DURGA

श्री दुर्गा के 108 नाम (Shri Durga 108 Name)

Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा के 108 नाम: देवी के विभिन्न रूपों का मंत्र Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा हिंदू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं और उन्हें शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनके 108 नाम उनके विभिन्न रूपों और गुणों को दर्शाते हैं। इन नामों का जाप करने से भक्तों को शक्ति, ज्ञान और मोक्ष प्राप्त होता है। Shri Durga 108 Name:108 नामों का महत्व Shri Durga 108 Name:जाप करने का तरीका Shri Durga 108 Name:कब करें आप किसी भी समय श्री दुर्गा के 108 नामों का जाप कर सकते हैं। लेकिन नवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर इनका जाप करना और भी अधिक फलदायी होता है। Shri Durga 108 Name:ध्यान रखें Shri Durga 108 Name:अतिरिक्त जानकारी श्री दुर्गा के 108 नाम (Shri Durga 108 Name) 1. सती- अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली2. साध्वी- आशावादी3. भवप्रीता- भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली4. भवानी- ब्रह्मांड की निवास5. भवमोचनी- संसार बंधनों से मुक्त करने वाली6. आर्या- देवी7. दुर्गा- अपराजेय8. जया- विजयी9. आद्य- शुरूआत की वास्तविकता10. त्रिनेत्र- तीन आँखों वाली11. शूलधारिणी- शूल धारण करने वाली12. पिनाकधारिणी- शिव का त्रिशूल धारण करने वाली13. चित्रा- सुरम्य, सुंदर14. चण्डघण्टा- प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली15. महातपा- भारी तपस्या करने वाली16. मन – मनन- शक्ति17. बुद्धि- सर्वज्ञाता 18. अहंकारा- अभिमान करने वाली19. चित्तरूपा- वह जो सोच की अवस्था में है20. चिता- मृत्युशय्या21. चिति- चेतना22. सर्वमन्त्रमयी- सभी मंत्रों का ज्ञान रखने वाली23. सत्ता- सत्-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है24. सत्यानन्दस्वरूपिणी- अनन्त आनंद का रूप25. अनन्ता- जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं26. भाविनी- सबको उत्पन्न करने वाली, खूबसूरत औरत27. भाव्या- भावना एवं ध्यान करने योग्य28. भव्या- कल्याणरूपा, भव्यता के साथ29. अभव्या – जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं30. सदागति- हमेशा गति में, मोक्ष दान31. शाम्भवी- शिवप्रिया, शंभू की पत्नी32. देवमाता- देवगण की माता33. चिन्ता- चिन्ता34. रत्नप्रिया- गहने से प्यार35. सर्वविद्या- ज्ञान का निवास36. दक्षकन्या- दक्ष की बेटी 37. दक्षयज्ञविनाशिनी- दक्ष के यज्ञ को रोकने वाली38. अपर्णा- तपस्या के समय पत्ते को भी न खाने वाली39. अनेकवर्णा- अनेक रंगों वाली40. पाटला- लाल रंग वाली41. पाटलावती- गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली42. पट्टाम्बरपरीधाना- रेशमी वस्त्र पहनने वाली43. कलामंजीरारंजिनी- पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली44. अमेय- जिसकी कोई सीमा नहीं45. विक्रमा- असीम पराक्रमी46. क्रूरा- दैत्यों के प्रति कठोर47. सुन्दरी- सुंदर रूप वाली48. सुरसुन्दरी- अत्यंत सुंदर49. वनदुर्गा- जंगलों की देवी50. मातंगी- मतंगा की देवी 51. मातंगमुनिपूजिता- बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय52. ब्राह्मी- भगवान ब्रह्मा की शक्ति53. माहेश्वरी- प्रभु शिव की शक्ति54. इंद्री- इन्द्र की शक्ति55. कौमारी- किशोरी56. वैष्णवी- अजेय57. चामुण्डा- चंड और मुंड का नाश करने वाली58. वाराही- वराह पर सवार होने वाली59. लक्ष्मी- सौभाग्य की देवी60. पुरुषाकृति- वह जो पुरुष धारण कर ले61. विमिलौत्त्कार्शिनी- आनन्द प्रदान करने वाली62. ज्ञाना- ज्ञान से भरी हुई63. क्रिया- हर कार्य में होने वाली64. नित्या- अनन्त 65. बुद्धिदा- ज्ञान देने वाली66. बहुला- विभिन्न रूपों वाली67. बहुलप्रेमा- सर्व प्रिय68. सर्ववाहनवाहना- सभी वाहन पर विराजमान होने वाली69. निशुम्भशुम्भहननी- शुम्भ, निशुम्भ का वध करने वाली70. महिषासुरमर्दिनि- महिषासुर का वध करने वाली71. मधुकैटभहंत्री- मधु व कैटभ का नाश करने वाली72. चण्डमुण्ड विनाशिनि- चंड और मुंड का नाश करने वाली73. सर्वासुरविनाशा- सभी राक्षसों का नाश करने वाली74. सर्वदानवघातिनी- संहार के लिए शक्ति रखने वाली75. सर्वशास्त्रमयी- सभी सिद्धांतों में निपुण76. सत्या- सच्चाई77. सर्वास्त्रधारिणी- सभी हथियारों धारण करने वाली78. अनेकशस्त्रहस्ता- हाथों में कई हथियार धारण करने वाली79. अनेकास्त्रधारिणी- अनेक हथियारों को धारण करने वाली80. कुमारी- सुंदर किशोरी81. एककन्या- कन्या 82. कैशोरी- जवान लड़की83. युवती- नारी84. यति- तपस्वी85. अप्रौढा- जो कभी पुराना ना हो86. प्रौढा- जो पुराना है87. वृद्धमाता- शिथिल88. बलप्रदा- शक्ति देने वाली89. महोदरी- ब्रह्मांड को संभालने वाली90. मुक्तकेशी- खुले बाल वाली91. घोररूपा- एक भयंकर दृष्टिकोण वाली92. महाबला- अपार शक्ति वाली93. अग्निज्वाला- मार्मिक आग की तरह94. रौद्रमुखी- विध्वंसक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा95. कालरात्रि- काले रंग वाली 96. तपस्विनी- तपस्या में लगे हुए97. नारायणी- भगवान नारायण की विनाशकारी रूप98. भद्रकाली- काली का भयंकर रूप99. विष्णुमाया- भगवान विष्णु का जादू100. जलोदरी- ब्रह्मांड में निवास करने वाली101. शिवदूती- भगवान शिव की राजदूत102. करली – हिंसक103. अनन्ता- विनाश रहित104. परमेश्वरी- प्रथम देवी105. कात्यायनी- ऋषि कात्यायन द्वारा पूजनीय106. सावित्री- सूर्य की बेटी107. प्रत्यक्षा- वास्तविक108. ब्रह्मवादिनी- वर्तमान में हर जगह वास करने वाली

