EKADASHI

Indira Ekadashi

Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष और जीवन में सुख-समृद्धि दिलाने वाला पावन व्रत

Indira Ekadashi: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और इनमें इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi 2025) का स्थान अत्यंत पवित्र है। यह व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली यह एकमात्र एकादशी है, जो इसे पितरों के उद्धार और मोक्ष के लिए समर्पित एक खास अवसर बनाती है। Indira Ekadashi इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण जी की विधिवत पूजा करने और व्रत रखने से न केवल साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि पितरों को भी नरक की यातनाओं से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए, इंदिरा एकादशी 2025 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व को विस्तार से जानते हैं। इंदिरा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त:Date and auspicious time of Indira Ekadashi 2025 वैदिक पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी 2025: इंदिरा एकादशी 2025 की तिथि: बुधवार, 17 सितंबर 2025 एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 सितंबर को देर रात 12 बजकर 21 मिनट पर (कुछ स्रोतों में 16 सितंबर 2025 को मध्य रात्रि 12:21 बजे से शुरू होने का भी उल्लेख है) एकादशी तिथि समाप्त: 17 सितंबर को देर रात 11 बजकर 39 मिनट पर सनातन धर्म में उदया तिथि मान्य है, जिसके अनुसार सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसलिए, Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी 17 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। पूजा के शुभ मुहूर्त:Auspicious time of puja • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 33 मिनट से सुबह 05 बजकर 20 मिनट तक • लाभ मुहूर्त (सुबह): सुबह 05:32 बजे से 07:04 बजे तक • अमृत मुहूर्त (सुबह): सुबह 07:04 बजे से 08:36 बजे तक • शुभ मुहूर्त (दोपहर): सुबह 10:08 बजे से 11:40 बजे तक • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:18 बजे से दोपहर 03:07 बजे तक • लाभ मुहूर्त (शाम): शाम 04:15 बजे से 05:47 बजे तक • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:24 बजे से शाम 06:47 बजे तक (अन्य स्रोत में 05:45 बजे से 06:10 बजे तक) • चर मुहूर्त (मध्यरात्रि): रात 10:11 बजे से 11:40 बजे तक • निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि): रात 11:16 बजे से 12:03 बजे तक इंदिरा एकादशी पारण का समय:Time of Indira Ekadashi Paran • इंदिरा एकादशी का पारण 18 सितंबर 2025 को किया जाएगा। • पारण का शुभ मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 07 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक (अन्य स्रोत में 05:33 बजे से 07:04 बजे तक) इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें और अन्न व धन का दान कर व्रत खोलें। इंदिरा एकादशी का महत्व: Significance of Indira Ekadashi सनातन धर्म में Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी का खास महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और पितृ पक्ष में पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। • पितरों को मोक्ष: धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से न केवल साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि उनके पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है और उन्हें नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है। • पितृ दोष का निवारण: जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है, क्योंकि यह दोष को शांत करने में मदद करता है। इसे श्राद्ध एकादशी भी कहा जाता है, और इस दिन पितरों का श्राद्ध व तर्पण अत्यंत शुभ माना गया है। • पापों से मुक्ति: नारद मुनि ने राजा इंद्रसेन को बताया था कि यह व्रत न केवल पितरों को मुक्ति दिलाता है, बल्कि व्रत करने वाले के स्वयं के पापों का भी नाश करता है। • सुख-समृद्धि: मान्यता है कि इस व्रत को करने से साधक को जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है और सभी सुखों को भोगकर वह बैकुंठ धाम को जाता है। • अश्वमेध यज्ञ के समान फल: शास्त्रों में कहा गया है कि Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। • अकाल मृत्यु से मुक्ति: मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों को भी मुक्ति मिल जाती है। इंदिरा एकादशी की पूजा विधि:Puja Vidhi of Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी Indira Ekadashi का व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है और द्वादशी तिथि तक चलता है। 1. दशमी तिथि के दिन: • एक समय भोजन: दशमी के दिन भक्त केवल एक समय सात्विक भोजन करते हैं। मांसाहारी भोजन, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज किया जाता है। • ब्रह्मचर्य का पालन: दशमी की रात से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। • पितृ तर्पण (वैकल्पिक): यदि संभव हो तो दशमी के दिन दोपहर में नदी या पवित्र सरोवर में पितरों के लिए तर्पण किया जा सकता है। इसमें जल और काले तिल से पितरों को अर्घ्य दिया जाता है। • घर की शुद्धि: घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। 2. एकादशी तिथि के दिन • प्रातःकाल स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करें। • व्रत का संकल्प: स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय कहें कि “मैं इंदिरा एकादशी का व्रत अपने पितरों को मोक्ष दिलाने और अपने पापों का नाश करने के लिए कर रहा/रही हूं।” • भगवान शालिग्राम की पूजा: भगवान शालिग्राम (विष्णु का एक रूप) या भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई) अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। • इंदिरा एकादशी व्रत कथा श्रवण: एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। • पितृ तर्पण: इस दिन दोपहर में पितरों के लिए विशेष तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। Indira Ekadashi इसमें जल, दूध, काले तिल और कुश से पितरों को तर्पण दिया जाता है। • ब्राह्मण भोजन: यदि संभव हो, तो ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें। • रात्रि जागरण: रात में जागरण कर भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें और उनकी कथाएं सुनें। 3. द्वादशी तिथि के दिन (पारण) • प्रातःकाल पूजा: सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें। • ब्राह्मण को भोजन और दान: पारण से पहले ब्राह्मणों को भोजन कराएं

