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Dev Uthani Ekadashi 2024: इस साल कब है देवउठनी एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

 Dev Uthani Ekadashi 2024: हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होते हैं। इससे पूर्व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने के लिए विश्राम करने चले जाते हैं। अतः आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक चातुर्मास रहता है। शास्त्रों में चातुर्मास के दौरान शुभ कार्य करने की मनाही है। अतः इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। आइए, Dev Uthani Ekadashi देव उठनी एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं- Dev Uthani Ekadashi:शुभ मुहूर्त कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 12 नवंबर को संध्याकाल 04 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इसके अगले दिन तुलसी विवाह है। तुलसी विवाह तिथि से सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जाते हैं। Dev Uthani Ekadashi:पारण समय व्रती तुलसी विवाह यानी 13 नवंबर को सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट तक व्रत खोल सकते हैं। इस समय में स्नान-ध्यान से निवृत्त होकर विधि-विधान से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करें। Dev Uthani Ekadashi इसके पश्चात ब्राह्मणों को अन्न दान देकर व्रत खोलें। Dev Uthani Ekadashi 2024:शुभ योग देवउठनी एकादशी को शाम 07 बजकर 10 मिनट तक हर्षण योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण सुबह 07 बजकर 52 मिनट से हो रहा है, जो 13 नवंबर को सुबह 05 बजकर 40 मिनट पर समाप्त हो रहा है। साथ ही रवि योग का संयोग बन रहा है। यह योग सुबह 06 बजकर 42 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 52 मिनट तक है। इन योग के दौरान भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। देवउठनी एकादशी पूजा विधि (Devuthani Ekadashi Puja Vidhi) देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी Dev Uthani Ekadashi एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग-निद्रा से जागते हैं। इसे विशेष रूप से विष्णु पूजा और तुलसी विवाह के लिए मनाया जाता है। यहाँ पूजा विधि दी गई है: 1. स्नान और स्वच्छता 2. व्रत संकल्प (Vrat Sankalp) 3. भगवान विष्णु की पूजा (Vishnu Puja) 4. तुलसी पूजा (Tulsi Puja) 5. भोग और प्रसाद (Bhog and Prasad) 6. आरती (Aarti) 7. व्रत कथा सुनें (Vrat Katha) 8. व्रत का समापन (End of Fast) देवउठनी एकादशी पर यह पूजा विधि अपनाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है Dev Uthani Ekadashi और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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Rama Ekadashi 2024:27 या 28 अक्टूबर, कब है रमा एकादशी? जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त