श्री दुर्गा के 108 नाम (Shri Durga 108 Name) Read More »

दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)

Durga Chalisa:दुर्गा चालीसा: शक्ति की स्तुति Durga Chalisa:दुर्गा चालीसा हिंदू धर्म में माँ दुर्गा की स्तुति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह चालीसा माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों और उनकी शक्ति का वर्णन करती है। इसे भक्तों द्वारा माँ दुर्गा को प्रसन्न करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गाया जाता है। Durga Chalisa:दुर्गा चालीसा का महत्व Durga Chalisa ka Arth दुर्गा चालीसा का अर्थ दुर्गा चालीसा में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों, जैसे कि महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी का वर्णन किया गया है। इसमें माँ दुर्गा के शौर्य, दया और करुणा का भी वर्णन है। यह चालीसा भक्तों को माँ दुर्गा के प्रति समर्पण और भक्ति भावना जगाती है। Durga Chalisa:दुर्गा चालीसा का पाठ कब करें? दुर्गा चालीसा का पाठ कैसे करें? दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥ शशि ललाट मुख महाविशाला ।नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ रूप मातु को अधिक सुहावे ।दरश करत जन अति सुख पावे ॥ ४ तुम संसार शक्ति लै कीना ।पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला ।तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥ प्रलयकाल सब नाशन हारी ।तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ।ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥ ८ रूप सरस्वती को तुम धारा ।दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा ।परगट भई फाड़कर खम्बा ॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो ।हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।श्री नारायण अंग समाहीं ॥ १२ क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।महिमा अमित न जात बखानी ॥ मातंगी अरु धूमावति माता ।भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी ।छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ १६ केहरि वाहन सोह भवानी ।लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै ।जाको देख काल डर भाजै ॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत ।तिहुँलोक में डंका बाजत ॥ २० शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।रक्तबीज शंखन संहारे ॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी ।जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ रूप कराल कालिका धारा ।सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ परी गाढ़ सन्तन पर जब जब ।भई सहाय मातु तुम तब तब ॥ २४ अमरपुरी अरु बासव लोका ।तब महिमा सब रहें अशोका ॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।तुम्हें सदा पूजें नरनारी ॥ प्रेम भक्ति से जो यश गावें ।दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई ।जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥ २८ जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥ शंकर आचारज तप कीनो ।काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥ निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ शक्ति रूप का मरम न पायो ।शक्ति गई तब मन पछितायो ॥ ३२ शरणागत हुई कीर्ति बखानी ।जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा ।दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥ मोको मातु कष्ट अति घेरो ।तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ आशा तृष्णा निपट सतावें ।मोह मदादिक सब बिनशावें ॥ ३६ शत्रु नाश कीजै महारानी ।सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ करो कृपा हे मातु दयाला ।ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥ जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ ।तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥ श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै ।सब सुख भोग परमपद पावै ॥ ४० देवीदास शरण निज जानी ।कहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥ ॥दोहा॥शरणागत रक्षा करे,भक्त रहे नि:शंक ।मैं आया तेरी शरण में,मातु लिजिये अंक ॥॥ इति श्री दुर्गा चालीसा ॥

दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) Read More »

Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि? जानें कलश स्थापना मुहूर्त, दुर्गा अष्टमी, महानवमी का दिन