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Parivartini Ekadashi

Parivartini Ekadashi 2025: परिवर्तिनी एकादशी 2025: कब है व्रत, जानें तारीख, महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Parivartini Ekadashi 2025: सितंबर माह में आने वाली पहली एकादशी परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi) के नाम से जानी जाती है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत शुभ और लाभकारी महत्व बताया गया है, और यह व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में करवट लेते हैं, जिससे इस एकादशी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। यह व्रत करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। आइए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी 2025 की सही तारीख, इसका महत्व, पूजा विधि और व्रत पारण का समय। Parsva Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी 2025: कब है व्रत, जानें तारीख, महत्व, शुभ मुहूर्त और….. Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी 2025 कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी की तिथि इस प्रकार है: • एकादशी तिथि का आरंभ: 3 सितंबर 2025, बुधवार को सुबह 03 बजकर 53 मिनट से होगा। • एकादशी तिथि का समापन: अगले दिन 4 सितंबर 2025, गुरुवार को सुबह 04 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। • व्रत का दिन: ऐसे में, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 3 सितंबर 2025, बुधवार को रखा जाएगा। यह सितंबर 2025 महीने का पहला एकादशी व्रत होगा। नोट: एकादशी व्रत 2025 की एक सामान्य सूची में परिवर्तिनी एकादशी की तारीख 14 सितंबर 2025 भी दी गई है। हालांकि, नवभारत टाइम्स और लाइव हिंदुस्तान जैसे प्रमुख स्रोतों ने 3 और 4 सितंबर 2025 को परिवर्तिनी एकादशी के रूप में विशेष रूप से विस्तृत जानकारी दी है। इसलिए, अधिक विशिष्ट जानकारी के आधार पर, 3 सितंबर को व्रत रखा जाएगा। Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी का महत्व परिवर्तिनी एकादशी Parivartini Ekadashi को पद्म एकादशी, पार्श्व एकादशी और जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान योग निद्रा में वास कर रहे भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं। यही वजह है कि इस दिन को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी पर व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है। अंत में, व्यक्ति वैकुंठ लोक को प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में धन, धान्य, सुख और समृद्धि आती है। परिवर्तिनी एकादशी 2025 पूजा विधि परिवर्तिनी एकादशी Parivartini Ekadashi का व्रत विधि-विधान से करने पर शुभ फल प्राप्त होते हैं। यहाँ पूजा विधि के चरण दिए गए हैं: 1. सुबह उठें और संकल्प लें: परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के बाद पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। 2. मंदिर की सफाई और पंचामृत स्नान: इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को प्रणाम करें। पूजा के लिए मंदिर की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें और सबसे पहले भगवान विष्णु को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण) से स्नान कराएं। 3. सामग्री अर्पित करें: स्नान के बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, अक्षत (साबुत चावल), सुपारी और तुलसी के पत्ते अर्पित करें। 4. मंत्र जप: इस दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का लगातार जप करते रहें। 5. व्रत कथा और आरती: इसके बाद परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें। 6. व्रत पारण: एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में किया जाता है। शुभ योग और पूजन मुहूर्त परिवर्तिनी एकादशी 2025 पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनमें किए गए कार्य शुभ फलदायी होते हैं: • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 30 मिनट से सुबह 05 बजकर 15 मिनट तक। • रवि योग: सुबह 06 बजे से रात 11 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। • अन्य शुभ योग: इस दिन आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। परिवर्तिनी एकादशी 2025 व्रत पारण का समय व्रत का पारण द्वादशी तिथि में करना चाहिए। परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 4 सितंबर 2025, गुरुवार को किया जाएगा। • पारण का शुभ मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 36 मिनट से शाम 04 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। पारण करने से पहले ब्राह्मणों को भोजन करवाने या अन्न का दान करने का विधान है। एकादशी व्रत के सामान्य नियम एकादशी व्रत के कुछ सामान्य नियम भी हैं जिनका पालन करना महत्वपूर्ण है: • चावल वर्जित: एकादशी के दिन चावल और चावल से बनी चीजों का सेवन वर्जित माना गया है। • सात्विक भोजन: मांस-मदिरा, लहसुन, प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। • संयम: इस दिन स्त्री-पुरुष को संयम भाव से रहना चाहिए और मन तथा वाणी से किसी के प्रति द्वेष का भाव नहीं रखना चाहिए। • रात्रि जागरण: एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए रात्रि में जागरण करके भगवान का ध्यान और भजन करने का भी विधान है। • दान-पुण्य: एकादशी के दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। यह व्रत श्रद्धा और भक्तिभाव से करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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Do not do this work on Ekadashi: एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम, वरना पाप के बनेंगे भागी

