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Mokshada Ekadashi 2025 Puja Vidhi: मोक्षदा एकादशी व्रत के कठोर नियम, क्या खाएं और क्या नहीं! पितरों के मोक्ष के लिए करें ये विशेष उपाय…

Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष (अगहन) शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. इस साल 1 दिसंबर 2025 को मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. यह एकादशी भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की पूजा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह व्रत रखने से साधक को आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मिक शांति मिलती है, Mokshada Ekadashi साथ ही यह मोक्ष का रास्ता खोलने वाली एकादशी मानी जाती है. मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. मोक्षदा एकादशी व्रत के कठोर नियम (Mokshada Ekadashi Vrat Ke Niyam) मोक्षदा एकादशी का व्रत नियमों का कठोरता से पालन मांगता है। व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही हो जाती है: 1. दशमी तिथि के नियम: एकादशी व्रत से एक दिन पहले, यानी दशमी तिथि पर सात्विक भोजन करें. Mokshada Ekadashi इस दिन चावल और जौ आदि का सेवन भूलकर भी न करें. 2. एकादशी की दिनचर्या: व्रत की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान का ध्यान करें. भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की उपासना और पूजा करें और व्रत का संकल्प लें. 3. मंत्र जाप: मोक्षदा एकादशी पर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए. 4. रात में कीर्तन: रात में जागकर भगवान का कीर्तन करें. 5. पारण और दान: द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में पारण (व्रत खोलना) करें और दान करें. 6. भोजन से संबंधित नियम: एकादशी तिथि पर व्रत रखें या न रखें, लेकिन इस तिथि पर दो बार भोजन नहीं करना चाहिए. साथ ही, बासी भोजन न करें और न ही भोजन को दोबारा गर्म करके खाएं. व्रत के दौरान क्या खाएं और क्या न खाएं? (Vrat Diet: What to Eat and Avoid) भगवान विष्णु को समर्पित Mokshada Ekadashi मोक्षदा एकादशी व्रत के दौरान कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित होता है, जबकि कुछ चीजें खाई जा सकती हैं. मोक्षदा एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं: खाद्य वस्तु विवरण फल ताजे और मौसमी फलों का सेवन करें, जैसे केला, सेब, संतरा, अंगूर. फलाहार व्रत में इन फलों से शक्ति मिलती है. डेयरी उत्पाद दूध, दही, पनीर और छाछ का सेवन पाचन के लिए अच्छा होता है, इन्हें खाया जा सकता है. आटा/खाद्य पदार्थ आलू, शकरकंद, अरबी व सिंघाड़े के आटे से बने प्रसाद या व्रत का भोजन करें. कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा या साबूदाना और राजगिरा का सेवन पौष्टिक हो सकता है. सब्जियां अगर आप फलाहार व्रत नहीं कर रहे हैं, तो सात्विक सब्जियों का सेवन वर्जित नहीं है, जैसे टमाटर, गाजर, लौकी, ककड़ी आदि. नमक और मसाले फलाहार में सेंधा नमक, काली मिर्च या अदरक का सेवन करने में कोई मनाही नहीं है. मोक्षदा एकादशी व्रत में क्या क्या न खाएं: वर्जित खाद्य वस्तु कारण/विवरण अन्न और दालें लहसुन, प्याज, चावल, गेहूं और दालें न खाएं. मांस और मदिरा मांस, मछली, अंडा, मदिरा (शराब) जैसी तामसिक चीज़ों का सेवन न करें. नमक एकादशी तिथि पर नमक का त्याग करें. मसाले हल्दी, हींग, राई (सरसों) के साथ ही मेथी दाना और अन्य गंभीर मसालों का सेवन न करें. मोक्ष और पितरों की शांति के लिए विशेष उपाय (Remedies for Pitru Moksha) मोक्षदा एकादशी Mokshada Ekadashi के दिन पितरों की आत्मा की शांति और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए भी उपाय बताए गए हैं. ये उपाय करने से पितरों को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. 1. तुलसी पूजा: भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें. पूजा के बाद कुछ तुलसी दल उठाकर अपने पितरों के नाम से जल में प्रवाहित करें या उन्हें पीपल के पेड़ की जड़ में रखें. देवी तुलसी को मोक्ष दायिनी माना गया है. 2. दीपदान: शाम के समय अपने घर की दक्षिण दिशा में या किसी पीपल के पेड़ के नीचे पितरों के नाम से शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं. दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है, यहाँ दीपदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं. 3. पीपल के वृक्ष की पूजा: मोक्षदा एकादशी पर पीपल के वृक्ष को जल दें. जल देते समय अपने पितरों का ध्यान करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. इससे पितृ दोष शांत होता है. 4. गीता का पाठ: चूँकि यह एकादशी ‘गीता जयंती’ के रूप में मनाई जाती है, Mokshada Ekadashi इसलिए इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ या उसके किसी अध्याय का पाठ करें. इससे शुभ फल मिलते हैं और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. 5. ब्राह्मण भोज और दान: एकादशी व्रत Mokshada Ekadashi पारण से पहले किसी गरीब या ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक घर बुलाकर सात्विक भोजन कराएं. भोजन के बाद उन्हें वस्त्र, अन्न या दक्षिणा का दान करें. दान की वस्तुएं पीले रंग की हों तो उत्तम माना जाता है.

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Mokshada Ekadashi 2025 Date And Time: मोक्षदा एकादशी 2025, तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और उपाय, जानें मोक्ष दिलाने वाले इस व्रत की पूरी जानकारी