Rama Ekadashi:रमा एकादशी 2024 में 28 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होती है और कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है, Rama Ekadashi जो दीपावली से चार दिन पहले होती है। इसे “रम्भा एकादशी” भी कहा जाता है। Rama Ekadashi:शुभ मुहूर्त: Rama Ekadashi:पूजा विधि: Rama Ekadashi 2024:व्रत के नियम: Rama Ekadashi:महत्व: Rama Ekadashi:रमा एकादशी का व्रत व्यक्ति के सभी पापों का नाश करता है और मोक्ष की प्राप्ति कराता है। इसे रखने से आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। Rama Ekadashi व्रत के पुण्य फल को हजार अश्वमेध यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञों के बराबर माना गया है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि जीवन में शांति और समृद्धि लाता है। रमा एकादशी से जुड़ी एक प्रमुख कथा राजा मुचुकुंद और उनकी पुत्री चंद्रभागा से संबंधित है। इस व्रत का पालन करने से राजा के दामाद शोभन को स्वर्ग की प्राप्ति होती है और व्रत की महिमा का महत्व बताता है कि यह न केवल सांसारिक जीवन में लाभ देता है बल्कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को पुण्य और स्वर्ग की प्राप्ति होती है कथा- रमा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा के अनुसार प्राचीन काल में मुचकुंद नाम का एक राजा था। Rama Ekadashi उसकी इंद्र के साथ मित्रता थी और साथ ही यम, कुबेर, वरुण और विभीषण भी उसके मित्र थे। यह राजा बड़ा धर्मात्मा, विष्णुभक्त और न्याय के साथ राज करता था। उस राजा की एक कन्या थी, जिसका नाम चंद्रभागा था। उस कन्या का विवाह चंद्रसेन के पुत्र शोभन के साथ हुआ था।  एक समय वह शोभन ससुराल आया। उन्हीं दिनों जल्दी ही पुण्यदायिनी एकादशी ‘रमा’ भी आने वाली थी। जब व्रत का दिन समीप आ गया तो चंद्रभागा के मन में अत्यंत सोच उत्पन्न हुआ कि मेरे पति अत्यंत दुर्बल हैं Rama Ekadashi और मेरे पिता की आज्ञा अति कठोर है। दशमी को राजा ने ढोल बजवा कर सारे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए। ढोल की घोषणा सुनते ही शोभन को अत्यंत चिंता हुई और अपनी पत्नी से कहा कि हे प्रिये! अब क्या करना चाहिए, मैं किसी प्रकार भी भूख सहन नहीं कर सकूंगा। ऐसा उपाय बताओ कि जिससे मेरे प्राण बच सकें, अन्यथा मेरे प्राण अवश्य चले जाएंगे।  चंद्रभागा कहने लगी कि हे स्वामी! मेरे पिता के राज्य में एकादशी के दिन कोई भी भोजन नहीं करता। Rama Ekadashi हाथी, घोड़ा, ऊंट, बिल्ली, गौ आदि भी तृण, अन्न, जल आदि ग्रहण नहीं कर सकते, फिर मनुष्य का तो कहना ही क्या है। यदि आप भोजन करना चाहते हैं तो किसी दूसरे स्थान पर चले जाइए, क्योंकि यदि आप यहीं रहना चाहते हैं तो आपको अवश्य व्रत करना पड़ेगा। ऐसा सुनकर शोभन कहने लगा कि हे प्रिये! मैं अवश्य व्रत करूंगा, Rama Ekadashi जो भाग्य में होगा, वह देखा जाएगा। इस प्रकार से विचार कर शोभन ने व्रत रख लिया और वह भूख व प्यास से अत्यंत पीड़ित होने लगा। जब सूर्य नारायण अस्त हो गए और रात्रि को जागरण का समय आया जो वैष्णवों को अत्यंत हर्ष देने वाला था, परंतु शोभन के लिए अत्यंत दु:खदायी हुआ। प्रात:काल होते शोभन के प्राण निकल गए। तब राजा ने सुगंधित काष्ठ से उसका दाह संस्कार करवाया। परंतु चंद्रभागा ने अपने पिता की आज्ञा से अपने शरीर को दग्ध नहीं किया और शोभन की अंत्येष्टि क्रिया के बाद अपने पिता के घर में ही रहने लगी।  रमा एकादशी के प्रभाव से शोभन को मंदराचल पर्वत पर धन-धान्य से युक्त तथा शत्रुओं से रहित एक सुंदर देवपुर प्राप्त हुआ। वह अत्यंत सुंदर रत्न और वैदूर्यमणि जटित स्वर्ण के खंभों पर निर्मित अनेक प्रकार की स्फटिक मणियों से सुशोभित भवन में बहुमूल्य वस्त्राभूषणों तथा छत्र व चंवर से विभूषित, गंधर्व और अप्सराओं से युक्त सिंहासन पर आरूढ़ ऐसा शोभायमान होता था मानो दूसरा इंद्र विराजमान हो।  एक समय मुचुकुंद नगर में रहने वाले एक सोम शर्मा नामक ब्राह्मण तीर्थयात्रा करता हुआ घूमता-घूमता उधर जा निकला और उसने शोभन को पहचान कर कि यह तो राजा का जमाई शोभन है, Rama Ekadashi उसके निकट गया। शोभन भी उसे पहचान कर अपने आसन से उठकर उसके पास आया और प्रणामादि करके कुशल प्रश्न किया।  ब्राह्मण ने कहा कि राजा मुचुकुंद और आपकी पत्नी कुशल से हैं। नगर में भी सब प्रकार से कुशल हैं, परंतु हे राजन! हमें आश्चर्य हो रहा है। आप अपना वृत्तांत कहिए कि ऐसा सुंदर नगर जो न कभी देखा, न सुना, आपको कैसे प्राप्त हुआ। तब शोभन बोला कि कार्तिक कृष्ण की रमा एकादशी का व्रत करने से मुझे यह नगर प्राप्त हुआ, परंतु यह अस्थिर है। यह स्थिर हो जाए ऐसा उपाय कीजिए।  ब्राह्मण कहने लगा कि हे राजन! यह स्थिर क्यों नहीं है और कैसे स्थिर हो सकता है आप बताइए, फिर मैं अवश्यमेव वह उपाय करूंगा। मेरी इस बात को आप मिथ्या न समझिए। शोभन ने कहा कि मैंने इस व्रत को श्रद्धा रहित होकर किया है। अत: यह सब कुछ अस्थिर है। यदि आप मुचुकुंद की कन्या चंद्रभागा को यह सब वृत्तांत कहें तो यह स्थिर हो सकता है। ऐसा सुनकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने नगर लौटकर चंद्रभागा से सब वृत्तांत कह सुनाया।  ब्राह्मण के वचन सुनकर चंद्रभागा बड़ी प्रसन्नता से ब्राह्मण से कहने लगी कि हे ब्राह्मण! ये सब बातें आपने प्रत्यक्ष देखी हैं या स्वप्न की बातें कर रहे हैं। ब्राह्मण कहने लगा कि हे पुत्री! मैंने महावन में तुम्हारे पति को प्रत्यक्ष देखा है। साथ ही किसी से विजय न हो ऐसा देवताओं के नगर के समान उनका नगर भी देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिर नहीं है।  जिस प्रकार वह स्थिर रह सके सो उपाय करना चाहिए। चंद्रभागा कहने लगी हे विप्र! तुम मुझे वहां ले चलो, मुझे पतिदेव के दर्शन की तीव्र लालसा है। मैं अपने किए हुए पुण्य से उस नगर को स्थिर बना दूंगी। आप ऐसा कार्य कीजिए जिससे उनका हमारा संयोग हो क्योंकि वियोगी को मिला देना महान पुण्य है।  ब्राह्मण सोम शर्मा यह बात सुनकर चंद्रभागा को लेकर मंदराचल पर्वत के समीप वामदेव ऋषि के आश्रम पर गया।

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Papankusha Ekadashi 2024 Date : पापांकुशा एकादशी कब है, इस दिन क्‍यों नहीं देते तुलसी को जल, जानें महत्‍व, पूजाविधि…….