Shardiya Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024, 3 अक्टूबर, 2024 से शुरू हो रही है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो माँ दुर्गा को समर्पित है। इस नौ दिनों के उत्सव में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ पितृ पक्ष के समापन के बाद यानी आश्विन आमवस्या के बाद ही होता है. आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होता है. यह नवरात्रि शरद ऋतु में आती है, इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि कहते हैं. एक नवरात्रि चैत्र माह में आती है, उसे चैत्र नवरात्रि के नाम से जानते हैं. इन दो नवरा​त्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं. शारदीय नवरात्रि के समय में कोलकाता में प्रसिद्ध दुर्गा पूजा का आयोजन होता है. शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि विधान से पूजा करते हैं. दुर्गा अष्टमी या महा अष्टमी के दिन कन्या पूजा, नवमी को हवन और दशमी के दिन शारदीय नवरात्रि का समापन हो जाता है. Shardiya Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 का शुभारंभ वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा ति​थि का प्रारंभ 2 अक्टूबर को देर रात 12:18 बजे से होगा. यह तिथि 4 अक्टूबर को तड़के 02:58 बजे तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयाति​थि के आधार पर इस साल शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 3 अक्टूबर दिन गुरुवार से हो रहा है. Navratri 2024 Date:दुर्गा अष्टमी 2024 कब है? दुर्गा अष्टमी आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस साल दुर्गा अष्टमी 11 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है. उस दिन कन्या पूजा की जाएगी. Navratri 2024 Date:नवरात्रि के दौरान क्या करें? Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 कलश स्थापना मुहूर्त Navratri 2024 Date:3 अक्टूबर से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि का कलश स्थापना करने के लिए दो शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं. कलश स्थापना के लिए सुबह में शुभ मुहूर्त 6 बजकर 15 मिनट से सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक है. सुबह में घट स्थापना के लिए आपको 1 घंटा 6 मिनट का समय प्राप्त होगा. इसके अलावा दोपहर में भी कलश स्थापना का मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में है. यह सबसे अच्छा समय माना जाता है. दिन में आप 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट के बीच कभी भी कलश स्थापना कर सकते हैं. दोपहर में आपको 47 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी महानवमी 2024 कब है? इस साल महा नवमी भी 11 अक्टूबर को ही है. महानवमी का हवन 12 अक्टूबर शनिवार को होगा. Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 कैलेंडर शारदीय नवरात्रि का पहला दिन: 3 अक्टूबर, गुरुवार: घटस्थापना, शैलपुत्री पूजाशारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: 4 अक्टूबर, शुक्रवार: ब्रह्मचारिणी पूजाशारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन: 5 अक्टूबर, शनिवार: चंद्रघंटा पूजाशारदीय नवरात्रि का चौथा दिन: 6 अक्टूबर, रविवार: विनायक चतुर्थीशारदीय नवरात्रि का पांचवा दिन: 7 अक्टूबर, सोमवार: कूष्मांडा पूजाशारदीय नवरात्रि का छठा दिन: 8 अक्टूबर, मंगलवार: स्कंदमाता पूजाशारदीय नवरात्रि का सातवां दिन: 9 अक्टूबर, बुधवार: कात्यायनी पूजाशारदीय नवरात्रि का आठवां दिन: 10 अक्टूबर, गुरुवार: कालरात्रि पूजाशारदीय नवरात्रि का नौवां दिन: 11 अक्टूबर, शुक्रवार: दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजाशारदीय नवरात्रि का दसवां दिन: 12 अक्टूबर, शनिवार: नवमी हवन, दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी, दशहरा, शस्त्र पूजा Navratri 2024:नवरात्रि का महत्व Navratri 2024:नवरात्रि का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाते हैं और माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि? जानें कलश स्थापना मुहूर्त, दुर्गा अष्टमी, महानवमी का दिन Read More »

Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, नोट करें सही तारीख, कलश स्थापना विधि व पूजन सामग्री

Shardiya Navratri 2024: चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि (माघ/आषाढ़) आती हैं। शारदीय नवरात्रि अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इस पर्व पर भक्त नौ दिनों तक मां अम्बे की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं Shardiya Navratri 2024 Date: सनातन धर्म में त्योहारों का विशेष महत्व है। नवरात्रि का पर्व भी खास अवसरों में से एक है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। साल में चार बार नवरात्रि का पावन त्योहार आता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि आती है। हालांकि सबसे ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्रि का है। पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विनी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। नवरात्रि के 10वें दिन दशहरा मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि का त्योहार 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी… Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथियां शारदीय नवरात्रि पूजा पर कैसे करें कलश स्थापना, जानें विधि (Shardiya Navratri 2024 Ghatsthapana Vidhi)  1. सुबह उठकर सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साप वस्त्र पहन लें. 2. घर में सफाई करने के बाद मुख्य द्वार की चौखट पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं. 3. पूजा घर को साफ करें और गंगाजल से पवित्र कर लें. 4. अब चौकी लगाएं और माता की प्रतिमा स्थापित करें. 5. फिर उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में कलश की स्थापना करें.  6. कलश स्थापना के लिए जौ के बीज बोएं. फिर कलश में एक तांबे के कलश में पानी और गंगाजल डालें.  7. कलश पर कलावा और आम के पत्ते बांधें. 8. अब कलश में दूब, अक्षत और सुपारी डालें. 9. कलश पर चुनरी और मौली बांध कर एक नारियल रख दें.  10 अब विधि-विधान से मां दुर्गा का पूजन करें.  11. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. 12. आखिरी में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें. Navratri 2024:पूजन सामग्री Navratri 2024 नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा के लिए निम्नलिखित पूजन सामग्री की आवश्यकता होती है पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा (Shardiya Navratri 2024 Maa Durga Sawari)  Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन पर वाहन (Maa Durga Sawari) का विशेष महत्व होता है. इसे शुभ और अशुभता से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में इस साल शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आएंगी. देवी पुराण में पालकी की सवारी को बहुत शुभ माना जाता है. Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri Date & Shubh Muhurat)  हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाता है और शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है. इस साल शारदीय नवरात्रि 03 अक्टूबर, 2024 से शुरू हो रहा है. वहीं समापन 11 अक्टूबर को होगा. इसके अगले दिन 12 अक्टूबर को विजयदशमी का पावन पर्व मनाया जाएगा.  हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 3 अक्टूबर, 2024 को सुबह 12:19 बजे से हो रहा है, जो 4 अक्टूबर को सुबह 2:58 बजे तक है. ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक शारदीय नवरात्रि गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024 आरंभ हो रही है.  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, नोट करें सही तारीख, कलश स्थापना विधि व पूजन सामग्री Read More »

Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी…

Durga Chalisa यहां सभी पाठकों के लिए प्रस्तुत है पवित्र श्री दुर्गा चालीसा। नवरात्रि के दिनों के अलावा  भी दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करने से मां दुर्गा अपने भक्त पर प्रसन्न होती हैं और वे  हर तरह के संकट दूर करती हैं।  Durga Chalisa:दुर्गा चालीसा: शक्ति की स्तुति Durga Chalisa दुर्गा चालीसा एक प्रसिद्ध हिंदू स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की महिमा का वर्णन करता है। देवी दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है और उन्हें बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। इस चालीसा में देवी के विभिन्न रूपों और उनके शक्तिशाली कार्यों का वर्णन किया गया है। Durga Chalisa दुर्गा चालीसा का महत्व Sri Durga Chalisa कब पाठ करें Durga Chalisa दुर्गा चालीसा नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥ क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥ मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत॥ शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥ अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥ प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥ जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥ निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥ शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥ मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥ आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपू मुरख मौही डरपावे॥ शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥ करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला। जब लगि जिऊं दया फल पाऊं । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥ दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥ देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥ Durga Chalisa ॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी… Read More »

Durgashtami2024:हर महीने की अष्टमी पर करना चाहिए देवी पूजा और व्रत, बीमारियों से बचने के लिए बनी है ये परंपरा ?

पौष महीने की अष्टमी पर शक्ति पूजा से प्रसन्न होती हैं देवी दुर्गा, सेहत के लिए भी अच्छा है इस दिन व्रत-उपवास करना Durgashtami2024अष्टमी तिथि की स्वामी देवी दुर्गा होती हैं। इसलिए हर महीने के शुक्लपक्ष में इस तिथि पर शक्ति पूजा और व्रत-उपवास करने का विधान पुराणों में बताया गया है। शक्ति पूजा के साथ नियम से व्रत या उपवास किया जाए तो सेहत भी अच्छा रहता है। इससे बीमारियां भी दूर होती हैं और उम्र बढ़ती है। हर महीने मौसम में थोड़े बदलाव होते हैं। जिससे बीमारियों का संक्रमण होता है। इसलिए ऋषियों हर व्रत-उपवास की परंपरा बनाई। जिससे पाचन अच्छा रहता है और शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। Durgashtami2024:मासिक दुर्गाष्टमी का शुभ मुहूर्त मासिक दुर्गाष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त में मां दुर्गा की पूजा करना शुभ माना जाता है। Durgashtami2024:मासिक दुर्गाष्टमी के उपाय मासिक दुर्गाष्टमी के दिन कुछ उपाय करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। Durgashtami2024:पौष महीने में देवी आराधनापौष महीने में शीत ऋतु होती है। इस महीने में बीमारियों से बचने के लिए सूर्य पूजा की जाती है। साथ ही पुराणों में इसके लिए देवी पूजा के लिए अष्टमी तिथि तय की गई है। पौष महीने में की गई शक्ति आराधना से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। 2022 के पहले महीने में आने वाली मासिक Durgashtami2024 दुर्गा अष्टमी को शक्ति की आराधना जरूर करनी चाहिए ताकि सालभर मुश्किलों से लड़ने की ताकत मिले और देवी मां की कृपा हमेशा बनी रहे। स्कंद षष्ठी पर इस शुभ मुहूर्त में विधान से करें पूजा, घर में बनी रहेगी खुशहाली! Durgashtami2024:शक्ति पूजा की विधि Durgashtami2024:शक्ति की आराधना के लिए मंत्र जाप करेंया देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ अष्टमी व्रत का महत्वमान्यता है कि हर हिंदू मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस व्रत का देवी दुर्गा का मासिक व्रत भी कहा जाता है। आमतौर पर हिंदू कैलेंडर में अष्टमी दो बार आती है। एक कृष्ण पक्ष में दूसरी शुक्ल पक्ष में। शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर खासतौर से देवी दुर्गा का पूजा और व्रत किया जाता है।