Mokshada Ekadashi full information 2025: सनातन धर्म में अगहन (मार्गशीर्ष) महीने का विशेष महत्व होता है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस महीने में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रतों में Mokshada Ekadashi मोक्षदा एकादशी का स्थान सर्वोपरि है। मोक्षदा एकादशी को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस व्रत के नाम में ही इसका अर्थ छिपा है—यह ‘मोह का नाश करने वाली’ और मोक्ष (मुक्ति) की प्राप्ति कराने वाली है। कब है मोक्षदा एकादशी 2025? (Mokshada Ekadashi 2025 Kab Hai?) हर साल अगहन माह के कृष्ण पक्ष की Mokshada Ekadashi एकादशी तिथि पर मोक्षदा एकादशी मनाई जाती है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान कृष्ण ने अपने परम शिष्य अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। इसके लिए हर साल अगहन महीने में मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती मनाई जाती है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से व्यक्ति विशेष को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। पंचांग के अनुसार, अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 नवंबर को रात 09 बजकर 29 मिनट पर होगी। वहीं, एकादशी तिथि का समापन 01 दिसंबर को रात 07 बजकर 01 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 01 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी मनाई जाएगी। मोक्षदा एकादशी का महान महत्व (Mokshada Ekadashi Religious Importance) मोक्षदा एकादशी का धार्मिक महत्व अत्यंत खास है, जिसके दो मुख्य कारण हैं: 1. मोक्ष की प्राप्ति: यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति कराता है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति विशेष को मोक्ष मिलता है, Mokshada Ekadashi उसके पूर्वजों को कर्मों के बंधन से मुक्ति मिलती है और उनके पापों का नाश होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा वैखानस ने इसी व्रत के पुण्य का फल अपने पिता को अर्पित कर उन्हें नरक से मुक्ति दिलाई थी। 2. गीता जयंती: द्वापर युग में, इसी पावन तिथि पर भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने परम शिष्य अर्जुन को श्रीमद् भागवत गीता का ज्ञान/उपदेश दिया था। यही कारण है कि इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन मानवता को नई दिशा देने वाली गीता के उपदेश का साक्षी है। Mokshada Ekadashi भागवत गीता के चिंतन से अज्ञानता दूर होती है और मनुष्य का मन आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है। Mokshada Ekadashi इसके पठन-पाठन और श्रवण से जीवन को नई प्रेरणा मिलती है। मोक्षदा एकादशी व्रत की पूजा विधि (Mokshada Ekadashi Puja Vidhi) मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण, महर्षि वेद व्यास, और श्रीमद् भागवत गीता का विशेष पूजन किया जाता है। व्रत की सही पूजा विधि इस प्रकार है: 1. दशमी तिथि (एक दिन पूर्व): व्रत से एक दिन पहले दशमी तिथि को दोपहर में केवल एक बार भोजन करना चाहिए। ध्यान रहे कि रात में भोजन नहीं करना चाहिए। 2. एकादशी तिथि     प्रात:काल उठकर स्नान करें और मोक्षदा एकादशी व्रत का संकल्प लें।      संकल्प लेने के बाद भगवान श्री कृष्ण की विधि-विधान से पूजा करें।     उन्हें धूप, दीप, और नैवेद्य आदि अर्पित करें।     रात्रि के समय भी पूजा करनी चाहिए और जागरण करना चाहिए। 3. द्वादशी तिथि (पारण का दिन)     एकादशी के अगले दिन, द्वादशी को पूजन के बाद, किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, दान-दक्षिणा, और वस्त्र आदि भेंट करने चाहिए।     इसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण (व्रत खोलना) करना चाहिए। दरिद्रता दूर करने के लिए करें तुलसी चालीसा का पाठ मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए तुलसी माता की पूजा का भी विशेष विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करने से मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है, साथ ही दरिद्रता भी दूर होती है। तुलसी चालीसा का पाठ करने की विधि में पहले गंगाजल मंगवाकर स्नान कराना, फिर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करना शामिल है। इसके बाद हृदय में निर्मल भाव से ध्यान करते हुए तुलसी चालीसा का पाठ किया जाता है। यह पाठ करने वाले को गोविंद (भगवान विष्णु) से वही फल प्राप्त होता है, जो उसके मन में इच्छा होती है। मोक्षदा एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह आत्मज्ञान और पितरों के उद्धार का मार्ग भी खोलता है। क्या आप चाहेंगे कि मैं आपको मोक्षदा एकादशी के महत्व या पूजा विधि पर आधारित कुछ छोटे प्रश्न पूछकर आपके ज्ञान की जाँच करूँ, या आप तुलसी चालीसा के पाठ की संपूर्ण विधि के बारे में और जानना चाहेंगे? गीता जयंती तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि मोक्षदा एकादशी

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Utpanna Ekadashi 2025 Kab Hai: उत्पन्ना एकादशी 2025: सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का समय जानें

Utpanna Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत पवित्र और धार्मिक महत्व माना गया है. मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र दिन पर भगवान श्रीविष्णु की श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा करने के साथ व्रत रखने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं. माना जाता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है, जीवन में सुख-शांति लाता है और घर-परिवार में समृद्धि का वास कराता है. यह व्रत भक्तों के लिए आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का अवसर होता है. Utpanna Ekadashi यह व्रत आरोग्य, संतान प्राप्ति और मोक्ष का भी मार्ग खोलता है. पुराणों के अनुसार, एकादशी देवी की उत्पत्ति इसी तिथि को हुई थी. ऐसा कहा गया है Utpanna Ekadashi कि देवी एकादशी ने ही असुरों का नाश किया और देवताओं की रक्षा की थी, इसलिए इस व्रत का नाम “उत्पन्ना” पड़ा. उत्पन्ना एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) पंचांग और हिंदू मान्यता के अनुसार, Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी व्रत 15 नवंबर 2025, शनिवार को रखा जाएगा. विवरण समय और तिथि एकादशी तिथि प्रारम्भ 15 नवंबर 2025 को सुबह 12 बजकर 49 मिनट पर (या 12:49 ए एम बजे) एकादशी तिथि समाप्त 16 नवंबर 2025 को तड़के 02 बजकर 37 मिनट पर (या 02:37 ए एम बजे) उत्पन्ना एकादशी व्रत 15 नवंबर 2025, शनिवार (उदया तिथि के आधार पर) शुभ संयोग: इस बार एकादशी पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं— जिनमें उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, विष्कुंभ योग, और अभिजीत मुहूर्त शामिल हैं. ये तीनों योग व्रत के फल को और भी शुभ बनाते हैं. व्रत आरंभ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ: जो श्रद्धालु एकादशी का व्रत शुरू करना चाहते हैं, उन्हें Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी से ही इसकी शुरुआत करनी चाहिए. मान्यता है कि इस व्रत से अश्वमेध यज्ञ का पुण्य मिलता है. उत्पन्ना एकादशी पारण का समय (Utpanna Ekadashi 2025 Paran Time) व्रत का पारण (व्रत तोड़ने का समय) एकादशी के अगले दिन, यानी 16 नवंबर 2025 को किया जाएगा. पंचांग के अनुसार, पारण का समय दोपहर 12 बजकर 38 मिनट से दोपहर 02 बजकर 49 मिनट तक है. एक अन्य स्रोत के अनुसार, पारण (व्रत तोड़ने का) समय 16 नवंबर को 01:10 पी एम से 03:18 पी एम तक रहेगा. पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 09:09 ए एम है. उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि (Utpanna Ekadashi 2025 Puja Vidhi) उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ekadashi के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जातक को हर एक दुख-दर्द से निजात मिल जाती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. पूजा की विधि इस प्रकार है: 1. संकल्प और स्नान: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नान आदि दैनिक कार्यों से निवृत्त हों. इसके बाद स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें तथा मन में व्रत का संकल्प लें. 2. पूजा स्थान: घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें. पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. दीपक जलाएं और शांत वातावरण बनाएं. 3. आचमन और अभिषेक: स्वयं आसन पर बैठकर जल से आचमन करें और भगवान का ध्यान करें. इसके बाद भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक (जल स्नान) करें. 4. अर्पण: भगवान विष्णु को पीला चंदन, अक्षत (चावल), पुष्प, तुलसी की माला और पीले फूल अर्पित करें. 5. भोग और तुलसी दल: मिठाई, फल आदि से भोग लगाएं. यह ध्यान रखें कि भोग में तुलसी दल अवश्य सम्मिलित हो, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है और श्रीहरि भोग ग्रहण नहीं करते. 6. आरती और मंत्र जप: घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान की आराधना करें. भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी करें. श्रद्धा भाव से ‘ॐ वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जप करें. 7. कथा और क्षमा याचना: पूजा के पश्चात Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में भगवान की आरती उतारें. आरती के बाद किसी भी भूल या त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें और अपनी मनोकामना भगवान विष्णु के समक्ष व्यक्त करें. 8. व्रत और पारण: पूरे दिन संयमपूर्वक व्रत रखें और शाम के समय पुनः भगवान विष्णु की पूजा करें. अगले दिन, द्वितीया तिथि के आगमन पर स्नान करने के पश्चात पूजा कर व्रत का पारण करें. उत्पन्ना एकादशी पर पढ़ें ये मंत्र (Utpanna Ekadashi 2025 Mantra) Utpanna Ekadashi व्रत के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है: • ‘ॐ वासुदेवाय नमः’ • ॐ वं विष्णवे नमः ॥ • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ श्री विष्णु जी की आरती (Vishnu Aarti) पूजा के समापन पर भगवान विष्णु की आरती अवश्य करनी चाहिए: ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे. भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…॥ जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का. सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥ मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी. तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय…॥ तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥ पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥ तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता. मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति. किस विधि मिलूँ दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे. अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा. श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥ तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा. तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥ जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे. कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