Papankusha Ekadashi:पापांकुशा एकादशी हिंदू धर्म के 24 एकादशी व्रतों में से एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। यह व्रत हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आता है। 2024 में पापांकुशा एकादशी 13 अक्टूबर को पड़ रही है। इस व्रत को करने से व्यक्ति अपने जीवन में किए गए पापों से मुक्ति पाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि, व्रत विधि, और क्या करें व क्या न करें। मान्‍यता है कि इस दिन भगवाव विष्‍णु को सबसे प्रिय तुलसी भी उनके लिए व्रत करती हैं। Papankusha Ekadashi यही वजह है कि इस दिन तुलसी को जल नहीं दिया जाता है। कहते हैं कि इस दिन तुलसी को जल देने से उनका व्रत खंडित हो जाता है, इसलिए पापांकुशा एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं देना चाहिए। इस दिन भगवान विष्‍णु को तुलसी दल अर्पित करने से वह बेहद प्रसन्‍न होते हैं और मनचाहा फल देते हैं। Papankusha Ekadashi:पापांकुशा एकादशी का महत्व पापांकुशा एकादशी का महत्व हिंदू धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्णित है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, Papankusha Ekadashi और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। विष्णु पुराण और स्कंद पुराण में इसका उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करता है, वह अपने जीवन के हर प्रकार के दुखों से मुक्ति पाता है और उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, यह व्रत धन, समृद्धि, शांति, और संतोष प्रदान करने वाला माना गया है। Papankusha Ekadashi:पापांकुशा एकादशी व्रत की पूजा विधि 1. व्रत की तैयारी: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने के लिए भक्तों को एक दिन पूर्व (दशमी तिथि) से ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और मन को शांत रखते हुए भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा की तैयारी करें। 2. संकल्प: पूजा से पहले, भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। संकल्प के दौरान कहें कि “मैं पापांकुशा एकादशी व्रत का पालन करूंगा/करूंगी और भगवान विष्णु की पूजा करूंगा/करूंगी। भगवान मुझे सभी पापों से मुक्त करें और मोक्ष का मार्ग दिखाएं।” 3. भगवान विष्णु की पूजा: पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा की सामग्री में फूल, तुलसी के पत्ते, धूप, दीपक, चंदन, और फल शामिल करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को अपने पूजा स्थल पर रखें। Papankusha Ekadashi सबसे पहले भगवान को गंगाजल या स्वच्छ पानी से स्नान कराएं, फिर उन्हें चंदन, अक्षत (चावल), पुष्प और तुलसी अर्पित करें। दीपक जलाकर भगवान की आरती करें और विष्णु सहस्रनाम या अन्य विष्णु स्तोत्रों का पाठ करें। इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 4. तुलसी पूजा: भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व होता है। तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है। अतः पूजा में तुलसी के पत्तों का अर्पण अवश्य करें। 5. व्रत का पालन: इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। कुछ लोग निर्जल व्रत रखते हैं, Papankusha Ekadashi तो कुछ फलाहार करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को तामसिक और मांसाहारी भोजन से दूर रहना चाहिए। व्रती को दिनभर उपवास रखकर भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करना चाहिए और उनकी लीलाओं का चिंतन करना चाहिए। 6. रात्रि जागरण: पापांकुशा एकादशी पर रात्रि जागरण का भी महत्व है। इस दिन रातभर जागकर भगवान विष्णु की स्तुति करें और भजन-कीर्तन में लीन रहें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 7. द्वादशी का पालन: व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को किया जाता है। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देने का विशेष महत्व होता है। अन्न, वस्त्र, और दक्षिणा का दान करना चाहिए और इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें। Papankusha Ekadashi:व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें क्या करें: क्या न करें: Papankusha Ekadashi:पापांकुशा एकादशी का फल पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है Papankusha Ekadashi और वह मोक्ष की प्राप्ति करता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करता है, उसे भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। इस व्रत का फल अन्य सभी व्रतों की तुलना में अधिक पुण्यदायक और प्रभावी माना जाता है।

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Indira Ekadashi 2024: इंदिरा एकादशी पर सिद्ध व साध्य योग का संयोग, जानें डेट व पूजन टाइमिंग

