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Jaya Ekadashi Upay: जया एकादशी के दिन करें ये 5 उपाय, होगी श्री हरि की कृपा तो बरसेगा अपार धन

Jaya Ekadashi 2025 Upay: जया एकादशी का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। जया एकादशी पर यहां दिए 5 उपाय करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को सभी तरह के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है। Jaya Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. वर्षभर में आने वाली 24 एकादशी तिथियों को भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए शुभ माना गया है. माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है, जिसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. एकादशी का व्रत 8 फरवरी यानी कल रखा जाएगा.  कब है जया एकादशी 2025? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल जया एकादशी का त्योहार शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 फरवरी 2025 को रात 9:26 बजे शुरू होकर 8 फरवरी 2025 को शाम 8:15 बजे समाप्त होगा। सनातन धर्म में तिथियों का ही महत्व है, इसलिए एकादशी 8 फरवरी को मनाया जा रहा है। Jaya Ekadashi Upay 2024 (जया एकादशी के उपाय, हिंदी में)- तिजोरी में रखें तुलसी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी के पत्तों को लाल कपड़े में लपेटकर भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करते हुए घर की तिजोरी में रखा जाता है। इसके बाद पूजा के दौरान उन्हीं पत्तों को देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। इससे आपके घर में आर्थिक लाभ हो सकता है। मां लक्ष्मी को चढ़ाएं सुहाग का सामान जया एकादशी के दिन लाल कपड़ा तैयार करके उसमें विवाह का सामान रखते हैं। फिर इसे देवी लक्ष्मी को अर्पित करें। यदि आप इस उपचार विधि को अपनाएंगे तो आपके वैवाहिक जीवन में होने वाली परेशानियां दूर हो जाएंगी। इसके अलावा, परिवारों के बीच प्यार बना रहता है। पीपल वृक्ष की पूजा इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए क्योंकि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। एकादशी के दिन मंदिर में पीपल के पेड़ को पानी दिया जाता है और उसके पास देसी दीपक जलाए जाते हैं। पीले फल और मिठाई का भोग अगर आप पीले रंग की मिठाइयां और फल भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं, तो इससे आपके जीवन में धन की वृद्धि होती है और कुंडली में गुरु की स्थिति भी मजबूत होती है। ध्यान रखें कि इस दिन पीली चीजों का सेवन न करें, विशेषकर उन लोगों के लिए जो विष्णु पूजन या व्रत कर रहे हैं। रात्रि जागरण जया एकादशी के दिन रातभर जागरण करते हुए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना और भजन करना बहुत लाभकारी माना जाता है। इससे आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है और विष्णु-लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। Jaya Ekadashi 2025 Shubh Muhurat : कब है जया एकादशी? जानें व्रत के निमय और सावधानियां Jaya Ekadashi 2025 Bhog: जया एकादशी पर लगाएं भगवान विष्णु को इन चीजों का भोग, धन-दौलत में होगी अपार वृद्धि Jaya Ekadashi 2025 Date: कब है जया एकादशी? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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Jaya Ekadashi 2025 Shubh Muhurat : कब है जया एकादशी? जानें व्रत के निमय और सावधानियां