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Utpanna Ekadashi 2025 Date And Time: उत्पन्ना एकादशी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और मुर राक्षस की पौराणिक कथा

Kab Hai Utpanna Ekadashi 2025: अगर आप एकादशी व्रत की शुरुआत करना चाहते हैं, तो नवंबर में आने वाली उत्पन्ना एकादशी सबसे शुभ और फलदायी मानी जाती है। उत्पन्ना एकादशी का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। Utpanna Ekadashi धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था, जिसके कारण इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। उत्पन्ना एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2025 Shubh Muhurat) उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ekadashi अगहन/मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। साल 2025 में, यह एकादशी 15 नवंबर को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि प्रारम्भ: 15 नवंबर 2025 को देर रात 12 बजकर 49 मिनट पर (12:49 AM)। एकादशी तिथि समाप्त: 16 नवंबर 2025 को देर रात 02 बजकर 37 मिनट पर (02:37 AM)। उदया तिथि की मान्यता: सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना होती है, इसलिए व्रत 15 नवंबर को रखा जाएगा। पारण का समय (Vrat Paran Timing) व्रत का पारण अगले दिन 16 नवंबर 2025 को किया जाएगा। उत्पन्ना एकादशी पारण समय: 16 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 55 मिनट से दोपहर 03 बजकर 08 मिनट के मध्य (या दोपहर 01:10 PM से 03:18 PM के मध्य)। हरि वासर समाप्त होने का समय: 09:09 AM। व्रत खोलने से पहले साधक को स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करनी चाहिए और अन्न का दान करना चाहिए। इस दिन बन रहा है शिववास योग ज्योतिषियों के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी के शुभ अवसर पर शिववास योग का संयोग भी बन रहा है। Utpanna Ekadashi इस योग के दौरान भगवान शिव, देवी मां पार्वती के साथ कैलाश पर विराजमान रहेंगे। शिववास योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उत्पन्ना एकादशी का महत्व (Utpanna Ekadashi Significance) उत्पन्ना एकादशी Utpanna Ekadashi का व्रत बहुत शुभ और फलदायी माना गया है, खासकर उन लोगों के लिए जो एकादशी व्रत की शुरुआत करना चाहते हैं। 1. पापों का नाश: धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने माता एकादशी को यह आशीर्वाद दिया था कि जो भी इस व्रत को करेगा, उसके पूर्वजन्म तक के पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। 2. सुख और समृद्धि: इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। 3. वंश वृद्धि: इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक के आय और वंश में भी वृद्धि होती है। 4. पूजा विधि: इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए और उन्हें फलों का भोग लगाना चाहिए। उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा (Utpanna Ekadashi Vrat Katha) उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथा सतयुग से जुड़ी है 1. मुर राक्षस का आतंक: सतयुग में मुर (Mur) नामक एक बलशाली राक्षस था, जिसने अपने पराक्रम से स्वर्ग पर विजय प्राप्त कर ली थी। 2. देवताओं की प्रार्थना: निराश होकर देवराज इंद्र, भगवान शिव के पास गए, जिन्होंने उन्हें भगवान विष्णु के पास जाने को कहा। सभी देवता क्षीरसागर पहुँचे और भगवान विष्णु से राक्षस मुर का वध करने की प्रार्थना की। 3. युद्ध और विश्राम: भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वासन दिया और मुर राक्षस से युद्ध किया। यह युद्ध कई सालों तक चलता रहा। युद्ध के दौरान, भगवान विष्णु को थकान हुई और वह विश्राम करने के लिए एक गुफा में जाकर सो गए। 4. देवी एकादशी का जन्म: भगवान विष्णु को सोता देखकर राक्षस मुर ने उन पर आक्रमण करने की कोशिश की, लेकिन तभी भगवान विष्णु के शरीर से एक कन्या उत्पन्न हुई। 5. राक्षस का वध: उस कन्या और मुर राक्षस के बीच युद्ध हुआ, और कन्या ने मुर का सिर धड़ से अलग करके उसका वध कर दिया। 6. वरदान: जब भगवान विष्णु की नींद खुली, तो उन्होंने देखा कि कन्या ने उनकी रक्षा की है। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान दिया कि आज से तुम्हारी पूजा करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। यही कन्या देवी एकादशी कहलाईं।

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Saphala Ekadashi

Saphala Ekadashi 2025 Date And Time: जानिए सफला एकादशी कब है 2025 में, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके लाभ