Do’s and Dont’s on Ekadashi: शास्त्रों में एकादशी तिथि को बहुत पवित्र बताया गया है। इस तिथि के पुण्य फल से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है और भगवान का आशीर्वाद बना रहता है। शास्त्रों में एकादशी का महत्व बताते हुए कुछ नियम भी बताए हैं। इन नियमों के अनुसार एकादशी तिथि को भूलकर भी इन कार्यों को करने से बचना चाहिए… हिंदू धर्म में सभी तिथियों में एकादशी तिथि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है और एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन किए गए उपवास, जप तप व ध्यान का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी का व्रत करने से सांसारिक जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है और अंत में बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि इस पुण्य तिथि पर कुछ ऐसे कार्य हैं, जिनको वर्जित बताया गया। ऐसा करने से जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और भगवान विष्णु की नाराजगी का भी सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि एकादशी के दिन ऐसे कौन से कार्य हैं, जिनको भूलकर भी नहीं करना चाहिए… Do not do this work on Ekadashi: एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम एकादशी तिथि पर करें यह कार्य:Do this work on Ekadashi date एकादशी के दिन रात में सोना नहीं चाहिए, यह तिथि बेहद पुण्यदायी होती है। इस तिथि को पूरी रात भगवान विष्णु के भजन गाने चाहिए, मंत्र या आरती करनी चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर पूरी रात जागरण करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और उनके आशीर्वाद से जीवन में उन्नति के योग बनते हैं। एकादशी तिथि पर ना करें इसका सेवन:Do not consume it on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन भूलकर भी चावल नहीं खाने चाहिए, चाहे आप उपवास ना भी रख रहे हों। धार्मिक कथाओं के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाली योनि में जन्म लेता है। हालांकि अगर आप द्वादशी तिथि को चावल खाते हैं तो आपको इस योनि से मुक्ति भी मिल जाती है। अजा एकादशी अगस्त में कब ? जानें डेट, इस एकादशी को करने से क्या लाभ मिलता है एकादशी तिथि पर ना करें ये कार्य:Do not do these things on Ekadashi date एकादशी के दिन दातुन या मंजन करना वर्जित बताया गया है। इसके साथ ही इस दिन क्रोध करना, झूठ बोलना, चुगली करना और दूसरों की बुराई करना, ऐसी चीजों से बचना चाहिए। ऐसा करने से ना केवल परिवार बल्कि पूरे समाज में सम्मान नहीं मिलता और पाप के भागी भी बनते हैं। इन सब कार्यों के करने से अच्छा है कि इस दिन भगवान विष्णु का भजन कर लें। एकादशी तिथि पर ध्यान रखें यह बात:Keep this thing in mind on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए, शास्त्रों में इसे वर्जित बताया गया है। वहीं द्वादशी तिथि को जब पारण करें तो तुलसी के पत्ते से ही करें। लेकिन उस दिन भी व्रती को तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। घर में अगर बच्चा या बुजुर्ग है, जिसने एकादशी का व्रत ना किया हो, उसको पत्ता तोड़ने के लिए द्वादशी तिथि में कहना चाहिए। एकादशी तिथि पर ना करें इन चीजों का सेवन:Do not consume these things on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनको खाने से बचना चाहिए। जैसे मसूर दाल, चना दाल, उड़द दाल, गोभी, गाजर, शलजम, पालक का साग आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन शारीरिक व मानसिक तौर पर किए जाने वाले बुरे कार्यों को करने से बचना चाहिए। शास्त्रों में एकादशी तिथि को मोक्षदायिनी तिथि कहा गया है इसलिए एकादशी तिथि के दिन इन कार्यों करने से बचना चाहिए। एकादशी तिथि पर भूलकर भी ना करें ये काम:Do not do this work even by mistake on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन पान खाना, चोरी करना, हिंसा करना, क्रोध करना, मैथुन, स्त्रीसंग, कपट आदि चीजों से बचना चाहिए। वहीं अगर आपसे कोई गलती हो जाए तो उसके लिए माफी मांगनी चाहिए। साथ ही इनको आदत बना लेनी चाहिए, जो आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। शारीरिक व मानसिक तौर पर अगर आप किसी को नुकसान पहुंचाते हैं तो यह बहुत गलत है, ऐसा करने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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Aja Ekadashi Vrat Katha

Aja Ekadashi Vrat Katha In Hindi: अजा एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा ,इसके पाठ से अश्वमेध यज्ञ का मिलता फल