Jaya Ekadashi kab hai : जया एकादशी Jaya Ekadashi 2025 एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है जो माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है. एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है, एक शुक्ल पक्ष में तो दूसरा कृष्ण पक्ष में. इस व्रत में अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता है और इस दिन व्रती सुबह उठकर स्नान करके सच्चे मन से श्री हरि विष्णु की आराधना करते हैं. Jaya Ekadashi 2025 : जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. यह एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होती है और पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजन करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है और वह मोक्ष प्राप्त होता है. पुराणों के अनुसार, जो भक्त इस एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें अगले जन्म में दिव्य सुख और विष्णु लोक में स्थान प्राप्त होता है. आइए जानते हैं इस साल 2025 में जया एकादशी का व्रत कब है और भगवान विष्णु की पूजा के शुभ मुहूर्त किस- किस समय हैं. Jaya Ekadashi 2025: जया एकादशी तिथि का आरंभ 7 फरवरी को रात 09 बजकर 26 मिनट पर होगा. जबकि इसका समापन 8 फरवरी को रात 08 बजकर 14 मिनट पर होगा. उदया तिथि के कारण जया एकादशी 8 फरवरी को रखा जाएगा. जया एकादशी व्रत 2025 पूजा का शुभ मुहूर्त | Jaya Ekadashi 2025 Shubh Muhurat पंचांग के अनुसार, Jaya Ekadashi 2025 जया एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त, तड़के 5 बजकर 21 मिनट से लेकर सुबह के 6 बजकर 13 तक होगा, इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर के 2 बजकर 26 मिनट से लेकर 3 बजकर 10 तक रहेगा. इसके बाद गोदुली मुहूर्त शाम के 6 बजकर 3 से लेकर 6 बजकर 30 तक रहेगा. इस दिन निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजकर 1 तक रहेगा. जया एकादशी व्रत के नियम Jaya Ekadashi Vrat ke niyam जया एकादशी Jaya Ekadashi 2025 का व्रत दो तरह से रखा जाता है. निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत. आमतौर पर पूरी तरह स्वस्थ्य व्यक्ति को ही निर्जल व्रत रखना चाहिए. सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए. इस व्रत में भगवान श्री कृष्ण की उपासना विशेष फलदायी होती है. इस व्रत में फलों और पंचामृत का भोग लगाया जाता है. इस दिन केवल जल और फल का सेवन करना उत्तम होता है Jaya Ekadashi Per kya kare kya na kare:जया एकादशी पर क्या करें, क्या ना करें? जया एकादशी Jaya Ekadashi 2025 के दिन जरूरतमंद लोगों की मदद करने का संकल्प लें. पीपल और केले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं. तामसिक आहार, व्यवहार और विचार से दूर रहें. इस दिन मन को ज्यादा से ज्यादा भगवान कृष्ण में लगाएं. सेहत ठीक ना हो तो उपवास न रखें. केवल व्रत के नियमों का पालन करें. इस चमत्कारी व्रत के महाप्रयोगों का लाभ उठाइए. जया एकादशी के दिन इन बातों का ध्यान रखकर आप अपने तमाम कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं. नियम और सावधानियां इस दिन ऐसे व्यक्ति को दान नहीं देना चाहिए जो कुपात्र हो. जो भी वस्तुएं दान में दी जाएं वो उत्तम कोटि की हों. कुंडली में जो ग्रह महत्वपूर्ण हों, उनसे जुड़ी चीजों का दान कभी न करें. दान देते समय मन में हमेशा ये भाव रखें कि ये वस्तु ईश्वर की दी हुई है और ये सेवा या दान मैं ईश्वर को ही कर रहा हूं. Jaya Ekadashi 2025 Vrat Ki Puja vidhi जया एकादशी व्रत की पूजा विधि जया एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं. फिर उन्हें पीले वस्त्र, चंदन, पुष्प और धूप-दीप आदि अर्पित करें. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी दल का भोग लगाएं. इसके बाद विष्णु मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा पढ़ें. Jaya Ekadashi 2025 Vrat ka mahetwa जया एकादशी व्रत का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है. Jaya Ekadashi 2025 Bhog: जया एकादशी पर लगाएं भगवान विष्णु को इन चीजों का भोग, धन-दौलत में होगी अपार वृद्धि Jaya Ekadashi 2025 Date: कब है जया एकादशी? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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Jaya Ekadashi 2025 Bhog: जया एकादशी पर लगाएं भगवान विष्णु को इन चीजों का भोग, धन-दौलत में होगी अपार वृद्धि