Saphala Ekadashi kab Hai 2025 Mein: हिंदू धर्म में सभी व्रतों में एकादशी व्रत को श्रेष्ठ माना जाता है, और यह हर महीने में दो बार (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) पड़ती है। हर वर्ष पौष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। ‘सफला’ शब्द का अर्थ ही सफलता होता है। यह मान्यता है कि इस Saphala Ekadashi एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल हो जाते हैं, इसीलिए इसे सफला एकादशी कहा जाता है। इस पवित्र दिन अच्युत भगवान (Lord Achyut) की विशेष पूजा की जाती है। धर्मग्रंथों में इस दिन को दुःख और कष्ट दूर करने वाले तथा भाग्य खोलने वाले दिन के रूप में वर्णित किया गया है। सफला एकादशी 2025 में कब मनाई जाएगी? (Saphala Ekadashi 2025 Date and Muhurat) हिन्दू पंचांग के अनुसार, Saphala Ekadashi सफला एकादशी पौष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। विवरण (Detail) तिथि व समय (Date and Time) एकादशी तिथि का आरम्भ 14 दिसंबर 2025, रविवार, शाम 06 बजकर 49 मिनट से एकादशी तिथि की समाप्ति 15 दिसंबर 2025, सोमवार, रात 09 बजकर 19 मिनट तक सफला एकादशी व्रत (उदया तिथि) 15 दिसंबर 2025, सोमवार पारण (व्रत खोलने) का समय 16 दिसंबर 2025, मंगलवार, सुबह 07 बजकर 07 मिनट से लेकर 09 बजकर 11 मिनट तक सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। सफला एकादशी की पूजा विधि (Saphala Ekadashi Puja Vidhi) सफला एकादशी Saphala Ekadashi के दिन भगवान अच्युत का विधिवत पूजन करने का विधान है। 1. व्रत का संकल्प: एकादशी के दिन प्रातः काल स्नान करने के बाद, भगवान अच्युत का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 2. स्नान और वस्त्र अर्पण: संकल्प लेने के बाद, भगवान की मूर्ति को ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए, पंचामृत से स्नान कराएँ। इसके बाद, भगवान को वस्त्र, चंदन, जनेऊ (sacred thread), धूप, दीप और फल आदि अर्पित करें। 3. विशेष पूजन सामग्री: भगवान अच्युत का पूजन नारियल (coconut), सुपारी (betel nut), आंवला (amla), अनार (pomegranate) और लौंग (cloves) से करना चाहिए। 4. आरती: पूजन के अंत में कपूर से भगवान की आरती उतारें। 5. रात्रि जागरण: इस दिन रात्रि में जागरण करके श्रीहरि के नाम का भजन करने का विशेष महत्व बताया गया है। Saphala Ekadashi माना जाता है कि इस दिन विष्णु सहस्रनाम का जाप करना बहुत फलदायक (fruitful) होता है। 6. पारण (व्रत तोड़ना): व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी को, किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराकर और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए। सफला एकादशी व्रत करने के प्रमुख लाभ और महत्व (Benefits and Importance) सफला एकादशी Saphala Ekadashi नाम के अनुरूप ही, भक्तों के सभी कार्यों को पूरा और सफल करने वाली मानी गई है। 1. तपस्या के समान फल: यह मान्यता है कि हजारों साल तक तपस्या करने के बाद जिस पुण्यफल की प्राप्ति होती है, वह पुण्य अकेले सफला एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। 2. पाप नाश और संकटों से मुक्ति: यह व्रत मनुष्य को निरोगी रखता है, उनके पापों का नाश करता है, और उन्हें संकटों से मुक्ति दिलाता है। 3. अश्वमेध यज्ञ का फल: सफला एकादशी का व्रत रखने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। 4. सफलता और इच्छापूर्ति: कहा जाता है कि अगर जीवन के हर कार्य में Saphala Ekadashi सफल होना है, तो शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से यह व्रत रखना चाहिए। इस व्रत को रखने से मनुष्य की सभी इच्छाएं और सपने पूरे होते हैं। 5. मोक्ष प्राप्ति: सफला एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, साथ ही राक्षस, भूत, पिशाच आदि योनियों से भी मुक्ति मिलती है। 6. धन और समृद्धि: श्रीहरि के पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और श्रीहरि के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं, जिससे जीवन में धन-समृद्धि बढ़ती है। जो मनुष्य यह व्रत करता है, उसके जीवन में कभी भी संकटों की कमी नहीं होती और उसके जीवन में धन, समृद्धि, खुशियों और कीर्ति (fame) की कमी नहीं होती है। सफला एकादशी के दिन कौन से कार्य नहीं करने चाहिए? (Activities to Avoid) एकादशी के व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन आवश्यक है: 1. शयन (Sleeping): सफला एकादशी के दिन बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए, बल्कि जमीन पर सोने का महत्व है। 2. आहार: इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। 3. दातुन: इस एकादशी के सुबह दातुन (toothbrushing) करने की मनाही होती है। 4. प्रकृति से जुड़ाव: सफला एकादशी के दिन किसी भी पेड़-पौधे की फूल पत्ती को तोड़ना अशुभ माना जाता है।

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Ekadashi

Ekadashi List 2026: वर्ष 2026 की संपूर्ण एकादशी व्रत सूची | जानें कौन सी एकादशी कब है ?