Aja Ekadashi Vrat Katha in Hindi: अजा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाने वाला है। पद्म पुराण में वर्णित अजा एकादशी की कथा के अनुसार, इस कथा का पाठ करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। अजा एकादशी का व्रत रखने वालों को इस कथा का पाठ जरुर करना चाहिए। तभी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। Aja Ekadashi Vrat Katha Sunne Ka Fayda :अजा एकादशी की कथा सुनने से फायदा सनातन धर्म(Sanatan Dharma) में अजा एकादशी(Aja Ekadashi) का अपना महत्व है. इस दिन व्रत रखने से कई प्रकार के दुखों से राहत मिलती है. माना जाता है कि जो भी सच्चे मन से इस व्रत को रखता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते है Aja Ekadashi Vrat Katha अजा एकादशी से जुड़ी वास्तविक कथा, जिससे पढ़ने और सुनने मात्र से आपके सभी पाप खत्म हो सकते हैं.  Aja Ekadashi Vrat Katha:अजा एकादशी की व्रत कथा, भगवान राम के पूर्वज से जुड़ी है दरासल अजा एकादशी व्रत की कथा भगवान श्रीराम (Ram) के पूर्वंज इक्ष्वाकु वंश के राजा हरिश्चन्द्र(Raja Harishchandra) की है. राजा हरिश्चंद्र सत्यवादी राजा थे. जो अपने मुख से निकले वचनों और अपनी कही वाणी को पूरा करने के लिए अपनी अर्धांगिनी तारामती(Taramati) और पुत्र राहुल रोहिताश्व तक को बेच देते हैं और खुद भी एक चाण्डाल(Chanadala) की सेवा करने लग जाते हैं. अजा एकादशी अगस्त में कब ? जानें डेट, इस एकादशी को करने से क्या लाभ मिलता है गौतम ऋषि(Gautam Rishi) के कहने पर राजा हरिश्चन्द्र ने Aja Ekadashi Vrat Katha अजा एकादशी का व्रत किया, तब जाकर उन्हें कष्टों से छुटकारा मिला. आइए जानते हैं इस कथा को विस्तार से, जिसे भगवान श्रीकृष्ण(Shri Krishna) ने युधिष्ठिर(yudhishthir) समेत पांडवों को सुनाई थी.  Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी की व्रत कथा युधिष्ठिर ने कहा, “हे वासुदेव!  मैनें पुत्रदा एकादशी के बारे में सविस्तार वर्णन सुना. अब कृपा करके मुझे अजा एकादशी के बारे में विस्तार से बताएं. इस एकादशी(Ekadashi) को क्या कहते हैं और इस व्रत को करने के नियम हैं? इस व्रत को करने से किस तरह का फल मिलता है?  श्रीकृष्ण ने कहा कि, “हे कुंती पुत्र! भाद्रपद की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं. इस व्रत को करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है. इस लोक और परलोक में कल्याण करने वाली इस एकादशी व्रत के समान दुनिया में कोई दूसरा व्रत नहीं है. Aja Ekadashi Vrat Katha अब ध्यान से इस कथा को सुनिए. “पौराणिक काल में भगवान राम के वंशज में अयोध्या नगरी के राजा हरिश्चन्द्र नाम का एक राजा था. अपनी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के कारण राजा के दूर-दूर तक चर्चे थे.  एक बार सभी देवताओं ने राजा की परीक्षा लेने की योजना बनाई, राजा ने सपना देखा की ऋषि विश्वामित्र को उन्होंने अपना सारा वैभव दे दिया है. अगली सुबह राजा जब उठा तो सच में विश्वामित्र राजा के द्वार पर खड़े थे. Aja Ekadashi Vrat Katha विश्वामित्र ने राजा हरिश्चन्द्र से कहा, कल रात जो तुमने सपने में मुझे अपना सारा राज-पाठ दान कर दिया है.  राजा ने सत्यनिष्ठा की भावना के साथ अपनी तमाम संपत्ति विश्वामित्र को दान कर दी. दान दक्षिणा देने के लिए राजा हरिश्चन्द्र ने अपनी पत्नी, बेटा और खुद को बेच दिया. राजा हरिश्चन्द्र को डोम जात के एक व्यक्ति ने खरीद लिया, जो श्मशान घाट में दाह-संस्कार का काम करवाता था. राजा हरिश्चन्द्र एक चाण्डाल के सेवक बन गए. Aja Ekadashi Vrat Katha राजा ने चाण्डाल के लिए कफन लेने का कार्य भी किया, किंतु इस आपत्तिजनक काम करने के बाद भी उन्होंने कभी सच का मार्ग नहीं छोड़ा.  इस काम को करते-करते कई वर्ष बीत जाने के बाद राजा हरिश्चन्द्र को काम पर काफी अफसोस होने लगा, और वह उसे निकालने का रास्ता तलाशने लगे. राजा हरिश्चन्द्र हर वक्त इस काम से मुक्ति के रास्ते तलाशने की कोशिश करते. एक बार राजा की मुलाकात गौतम ऋषि से हुई, राजा ने गौतम ऋषि को प्रणाम कर उन्हें अपनी दुःख-भरी बात बताई.  राजा की दुःख-भरी बातों को सुनकर गौतम ऋषि को भी दुःख हुआ और उन्होंने राजा को बताया,“हे राजन! भादो माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी आती है जिसे अजा एकादशी भी कहा जाता है. तुम उस व्रत को विधि-विधान के साथ करो और रात के वक्त जागरण भी, इससे तुम्हारे सभी तरह के पाप का नाश हो जाएगा. गौतम ऋषि इतनी बात कहकर अंतर्धान हो गए.   अजा एकादशी के आने पर राजा ने महर्षि गौतम के कहे के मुताबिक ही नियमपूर्वक व्रत और रात को जागरण किया. इस व्रत को करने से राजा को सभी पापों से मुक्ति मिल गई. उस वक्त स्वर्ग में जश्न मनाया जाने लगा फूलों की बारिश होने लगी. Aja Ekadashi Vrat Katha राजा हरिश्चन्द्र ने अपने सामने ब्रह्मा, विष्णु, महेश और देवेन्द्र देवताओं को अपने सामने पाया. राजा ने अपने मृत पुत्र और पत्नी को वस्त्रों और आभूषणों से लदा देखा.  व्रत की वजह से राजा को दोबारा उसका राज्य मिल गया, असल में एक ऋषि के द्वारा राजा की परीक्षा लेने के लिए ये सब खेल रचा गया था, लेकिन अजा एकादशी के व्रत के कारण ऋषि द्वारा रची गई माया खत्म हो गई और आखिरी वक्त में हरिश्चंद्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक में चले गए.  इस कथा को सुनने के बाद श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा,“हे राजन! ये सब Aja Ekadashi Vrat Katha अजा एकादशी व्रत का असर था. जो भी मनुष्य इस व्रत कथा का विधि-विधान के साथ पालन करता है और रात के वक्त जागरण तो उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है और अंत में वे स्वर्ग लोक को प्राप्त करता है. कहा जाता है कि इस एकादशी को करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है.