Jaya Ekadashi 2025 Bhog: 20 फरवरी 2024 को माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी है। आप लोगों को पता ही है कि प्रत्येक महीने में एकादशी दो बार आती है। एक बार कृष्ण पक्ष में और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में। कृष्ण पक्ष की एकादशी पूर्णिमा के बाद आती है और शुक्ल पक्ष की एकादशी अमावस्या के बाद आती है। अतः 20 फरवरी 2024 यानी कल जया एकादशी का व्रत रखा जाएगा। Jaya Ekadashi 2025 Bhog शास्त्रों में ये एकादशी बड़ी ही फलदायी बताई गई है। एकादशी में भगवान विष्णु के निमित्त व्रत करने और उनकी पूजा करने का विधान है। Jaya Ekadashi 2025 Bhog जया एकादशी के दिन जो गृहस्थ हैं और जो गृहस्थ नहीं हैं, दोनों को ये व्रत करना चाहिए और श्री विष्णु की पूजा करनी चाहिए। साथ ही माता लक्ष्मी की भी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। कहते हैं Jaya Ekadashi 2025 Bhog इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को भूत-प्रेत और भय आदि से भी छुटकारा मिलता है। जया एकादशी के दिन विभिन्न शुभ फलों की प्राप्ति के लिए क्या कुछ खास उपाय करने चाहिए। जया एकादशी भोग (Jaya Ekadashi 2025 Bhog List ) जया एकादशी शुभ मुहूर्त (Jaya Ekadashi 2025) वैदिक पंचांग के अनुसार, Jaya Ekadashi 2025 Bhog माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 07 फरवरी को रात 09 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी। वहीं इसका Jaya Ekadashi 2025 Bhog समापन 08 फरवरी को रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए, इस साल जया एकादशी का व्रत दिन शनिवार, 08 फरवरी को रखा जाएगा। जया एकादशी व्रत के दिन करें ये उपाय Jaya Ekadashi 2025 Date: कब है जया एकादशी? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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Jaya Ekadashi 2025 Date: कब है जया एकादशी? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Jaya Ekadashi 2025 Date: हिंदू धर्म में जया एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मत है कि भगवान विष्णु के शरण और चरण में रहने वाले साधकों पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है। उनकी कृपा से धन की समस्या दूर होती है। साथ ही घर में सुख समृद्धि एवं शांति बनी रहती है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (Jaya Ekadashi 2025 Date) तिथि पर साधक भक्ति भाव से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करते हैं। धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत करने से साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से व्यक्ति को पृथ्वी लोक पर सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि जया एकादशी (Jaya Ekadashi 2025 Date) कब और क्यों मनाई जाती है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं- कब मनाई जाती है जया एकादशी? Jaya Ekadashi 2025 Date सनातन शास्त्रों के अनुसार, माघ माह में जया एकादशी मनाई जाती है। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है।इस व्रत की महिमा का वर्णन जगत के पालनहार भगवान कृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को दिया था। उस समय जग के नाथ भगवान कृष्ण ने बताया कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी व्रत करने से व्यक्ति विशेष को अमोघ फल की प्राप्ति होती है। Jaya Ekadashi 2025 Date साथ ही साधक के पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। जया एकादशी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त (Jaya Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के मुताबिक माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 07 फरवरी को रात 09 बजकर 27 मिनट पर हो रहा है। वहीं एकादशी तिथि का अंत 08 फरवरी को रात 08 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि को आधार मानते हुए जया एकादशी 8 फरवरी को रखा जाएगा।  पंचांग के अनुसार, जया एकादशी व्रत पारण का समय 09 फरवरी को सुबह 07 बजकर 04 मिनट से लेकर 09 बजकर 17 मिनट तक है। जया एकादशी का शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 21 मिनट से 06 बजकर 13 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 26 मिनट से 03 बजकर 10 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 03 मिनट से 06 बजकर 30 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 01 मिनट तक   जया एकादशी 2025 महत्व (Jaya Ekadashi 2024 Significance) जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ ही आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। Jaya Ekadashi 2025 Date वहीं व्यक्ति बैकुंठ धाम प्राप्त करता है। जैसा की इस एकादशी के नाम से पता चल रहा है, यह व्रत सभी कार्यों में विजय दिलाता है और बेहद कल्याणकारी माना गया है। इस व्रत में दान करने का फल संपूर्ण यज्ञों के बराबर प्राप्त होता है।  बता दें कि जया एकादशी व्रत को बहुत ही शक्तिशाली माना जाता है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति सबसे जघन्य पापों यहां तक कि ब्रह्महत्या से भी मुक्त कर सकता है। जया एकादशी शुभ योग (Jaya Ekadashi 2025 Shubh Yoga) जया एकादशी Jaya Ekadashi 2025 Date के दिन भद्रावास और रवि योग का संयोग है। रवि योग में भगवान भास्कर की पूजा करने से साधक को आरोग्य जीवन का वरदान प्राप्त होगा। साथ ही करियर और कारोबार को नया आयाम मिलेगा। इस शुभ अवसर पर मृगशिरा और आर्द्रा नक्षत्र का संयोग है। इन योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।

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Shattila Ekadashi 2025: श्रीहरि का आशीर्वाद पाने के लिए करें ये खास उपाय