Ekadashi List 2026: एकादशी व्रत से जुड़ा यह पृष्ठ यह जानकारी तो देता ही है कि एकादशी कब है, लेकिन साथ ही इस पर्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं की भी विस्तार से विवेचना करता है। हिंदू धर्म में एकादशी या ग्यारस एक महत्वपूर्ण तिथि है। एकादशी व्रत की बड़ी महिमा है। एक ही दशा में रहते हुए अपने आराध्य देव का पूजन व वंदन करने की प्रेरणा देने वाला व्रत ही एकादशी व्रत कहलाता है। पद्म पुराण के अनुसार स्वयं महादेव ने नारद जी को उपदेश देते हुए कहा था, एकादशी महान पुण्य देने वाली होती है। कहा जाता है कि जो मनुष्य एकादशी का व्रत रखता है उसके पितृ और पूर्वज कुयोनि को त्याग स्वर्ग लोक चले जाते हैं। आइए, एकादशी से जुड़े अनेकानेक आयामों को गहराई से देखते हैं– क्या है एकादशी:What is Ekadashi ? हिंदू पंचांग की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। एकादशी Ekadashi संस्कृत भाषा से लिया गया शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘ग्यारह’। प्रत्येक महीने में एकादशी दो बार आती है–एक शुक्ल पक्ष के बाद और दूसरी कृष्ण पक्ष के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं। प्रत्येक पक्ष की एकादशी का अपना अलग महत्व है। वैसे तो हिन्दू धर्म में ढेर सारे व्रत आदि किए जाते हैं लेकिन इन सब में एकादशी का व्रत सबसे पुराना माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस व्रत की बहुत मान्यता है। एकादशी का महत्व:Importance of Ekadashi पुराणों के अनुसार एकादशी Ekadashi को ‘हरी दिन’ और ‘हरी वासर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को वैष्णव और गैर-वैष्णव दोनों ही समुदायों द्वारा मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि एकादशी व्रत हवन, यज्ञ , वैदिक कर्म-कांड आदि से भी अधिक फल देता है। इस व्रत को रखने की एक मान्यता यह भी है कि इससे पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है उनके लिए एकादशी के दिन गेहूं, मसाले और सब्जियां आदि का सेवन वर्जित होता है। भक्त एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले यानि कि दशमी से ही शुरू कर देते हैं। दशमी के दिन श्रद्धालु प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करते हैं और इस दिन वे बिना नमक का भोजन ग्रहण करते हैं। एकादशी व्रत का नियम:Ekadashi fasting rules एकादशी Ekadashi व्रत करने का नियम बहुत ही सख्त होता है जिसमें व्रत करने वाले को एकादशी तिथि के पहले सूर्यास्त से लेकर एकादशी के अगले सूर्योदय तक उपवास रखना पड़ता है। यह व्रत किसी भी लिंग या किसी भी आयु का व्यक्ति स्वेच्छा से रख सकता है। एकादशी व्रत करने की चाह रखने वाले लोगों को दशमी (एकादशी से एक दिन पहले) के दिन से कुछ जरूरी नियमों को मानना पड़ता है। दशमी के दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज, दाल (मसूर की) और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। रात के समय भोग-विलास से दूर रहते हुए, पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह दांत साफ़ करने के लिए लकड़ी का दातून इस्तेमाल न करें। इसकी जगह आप नींबू, जामुन या फिर आम के पत्तों को लेकर चबा लें और अपनी उँगली से कंठ को साफ कर लें। इस दिन वृक्ष से पत्ते तोड़ना भी ‍वर्जित होता है इसीलिए आप स्वयं गिरे हुए पत्तों का इस्तेमाल करें और यदि आप पत्तों का इतज़ाम नहीं कर पा रहे तो आप सादे पानी से कुल्ला कर लें। स्नान आदि करने के बाद आप मंदिर में जाकर गीता का पाठ करें या फिर पंडितजी से गीता का पाठ सुनें। सच्चे मन से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जप करें। भगवान विष्णु का स्मरण और उनकी प्रार्थना करें। इस दिन दान-धर्म की भी बहुत मान्यता है इसीलिए अपनी यथाशक्ति दान करें। एकादशी Ekadashi के अगले दिन को द्वादशी के नाम से जाना जाता है। द्वादशी दशमी और बाक़ी दिनों की तरह ही आम दिन होता है। इस दिन सुबह जल्दी नहाकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और सामान्य भोजन को खाकर व्रत को पूरा करते हैं। इस दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न और दक्षिणा आदि देने का रिवाज़ है। ध्यान रहे कि श्रद्धालु त्रयोदशी आने से पहले ही व्रत का पारण कर लें। इस दिन कोशिश करनी चाहिए कि एकादशी व्रत का नियम पालन करें और उसमें कोई चूक न हो। एकादशी व्रत का भोजन:Ekadashi fasting food शास्त्रों के अनुसार श्रद्धालु एकादशी के दिन आप इन वस्तुओं और मसालों का प्रयोग अपने व्रत के भोजन में कर सकते हैं– ताजे फल मेवेचीनीकुट्टूनारियलजैतूनदूधअदरककाली मिर्चसेंधा नमकआलूसाबूदानाशकरकंद एकादशी व्रत का भोजन सात्विक होना चाहिए। कुछ व्यक्ति यह व्रत बिना पानी पिए संपन्न करते हैं जिसे निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। What not to do on Ekadashi:एकादशी को क्या न करें वृक्ष से पत्ते न तोड़ें।घर में झाड़ू न लगाएं। ऐसा इसीलिए किया जाता है क्यूंकि घर में झाड़ू आदि लगाने से चीटियों या छोटे-छोटे जीवों के मरने का डर होता है। और इस दिन जीव हत्या करना पाप होता है।बाल नहीं कटवाएं। ज़रूरत हो तभी बोलें। कम से कम बोलने की कोशिश करें। ऐसा इसीलिए किया जाता है क्यूंकि ज्यादा बोलने से मुँह से गलत शब्द निकलने की संभावना रहती है। एकादशी के दिन चावल का सेवन भी वर्जित होता है।  किसी का दिया हुआ अन्न आदि न खाएं।मन में किसी प्रकार का विकार न आने दें।यदि कोई फलाहारी है तो वे गोभी, पालक, शलजम आदि का सेवन न करें। वे आम, केला, अंगूर, पिस्ता और बादाम आदि का सेवन कर सकते है। एकादशी व्रत कथा:Ekadashi fast story हर व्रत को मनाये जाने के पीछे कोई न कोई धार्मिक वजह या कथा छुपी होती है। एकादशी व्रत मनाने के पीछे भी कई कहानियां है। एकादशी व्रत कथा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। जैसा कि हम सब जानते हैं एकादशी प्रत्येक महीने में दो बार आती है, जिन्हें हम अलग-अलग नामों से जानते हैं। सभी एकादशियों के पीछे अपनी अलग कहानी छुपी है। एकादशी व्रत के दिन उससे जुड़ी व्रत कथा सुनना अनिवार्य होता है। शास्त्रों के अनुसार बिना एकादशी

