ति, ग्रह-दोषों के प्रभाव से मुक्ति और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दान करते हैं। हिन्दू धर्म में दान का महत्व इसलिए भी ज्यादा है Aja Ekadashi 2024 क्योंकि कहा जाता है कि दान का लाभ सिर्फ जीते जी नहीं बल्कि मृत्यु के बाद भी मिलता है। लेकिन दान का पुण्य फल आपको तभी प्राप्त होता है, जब दान सही समय, सही तरीके और सच्चे मन के साथ पात्र व्यक्ति को दिया गया हो।  दान के महत्व का उल्लेख करते हुए श्रीमद् भगवद्गीता में कहा गया है-  दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे। देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्।। (जो दान कर्तव्य समझकर, किसी फल की आशा के बिना, उचित काल तथा स्थान में और आध्यात्मिक कार्यों में लगे पात्र व्यक्ति को दिया जाता है वही दान सात्विक माना जाता है।)   Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी पर करें इन चीजों का दान  Aja Ekadashi 2024 अन्य त्यौहारों की तरह अजा एकादशी पर भी दान का बड़ा महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस शुभ दिन पर अन्न और भोजन का दान सर्वोत्तम है। इसलिए एकादशी के पुण्यकारी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के दीन-हीन, निर्धन, दिव्यांग बच्चों को भोजन दान करने के प्रकल्प में सहयोग करके पुण्य के भागी बनें। अजा एकादशी 2024: पापों का नाश और मोक्ष का मार्ग अजा एकादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष, अजा एकादशी 29 अगस्त, 2024, गुरुवार को पड़ रही है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। Aja Ekadashi शुभ मुहूर्त और पूजा विधि दान का महत्व अजा एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान कर सकते हैं। Aja Ekadashi अजा एकादशी का महत्व

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Putrada Ekadashi 2024 Date: पुत्रदा एकादशी संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Putrada Ekadashi 2024 : पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से आपको अक्षय पुण्‍य की प्राप्ति होती है, जानिए शुभ मुहूर्त और तिथि… Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी 2024: संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व पुत्रदा एकादशी 2024 हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो संतान प्राप्ति की कामना से रखा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जिनको संतान दाता देवता माना जाता है। Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी 2024 की तिथि और शुभ मुहूर्त शुभ मुहूर्त: शुभ मुहूर्त के लिए आपको किसी पंडित या ज्योतिषी से संपर्क करना चाहिए। Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व पुत्रदा एकादशी व्रत कैसे करें? पुत्रदा एकादशी व्रत के लाभ Putrada Ekadashi Kab Hai : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। साथ ही आपको बता दें कि एक महीने में दो एकादशी पड़ती हैं, जिसमेंं एक शुक्ल पक्ष तो दूसरी कृष्ण पक्ष में। वहीं यहां हम बात करने जा रहे हैं पुत्रदा एकादशी के बारे में, जो इस साल 16 अगस्त को मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वहीं मान्‍यता है इस दिन वे महिलाएं जो पुत्र पाना चाहती हैं अगर व्रत करें तो उन्‍हें पुत्र रत्‍न की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त… पुत्रदा एकादशी की तिथि पुत्रदा एकादशी की शुरुआत 15 अगस्‍त को सुबह 10 बजकर 25 मिनट से होगी। साथ ही इस एकादशी का अंत 16 अगस्‍त को सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर होगा। इसलिए उदयातिथि को आधार मानते हुए पुत्रदा एकादशी का व्रत 16 अगस्त को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 17 अगस्‍त को सुबह 5 बजकर 52 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक किया जा सकता है। पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत पर प्रीति योग बन रहा है। इस योग का निर्माण दोपहर 1 बजकर 13 मिनट से हो रहा है। इस समय में भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा। Putrada Ekadashi साथ ही पूजा का दोगुना फल प्राप्त होता है। पुत्रदा एकादशी धार्मिक महत्व पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख- समृद्धि बनी रहती है। वहीं मान्यता है कि व्यक्ति को मृत्‍यु उपरांत बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। Putrada Ekadashi साथ ही इस व्रत के पुण्य-प्रताप से राजा महीजित महिष्मती को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। इसलिए इस एकादशी का व्रत रखने से पुत्र रत्न की प्राप्ति के योग बनते हैं। साथ ही विवाहित महिलाओं के सुख और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।