षटतिला एकादशी 2025: श्रीहरि का आशीर्वाद पाने के लिए करें ये खास उपाय षटतिला एकादशी भगवान विष्णु की आराधना का विशेष दिन है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन व्रत रखने और तिल से जुड़े विशेष उपाय करने से पापों का नाश होता है, पितरों को शांति मिलती है, और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।2025 में षटतिला एकादशी  25 जनवरी को पड़ रही है। इस ब्लॉग में हम आपको षटतिला एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, और उपायों के बारे में बताएंगे, ताकि आप इस पावन दिन का पूरा लाभ उठा सकें। षटतिला एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त षटतिला एकादशी का महत्व षटतिला एकादशी पर तिल (तिलकुटा) का खास महत्व है। इस दिन तिल का दान, तिल का सेवन, तिल से स्नान और तिल से हवन करना न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है।भगवान विष्णु ने स्वयं नारद मुनि को बताया था कि इस व्रत को करने से जीवन के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। षटतिला एकादशी पर करने वाले 7 खास उपाय षटतिला एकादशी व्रत कथा एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक महिला धनवान थी लेकिन वह कभी दान नहीं करती थी। भगवान विष्णु ने उसकी परीक्षा लेने के लिए ब्राह्मण के रूप में उससे भिक्षा मांगी। उसने मिट्टी का एक लड्डू दान में दिया। अगले जन्म में उसे स्वर्ग में स्थान मिला, लेकिन उसका घर खाली था। भगवान विष्णु ने उसे तिल का दान और सेवन करने की सलाह दी, जिससे उसका जीवन धन-धान्य से भर गया।इस कथा से हमें सिख मिलती है कि तिल का दान और उपयोग व्यक्ति को सुख-समृद्धि देता है। षटतिला एकादशी व्रत विधि षटतिला एकादशी 2025: FAQs Q1. क्या तिल का उपयोग षटतिला एकादशी पर जरूरी है?हाँ, तिल का दान, स्नान, हवन, और सेवन करना इस दिन बेहद शुभ माना जाता है। Q2. षटतिला एकादशी का व्रत कैसे करें?इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें, व्रत रखें और तिल का दान करें। अगले दिन व्रत पारण करें। Q3. इस व्रत का फल क्या है?यह व्रत पापों का नाश करता है, पितरों को शांति देता है, और श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद दिलाता है। निष्कर्षषटतिला एकादशी 2025 एक पावन अवसर है, जो आत्मा की शुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का दिन है। इस दिन बताए गए विशेष उपायों को अपनाकर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं। आपका दिन मंगलमय हो!क्या आप इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर साझा करेंगे?

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Shat Tila Ekadashi:षटतिला एकादशी व्रत कब रखा जाएगा? जानें सही तारीख, मंत्र, पूजाविधि और पारण का समय

Shattila Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, 25 जनवरी 2025 को षटतिला एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह दिन विष्णुजी की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन तिल का उपयोग और तिल का दान पुण्य फलदायी माना गया है। एकादशी के व्रत का सम्वन्ध तीन दिनों की दिनचर्या से है। भक्त उपवास के दिन, से एक दिन पहले दोपहर में भोजन लेने के उपरांत शाम का भोजन नहीं ग्रहण करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अगले दिन पेट में कोई अवशिष्ट भोजन न बचा रहे। भक्त एकादशी के दिन उपवास के नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं। तथा अगले दिन सूर्योदय के बाद ही उपवास समापन करते हैं। एकादशी व्रत के दौरान सभी प्रकार के अनाज का सेवन वर्जित होता है। जो लोग किसी कारण एकादशी व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें एकादशी के दिन भोजन में चावल का प्रयोग नहीं करना चाहिए तथा झूठ एवं परनिंदा से बचना चाहिए। जो व्यक्ति एकादशी के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करता है, उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। जब एकादशी दो दिन की होती है तब दूजी एकादशी एवं वैष्णव एकादशी एक ही दिन अर्थात दूसरे दिन मनाई जाती है। Shattila Ekadashi 2025:हिंदू धर्म में हर महीने में आने वाली एकादशी तिथि को विष्णुजी की पूजा-उपासना का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से जीवन के सभी दुख-कष्ट दूर होते हैं और साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षटतिला एकादशी व्रत बहुत पवित्र माना गया है। इस दिन विष्णुजी के पूजन और व्रत से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। षटतिला एकादशी व्रत में तिल का उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं षटतिला एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और पारण टाइमिंग… कब है षटतिला एकादशी 2025? दृक पंचांग के अनुसार, माघ महीने शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जनवरी 2025 को रात 07:25 बजे होगी और अगले दिन 25 जनवरी 2025 को रात 08:31 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 25 जनवरी 2025 दिन शनिवार को षटतिला एकादशी मनाया जाएगा। पारण का समय: एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। 25 जनवरी को एकादशी व्रत रखने वाले जातक 26 जनवरी को द्वादशी तिथि में सुबह 7:12 बजे से सुबह 9:21 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं। षटतिला एकादशी के दिन तिल स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का तर्पण, तिल का भोजन और तिल का दान समेत 6 प्रकार से तिल का उपयोग करना पुण्य फलदायी माना गया है। षटतिला एकादशी 2025: पूजाविधि षटतिला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें। सफेद तिल का उबटन लगाकर पानी में तिल मिलाकर स्नान करें। स्नानादि से निवृत्त होने के बाद एकादशी व्रत का संकल्प लें और विष्णुजी की पूजा करें। विष्णुजी को फल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। एकादशी व्रत का पाठ करें। विष्णुजी के मंत्रों का जाप करें। अंत में विष्णुजी समेत सभी देवी-देवताओं की आरती उतारें। पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा-प्रार्थना मांगे। इस दिन रात्रि को जागरण करना शुभ माना गया है। षटतिला एकादशी 2025: मंत्र 1.ऊँ नारायणाय नमः 2.ऊँ हूं विष्णवे नमः 3.ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Vaikuntha Ekadashi 2025: कब है बैकुंठ एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है? जानें इसका धार्मिक महत्व