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Devuthani Ekadashi

Devuthani Ekadashi 2025 Date And Time: कब जागेंगे भगवान विष्णु? नोट करें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Kab Hai Devuthani Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi), देव प्रबोधिनी एकादशी (Dev Prabodhini Ekadashi) या देवोत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है. Devuthani Ekadashi यह वह पावन दिन है जब जगत के पालनहार भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग-निद्रा (नींद) से जागते हैं. भगवान विष्णु के जागने के साथ ही पिछले चार महीनों से बंद हुए सभी मांगलिक काम, जैसे विवाह आदि, Devuthani Ekadashi एक बार फिर से शुरू हो जाते हैं. यह दिन एक नए और शुभ समय की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. देव उठनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त (DevUthani Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) हिंदू पंचांग के अनुसार, Devuthani Ekadashi देवउठनी एकादशी कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की तिथि को पड़ती है. विवरण (Detail) तिथि एवं समय (Date & Time) कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि प्रारंभ 01 नवंबर 2025, सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त 02 नवंबर 2025, सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर देवउठनी एकादशी 2025 (गृहस्थों के लिए) 01 नवंबर 2025 देवउठनी एकादशी (वैष्णवों के लिए) 02 नवंबर 2025 ध्यान दें: इस वर्ष एकादशी का मान दो दिन (1 और 2 नवंबर) है. गृहस्थ लोग सामान्य पंचांग के अनुसार 1 नवंबर को व्रत रखेंगे, जबकि वैष्णव परंपरा में हरिवासर (भगवान विष्णु के जागने का सटीक मुहूर्त) के कारण 2 नवंबर को व्रत रखा जाता है. देव उठनी एकादशी का महत्व और चातुर्मास का समापन देव उठनी एकादशी Devuthani Ekadashi का महत्व सिर्फ भगवान विष्णु के जागने तक ही सीमित नहीं है, Devuthani Ekadashi बल्कि यह सनातन धर्म में एक नए और अत्यंत शुभ समय के आगमन का प्रतीक है. 1. मांगलिक कार्यों की शुरुआत: इस दिन भगवान विष्णु के जागने से चार महीने के चातुर्मास का अंत होता है. चातुर्मास के दौरान बंद हुए सभी मांगलिक काम (Auspicious activities) जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और यज्ञोपवीत संस्कार आदि, फिर से शुरू हो जाते हैं. 2. पापों का नाश: ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही, व्रत रखने और भगवान विष्णु का ध्यान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है. 3. माता लक्ष्मी की कृपा: यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त करने का एक विशेष अवसर होता है. देव उठनी एकादशी 2025 पूजा विधि (Puja Vidhi) इस शुभ दिन पर, भक्तजन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करते हैं. पूजन विधि के चरण: तैयारी: एकादशी के एक दिन पहले, शाम के समय सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल को साफ करें. पीले रंग के कपड़े पहनें. अभिषेक: घर के मंदिर में दीप जलाएं. भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें और उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं. जल, दूध, और गंगा जल से अभिषेक करें. सामग्री अर्पण: भगवान विष्णु को पीला चंदन, पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत का भोग लगाएं. अन्य सामग्री: पूजा में नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूपबत्ती, दीपक, घी, अक्षत (चावल), मिठाई, और मौसमी फल जैसे मूली, शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, बेर, सीताफल और अमरुद भी अर्पित करने चाहिए. भोग में तुलसी: ध्यान रहे, भगवान विष्णु को बिना तुलसी के भोग अर्पित नहीं किया जाता. कथा श्रवण: दीपक और धूप जलाकर व्रत कथा सुनें या पढ़ें. आरती: पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें और उन्हें सात्विक भोग लगाएं. भगवान विष्णु पूजन मंत्र और तुलसी विवाह इस दिन भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है: 1. ॐ विष्णवे नमः।। 2. ॐ नमो नारायण। श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि।। तुलसी विवाह का महत्व: Devuthani Ekadashi देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम रूप और माता तुलसी का विवाह किया जाता है. तुलसी विवाह का आयोजन करने से घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है. देवउठनी एकादशी व्रत पारण का समय (Parana Timing) एकादशी व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है. 1 नवंबर को व्रत रखने वाले (गृहस्थ): 2 नवंबर 2025 को पारण करेंगे.     पारण समय: 01:11 P.M. से 03:23 P.M. तक.     हरि वासर समाप्त होने का समय (2 नवंबर): 12:55 P.M.. 2 नवंबर को व्रत रखने वाले (वैष्णव): 3 नवंबर 2025 को पारण करेंगे.     पारण समय: 06:34 A.M. से 08:46 A.M. तक.     (ध्यान दें: इस दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी).

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Rama Ekadashi 2025

Rama Ekadashi 2025: बंद किस्मत के दरवाजे खोल देगा ये मंत्र, रमा एकादशी पर जरूर करें जाप

Rama Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी को बहुत शुभ और खास माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं।  Rama Ekadashi 2025: इस विशेष अवसर पर कुछ विशेष मंत्रों का जप करने से शुभ फल कई गुना बढ़ जाते हैं और Rama Ekadashi 2025 मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। Rama Ekadashi 2025 तो आइए जानते हैं कि रमा एकादशी के दिन कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए। Rama Ekadashi 2025:एकादशी मंत्र ऊँ श्री त्रिपुराय विद्महे तुलसी पत्राय धीमहि तन्नो: तुलसी प्रचोदयात।ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।। तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया ।। लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया ।। वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी || एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत || महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी ।आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते । देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः !नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।। दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम।विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम। लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम। ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि। मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा ।बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् ।करोमि यद्यत्सकलं परस्मै ।नारायणयेति समर्पयामि ॥ भगवान विष्ण के मंत्र अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।। कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् || ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् || श्री विष्णु स्तोत्र किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुन: पुन: ।यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव: ।। मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम् ।गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम् ।। पदनाभं सहस्त्राक्षं वनमालिं हलायुधम् ।गोवर्धनं ऋषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम् ।। विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम् ।दामोदरं श्रीधरं च वेदांग गरुड़ध्वजम् ।। अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम् ।गवां कोटिप्रदानस्य अश्वमेधशतस्य च ।। कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानव:अमायां वा पौर्णमास्यामेकाद्श्यां तथैव च ।। संध्याकाले स्मरेन्नित्यं प्रात:काले तथैव च ।मध्याहने च जपन्नित्यं सर्वपापै: प्रमुच्यते ।।

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Rama Ekadashi

Rama Ekadashi 2025 Date And Time: किस दिन मनाई जाएगी रमा एकादशी? यहां जानें शुभ मुहूर्त एवं महत्व