Indira Ekadashi Pujan muhurat: हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साल में कुल 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। आश्विन मास में इंदिरा एकादशी व्रत किया जाता है। जानें सितंबर में इंदिरा एकादशी कब है, पूजन……. When is Indira Ekadashi 2024: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीहरि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाता है। इस साल इंदिरा एकादशी 28 सितंबर 2024, शनिवार को है। इंदिरा एकादशी पर सिद्ध व साध्य योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में ये दोनों ही योग शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम माने गए हैं। मान्यता है कि इन योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है। जानें इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु के पूजन के शुभ मुहू्र्त व व्रत पारण का समय इंदिरा एकादशी पूजन मुहूर्त– एकादशी तिथि 27 सितंबर 2024 को दोपहर 01 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ होगी और 28 सितंबर 2024 को दोपहर 02 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी। इंदिरा एकादशी पूजन के शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 41 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 01 बजकर 40 मिनट से दोपहर 03 बजकर 10 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। दोपहर 03 बजकर 10 मिनट से शाम 04 बजकर 40 मिनट तक पूजन का शुभ समय रहेगा। सिद्ध व साध्य योग-एकादशी के दिन सिद्ध योग रात 11 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके बाद साध्य योग प्रारंभ होगा। सूर्योदय के बाद किया जाता है पारण-हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, एकादशी व्रत के समापन को व्रत पारण कहा जाता है। एकादशी व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले जरूरी होती है। इंदिरा एकादशी व्रत पारण का समय-इंदिरा एकादशी व्रत पारण 29 सितंबर 2024, रविवार को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 12 मिनट से सुबह 08 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। व्रत पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय शाम 04 बजकर 47 मिनट है। Indira Ekadashi:इंदिरा एकादशी इंदिरा एकादशी हिंदू महीने आश्विन के कृष्ण पक्ष के ग्यारहवें दिन मनाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसमें भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। Indira Ekadashi:महत्व Indira Ekadashi:व्रत कैसे मनाया जाता है कथा इंदिरा एकादशी की कथा राजा इंद्र से जुड़ी है। राजा इंद्र ने अपने पापों के कारण स्वर्ग खो दिया था। उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की और इंदिरा एकादशी का व्रत किया। इससे उन्हें स्वर्ग वापस मिल गया। उपसंहार: इंदिरा एकादशी एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है, जो भक्तों को भगवान विष्णु की भक्ति और मोक्ष प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। व्रत करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। Indira Ekadashi:व्रत का महत्व: व्रत कैसे मनाया जाता है: व्रत के नियम:

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Parivartini Ekadashi 2024: परिवर्तिनी एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और उपाय

Parivartini Ekadashi 2024: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकदाशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी को पद्मा एकादशी और पार्श्व एकादशी भी कहा जाता है. Parivartini Ekadashi 2024: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा या परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी पर भगवान विष्णु विश्राम के दौरान करवट बदलते हैं. इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 14 सितंबर यानी आज रखा जा रहा है.  परिवर्तिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Parivartini Ekadashi 2024 Shubh Muhurat) Parivartini Ekadashi 2024:भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 13 सितंबर यानी कल रात 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 14 सितंबर यानी आज रात 8 बजकर 41 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, आज ही परिवर्तिनी एकादशी मनाई जा रही है.  परिवर्तिनी एकादशी पूजन विधि (Parivartini Ekadashi Pujan Vidhi) Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी पर प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें. इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करें. श्री हरि को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. गणेश जी को मोदक और दूर्वा अर्पित करें. पहले गणेश जी और फिर श्री हरि के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद किसी निर्धन व्यक्ति को जल, अन्न-वस्त्र, या छाते का दान करें. इस दिन अन्न का सेवन बिल्कुल न करें. जलाहार या फलाहार ही ग्रहण करें. परिवर्तिनी एकादशी उपाय (Parivartini Ekadashi Upa) 1. पीले कपड़े दान करें परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. मान्यता है Parivartini Ekadashi 2024 कि इस दिन जरूरतमंदों को पीले कपड़ों का दान करना शुभ होता है. ऐसा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है. वहीं, शुभ फलों की प्राप्ति होती है. 2. चांदी के सिक्के चढ़ाएं Parivartini Ekadashi 2024 परिवर्तिनी एकादशी के दिन पूजन के समय भगवान विष्णु को चांदी के कुछ सिक्के चढ़ाएं और पूजा के बाद उन सिक्कों को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर तिजोरी में पैसे वाले स्थान पर रख दें. आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाएंगी.  3. केसर युक्त दूध से अभिषेक करें परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी मां की पूजा करने का विधान है और इस दिन भगवान विष्णु का अभिषेक केसर युक्त दूध से करें. ऐसा करने से घर में सुख,सौभाग्य का आगमन होता है.