धार्मिक मत है कि बैकुंठ एकादशी (Putrada Ekadashi 2025 Date) तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होती है। वहीं मृत्यु उपरांत बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। साधक बैकुंठ एकादशी पर श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। सनातन धर्म में बैकुंठ एकादशी का विशेष महत्व है। इस शुभ अवसर पर बैकुंठ के स्वामी भगवान bhagwan jagdish जगदीश की और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही बैकुंठ एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को भगवान विष्णु के लोक में स्थान मिलता है। साथ ही जन्म-मृत्यु के चक्र से व्यक्ति मुक्त हो जाता है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि बैकुंठ एकादशी तिथि पर बैकुंठ लोक का मुख्य द्वार (मुख्य दरवाजा) खुला रहता है। वैदिक गणना के अनुसार, यह पर्व सूर्य देव के धनु राशि में गोचर करने के दौरान मनाया जाता है। कई बार पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाता है। साधक बैकुंठ एकादशी तिथि पर श्रद्धा भाव से भगवान श्रीहरि की पूजा करते हैं। आइए, बैकुंठ एकादशी की सही डेट शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं महत्व जानते हैं- Vaikuntha Ekadashi: हिन्दू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी का दिन बहुत विशेष माना गया है. ये दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के व्रत का एक विशेष महत्व है. आइए जानते हैं इस दिन भगवान विष्णु के व्रत से क्या लाभ मिलते हैं. Vaikuntha Ekadashi 2025 Vrat And Importance: हिन्दू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी को बहुत ही पवित्र दिन माना गया है. ये दिन जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु shri vishnu bhagwan को समर्पित किया गया है. इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के पूजन और व्रत का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु के व्रत और पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है. साथ ही हर काम में सफलता मिलती हैं. ES SAL KAB HAI Vaikuntha Ekadashi:इस साल कब है वैकुंठ एकादशी? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वैकुंठ एकादशी की तिथि की शुरुआत 9 जनवरी दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 10 जनवरी को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि के अनुसार, वैकुंठ एकादशी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा. Kyu rakha jata hai Vaikuntha Ekadashi : क्यों रखा जाता है वैकुंठ एकादशी का व्रत? हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी वैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत और पूजन करता है उस पर श्री हरि प्रसन्न होते हैं. इतना ही नहीं व्रत और पूजन करने वालों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि जो भी इस दिन व्रत करता है उसके सभी पापों का नाश हो जाता है. इस दिन व्रत करने वालों का मन शुद्ध हो जाता है. उन्हें जीवन में सभी प्रकार की सुख सुविधाएं प्राप्त होती हैं. जीवन के सभी सुखों को भोग कर उन्हें मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही वैकुंठ धाम में जगह मिलती है. वैकुंठ एकादशी का धार्मिक महत्व Vaikuntha Ekadashi ka dharmik mahetwa हिंदू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है. बैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन और व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दिन व्रत और पूजन करने वालों को न सिर्फ संसार के सुख प्राप्त होते हैं, बल्कि उन्हें जन्म और मरण के चक्र से भी मुक्ति प्राप्त होती है. वैकुंठ एकादशी पर व्रत करने वालों का स्वर्ग प्राप्ति का रास्ता आसान हो जाता है. वैकुंठ एकादशी पूजा विधि Vaikuntha Ekadashi puja vidhi Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Putrada Ekadashi 2025 Date :पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, जानें सही तारीख और व्रत का महत्व