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Aja Ekadashi 2024: अजा एकादशी कब? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होते हैं। Aja Ekadashi Kab Hai भगवान विष्णु के भक्तों के लिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। साल भर में 24 एकादशी होती हैं। व्रतराज ग्रंथ के अनुसार, भाद्रपद (भादो) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को ‘अजा एकादशी’ का व्रत रखा जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व है। अजा एकादशी के दिन व्रत करने से न केवल धन और सुख की प्राप्ति होती है बल्कि सभी प्रकार की चिंताओं से भी छुटकारा मिल जाता है। Aja Ekadashi 2024 आइए जानते हैं अजा एकादशी की तिथि, पूजा मुहूर्त और पारण के समय के बारे में सब कुछ Aja Ekadashi 2024 कब है अजा एकादशी भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ: 29 अगस्त, बृहस्पतिवार, देर रात 1 : 19 मिनट से भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 30 अगस्त, शुक्रवार को देर रात 1 :37 मिनट पर समाप्त हो रही है सूर्य के उदय और व्रत की तिथि के योग यानी उदयातिथि के आधार पर अजा एकादशी 29 अगस्त 2024 को मनाए जाएगी। अजा एकादशी पर बन रहे हैं ये शुभ योगअजा एकादशी के दिन आर्द्रा नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। साथ ही इस दिन इन सभी योगों का संयोग सिद्धि योग के साथ हो रहा है।  इस बार अजा एकादशी गुरुवार के दिन ही पड़ रही है। ऐसे में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। अजा एकादशी 2024 पारण का समयहिन्दू पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी के पारण का समय:  शुक्रवार 30 अगस्त को प्रातः  7: 49 मिनट से 8 : 31 मिनट तक है। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय: पारण प्रातः  7: 49 मिनट है। बता दें कि पारण करने की कुल अवधि 42 मिनट की है।  Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी की पूजा विधि अजा एकादशी 2024 महत्वअजा एकादशी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक सशक्त उपाय माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। Aja Ekadashi 2024 इसके साथ ही तरक्की और शांति के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार इस एकादशी की कथा सुनने मात्र से अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है। Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी का व्रत कैसे रखें अजा एकादशी का धार्मिक महत्व डिस्क्लेमर ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

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Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज पर बन रहे शुभ संयोग, इन 4 राशि की महिलाओं को मिलेगा लाभ

Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज 2024: शुभ संयोग और 4 भाग्यशाली राशियां Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज 2024 हिंदू महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस साल हरियाली तीज पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे यह त्योहार और भी खास हो गया है। विशेष रूप से, कुछ राशियों की महिलाओं के लिए यह त्योहार बेहद लाभदायक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि किन राशियों पर मां पार्वती की विशेष कृपा होगी। Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज 7 अगस्त 2024 को मनाई जाएगी. इस दिन कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, ऐसे में कुछ राशि की महिलाओं को विशेष लाभ मिलेगा. जानें हरियाली तीज पर किन राशियों की चमकेगी किस्मत Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज पर सुहागिनें पति की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती है. ये व्रत शिव-पार्वती को समर्पित है. इसके प्रताप से सुहाग की रक्षा, उन्नति, स्त्रियों को अखंड सौभाग्य मिलता है. इस बार हरियाली तीज पर रवि और शिव योग का संयोग बन रहा है. शिव योग में भोलेनाथ की उपासना का दोगुना फल मिलता है. इन योग के शुभ प्रभाव और ग्रहों की शुभ स्थिति से तुला राशि, मीन, मकर और वृश्चिक राशि की स्त्रियों को लाभ देगी. Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज का महत्व हरियाली तीज को श्रावण मास की तीज भी कहा जाता है। यह त्योहार प्रकृति और महिलाओं के सौंदर्य का प्रतीक है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। क्यों है खास हरियाली तीज 2024? इस साल हरियाली तीज पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जैसे कि: इन शुभ योगों के कारण, इस साल हरियाली तीज पर की गई पूजा का फल अधिक मिलेगा। पूजा विधि Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और बेल पत्र, धतूरा, फूल आदि अर्पित करें। इसके अलावा, भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें। पूजा के बाद ब्राह्मण को दान करें। वृषभ: वृषभ राशि की महिलाओं को इस साल हरियाली तीज पर धन लाभ होने की संभावना है। व्यापार में वृद्धि हो सकती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मकर: मकर राशि की महिलाओं के लिए हरियाली तीज बहुत लकी रहेगी. बिजनेस में तेजी आएगी. अच्छा मुनाफा होगा. वाहन खरीदने की योजना सफल हो सकीत है. कमाई का जरिया बढ़ेगा. तुला: तुला राशि की महिलाओं को इस साल हरियाली तीज पर करियर में सफलता मिल सकती है। नौकरी में पदोन्नति मिल सकती है या नया अवसर मिल सकता है। मीन: मीन राशि की महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा। वे मानसिक रूप से मजबूत महसूस करेंगी। सावधानियां निर्जला व्रत का करें संकल्प हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाओं को सुबह सुर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करने के बाद माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। Hariyali Teej 2024 इस दिन पति-पत्नी का साथ मिलकर शिव-पार्वती की पूजा करना शुभ माना गया है। इसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प करें। निष्कर्ष हरियाली तीज 2024 सभी के लिए एक शुभ अवसर है। विशेष रूप से, ऊपर बताई गई राशियों की महिलाओं के लिए यह त्योहार और भी खास है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Hariyali Teej 2024:रियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं क्या करें और क्या नहीं

Hariyali Teej अगर आप हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं तो इस दिन इन गलतियों को करने से पूरी तरह बचें। वरना आपकी पूजा और व्रत दोनों अधूरी रह सकती है। तो आइए जानते हैं कि हरियाली तीज के दिन किन कामों को नहीं करना चाहिए। Hariyali Teej 2024: आज सुहागिनों के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक हरियाली तीज मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है। Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज के दिन भगवान शिव शंकर और माता पार्वती की पूजा का विधान है। हरियाली तीज हर सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। वहीं व्रत करने वाली महिलाओं को हरियाली तीज के दिन इन कामों को करने से बचना चाहिए वरना आपकी पूजा खंडित हो सकती है। तो आइए जानते हैं कि हरियाली तीज के दिन क्या नहीं करना चाहिए Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं भूलकर न करें ये काम Hariyali Teej 2024:सुहागिन महिलाएं हरियाली तीज पर क्या करें: हरियाली तीज के दिन महिलाओं के बीच झूला झूलने का भी प्रचलन है। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। इस दिन खुद से बड़ी सुहागिन महिलाओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए। करें 16 श्रृंगार हरियाली तीज पर 16 श्रृंगार करने का विशेष महत्व है। इसलिए इस दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियों आदि जैसे 16 श्रृंगार को अपने श्रृंगार का हिस्सा बनाना चाहिए। इस दिन महिलाओं के बीच मेंहदी लगाने का भी प्रचलन हैं। निर्जला व्रत का करें संकल्प हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाओं को सुबह सुर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करने के बाद माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन पति-पत्नी का साथ मिलकर शिव-पार्वती की पूजा करना शुभ माना गया है। इसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प करें। हरियाली तीज का महत्व (Hariyali Teej Importance) हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए माता पार्वती के व्रत की शुरुआत हरियाली तीज से ही हुई थी। इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। साथ ही इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनने का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाओं के बीच झूला झूलने का भी प्रचलन है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Hariyali Teej 2024: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज,तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