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Parivartini Ekadashi 2024: कब है परिवर्तिनी एकादशी ? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Parivartini Ekadashi 2024 परिवर्तिनी एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी शैया बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं।  Parivartini Ekadashi:धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में भगवान विष्णु 4 मास के लिए योग निद्रा में गए हुए हैं। वहीं, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन करवट लेंगे। इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी के अलावा पदमा एकादशी, जलझूलनी एकादशी जैसे नामों से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने से हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  Parivartini Ekadashi परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि परिवर्तनी एकादशी कब मनाई जाएगी।  Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी 2024 तिथि  भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ: 13, सितंबर, शुक्रवार, रात्रि 10:30 बजे भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 14 सितंबर, शनिवार, रात्रि 08:41 पर उदया तिथि के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी 14 सितंबर 2024 शनिवार को है।जैसा कि सब जानते हैं कि चातुर्मास में विष्णु जी योग निद्रा में रहते हैं और उनका शयनकाल रहता है। ऐसे में  Parivartini Ekadashi पर विष्णु जी करवट बदलते हैं। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है, साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है।  Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी 2024 मुहूर्त   Parivartini Ekadashi पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 14 सितंबर 2024 को रात 08 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु की पूजा का मुहूर्त प्रातः 07:38  से प्रातः 09:11 तक रहेगा। इसके बाद राहुकाल शुरू हो जाएगा। Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi)  Parivartini Ekadashi :परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण समय   Parivartini Ekadashi:परिवर्तिनी एकादशी का व्रत पारण समय:  15 सितंबर, रविवार, प्रातः 06:06 से प्रातः 08:34 मिनट के बीच Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी व्रत की विधि  Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी का महत्व Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी का व्रत कैसे करें? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Rishi Panchami 2024 Date: कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व

Rishi Panchami 2024 Date:ऋषि पंचमी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा कहा जाता है कि इस गति को बनाए रखने से आप उन त्रुटियों को समाप्त कर देंगे जिनके बारे में आपको जानकारी नहीं होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को धार्मिक कार्य करने की मनाही है। उनका कहना है कि जब अवचेतन रूप से भी इस कानून का पालन नहीं किया जाता तो उन्हें बड़ा अपराध बोध होता है। इसी कमी को दूर करने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। इसके अलावा इस व्रत को करने से आपकी मनोकामनाएं भी पूरी होंगी। आइए जानते है ऋषि पंचमी की तिथि, पूजा मुहूर्त,मंत्र और महत्व के बारे में।  ऋषि पंचमी 2024: तिथि, शुभ योग, पूजा विधि और महत्व ऋषि पंचमी 2024 हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष ऋषि पंचमी 8 सितंबर, 2024 को मनाई जा रही है। यह व्रत ऋषियों की पूजा करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। ऋषि पंचमी 2024 पंचमी तिथि आरंभ:  7 सितम्बर 2024, सायं 05:37  पर पंचमी तिथि समाप्त: 8 सितम्बर 2024 को सायं 07:58 परउदया तिथि के आधार पर ऋषि पंचमी 8 सितंबर 2024, रविवार को मनाई जाएगी। ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त: प्रातः  11:03 से दोपहर 01:34 तक ।ऋषि पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:31 से 05:17 तक। ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:53  से  दोपहर12:43 तक ऋषि पंचमी 2024 शुभ योगइस वर्ष ऋषि पंचमी के दिन दो शुभ योग बन रहे हैं। सबसे पहले इंद्र योग का प्रशिक्षण दिया जाता है, जो सुबह से देर शाम तक और 12:05 बजे तक  है। वहीं रवि योग दोपहर 3:31 बजे से अगले दिन 9 सितंबर सुबह 6:31 बजे तक रहेगा।रवि योग सभी प्रकार के दोष को दूर करने की क्षमता रखता है क्योंकि यह सूर्य के प्रभाव को अधिक ध्यान में रखता है। ऋषि पंचमी पर स्वाति और विशाखा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र सुबह से 15:31 बजे तक रहेगा।  ऋषि पंचमी पूजा विधि  Rishi Panchami 2024:महत्व ऋषि पंचमी का व्रत करने से कई लाभ होते हैं, जैसे: Rishi Panchami 2024:ऋषि पंचमी 2024 पूजा मंत्रकश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः दहंतु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः॥ Rishi Panchami 2024 के दिन निम्नलिखित कार्य करने से बचना चाहिए Rishi Panchami 2024 के दिन निम्नलिखित कार्य करने की प्रथा है: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Hartalika Teej 2024: पत्नी के व्रत के दौरान पति जरूर करें ये काम, न करें ऐसी गलती

Hartalika Teej 2024: व्रत के दौरान महिलाएं कई अन्य नियमों का भी पालन करती हैं. इस दिन पतियों को भी कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस साल हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा. जानते हैं इस लेख में हरतालिका तीज के दिन पति को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Hartalika Teej:हरतालिका तीज एक ऐसा पर्व है जो पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत बनाता है। इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। ऐसे में पति को भी कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। Hartalika Teej 2024: विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अपने पति की दीर्घायु के लिए हरतालिका तीज व्रत रखती हैं. यह एक कठिन व्रत है क्योंकि महिलाएं व्रत के दिन सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन सूर्योदय तक अन्न, जल और फल ग्रहण नहीं करती हैं. इस कठिन नियम के अलावा महिलाएं कई अन्य नियमों का भी पालन करती हैं. इस दिन पतियों को भी कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस साल हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा. जानते हैं इस लेख में हरतालिका तीज के दिन पति को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Hartalika Teej 2024: तीज पर करें छोटा सा उपाय, वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां होगी दूर Hartalika Teej:हरतालिका तीज के दिन पति क्या करें और न करें पति को क्या नहीं करना चाहिए: क्यों महत्वपूर्ण है पति का सहयोग: Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि प्रारंभ: 5 सितंबर, गुरुवार, दोपहर 12:21 बजे सेभाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त: 6 सितंबर, शुक्रवार, दोपहर 3:01 बजे तकतीज पूजा का समय: सुबह 06:02 बजे से 8:33 बजे तकप्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:36 बजे से कब है Hartalika Teej हरतालिका तीज 2024? इस साल 6 सितंबर को मनाया जाएगा हरतालिका तीज Hartalika Teej:हरतालिका तीज 2024 का शुभ मुहुर्त क्या है? हरतालिका तीज का शुभ मुहुर्त सुबह 06:02 बजे से 8:33 बजे तक है.