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Aja Ekadashi 2025 Date And Time: अजा एकादशी अगस्त में कब ? जानें डेट, इस एकादशी को करने से क्या लाभ मिलता है

Aja Ekadashi: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और अनेक कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल अजा एकादशी किस दिन पड़ रही है। Aja Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत व्यक्ति के जीवन से दुख, दोष और संकटों को दूर करके सुख-शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। शास्त्रों के अनुसार अजा एकादशी का पालन करने से व्यक्ति को पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्ति मिलती है। इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और अनेक कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल अजा एकादशी किस दिन पड़ रही है।  सत्यनारायण व्रत 2025 में कब-कब रखा जाएगा ? अजा एकादशी 2025 तिथि और मुहूर्त: Aja Ekadashi 2025 Tithi Or Subh Muhurat एकादशी तिथि आरंभ- 18 अगस्त 2025, शाम 5:22 बजेएकादशी तिथि समाप्त- 19 अगस्त 2025, दोपहर 3:32 बजेव्रत पारण का समय (20 अगस्त को): सुबह 5:53 बजे से 8:29 बजे तकधार्मिक मान्यता है कि अजा एकादशी पर उपवास और भगवान विष्णु की भक्ति करने से जीवन के समस्त पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। अजा एकादशी व्रत का महत्व: Aja Ekadashi Vrat Ka Mahetwa मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की उपासना करता है और व्रत कथा का श्रवण करता है, उसे मृत्यु के बाद विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इस व्रत की कथा सुनने मात्र से ही अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है। पूजन विधि: Pujan Vidhi

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Putrada Ekadashi 2025: संतान प्राप्ति के लिए करें पुत्रदा एकादशी व्रत…

Putrada Ekadashi 2025:इस साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दो दिन होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। जानें सावन पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, मुहूर्त, पारण का समय और महत्व.. Sawan Putrada Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत रखा जाता है। ऐसे में ही श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। बता दें कि साल में दो बार पुत्रदा एकादशी का व्रत पड़ता है। पहला श्रावण मास में, तो दूसरा पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। सावन मास में पड़ने वाले एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस एकादशी को पवित्रोपना एकादशी या पवित्र एकादशी के नाम से भी जानते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव जी की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ पूजा करने से हर एक दुख-दर्द से निजात मिल जाती है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, मुहूर्त, धार्मिक महत्व से लेकर व्रत के पारण का समय तक… Putrada Ekadashi 2025 Date: 4 या 5 अगस्त, कब है सावन की पुत्रदा एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और महत्व.. पुत्रदा एकादशी 2025 का महत्व (Putrada Ekadashi 2024 Significnace) हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में कुल 2 बार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। पहला श्रावण मास और दूसरा पौष मास। श्रावण मास में पड़ने वाली एकादशी का व्रत अगस्त माह में रखा जा रहा है और पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी दिसंबर या फिर जनवरी में रखा जाएगा। श्रावण मास में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु के साथ शिव जी की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत रखने से हर तरह के दुख-दर्द से निजात मिल जाती है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो सकती है। इन राशियों पर होगी विशेष कृपा पौष पुत्रदा एकादशी इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस दिन शुक्ल योग बनेगा। ये एकादशी शुक्रवार को आएगी, जिससे मां लक्ष्मी की कृपा कुछ राशियों पर विशेष रूप से पड़ेगी। मेष: मेष राशि वालों के लिए यह एकादशी बेहद शुभ साबित होगी। इस दिन रोजगार में तरक्की के योग बन रहे हैं, और जीवन की सारी समस्याएं, खासकर आर्थिक परेशानियां दूर होंगी। बिजनेस में भी लाभ के अवसर मिलेंगे। कर्क: कर्क राशि वालों के लिए पौष पुत्रदा एकादशी बहुत ही लाभकारी मानी जा रही है। इस दिन वे किसी नए कार्य की शुरुआत कर सकते हैं, जिससे उन्हें लाभ मिलेगा और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। तुला:तुला राशि के लोगों के जीवन में इस एकादशी से खुशियों की शुरुआत होगी। पारिवारिक समस्याएं समाप्त होंगी और सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। यह समय उनके लिए बहुत ही शुभ रहेगा। धनु: धनु राशि वालों को पौष पुत्रदा एकादशी से शुभ सूचनाएं मिल सकती हैं। धन लाभ के साथ आय में वृद्धि के योग बन रहे हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मीन: मीन राशि वाले इस दिन अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। उनकी सेहत भी बेहतर रहेगी और आर्थिक लाभ के नए अवसर प्राप्त होंगे। बिजनेस में मेहनत करने से फायदा होगा। श्री विष्णु मंत्र (Vishnu Mantra) ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || क्लेश नाशक श्री विष्णु मंत्र:कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। विष्णु गायत्री मंत्र:नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि ।तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