Putrada Ekadashi 2025 : पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को संतान सुख मिलता है। साथ ही व्यक्ति को सभी प्रकार की सुख सुविधाएं भी मिलती है। आइए जानते हैं साल 2025 में पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा 9 या 10 जनवरी। साथ ही जानें पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व । Putrada Ekadashi 2025 Date: साल 2025 में आने वाली सबसे पहली एकादशी है पुत्रदा एकादशी। वैसे तो सभी एकादशी का हिंदू धर्म में महत्व है। लेकिन, पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व हिंदू धर्म में बताया गया है।  पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की सुख समृद्धि के लिए अति उत्तम माना गया है। Putrada Ekadashi 2025 पौष माह में आने वाला यह व्रत कई दंपतियों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला होता है। साल 2025 की पहली एकादशी पुत्रदा एकादशी ही है। ऐसे में इस दिन व्रत रखने से आप पूरे साल भर शुभ फल भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि, जनवरी के महीने में पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा। व्रत की विधि क्या और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व है।   Putrada Ekadashi 2025 पुत्रदा एकादशी तिथि 2025 kab hai Putrada Ekadashi 2025 कब है पुत्रदा एकादशी 2025 ?पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी तिथि का आरंभ 9 जनवरी को दोपहर में 12 बजकर 23 मिनट पर होगा और 10 जनवरी को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, उदय काल में एकादशी तिथि होने के कारण पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा। Putrada Ekadashi 2025 brat vidhi पुत्रदा एकादशी व्रत विधि एकादशी तिथि के व्रत रखने वाले हैं तो दशमी तिथि से ही आपको सात्विक जीवन जीना चाहिए। इसके बाद एकादशी तिथि के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प आपको लेना चाहिए। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित इसके बाद करें। विष्णु भगवान को गंगाजल, रोली, चावल, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद दीपक और अगरबत्ती जलाएं। तत्पश्चात भगवान को फल, मिष्ठान्न और पंचामृत अर्पित करें। व्रत रखने वालों के लिए पूजा के दौरान पुत्रदा एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। कथा सुनने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने वालों को दिनभर भगवान विष्णु के नाम का जप करना चाहिए। आप चाहें तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकते हैं। व्रत का पारण द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद आपको करना चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन खिलाकर दान-दक्षिणा दें और फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें। Putrada Ekadashi 2025 mahetwa पुत्रदा एकादशी का महत्व पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत पारिवारिक सुख-शांति और संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिष्मति नगरी के राजा सुकेतुमान और उनकी रानी शैव्या ने इस व्रत को रखा था, जिससे उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति हुई थी। तभी से संतान सुख की कामना रखने वाले लोग इस व्रत को करने लगे। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Karmasu.in एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।) Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में कब-कब है एकादशी?नोट करें सही डेट एवं पूरी लिस्ट

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Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में कब-कब है एकादशी?नोट करें सही डेट एवं पूरी लिस्ट

Ekadashi Date List 2025:धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत (Ekadashi Date List 2025) करने से साधक को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। वैष्णव समाज के लोग एकादशी के दिन व्रत रख लक्ष्मी नारायण जी की विधि-विधान से पूजा करते हैं। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। 2025 Ekadashi Vrat Date List: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बता दें कि प्रत्येक महीन में दो बार एकादशी का व्रत आता है एक कृष्ण पक्ष को और दूसरा शुक्ल पक्ष को। दोनों ही एकादशी व्रत का खास महत्व होता है। सालभर में 24 एकादशी आती हैं। मान्यताओं के मुताबिक, पूरे साल में आने वाली सभी Ekadashi Date List 2025 एकादशी व्रत का फल अलग-अलग मिलता है। तो आइए अब जानते हैं साल 2025 में आने वाली सभी एकादशी व्रत की तिथियों की पूरी लिस्ट। Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में पड़ने वाली एकादशी की तिथियां जनवरी 2025 एकादशी January 2025 Ekadashi व्रत डेट फरवरी 2025 एकादशी व्रत मार्च 2025 एकादशी व्रत अप्रैल 2025 एकादशी व्रत मई 2025 एकादशी व्रत जून 2025 एकादशी व्रत जुलाई 2025 एकादशी व्रत अगस्त 2025 एकादशी व्रत सितंबर 2025 एकादशी व्रत अक्टूबर 2025 एकादशी व्रत नवंबर 2025 एकादशी व्रत दिसंबर 2025 एकादशी व्रत Ekadashi Date List 2025:एकादशी व्रत का महत्व एकादशी का व्रत करने से जातक को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और घर में सदैव उन्नति, संपन्न, सुख-समृद्धि बनी रहती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। साथ ही इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना भी जरूर करें अन्यथा आपको पूजा का पूरा फल नहीं मिलेगा। मां लक्ष्मी की उपासना करने से धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।) 

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Saphala Ekadashi 2024: साल की आखिरी एकादशी पर इस विधि से करें पूजा, हर कार्य में मिलेगी सफलता