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Hartalika Teej 2024: तीज पर करें छोटा सा उपाय, वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां होगी दूर

Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस त्योहार पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।  Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज के दिन पूजा पूरी करने के बाद पांच बुजुर्ग सुहागिन महिलाओं को साड़ी और बिछिया दान करें. साथ ही उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है. Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज का त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. यह व्रत इस साल 6 सितंबर को रखा जा रहा है. हरतालिका तीज के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत और पूजा करती हैं. Hartalika Teej:कुवांरी लड़किया क्यों रखती हैं व्रत…. अविवाहित लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं. इस व्रत के दौरान सुहागिन महिलाएं माता गौरी से सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं. पूजा के अलावा इस दिन कुछ उपाय भी किए जाते हैं, जिन्हें करने से आप वैवाहिक जीवन में सुख प्राप्त कर सकती हैं. आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में… तीज के दिन करें ये उपाय हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को सोलह श्रृंगार करके शिव मंदिर में जल चढ़ाती हैं. साथ ही माता पार्वती को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं. इसके बाद ‘ॐ गौरी शंकराय नमः मंत्र’ का जाप करें. अपनी श्रद्धा के अनुसार चुनरी में 7, 11 या 21 रुपए बांधें. पूजा पूरी करने के बाद चुनरी में बंधे पैसों को अपने पास रख लें. मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है. पूजा के बाद जरूर करें काम हरतालिका तीज व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. अंत में व्रत कथा सुनें और इसके बाद माता पार्वती को खीर का भोग लगाएं. इस खीर को प्रसाद के रूप में अपने पति को भी खिलाएं. इससे पति-पत्नी के बीच संबंध मजबूत होते हैं. साथ ही दांपत्य जीवन खुशहाल होता है. Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय Hartalika Teej 2024:गौरी शंकर की पूजा के बाद सुहागिन महिलाओं को दें ये चीज Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज के दिन पूजा पूरी करने के बाद पांच बुजुर्ग सुहागिन महिलाओं को साड़ी और बिछिया दान करें. साथ ही उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है. Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज की पूजा विधि Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज का महत्व अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Somvati Amavasya 2024 पर पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय, नहीं सताएगा पितृ दोष का डर

Somvati Amavasya सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करना और दान करना बहुत शुभ माना जाता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने और पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं।इस साल भाद्रपद की अमावस्या सोमवार 02 सितंबर 2024 को पड़ रही है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती आमवस्या भी कहा जाएगा है। इस तिथि पर व्रत पूजा-पाठ और स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। इसी के साथ पितरों के निमित्त कुछ उपाय करने से आप इस तिथि पर जीवन में शुभ परिणाम देख सकते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों के लिए समर्पित मानी गई है। ऐसे में आप इस तिथि पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखते हैं। तो चलिए जानते हैं कि भाद्रपद में आने वाली सोमवती अमवास्या (Somvati Amavasya 2024) पर आप किस तरह पितरों को तृप्त कर सकते हैं। जरूर करें ये काम (Pitron ko kaise Khush kare) सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान जरूर करें। अगर आपके आसपास कोई नदी या तालाब नहीं है, तो ऐसे में आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इसी के साथ सोमवती अमावस्‍या पर पीपल के पेड़ का पूजा भी जरूर करें। पूजन के दौरान पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करें और पेड़ के नीचे सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाएं। शुभ फलों की प्राप्ति के लिए आप पितृ चालीसा (Somvati Amavasya 2024 date) का पाठ कर भी कर सकते हैं। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जरूर करें ये काम (works to get ancestors blessings) सोमवती अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद अपनी क्षमता अनुसार, दान-दक्षिणा जरूर देनी चाहिए। Somvati Amavasya इसी के साथ आप जरूरमंद लोगों में काले तिल, जल, दही, शहद, गाय का दूध, गंगाजल, वस्त्र, अन्न का भी दान कर सकते हैं। पितृदोष निवारण हेतु पिंडदान करते समय मंत्रों का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी अवश्य करें। Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi) Somvati Amavasya:पितृ दोष निवारण मंत्र पितरों की शांति के लिए उपाय: दान के लिए शुभ वस्तुएं: Kyu Mnai Jati Hai Somvati Amavasya:क्यों मनाई जाती है सोमवती अमावस्या? सोमवती अमावस्या को चंद्रमा का दिन माना जाता है और चंद्रमा को पितरों का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन पितरों की पूजा करना और उन्हें याद करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। पितृ दोष क्या होता है? पितृ दोष एक ज्योतिषीय दोष है जो पितरों के असंतुष्ट होने के कारण होता है। यह दोष व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है, जैसे कि विवाह में बाधाएं, धन हानि, स्वास्थ्य समस्याएं आदि। Somvati Amavasya सोमवती अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?