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Putrada Ekadashi 2025 Date: 4 या 5 अगस्त, कब है सावन की पुत्रदा एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और महत्व..

Putrada Ekadashi Shubh MUhurat: हर साल दो बार पुत्रदा एकादशी आती है , पहली श्रावण मास में और दूसरी पौष मास में, लेकिन सावन में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस वर्ष पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व।  Sawan Putrada Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत रखा जाता है। ऐसे में ही श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। बता दें कि साल में दो बार पुत्रदा एकादशी का व्रत पड़ता है। पहला श्रावण मास में, तो दूसरा पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। सावन मास में पड़ने वाले एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस एकादशी को पवित्रोपना एकादशी या पवित्र एकादशी के नाम से भी जानते हैं। Putrada Ekadashi इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव जी की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ पूजा करने से हर एक दुख-दर्द से निजात मिल जाती है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, मुहूर्त, धार्मिक महत्व से लेकर व्रत के पारण का समय तक… हर साल दो बार Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी आती है ,  पहली श्रावण मास में और दूसरी पौष मास में, लेकिन सावन में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी, जिसे पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है, का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस वर्ष पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और व्रत के पारण का सही समय, ताकि आप भी इस पावन व्रत से पूर्ण फल प्राप्त कर सकें। सावन पुत्रदा एकादशी तिथि: Sawan Putrada Ekadashi Tithi श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ – 04 अगस्त 2025 , प्रातः  11:41 से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त – 05 अगस्त 2025, दोपहर 01:12 पर उदयातिथि के अनुसार सावन पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त 2025 को मानी  जाएगी।  सावन पुत्रदा एकादशी 2025 मुहूर्त: Sawan Putrada Ekadashi 2025 Muhurta पूजन का ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:20 से प्रातः 05:02 बजे तकरवि योग – प्रातः 05:45 से प्रातः11:23 बजे तक अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक सायंकाल पूजन मुहूर्त – सायं 07:09 बजे से सायं 07:30 बजे तक श्रावण पुत्रदा एकादशी पारण का समय: Time of Shravan Putrada Ekadashi Paran सावन Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी के अगले दिन यानी 6 अगस्त को प्रातः  5 : 45 मिनट से 8 : 26 मिनट तक व्रत का पारण कर सकते हैं। पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दोपहर 02:08 मिनट पर है। पुत्रदा एकादशी का महत्व : Importance of Putrada Ekadashi हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, और जब बात पुत्रदा एकादशी की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस व्रत को हर साल दो बार रखा जाता है। पहली बार श्रावण मास में और दूसरी बार पौष मास में। श्रावण महीने में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का आयोजन इस वर्ष अगस्त में होगा, जबकि पौष मास की पुत्रदा एकादशी दिसंबर या जनवरी में पड़ सकती है। श्रावण की पुत्रदा एकादशी को पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है और इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इसके साथ ही इस एकादशी पर भगवान शिव की आराधना करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखते हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति, पारिवारिक खुशियाँ और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है जो संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं। पुत्रदा एकादशी पर करें इन मंत्रों का जाप :Chant these mantras on Putrada Ekadashi श्री विष्णु मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || क्लेश नाशक श्री विष्णु मंत्रकृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः | विष्णु गायत्री मंत्रनारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN नहीं है।