Saphala Ekadashi 2024: साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो सभी भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी व्रत हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है, जो हर माह में दो बार आती हैं। Saphala Ekadashi 2024: साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो सभी भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी व्रत हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है, जो हर माह में दो बार आती हैं। मान्यताओं के अनुसार सभी एकादशी अपना विशेष महत्व रखती हैं, परंतु सफला को सबसे प्रमुख माना गया है। पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस साल 26 दिसंबर 2024 को सफला एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु की आराधना करने पर सभी कार्यों में सफलता हासिल होती हैं। कहते हैं कि सफला एकादशी पर लंबे समय से रुके हुए कार्यों को करने पर उनमें सफलता अवश्य मिलती हैं। Saphala Ekadashi 2024 धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सफला एकादशी अपने में ही सफलता के अर्थ से परिपूर्ण है, इस तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना से साधक को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि के बारे में जानते हैं। Saphala Ekadashi 2024:सफला एकादशी तिथि 2024 पौष माह के कृष्ण पक्ष की Saphala Ekadashi 2024 एकादशी तिथि की शुरुआत 25 दिसंबर 2024 को रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 27 दिसंबर को रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 26 दिसंबर 2024 को सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। शुभ योग Saphala Ekadashi 2024 पंचांग के अनुसार 26 दिसंबर 2024 को सफला एकादशी के दिन सुकर्मा योग का निर्माण हो रहा है, जो रात 10 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगा। सफला एकादशी पर स्वाती नक्षत्र भी बनेगा, जो 18:09 मिनट तक रहेगा। Saphala Ekadashi 2024 इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 से 12:42 मिनट तक है।  सफला एकादशी पूजा मुहूर्त Saphala Ekadashi puja muhurat सफला एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से सुबह 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। आप इस अवधि में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। पूजा विधि Saphala Ekadashi Puja vidhi भगवान विष्णु की आरतीॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥ मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥ तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥ तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥ तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥ जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥ डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

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Utpanna Ekadashi Puja Muhurat : उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें सभी जरूरी नियम

Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता की उत्पति मानी जाती है। शास्त्र में इस दिन को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें और क्या नहीं। Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक प्रमुख माध्यम माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को हजारों यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्ण की विधि- विधान से पूजा की जाती है। Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता उत्पन्न हुईं थी, इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम जाना जाता है। शास्त्रों में उत्पन्ना एकादशी के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं इस दिन क्या करें क्या नहीं। उत्पन्ना एकादशी तिथि | Utpanna Ekadashi Date पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर दिन मंगलवार को देर रात 01 बजकर 01 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 27 नवंबर दिन बुधवार को देर रात 03 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि तिथि के अनुसार, 26 नवंबर को ही उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाएगा. वहीं व्रत का पारण 27 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक किया जा सकता है. उत्पन्ना एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त | Utpanna Ekadashi Puja Muhurat पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी पूजा का समय 26 नवंबर सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन करें ये काम Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन न करें ये काम उत्पन्ना एकादशी का महत्व | Utpanna Ekadashi Significance मान्यता के अनुसार, एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष प्राप्ति और विष्णु लोक में स्थान मिलता है. इस व्रत को करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. यह व्रत करने से न केवल वर्तमान जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि अगले जन्म में भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Utpanna Ekadashi 2024: उत्पन्ना एकादशी पर करें मां तुलसी की खास पूजा, घर में बनी रहेगी बरकत