हरियाली तीज, सावन की तीज, तीज पूजा, तीज मुहूर्त, सावन का महीना Hariyali Teej 2024: हिंदू धर्म में हरियाली तीज व्रत का विशेष महत्व है. हरियाली तीज का व्रत पति के दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि लाने के लिए रखा जाता है. इस व्रत में कठिन नियमों का पालन करना होता है. रियाली तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, विशेषकर महिलाओं के लिए। यह त्योहार सावन के महीने में मनाया जाता है और प्रकृति, सौंदर्य और महिलाओं के जीवन को समर्पित है। Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का उत्सव हर साल श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है. वहीं हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है. इस बार Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जाएगी. इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बन रही है, क्योंकि तृतीया ति​थि 6 और 7 अगस्त दोनों दिन है. Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज कब है? हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस बार श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि 6 अगस्त को 07 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 7 अगस्त को रात 10 बजकर 05 मिनट तक मान्य होगी. 6 अगस्त को तृतीया तिथि रात के समय में लग रही है, इस वजह से उस दिन तीज का व्रत नहीं रखा जाएगा. श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि की उदयातिथि 6 अगस्त को न होकर 7 अगस्त को है. उदयातिथि की गणना सूर्योदय से की जाती है. श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि में सूर्योदय 7 अगस्त को 05 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है, इसलिए हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जाएगी. इस आधार पर हरियाली तीज का व्रत 6 अगस्त को न रखकर 7 अगस्त के दिन रखा जाएगा. Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज पर 3 शुभ योग पंचांग के अनुसार हरियाली तीज पर 3 शुभ योग बनेंगे. हरियाली तीज के दिन परिघ योग, शिव योग और रवि योग का निर्माण होगा. हरियाली तीज व्रत के दिन रवि योग रात 8 बजकर 30 मिनट से लेकर अगले दिन 8 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक है. वहीं परिघ योग सुबह से लेकर सुबह 11 बजकर 42 मिनट तक है और उसके बाद शिव योग लगेगा. शिव योग अगले दिन पारण तक रहेगा. हरियाली तीज का महत्व पूजा विधि माता पार्वती को अर्पित करें शृंगार हरियाली तीज का पर्व माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। ऐसे में जो महिला ये व्रत कर रही है, उसे मां पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इससे मां पार्वती अति प्रसन्न होती हैं और साधक को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। राहुकाल में भूलकर भी नहीं करें हरियाली तीज की पूजा ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना जाता है. इसलिए राहुकाल के दौरान यज्ञ, पूजा, पाठ आदि नहीं करते हैं, क्योंकि यह फलित नहीं होते हैं. इसलिए हरियाली तीज के दिन राहुकाल में पूजा नहीं करनी चाहिए. हरियाली तीज पर राहुकाल दोपहर में 02 बजकर 06 मिनट से 03 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. हरियाली तीज में इन बातों का रखें ध्यान हरियाली तीज में व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व सरगी खाते हैं. फिर सूर्योदय के साथ ही निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाएगा. सरगी के समय ही ठीक से पानी पी लेना चाहिए. यदि आपकी सेहत ठीक नहीं है तो आपको निर्जला व्रत करने से बचना चाहिए. क्योकि यह आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है. हरियाली तीज व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के समय माता गौरी को श्रृंगार की सामग्री जरूर अर्पित करें. हरियाली तीज पर क्या नहीं करना चाहिए? हरियाली तीज की रात को व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं को रात को सोना नहीं चाहिए, बल्कि रात भर जागरण करना चाहिए. Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज के दिन महिलाओं को बिल्कुल भी गुस्सा नहीं करना चाहिए. मन को शांत रखकर मां पार्वती को पूजा-अर्चना करना चाहिए. हरियाली तीज के दिन अपने पार्टनर से किसी भी प्रकार का विवाद या फिर झूठ नहीं बोलना चाहिए.  

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