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Vrat Katha

Kamika Ekadashi 2025 Vrat Katha: कामिका एकादशी व्रत कथा

Kamika Ekadashi 2025 Vrat Katha : कामिका एकादशी का व्रत हर वर्ष सावन मास की एकादशी तिथि को रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा पूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. चूंकि एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व होता है. आइए जानते हैं कामिका एकादशी व्रत 2025 के नियम क्या हैं. कामिका एकादशी व्रत कथा (Kamika Ekadshi Vrat Katha) कुंती पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से कहा कि आपने देवशयनी एकादशी और चातुर्मास के महत्व के बारे में बता दिया है। Vrat Katha अब कृपया श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी के बारे में बताएं। श्रीकृष्ण ने कहा कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी भी देवर्षि नारद से कह चुके है, अतः मैं भी तुमसे वहीं कहता हूं। नारदजी ने ब्रह्माजी से श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की इच्छा जताई थी। उस एकादशी का नाम, विधि और माहात्म्य जानना चाहा। ब्रह्मा ने कहा- “हे नारद! श्रावण मास की Vrat Katha कृष्ण एकादशी का नाम कामिका एकादशी है। इस एकादशी व्रत को सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस तिथि पर शंख, चक्र एवं गदाधारी श्रीविष्णुजी का पूजन होता है। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। गंगा, काशी, नैमिशारण्य और पुष्कर में स्नान करने से जो फल मिलता है, वह फल विष्णु भगवान के पूजन से भी मिलता है। सूर्य व चंद्र ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, भूमि दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में आने के समय गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी जो फल प्राप्त नहीं होता, वह प्रभु भक्ति और पूजन से प्राप्त होता है। पाप से भयभीत मनुष्यों को Vrat Katha कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। एकादशी व्रत से बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। स्वयं प्रभु ने कहा है कि कामिका व्रत से कोई भी जीव कुयोनि में जन्म नहीं लेता। जो इस एकादशी पर श्रद्धा-भक्ति से भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पण करते हैं, वे इस समस्त पापों से दूर रहते हैं। हे नारद! मैं स्वयं श्री हरी की प्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूं। तुलसी के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और इसके स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है।” व्रत के पीछे क्या है कथा: एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में किसी गांव में एक ठाकुर जी थे। क्रोधी ठाकुर का एक ब्राह्मण से झगडा़ हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर से ब्राह्मण का खून हो जाता है। अत: अपने अपराध की क्षमा याचना हेतु ब्राह्मण की क्रिया उसने करनी चाही, परंतु पंडितों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रह्म हत्या का दोषी बन गया। Vrat Katha परिणामस्वरूप ब्राह्मणों ने भोजन करने से इंकार कर दिया। तब उन्होंने एक मुनि से निवेदन किया कि- हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है, इस पर मुनि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने की प्रेरणा दी। ठाकुर ने वैसा ही किया जैसा मुनि ने उसे करने को कहा था। जब रात्रि में भगवान की मूर्ति के पास वह शयन कर रहा था, तभी उसे स्वप्न में प्रभु दर्शन देते हैं और उसके पापों को दूर करके उसे क्षमा दान देते हैं। कामिका एकादशी Vrat Katha की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।

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एकादशी

कामिका एकादशी 2025: कब और कैसे करें व्रत का पारण, जानें सही समय और महत्व

कामिका एकादशी 2025 कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय और व्रत का महत्व परिचय:हिंदू धर्म में व्रत का अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति, तथा पापों के नाश का माध्यम माना जाता है। सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली विशेष रूप से पुण्यदायी मानी गई है। 📅 कामिका एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त: 📝 नोट: व्रत का पारण द्वादशी तिथि में हरि वासर समाप्त होने के बाद करना अनिवार्य है। 🌟 कामिका एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व: 🕉️ कामिका एकादशी व्रत और पूजा विधि: 🔹 प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।🔹 भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं।🔹 घी का दीपक जलाएं और तुलसी दल अर्पित करें।🔹 “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें।🔹 विष्णु सहस्रनाम और व्रत कथा का पाठ करें।🔹 फल, मेवा और सात्विक भोग अर्पित करें।🔹 शाम को भजन-कीर्तन और आरती करें।🔹 पूर्ण उपवास रखें या फलाहार लें। 🍚 कामिका एकादशी व्रत पारण विधि (22 जुलाई 2025): ✅ प्रातः काल स्नान करें✅ भगवान विष्णु की पूजा करें✅ सात्विक भोग अर्पित करें✅ ब्राह्मण को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दान दें✅ स्वयं सात्विक भोजन (जैसे खिचड़ी, फल, दूध आदि) ग्रहण करें 🚫 हरि वासर (द्वादशी का प्रथम चौथाई भाग) के दौरान पारण वर्जित है। 📖 कामिका एकादशी व्रत कथा (संक्षिप्त): पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक क्रोधी व्यक्ति ने गलती से एक ब्राह्मण की हत्या कर दी। पश्चाताप के बाद, एक ऋषि ने उसे कामिका व्रत करने की सलाह दी। उसने श्रद्धा से व्रत रखा और भगवान विष्णु की कृपा से अपने पापों से मुक्त हो गया। 👉 यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चे मन से किया गया व्रत हर पाप का नाश कर सकता है। ✅ कामिका एकादशी पर करें ये कार्य: ❌ कामिका एकादशी पर न करें ये कार्य: ✨ निष्कर्ष: कामिका 2025 का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा और पारण 22 जुलाई की सुबह किया जाएगा। यह व्रत पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति और जीवन में सुख-समृद्धि लाने का सशक्त साधन है। इस पर भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर व्रत व पूजा करें और अपना जीवन आध्यात्मिक ऊँचाइयों की ओर अग्रसर करें। 🕉️ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