Durgashtami2024:हर महीने की अष्टमी पर करना चाहिए देवी पूजा और व्रत, बीमारियों से बचने के लिए बनी है ये परंपरा ? Read More »

Kushmanda Mata नवरात्रि के चौथे दिन ऐसे करें मां कुष्मांडा देवी की पूजा :Chaitra Navratri 2024

माँ कुष्मांडा: नवरात्रि के चौथे दिन की देवी माँ कुष्मांडा नवदुर्गा का चौथा स्वरूप हैं। इनकी पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है। माँ कुष्मांडा को आदि शक्ति और सृष्टि की रचनाकारिणी माना जाता है। माँ कुष्मांडा का स्वरूप: माँ कुष्मांडा का नाम: माँ कुष्मांडा की पूजा: मां कुष्मांडा का पूजा विधि मां कुष्मांडा की पूजा करने के लिए सुबह उठकर स्नान कर मंदिर की साज सज्जा करें. उसके बाद मां कुष्मांडा का ध्यान कर कुमकुम, मौली, अक्षत, लाल रंग के फूल, फल, पान के पत्ते, केसर और शृंगार आदि श्रद्धा पूर्वक चढ़ाएं. साथ ही यदि सफेद कुम्हड़ा या उसके फूल है तो उन्हें मातारानी को अर्पित कर दें. फिर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में घी के दीप या कपूर से मां कूष्मांडा की आरती करें. माँ कुष्मांडा का मंत्र: “या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।” माँ कुष्मांडा की कृपा से सभी भक्तों को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:वरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा रूप की पूजा अर्चना की जाती है. मान्यता है कि नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा करने वाले साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भक्तों को सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही पढ़ने वाले विद्यार्थी यदि कुष्मांडा देवी की पूजा करें तो उनके बुद्धि विवेक में वृद्धि होती है. दुर्गा माता के चौथे रूप में मां कुष्मांडा भक्तों को रोग, शोक, विनाश से मुक्त करके आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं. माँ कुष्मांडा की आरती: कूष्मांडा माता की आरती (Kushmanda Mata Ki Aarti) कूष्मांडा जय जग सुखदानी।मुझ पर दया करो महारानी॥ पिंगला ज्वालामुखी निराली।शाकंबरी माँ भोली भाली॥ लाखों नाम निराले तेरे।भक्त कई मतवाले तेरे॥ भीमा पर्वत पर है डेरा।स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥ सबकी सुनती हो जगदंबे।सुख पहुँचाती हो माँ अंबे॥ तेरे दर्शन का मैं प्यासा।पूर्ण कर दो मेरी आशा॥ माँ के मन में ममता भरी।क्यों ना सुनेगी अरज हमरी॥ तेरे दर पर किया है डेरा।दूर करो माँ संकट मेरा॥ मेरे कारज पूरे कर दो।मेरे तुम भंडारे भर दो॥ तेरा दास तुझे ही ध्याए।भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

Kushmanda Mata नवरात्रि के चौथे दिन ऐसे करें मां कुष्मांडा देवी की पूजा :Chaitra Navratri 2024 Read More »

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी कब है? Chaitra Navratri 2024 Navami Date

चैत्र नवरात्रि के साथ प्रभु राम का जन्म और रामराज्य की स्थापना का इतिहास जुड़ा है, इसलिए इस नवरात्रि का धार्मिक महत्व है. नवरात्रि मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक होता है. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने का विधान है. घटस्थापना से लेकर नवमी तिथि तक 9 दिन देवी के लोग व्रत, पूजा, पाठ आदि में लीन रहते हैं. नवरात्रि व्रत का मुख्य उद्देश्य अपनी इंद्रियों पर संयम रखना और आध्यात्मिक शक्ति का संचय करना है. ऐसी मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि की महानवमी पर व्रत रखने और देवी पूजा करने से पूरे 9 दिनों की उपासना करने के समान फल प्राप्त है.  चैत्र नवरात्रि चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाया जाता है। 2024 में, चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से 17 अप्रैल तक मनाई जाएगी। नवरात्रि का महत्व: चैत्र नवरात्रि के नौ दिन: चैत्र नवरात्रि 2024 अष्टमी कब है? (Chaitra Navratri 2024 Ashtami Date) नवरात्रि के आठवें दिन महा अष्टमी मनाई जाती है और इस दिन मां महागौरी की पूजा होती है. इस बार चैत्र मास के शुक्ल की अष्टमी तिथि 15 अप्रैल 2024 की दोपहर 12:11 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 16 अप्रैल 2024 की दोपहर 01:23 पर समाप्त होगी. ऐसे में चैत्र नवरात्रि में महाष्टमी 16 अप्रैल 2024 को मनाई जाएगी. चैत्र नवरात्रि 2024 नवमी कब है ? (Chaitra Navratri 2024 Navami) इस साल चैत्र नवरात्रि की दुर्गा महानवमी 17 अप्रैल 2024 को पड़ है. पंचांग के अनुसार इसी दिन राम नवमी भी मनाई जाएगी. यह नवरात्रि का आखिरी दिन होता है. इस दिन देवी दुर्गा के 9वें रूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों की समाप्ति के बाद इसी दिन नवरात्रि व्रत का पारण भी किया जाता है. नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण कार्य: चैत्र नवरात्रि का समापन: नवरात्रि का समापन नवमी तिथि को होता है। इस दिन, लोग मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं और एक-दूसरे को प्रसाद वितरित करते हैं। चैत्र नवरात्रि नवमी पर मनाया जाता है राम जन्मदिवस शारदीय और चैत्र नवरात्रि दोनों में ही नवमी तिथि का प्रभु श्रीराम से गहरा संबंध मिलता है. ऐसी मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि पर भगवान राम ने रावण का वध किया था और लंका पर विजय प्राप्ति की थी. ऐसे ही, चैत्र नवरात्रि की महानवमी पर राजा दशरथ के घर पुरुष अवतार के रूप में श्रीराम का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन को रामनवमी के रूप में भी जाना जाता है.