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Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi)

Ekadashi 2025: एकादशी तिथि भगवान श्री हरि विष्णु भगवान जी की पूजा अर्चना करने के लिए सबसे शुभ दिन होता है. तो चलिए जानते है साल 2025 में आने वाली समस्त एकादशी तिथियों के बारे में (जनवरी से दिसंबर तक) Ekadashi 2025 एक हिंदू त्योहार है जो हर महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत करने का दिन माना जाता है, जिससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। Ekadashi 2025: एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. प्रत्येक माह में 2 एकादशी तिथि आती है शुक्ल पक्ष की एकादशी,और कृष्ण पक्ष की एकादशी। हिन्दू कैलेंडर में एकादशी तिथि 11वीं तिथि को बोला जाता है.Ekadashi 2025 इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना करना से तथा व्रत धारण करने से व्यक्ति समस्त पापों का नाश होता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है. साल में लगभग 24 या 25 एकादशी तिथि आती हैं Ekadashi 2025और प्रत्येक एकादशी का नाम अलग अलग होता है और कथा भी अलग अलग होती हैं। ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा की स्थिति के कारण व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब और अच्छी होती है. चंद्रमा की स्थिति को सही करने के लिए एकादशी का व्रत रखा जाता है. Ekadashi 2025 एकादशी व्रत का प्रभाव मन और शरीर दोनों पर पड़ता है।तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का है. Ekadashi 2025 तो चलिए जानते है साल 2025 में पड़ने वाले समस्त एकादशी तिथियों के बारे में. 2025 में लगभग 25 एकादशी आएँगी तो आप यहां पे हर महीने में आने वाली एकादशी तिथि के बारे में जान सकते है. 2025 में जनवरी से दिसंबर (2025 Ekadashi January To December) माह तक आने वाली प्रत्येक एकादशी की सही डेट और समय. साल 2025 की सभी एकादशी (Ekadashi 2025 Date and Time) जनवरी 2025 में एकादशी (10 जनवरी 2025, शुक्रवार) पौष पुत्रदा एकादशी / वैकुण्ठ एकादशी: पौष, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 12:22 अपराह्न, 09 जनवरी, समाप्त – प्रातः 10:19 बजे, 10 जनवरी) (25 जनवरी 2025, शनिवार) षटतिला एकादशी: माघ, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 07:25 अपराह्न, 24 जनवरी, समाप्त – 25 जनवरी, रात्रि 08:31 बजे) फरवरी 2025 एकादशी (8 फ़रवरी 2025, शनिवार) जया एकादशी : माघ, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – रात्रि 09:26 बजे, 07 फरवरी समाप्त – रात्रि 08:15 बजे, फरवरी 08) (24 फरवरी 2025, सोमवार) विजया एकादशी: फाल्गुन, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – 01:55 अपराह्न, 23 फरवरी समाप्त – 01:44 अपराह्न, 24 फरवरी) मार्च 2025 एकादशी 10 मार्च 2025, सोमवार) आमलकी एकादशी: फाल्गुन, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 07:45, मार्च 09 समाप्त – प्रातः 07:44, मार्च 10) (25 मार्च 2025, मंगलवार) पापमोचनी एकादशी: चैत्र, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 05:05, मार्च 25 समाप्त – प्रातः 03:45, मार्च 26) (26 मार्च 2025, बुधवार) वैष्णव पापमोचनी एकादशी: चैत्र, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 05:05, मार्च 25 समाप्त – प्रातः 03:45, मार्च 26) अप्रैल 2025 में एकादशी (8 अप्रैल 2025, मंगलवार) कामदा एकादशी: चैत्र, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – 08:00 अपराह्न, 07 अप्रैल समाप्त – रात्रि 09:12 बजे, अप्रैल 08) (24 अप्रैल, 2025, गुरुवार) वरुथिनी एकादशी: वैशाख, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 04:43 अपराह्न, 23 अप्रैल समाप्त – 02:32 अपराह्न, 24 अप्रैल) मई2025 में एकादशी (8 मई 2025, गुरूवार) मोहिनी एकादशी: वैशाख, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 10:19 बजे, 07 मई समाप्त – 12:29 PM, 08 मई) (23 मई 2025, शुक्रवार) अपरा एकादशी: ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 01:12 AM, 23 मई समाप्त – रात्रि 10:29 बजे, 23 मई) जून 2025 में एकादशी (6 जून 2025, शुक्रवार) निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 02:15 पूर्वाह्न, 06 जून समाप्त – प्रातः 04:47, जून 07) (21 जून 2025, शनिवार) योगिनी एकादशी: आषाढ़, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:18 बजे, 21 जून समाप्त – प्रातः 04:27, जून 22) (22 जून 2025, रविवार) गौना योगिनी एकादशी / वैष्णव योगिनी एकादशी: आषाढ़, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:18 बजे, 21 जून समाप्त – प्रातः 04:27 बजे, 22 जून) जुलाई 2025 में एकादशी (6 जुलाई 2025, रविवार) देवशयनी एकादशी: आषाढ़, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – सायं 06:58 बजे, 05 जुलाई समाप्त – रात्रि 09:14 बजे, 06 जुलाई) (21 जुलाई 2025, सोमवार) कामिका एकादशी: श्रावण, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:12 अपराह्न, 20 जुलाई समाप्त – प्रातः 09:38 बजे, 21 जुलाई) अगस्त2025 में Ekadashi 2025 (5 अगस्त 2025, मंगलवार) श्रावण पुत्रदा एकादशी: श्रावण, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 11:41 पूर्वाह्न, 04 अगस्त, समाप्त – 01:12 अपराह्न, 05 अगस्त) (19 अगस्त 2025, मंगलवार) अजा एकादशी: भाद्रपद, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 05:22 अपराह्न, 18 अगस्त समाप्त – 03:32 अपराह्न, 19 अगस्त) सितम्बर 2025 एकादशी (3 सितम्बर 2025, बुधवार) पार्श्व एकादशी: भाद्रपद, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 03:53 पूर्वाह्न, 03 सितंबर समाप्त – प्रातः 04:21, सितम्बर 04) (17 सितम्बर 2025, बुधवार) इन्दिरा एकादशी: आश्विन, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:21 पूर्वाह्न, 17 सितंबर समाप्त – रात्रि 11:39 बजे, 17 सितम्बर) अक्टूबर 2025 में एकादशी (3 अक्टूबर 2025, शुक्रवार) पापांकुशा एकादशी: आश्विन, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 07:10 अपराह्न, 02 अक्टूबर, समाप्त – 06:32 अपराह्न, 03 अक्टूबर) (17 अक्टूबर 2025, शुक्रवार) रमा एकादशी: कार्तिक, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 10:35 बजे, 16 अक्टूबर समाप्त – 11:12 पूर्वाह्न, 17 अक्टूबर) नवंबर 2025 में एकादशी (2 नवंबर 2025, रविवार) देवउत्थान एकादशी: कार्तिक, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 09:11 बजे, 01 नवम्बर, समाप्त – प्रातः 07:31 बजे, 02 नवम्बर) (15 नवंबर 2025, शनिवार) उत्पन्ना एकादशी: मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:49 पूर्वाह्न, 15 नवंबर,समाप्त – 02:37 पूर्वाह्न, 16 नवंबर) दिसंबर 2025 में Ekadashi (1 दिसंबर 2025, सोमवार) मोक्षदा एकादशी: मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी (आरंभ – रात्रि 09:29 बजे, 30 नवंबर, समाप्त – 07:01 अपराह्न, 01 दिसम्बर) (15 दिसंबर 2025, सोमवार) सफला एकादशी: पौष, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 06:49 अपराह्न, 14 दिसंबर, समाप्त – रात्रि 09:19 बजे, 15 दिसम्बर) (31 दिसंबर 2025, बुधवार) पौष पुत्रदा एकादशी: पौष, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:50 बजे, 30 दिसम्बर, समाप्त – प्रातः 05:00 बजे, 31 दिसम्बर)