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Kamika Ekadashi 2025 Daan: कामिका एकादशी पर इन चीजों का दान करेगा धन और सुख में वृद्धि

Kamika Ekadashi: एकादशी हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह दिन पूरी तरह से इस जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को (Kamika Ekadashi) कामिका एकादशी कहा जाता है। श्रावण मास में श्री हरि की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने तथा भगवान नारायण की उपासना करने से उपासक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन महीने की पहली एकादशी यानी कामिका एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन साधक कठिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान के साथ पूजा करते है। वहीं, इस दिन दान और पुण्य का महत्व है। व्रत के साथ-साथ इस दिन (Kamika Ekadashi 2025 Importance) कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है, तो आइए उन वस्तुओं के बारे में जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। कामिका एकादशी पर जरूर करें ये विशेष दान (Kamika Ekadashi 2025 Daan List) दान के नियम Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का महत्व  कहा जाता है कि कामिका एकादशी के दिन व्रत रखने और दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने से व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। चातुर्मास में पड़ने वाली कामिका एकादशी का अपना अलग ही महत्व है। मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्रदान करती है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। 

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Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ?

Fast Rules Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी का व्रत बहुत ही खास माना जाता है। एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है। इस बार यह व्रत 21 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन (Kamika Ekadashi 2025) उपवास करने के साथ भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ? कामिका एकादशी में क्या खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Khayein?) Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी पर जो साधक उपवास रख रहे हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही व्रती भगवान विष्णु की पूजा के बाद ही कुछ सेवन करें। वहीं, भोग को तैयार करते इसके समय सफाई का अच्छी तरह से ध्यान रखें। कामिका एकादशी में क्या न खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Nahin Khayein?) अगर आप कामिका एकादशी पर व्रत कर रहे हैं, तो अपने खाने का पूरा ध्यान दें, क्योंकि यह व्रत को सफल और असफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। बता दें, व्रती को एकादशी व्रत के दिन भोजन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस तिथि पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही इस व्रत (Kamika Ekadashi 2025 Significance) पर चावल और नमक का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखें। भोग चढ़ाने का मंत्र (Kamika Ekadashi 2025 Bhog Mantra) कामिका एकादशी Fast Rules Kamika Ekadashi पर नारायण को भोग लगाते समय इस मंत्र ”त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।” का भावपूर्ण जप करें। ऐसा करने से भगवान प्रसाद स्वीकार कर लेते हैं। इसके साथ ही मनचाहा फल प्रदान करते हैं।

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Kamika Ekadashi 2025 Date: कामिका एकादशी 2025 जानें 20 या 21 जुलाई में कब है व्रत, शुभ मुहूर्त और विशेष योग

Kamika Ekadashi 2025: देवों के देव महादेव को सावन का महीना प्रिय है। सावन सोमवार के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से अविवाहित जातकों की शादी जल्द हो जाती है। इस महीने में कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi 2025 Date) और पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। Kamika Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत शुभ और फलदायक माना जाता है। कामिका एकादशी  सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। सावन के माह में कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है। तो आइए जानते हैं कामिका एकादशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में Kamika Ekadashi 2025 Date:कब मनाई जाती है कामिका एकादशी? हर साल सावन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन कामिका एकादशी मनाई जाती है। इस दिन लक्ष्मी नारायण जी की पूजा एवं भक्ति की जाती है। सनातन शास्त्रों में व्रत की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। साधक मनचाही मुराद पाने के लिए कामिका एकादशी का व्रत रखते हैं। Kamika Ekadashi Shubh Muhurat कामिका एकादशी शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर होगी और इसका समापन 21 जुलाई को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा। कामिका एकादशी पारण समय कामदा एकादशी का पारण 22 जुलाई को किया जाएगा। साधक 22 जुलाई को सुबह 05 बजकर 37 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 05 मिनट के मध्य कर सकते हैं। इस दौरान भक्ति भाव से पूजा कर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। कामिका एकादशी शुभ योग (Kamika Ekadashi 2025 Shubh Yoga) सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर वृद्धि और ध्रुव योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाएगी। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। Kamika Ekadashi Puja Vidhi कामिका एकादशी पूजा विधि कामिका एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।फिर घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें।उसके बाद एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करें।अब भगवान विष्णु को चंदन, फूल, तुलसी पत्र, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें और पंचामृत का भोग लगाएं।इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों और नामों का जाप करें।अंत में श्री हरि के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें। 

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