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी कब है? Chaitra Navratri 2024 Navami Date Read More »

Durga Ashtami:दुर्गा अष्टमी व्रत तिथि 2023

हिन्दू धर्म में अष्टमी का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। अष्टमी के दिन देवी दुर्गा की पूजा व व्रत किया जाता है। हर हिन्दू मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी Durga Ashtami का व्रत किया जाता है। इस व्रत का देवी दुर्गा का मासिक व्रत भी कहा जाता है। हिन्दू कैलेण्डर में अष्टमी दो बार आती है एक कृष्ण पक्ष में दूसरी शुक्ल पक्ष में। शुक्ल पक्ष की अष्टमी में देवी दुर्गा का व्रत किया जाता है। अश्विन मास में आने वाली शारदीय नवरात्रि के उत्सव के दौरान पड़ने वाली अष्टमी को और चैत्र नवरात्रि के उत्सव के दौरान पड़ने वाली अष्टमी को महाष्टमी व दुर्गाष्टमी Durga Ashtami कहा जाता है।  Durga Ashtami व्रत का महत्व: व्रत की विधि: व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें: मासिक दुर्गा अष्टमी: दुर्गा अष्टमी व्रत केवल नवरात्रि के दौरान ही नहीं, बल्कि हर महीने में भी किया जा सकता है। माना जाता है कि मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत करने से भक्तों को मनचाही वस्तु की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

Durga Ashtami:दुर्गा अष्टमी व्रत तिथि 2023 Read More »