उत्पन्ना एकादशी व्रत का दिन बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2024 Date And Time) के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह एकादशी 26 नवंबर को मनाई जाएगी। वहीं इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। Utpanna Ekadashi 2024:सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही पावन माना गया है। उत्पन्ना एकादशी यह दिन श्री हरि की पूजा के लिए बेहद खास होता है। इस पावन तिथि पर सभी विष्णु भक्त उपवास रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इसके साथ ही द्वादशी तिथि पर अपना व्रत खोलते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी तिथि (Utpanna Ekadashi 2024) यानी 26 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी। वहीं, इस दिन देवी तुलसी की पूजा का भी महत्व है। अगर आप जीवन में आ रही किसी भी समस्या से लगातार परेशान हैं, तो आपको इस एकादशी पर देवी तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए। मां तुलसी की पूजा का महत्व उत्पन्ना एकादशी मां तुलसी को वैष्णव धर्म में विष्णु भगवान की पत्नी माना गया है। उत्पन्ना एकादशी पर तुलसी का पूजन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे पर दीपक जलाने और विशेष मंत्रों का जाप करने से घर में बरकत बनी रहती है। Utpanna Ekadashi 2024: 26 या 27 नवंबर, कब है उत्पन्ना एकादशी? जाने इस व्रत की सही डेट पूजन विधि उत्पन्ना एकादशी के फायदे उत्पन्ना एकादशी फिर पांच दीपक देवी के सामने जलाने चाहिए और उनकी 7 बार परिक्रमा पूरी करके उनके 108 नामों का जाप (Maa Tulsi Ke 108 Naam) करना चाहिए, जो यहां पर दिए गए हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और अपार धन की प्राप्ति होगी। ।।मां तुलसी के 108 नाम।। (Maa Tulsi Ke 108 Naam) 1.ॐ श्री तुलस्यै नमः। 2.ॐ नन्दिन्यै नमः। 3.ॐ देव्यै नमः। 4.ॐ शिखिन्यै नमः। 5.ॐ धारिण्यै नमः। 6.ॐ धात्र्यै नमः। 7.ॐ सावित्र्यै नमः। 8.ॐ सत्यसन्धायै नमः। 9.ॐ कालहारिण्यै नमः। 10.ॐ गौर्यै नमः। 11.ॐ देवगीतायै नमः। 12.ॐ द्रवीयस्यै नमः। 13.ॐ पद्मिन्यै नमः। 14.ॐ सीतायै नमः। 15.ॐ रुक्मिण्यै नमः। 16.ॐ प्रियभूषणायै नमः। 17.ॐ श्रेयस्यै नमः। 18.ॐ श्रीमत्यै 19.ॐ मान्यायै नमः। 20.ॐ गौर्यै नमः। 21.ॐ गौतमार्चितायै नमः। 22.ॐ त्रेतायै नमः। 23.ॐ त्रिपथगायै नमः। 24.ॐ त्रिपादायै नमः। 25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः। 26.ॐ जगत्रयायै नमः। 27.ॐ त्रासिन्यै नमः। 28.ॐ गात्रायै नमः। 29.ॐ गात्रियायै नमः। 30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः। 31.ॐ शोभनायै नमः। 32.ॐ समायै नमः। 33.ॐ द्विरदायै नमः। 34.ॐ आराद्यै नमः। 35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः। 36.ॐ महाविद्यायै नमः। 37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः। 38.ॐ कामाक्ष्यै नमः। 39.ॐ कुलायै नमः। 40.ॐ श्रीयै नमः। 41.ॐ भूम्यै नमः। 42.ॐ भवित्र्यै नमः। 43.ॐ सावित्र्यै नमः। 44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः। 45.ॐ शंखिन्यै नमः। 46.ॐ चक्रिण्यै नमः। 47.ॐ चारिण्यै नमः। 48.ॐ चपलेक्षणायै नमः। 49.ॐ पीताम्बरायै नमः। 50.ॐ प्रोत सोमायै नमः। 51.ॐ सौरसायै नमः। 52.ॐ अक्षिण्यै नमः। 53.ॐ अम्बायै नमः। 54.ॐ सरस्वत्यै नमः। 55.ॐ सम्श्रयायै नमः। 56.ॐ सर्व देवत्यै नमः। 57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः। 58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः। 59.ॐ सुवासनायै नमः। 60.ॐ वरदायै नमः। 61.ॐ सुश्रोण्यै नमः। 62.ॐ चन्द्रभागायै नमः। 63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः। 64.ॐ कावेर्यै नमः। 65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः। 66.ॐ अर्चिन्यै नमः। 67.ॐ स्थायिन्यै नमः। 68.ॐ दानप्रदायै नमः। 69.ॐ धनवत्यै नमः। 70.ॐ सोच्यमानसायै नमः। 71.ॐ शुचिन्यै नमः। 72.ॐ श्रेयस्यै नमः। 73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः। 74.ॐ विभूत्यै नमः। 75.ॐ आकृत्यै नमः। 76.ॐ आविर्भूत्यै नमः। 77.ॐ प्रभाविन्यै नमः। 78.ॐ गन्धिन्यै नमः। 79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः। 80.ॐ गदायै नमः। 81.ॐ वेद्यायै नमः। 82.ॐ प्रभायै नमः। 83.ॐ सारस्यै नमः। 84.ॐ सरसिवासायै नमः। 85.ॐ सरस्वत्यै नमः। 86.ॐ शरावत्यै नमः। 87.ॐ रसिन्यै नमः। 88.ॐ काळिन्यै नमः। 89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः। 90.ॐ यामायै नमः। 91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः। 92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः। 93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः। 94.ॐ शमनिधिन्यै नमः। 95.ॐ शतानन्दायै नमः। 96.ॐ शतद्युतये नमः। 97.ॐ शितिकण्ठायै नमः। 98.ॐ प्रयायै नमः। 99.ॐ धात्र्यै नमः। 100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः। 101.ॐ कृष्णायै नमः। 102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः। 103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः। 104.ॐ हरायै नमः। 105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः। 106.ॐ भूम्यै नमः। 107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः। 108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।

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