Rama Ekadashi Kab Hai: धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत करने से जातक की हर मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। यह व्रत परम फलदायी है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन सफेद और पीले रंग की चीजों का दान करने से उत्तम फल मिलता है। रमा एकादशी हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और भगवद्गीता का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस दिन हिंदू व्रत भी रखते हैं। इस दिन का महत्व भगवान कृष्ण ने बताया था और ब्रह्म वैवर्त पुराण में वर्णित है। रमा एकादशी हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन आती है, जो आमतौर पर अप्रैल में पड़ता है। यह दिन भगवान विष्णु के अवतार, भगवान राम को समर्पित है और समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। कब मनाई जाती है रमा एकादशी:When is Rama Ekadashi celebrated? हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है। रमा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेघ यज्ञ समान फल मिलता है। रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2025) वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 17 अक्टूबर को है। इस तिथि की शुरुआत 16 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 17 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 12 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा। इस प्रकार 17 अक्टूबर को रमा एकादशी मनाई जाएगी। कब मनाई जाती है देवउठनी एकादशी:When is Devuthani Ekadashi celebrated? कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इसके एक दिन बाद तुलसी विवाह मनाया जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन से चातुर्मास समाप्त होता है। इससे पहले आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू होता है। इस दिन से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। देवउठनी एकादशी व्रत करने से समस्त दुखों का नाश होता है। देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2025) वैदिक पंचांग के अनुसार, 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी और 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी। उदया तिथि गणना से 01 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। रमा एकादशी का महत्व:Importance of Rama Ekadashi शास्त्रों के अनुसार, मुचुकुंद नाम का एक राजा था। वह एक समृद्ध राज्य पर शासन करता था और उसके मित्रों में भगवान इंद्र, भगवान वरुण और भगवान कुबेर शामिल थे। वह भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था और उसे एक कन्या का आशीर्वाद प्राप्त हुआ जिसका नाम चंद्रभागा रखा गया। बाद में उसका विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र राजकुमार शोभन से हुआ। चंद्रभागा एकादशी का व्रत रखती थी, इसलिए उसने अपने ससुराल में भी इस परंपरा का पालन किया। उसने अपने पति से भी एकादशी का व्रत रखने को कहा। शोभन शारीरिक रूप से कमज़ोर महसूस करता था, इसलिए उसने व्रत रखने से इनकार कर दिया, जिससे चंद्रभागा व्यथित हो गई। उसे उसकी निराशा का एहसास हुआ, इसलिए उसने व्रत रखा, लेकिन जल्द ही वह भूख-प्यास से तड़पने लगा। राजकुमार व्रत का पालन नहीं कर सका, इसलिए सुबह होने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। भगवान राम, विष्णु के सातवें अवतार, अपने धर्म, न्याय और कर्तव्य के आदर्शों के लिए पूजनीय हैं। Rama Ekadashi रमा एकादशी भगवान राम के गुणों का सम्मान करती है और सदाचार और धार्मिकता से भरा जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन हेतु उनका आशीर्वाद मांगती है। भगवान राम का स्मरण करके, भक्तगण स्वयं को सत्य, सम्मान और कर्तव्य के उनके सिद्धांतों के साथ संरेखित करना चाहते हैं। Rama Ekadashi रमा एकादशी के पुण्य से शोभन को एक विशाल, किन्तु अदृश्य राज्य प्राप्त हुआ। एक बार, उसकी पत्नी के राज्य का एक ब्राह्मण भ्रमण पर निकला, तभी रास्ते में उसे वह राज्य मिला। शोभन ने उसे बताया कि Rama Ekadashi रमा एकादशी की कृपा से उसे राज्य प्राप्त हुआ है। उसने ब्राह्मण से कहा कि वह अपनी पत्नी को अपने राज्य के बारे में बताए। ब्राह्मण ने लौटकर चंद्रभागा को पूरी घटना बताई। चंद्रभागा, जो बचपन से ही एकादशी व्रत करती थी, ने अपने पुण्य से उसके राज्य को प्राप्त कर लिया। इसके बाद वे दोनों सुखपूर्वक रहने लगे। Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जीवन में मिलेंगे सभी सुख एकादशी की कथा:Story of Ekadashi रमा एकादशी Rama Ekadashi का महत्व माया नामक राक्षसी की कथा से जुड़ा है , जिसे भगवान राम ने पराजित किया था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माया एक राक्षसी थी जिसने देवताओं और मनुष्यों दोनों को कष्ट और पीड़ा पहुँचाई थी। उसे पराजित करके, भगवान राम ने अपनी शक्ति और धर्म का प्रदर्शन किया। ऐसा माना जाता है कि रमा एकादशी का व्रत करने से भक्तों को अपनी बाधाओं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद मिलती है, ठीक उसी तरह जैसे भगवान राम ने माया पर विजय प्राप्त की थी। रमा एकादशी व्रत के लाभ:Benefits of Rama Ekadashi fast कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को Rama Ekadashi रमा एकादशी कहते हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । व्यक्ति को वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में बाधाओं से ग्रस्त है, तो उसे भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करनी चाहिए। रमा एकादशी Rama Ekadashi का व्रत रखने वाले सभी भक्तों को अनाज और चावल से बने भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए (अन्य नियम एकादशी व्रत के समान ही हैं)। इसके अलावा, इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन के सभी पिछले पाप धुल जाते हैं। भगवान विष्णु मोती, रत्न आदि से भी प्रसन्न होते हैं। रमा एकादशी पर मुख्य अभ्यास:Main practices on Rama Ekadashi कठोर

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Papankusha Ekadashi

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जीवन में मिलेंगे सभी सुख

Papankusha Ekadashi: सनातन धर्म में, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की सभी तिथियों का विशेष महत्व होता है, जिसमें एकादशी तिथि भी शामिल है. वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को (Papankusha Ekadashi) पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है. इस व्रत को करने से सभी पापों से भी छुटकारा मिलता है. पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी शुभ माना गया है। एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है और बिगड़े काम पूरे होते हैं। अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी। पापांकुशा एकादशी 2025 कब है? (Papankusha Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी. तिथि की शुरुआत: आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगी. तिथि का समापन: एकादशी तिथि का समापन 03 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 32 मिनट पर होगा. व्रत का पारण: व्रत का पारण 04 अक्टूबर को किया जाएगा. एकादशी पर क्यों करें भगवान शिव की पूजा:Why worship Lord Shiva on Ekadashi? पापांकुशा एकादशी Papankusha Ekadashi पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है. लेकिन, इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है, और साधक के बिगड़े काम पूरे होते हैं. अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करनी चाहिए. इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी. शिवलिंग पर क्या-क्या चढ़ाएं और क्या लाभ मिलेगा:What should be offered to Shivling and what will be the benefit? यदि आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता चाहते हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन निम्नलिखित चीजें शिवलिंग पर अर्पित करें: 1. आर्थिक तंगी होगी दूर: कच्चे चावल (Raw Rice) अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी (Financial Difficulties) का सामना कर रहे हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करें. इसके साथ ही, महादेव से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें. धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आपकी आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है. 2. मिलेगा मनचाहा वर: घी (Ghee) शिवलिंग पर घी अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है. एकादशी के दिन महादेव का घी से अभिषेक करने से साधक को मनचाहे वर (Desired Spouse) की प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता (Success) मिलती है. 3. जीवन में मिलेंगे सभी सुख: गन्ने का रस (Sugarcane Juice) जीवन में सभी सुखों (All Worldly Comforts) की प्राप्ति के लिए Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के अवसर पर शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें. ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं और उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. भगवान शिव के मुख्य मंत्र:Main mantras of Lord Shiva शिवलिंग पर अभिषेक और पूजन करते समय आप इन पवित्र मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं: 1. शिव जी का मूल मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥ 2. महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ 3. रूद्र मंत्र: ॐ नमो भगवते रूद्राय। 4. रूद्र गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