Durga mata :श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा 

श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत की कथा का बहुत महत्व है। यह कथा हमें देवी दुर्गा की महिमा और उनके भक्तों पर उनकी कृपा के बारे में बताती है। यह कथा हमें प्रेरित करती है कि हम भी देवी दुर्गा की सच्ची श्रद्धा से उनकी आराधना करें ताकि हमें भी उनकी कृपा प्राप्त हो सके। नवरात्रि व्रत का फल श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत का फल बहुत ही फलदायी होता है। इस व्रत को करने से मनुष्य को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। उसे सुख-समृद्धि और मोक्ष प्राप्त होता है। Durga mata नवरात्रि व्रत की विधि श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत की विधि निम्नलिखित है: नवरात्रि व्रत के नियम श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत के कुछ नियम निम्नलिखित हैं: व्रत कथा प्रारम्भ बृहस्पति जी बोले- हे ब्राह्मण। आप अत्यन्त बुद्धिमान, सर्वशास्त्र और चारों वेदों को जानने वालों में श्रेष्ठ हो। हे प्रभु! कृपा कर मेरा वचन सुनो। चैत्र, आश्विन और आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष में नवरात्र का व्रत और उत्सव क्यों किया जाता है? हे भगवान! इस व्रत का फल क्या है? किस प्रकार करना उचित है? और पहले इस व्रत को किसने किया? सो विस्तार से कहो? बृहस्पति जी का ऐसा प्रश्न सुनकर ब्रह्मा जी कहने लगे कि हे बृहस्पते! प्राणियों का हित करने की इच्छा से तुमने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया। जो मनुष्य मनोरथ पूर्ण करने वाली दुर्गा Durga mata महादेवी, सूर्य और नारायण का ध्यान करते हैं, वे मनुष्य धन्य हैं, यह नवरात्र व्रत सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। इसके करने से पुत्र चाहने वाले को पुत्र, धन चाहने वाले को धन, विद्या चाहने वाले को विद्या और सुख चाहने वाले को सुख मिल सकता है। इस व्रत को करने से रोगी मनुष्य का रोग दूर हो जाता है और कारागार हुआ मनुष्य बन्धन से छूट जाता है। मनुष्य की तमाम आपत्तियां दूर हो जाती हैं और उसके घर में सम्पूर्ण सम्पत्तियां आकर उपस्थित हो जाती हैं। बन्ध्या और काक बन्ध्या को इस व्रत के करने से पुत्र उत्पन्न होता है। समस्त पापों को दूूर करने वाले इस व्रत के करने से ऐसा कौन सा मनोबल है जो सिद्ध नहीं हो सकता। जो मनुष्य अलभ्य मनुष्य देह को पाकर भी नवरात्र का व्रत नहीं करता वह माता-पिता से हीन हो जाता है अर्थात् उसके माता-पिता मर जाते हैं और अनेक दुखों को भोगता है। उसके शरीर में कुष्ठ हो जाता है और अंग से हीन हो जाता है उसके सन्तानोत्पत्ति नहीं होती है। इस प्रकार वह मूर्ख अनेक दुख भोगता है। इस व्रत को न करने वला निर्दयी मनुष्य धन और धान्य से रहित हो, भूख और प्यास के मारे पृथ्वी पर घूमता है और गूंगा हो जाता है। जो विधवा स्त्री भूल से इस व्रत को नहीं करतीं वह पति हीन होकर नाना प्रकार के दुखों को भोगती हैं। यदि व्रत करने वाला मनुष्य सारे दिन का उपवास न कर सके तो एक समय भोजन करे और उस दिन बान्धवों सहित नवरात्र व्रत की कथा करे। Durga mata:दुर्गा माता के 9 रूपों की कहानी हे बृहस्पते! जिसने पहले इस व्रत को किया है उसका पवित्र इतिहास मैं तुम्हें सुनाता हूं। तुम सावधान होकर सुनो। इस प्रकार ब्रह्मा जी का वचन सुनकर बृहस्पति जी बोले- हे ब्राह्मण! मनुष्यों का कल्याण करने वाले इस व्रत के इतिहास को मेरे लिए कहो मैं सावधान होकर सुन रहा हूं। आपकी शरण में आए हुए मुझ पर कृपा करो। ब्रह्मा जी बोले- पीठत नाम के मनोहर नगर में एक अनाथ नाम का ब्राह्मण रहता था। वह भगवती दुर्गा का भक्त था। उसके सम्पूर्ण सद्गुणों से युक्त मनो ब्रह्मा की सबसे पहली रचना हो ऐसी यथार्थ नाम वाली सुमति नाम की एक अत्यन्त सुन्दर पुत्री उत्पन्न हुई। वह कन्या सुमति अपने घर के बालकपन में अपनी सहेलियों के साथ क्रीड़ा करती हुई इस प्रकार बढ़ने लगी जैसे शुक्लपक्ष में चन्द्रमा की कला बढ़ती है। उसका पिता प्रतिदिन दुर्गा की पूजा और होम करता था। उस समय वह भी नियम से वहां उपस्थित होती थी। एक दिन वह सुमति अपनी सखियों के साथ खेलने लग गई और भगवती के पूजन में उपस्थित नहीं हुई। उसके पिता को पुत्री की ऐसी असावधानी देखकर क्रोध आया और पुत्री से कहने लगा कि हे दुष्ट पुत्री! आज प्रभात से तुमने भगवती का पूजन नहीं किया, इस कारण मैं किसी कुष्ठी और दरिद्री मनुष्य के साथ तेरा विवाह करूंगा।  इस प्रकार कुपित पिता के वचन सुनकर सुमति को बड़ा दुख हुआ और पिता से कहने लगी कि हे पिताजी! मैं आपकी कन्या हूं। मैं आपके सब तरह से आधीन हूं। जैसी आपकी इच्छा हो वैसा ही करो। राजा कुष्ठी अथवा और किसी के साथ जैसी तुम्हारी इच्छा हो मेरा विवाह कर सकते हो पर होगा वही जो मेरे भाग्य में लिखा है मेरा तो इस पर पूर्ण विश्वास है। मनुष्य जाने कितने मनोरथों का चिन्तन करता है पर होता वही है जो भाग्य में विधाता ने लिखा है जो जैसा करता है उसको फल भी उस कर्म के अनुसार मिलता है, क्यों कि कर्म करना मनुष्य के आधीन है। पर फल दैव के आधीन है। जैसे अग्नि में पड़े तृणाति अग्नि को अधिक प्रदीप्त कर देते हैं उसी तरह अपनी कन्या के ऐसे निर्भयता से कहे हुए वचन सुनकर उस ब्राह्मण को अधिक क्रोध आया। तब उसने अपनी कन्या का एक कुष्ठी के साथ विवाह कर दिया और अत्यन्त क्रुद्ध होकर पुत्री से कहने लगा कि जाओ- जाओ जल्दी जाओ अपने कर्म का फल भोगो। देखें केवल भाग्य भरोसे पर रहकर तुम क्या करती हो? इस प्रकार से कहे हुए पिता के कटु वचनों को सुनकर सुमति मन में विचार करने लगी कि – अहो! मेरा बड़ा दुर्भाग्य है जिससे मुझे ऐसा पति मिला। इस तरह अपने दुख का विचार करती हुई वह सुमति अपने पति के साथ वन चली गई और भयावने कुशयुक्त उस स्थान पर उन्होंने वह रात बड़े कष्ट से व्यतीत की। उस गरीब बालिका की ऐसी दशा देखकर भगवती पूर्व पुण्य के प्रभाव से प्रकट होकर सुमति से कहने लगीं कि हे दीन ब्राह्मणी! मैं तुम पर प्रसन्न हूं, तुम जो चाहो वरदान मांग सकती हो। मैं प्रसन्न होने पर मनवांछित फल देने वाली हूं। इस प्रकार भगवती दुर्गा का

Durga mata :श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा  Read More »