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Aja Ekadashi 2024: इन गलतियों के कारण टूट सकता है अजा एकादशी का व्रत! श्री हरि हो जाएंगे नाराज

Aja Ekadashi अजा एकादशी 2024: इन गलतियों से बचें, वरना श्री हरि हो जाएंगे नाराज Aja Ekadashi अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत को करने से कई तरह के पुण्य मिलते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन अगर इस व्रत को करते समय कुछ गलतियाँ की जाएँ तो भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और व्रत का फल नहीं मिलता है। Aja Ekadashi 2024: अजा एकादशी पर होगा पापों का नाश, जानिए शुभ मुहूर्त और दान का महत्व Aja Ekadashi अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस दिन कठिन व्रत का पालन करते हैं और विधि अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें सुख-शांति की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार अजा एकादशी 29 अगस्त को मनाई जाएगी तो आइए इस तिथि से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं। Aja Ekadashi हिंदू धर्म में सभी एकादशी का अपना एक खास महत्व है। यह बहुत विशेष मानी जाती है। यह दिन भगवान विष्णु (Vishnu ji) की आराधना के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस दौरान कठिन व्रत का पालन करते, उन्हें दोगुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही श्री हरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वहीं कुछ लोग इस दिन (Aja Ekadashi 2024 Date) ऐसी महत्वपूर्ण बातों को अनदेखा कर देते हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है, तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।अजा एकादशी का व्रत एक पवित्र व्रत है। इस व्रत को विधि-विधान से करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। इन बातों का जरूर रखें ध्यान Aja Ekadashi अजा एकादशी का महत्व: Aja Ekadashi अजा एकादशी व्रत कैसे करें कब है अजा एकादशी? (Bhadrapada Ekadashi 2024) हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ गुरुवार 29 अगस्त को देर रात 1 बजकर 19 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन शुक्रवार 30 अगस्त को देर रात 01 बजकर 37 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, अजा एकादशी 29 अगस्त 2024 को मनाई जाएगी। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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