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Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन, पापों से मिलेगा छुटकारा

Papankusha Ekadashi 2025: पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी व्रत (Papankusha Ekadashi 2025) एकादशी व्रत को अधिक शुभ माना जाता है। व्रत (Papankusha Ekadashi 2025 Vrat Niyam) के दौरान चावल और अन्न का सेवन वर्जित है। इससे भगवान विष्णु जी नाराज हो सकते हैं। आइए जानते हैं एकादशी में किन चीजों का सेवन कर सकते हैं। सनातन धर्म में जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाता है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी (Ekadashi Vrat Kab Hai) के नाम से जाना जाता है। इस दिन जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। व्रत के दौरान खानपान के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। माना जाता है कि नियम का पालन न करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है और जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं पापंकुशा एकादशी व्रत (Papankusha Ekadashi Vrat Me kya khayen) में क्या खाएं और क्या न खाएं? Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन पापों से मिलेगा छुटकारा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन:Consume these things during Ekadashi fast पापांकुशा एकादशी व्रत में दही, दूध, फल का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा आलू साबूदाने की सब्जी, कुट्टू के आटे की रोटी, मिठाई और पंचामृत भी भोग थाली में शामिल कर सकते हैं। जरूर लगाएं भोग:Please enjoy एक बात का विशेष ध्यान रखें कि इन चीजों का सेवन करने से पहले प्रभु को भोग जरूर लगाएं। साथ ही तुलसी दल को शामिल करें, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भूलकर भी न तोड़ें। मान्यता है कि एकादशी का धन की देवी मां लक्ष्मी व्रत करती हैं। ऐसे में तुलसी के पत्ते तोड़ने से उनका व्रत खंडित हो सकता है। इसलिए एकादशी से एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें। न करें इन चीजों का सेवन:Do not consume these things यदि आप पापांकुशा एकादशी व्रत में व्रत रख रहे हैं, तो खानपान का विशेष ध्यान रखें। व्रत के दौरान अन्न और चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मांस-मदिरा और तामसिक चीजों के सेवन से भी दूर रहना चाहिए। साथ ही भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस मंत्र का करें जप:Chant this mantra भोग लगाते समय निम्न मंत्र का जप करें। मान्यता है कि मंत्र के जप के बिना प्रभु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।

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Papankusha Ekadashi 2025 Date And Time: कब मनाई जाएगी इस साल पापांकुशा एकादशी? नोट कर लें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी, जिसे पुण्य व्रत या शरीर एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में विशेष स्थान रखती है। यह एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भक्त अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पापांकुशा एकादशी का व्रत आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। Papankusha Ekadashi 2025 Kab Hai: सनातन धर्म में आश्विन माह का विशेष महत्व है. यह महीना मां दुर्गे की आराधना का है. देवी मां दुर्गा व उनके नौ रूपों की विधि विधान से पूजा कर भक्त उनका आशीर्वाद पाता है. वहीं नवरात्रि और दशमी तिथि के बाद हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पापांकुशा एकादशी व्रत रखने का विधान है. Papankusha Ekadashi 2025 पापांकुशा एकादशी का व्रत का संकल्प करने से व्रती के सभी दुख दूर होते हैं और जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. लक्ष्मी नारायण की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन भक्त पूरे विधि विधान से शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. पापांकुशा एकादशी 2025 (Papankusha Ekadashi 2025) Papankusha Ekadashi 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल एकादशी तिथि 02 अक्टूबर की शाम को 07:10 बजे मिनट पर शुरू हो रही है और 03 अक्टूबर को शाम 06:32 पर तिथि का समापन हो रहा है. इस तरह उदयातिथि में 03 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत रखा जाएगा. 3 अक्टूबर को ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाएगी. वहीं पापांकुशा एकादशी पारण शुभ मुहूर्त में सुबह 06:15 बजे से लेकर 08:37 के बीच किया जा सकेगा. पापांकुशा एकादशी 2025 पर महत्वपूर्ण समय Papankusha Ekadashi Important Time सूर्योदय 03 अक्टूबर, 2025 सुबह 6:23 बजे सूर्यास्त 3 अक्टूबर, 2025 शाम 6:08 बजे एकादशी तिथि प्रारंभ 2 अक्टूबर, 2025 शाम 7:11 बजे एकादशी तिथि समाप्त 03 अक्टूबर, 2025 शाम 6:33 बजे हरि वासरा अंतिम क्षण 04 अक्टूबर, 2025 12:12 पूर्वाह्न द्वादशी समाप्ति क्षण 04 अक्टूबर, 2025 शाम 5:09 बजे पारणा समय 4 अक्टूबर, सुबह 6:23 – 4 अक्टूबर, सुबह 8:44 पापांकुशा एकादशी का महत्व (Papankusha Ekadashi Ka Mahatav) पापांकुशा एकादशी व्रत कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha) Papankusha Ekadashi 2025 प्राचीन काल में देवों और असुरों के बीच एक महान युद्ध हुआ था। इस युद्ध में देवता हारे और वे पृथ्वी पर आने लगे। असुरों ने देवताओं की स्त्री रूपिणी शक्ति को बंदी बना लिया। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और पपांकुशा एकादशी के दिन देवताओं की स्त्री रूपिणी शक्ति को मुक्त किया। व्रत के प्रभाव से देवता और असुर दोनों का कल्याण हुआ और पापों का नाश हुआ। Papankusha Ekadashi 2025 इस दिन की विशेषता यह है कि यह व्रत पापों को समाप्त करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। पापांकुशा एकादशी व्रत विधि (Papankusha Ekadashi Vrat Vidhi) पापांकुशा एकादशी के लाभ (Papankusha Ekadashi Ke Labh) पापांकुशा एकादशी का संदेश (Papankusha Ekadashi 2025 Ka Sandesh) Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी हमें यह सिखाती है कि जीवन में पापों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है भगवान विष्णु की भक्ति और सच्ची श्रद्धा। इस व्रत से व्यक्ति अपने पापों को समाप्त करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। यह व्रत आत्मा की शुद्धि और जीवन की सही दिशा में चलने की प्रेरणा देता है Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष और जीवन में सुख-समृद्धि दिलाने वाला पावन व्रत

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