Maa Durga 108 Names: करें मां के 108 नामों का जाप, बनी रहती है मां की कृपा

माँ दुर्गा के 108 नाम माँ दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। वे हिंदू धर्म की सबसे प्रमुख देवी हैं, और उन्हें कई नामों से जाना जाता है। इनमें से कुछ नाम निम्नलिखित हैं: इनके अलावा, देवी दुर्गा को अन्य कई नामों से भी जाना जाता है, जैसे: Mata Durga:माता दुर्गा के 5 रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान इन सभी नामों का अपना एक विशेष अर्थ है। देवी दुर्गा को इन नामों से पुकारने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है। Maa Durga 108 Names माँ दुर्गा के 108 नाम List सती, साध्वी, भवप्रीता, भवानी, भवमोचनी, आर्या, दुर्गा, जया, आद्या, त्रिनेत्रा, शूलधारिणी, पिनाकधारिणी, चित्रा, चंद्रघंटा, महातपा, मन, बुद्धि, अहंकारा, चित्तरूपा, चिता, चिति, सर्वमंत्रमयी, सत्ता, सत्यानंदस्वरुपिणी, अनंता, भाविनी, भव्या, अभव्या, सदागति, शाम्भवी, देवमाता, चिंता, रत्नप्रिया, सर्वविद्या, दक्षकन्या, दक्षयज्ञविनाशिनी, अपर्णा, अनेकवर्णा, पाटला, पाटलावती, पट्टाम्बरपरिधाना, कलमंजरीरंजिनी, अमेयविक्रमा, क्रूरा, सुंदरी, सुरसुंदरी, वनदुर्गा, मातंगी, मतंगमुनिपूजिता, ब्राह्मी, माहेश्वरी, ऐंद्री, कौमारी, वैष्णवी, चामुंडा, वाराही, लक्ष्मी, पुरुषाकृति, विमला, उत्कर्षिनी, ज्ञाना, क्रिया, नित्या, बुद्धिदा, बहुला, बहुलप्रिया, सर्ववाहनवाहना, निशुंभशुंभहननी, महिषासुरमर्दिनी, मधुकैटभहंत्री, चंडमुंडविनाशिनी, सर्वसुरविनाशा, सर्वदानवघातिनी, सर्वशास्त्रमयी, सत्या, सर्वास्त्रधारिणी, अनेकशस्त्रहस्ता, अनेकास्त्रधारिणी, कुमारी, एककन्या, कैशोरी, युवती, यति, अप्रौढ़ा, प्रौढ़ा, वृद्धमाता, बलप्रदा, महोदरी, मुक्तकेशी, घोररूपा, महाबला, अग्निज्वाला, रौद्रमुखी, कालरात्रि, तपस्विनी, नारायणी, भद्रकाली, विष्णुमाया, जलोदरी, शिवदुती, कराली, अनंता, परमेश्वरी, कात्यायनी, सावित्री, प्रत्यक्षा और ब्रह्मावादिनी।

Maa Durga 108 Names: करें मां के 108 नामों का जाप, बनी रहती है मां की कृपा Read More »

Durga mata:दुर्गा अष्टमी: देवी महागौरी की कथा, पूजा विधि और कन्या भोजन का महत्व

देवी महागौरी की कथाकथा है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने कठोर तप किया था. इससे उनका शरीर काला पड़ गया था. देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव इन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करते हैं और इनके शरीर को गंगाजल से धोया जाता है. इससे वे विद्युत के समान कांतिमान हो जाती हैं. वे गौरवर्ण हैं इसलिए उन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है. Durga mata:महागौरी का स्वरूपमहाअष्टमी के दिन देवी दुर्गा के चार हाथों में से दो हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में होते हैं और दो हाथों में डमरू और त्रिशूल रहता है. महागौरी सफेद या हरा वस्त्र धारण करती हैं. इस दिन देवी दुर्गा के अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की जाती है. शस्त्रों के प्रदर्शन के कारण इस दिन को वीराष्टमी भी कहा जाता है. अष्टमी पर लाल फूल, लाल चंदन, दिया और धूप जैसी चीजों से मां दुर्गा का पूजन करते हैं. दुर्गा सप्तशती के पाठ का आज विशेष महत्व है. आराधना मंत्रया देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमस्तस्यै मनो नम:. कन्या पूजन का फल अष्टमी के दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन 10 साल के कम उम्र की  कन्याओं के पूजन और उन्हें भोजन कराने से शुभ फल मिलता है. ये कन्याएं मां दुर्गा का प्रतिनिधि मानी जाती हैं. आमतौर पर कन्याभोज में नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है लेकिन 5, 7 और 11 की संख्या भी शुभ मानी जाती है. घर बुलाकर पहले उनके पैर पूजे जाते हैं, फिर उन्हें भोजन कराकर पसंदीदा तोहफे दिए जाते हैं और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है. Durga mata: माता को अर्पणमंदिरों में इस दिन महाअष्टमी का हवन होता है. इसमें भक्त बड़ी श्रद्धा से शामिल होते हैं क्योंकि मान्यता है कि इस हवन से पुण्यलाभ होता है. महिलाएं देवी मां को लाल चुनरी, लाल-हरी चूड़ियां और सिंदूर अर्पित करती और अपने सुख-सौभाग्य के लिए प्रार्थना करती हैं. पौराणिक विश्वास के अनुसार देवी के इस स्वरूप की सच्चे मन से पूजा करें तो सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

Durga mata:दुर्गा अष्टमी: देवी महागौरी की कथा, पूजा विधि और कन्या भोजन का महत्व Read More »