ASTROLOGY

Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 10/09/2024

Aaj Ka Panchang 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞 ⛅दिनांक – 10 सितम्बर 2024⛅दिन – मंगलवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – सप्तमी रात्रि 11:11 तक तत्पश्चात अष्टमी⛅नक्षत्र – अनुराधा रात्रि 08:04 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा⛅योग – विष्कम्भ रात्रि 12:31 सितम्बर 11 तक तत्पश्चात प्रीति⛅राहु काल – दोपहर 03:42 से शाम 05:15 तक⛅सूर्योदय – 06:25 ⛅सूर्यास्त – 06:48⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से दोपहर 01:01 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:13 सितम्बर 11 से रात्रि 01:00 सितम्बर 11 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – ललिता सप्तमी, जयेष्ठ गौरी आह्वाहन⛅विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ते हैं और शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹अपनी प्रकृति अनुसार करें आहार सेवन🔹 🔸मानवीय प्रकृति में जिस दोष की प्रधानता होती है उसके प्रकोपजन्य व्याधियाँ होने की सम्भावना अधिक होती है । इनसे रक्षा के लिए आयुर्वेद के आचार्य महर्षि चरक कहते हैं :विपरीत गुणस्तेषां स्वस्थवृत्तेर्विधिर्हितः । 🔸प्रकृति के विरुद्ध गुण का सेवन ही स्वास्थ्यवर्धक होता है । (च. सं., सूत्रस्थान ७.४१) इसलिए अपनी प्रकृति का निश्चय कर उसके अनुसार आहार-विहार का सेवन करना चाहिए । 🔸सभी आहार द्रव्यों का लाभ प्राप्त करने हेतु पदार्थ जिस दोष को बढ़ाता है उसके शमनकारी पदार्थों का युक्तिपूर्वक संयोग कर सेवन करना हितकर है । जैसे- पालक वायुवर्धक है तो उसके साथ में वायुशामक सोआ डाला जाता है, अदरक, लहसुन, काली मिर्च, हींग आदि द्रव्यों के उपयोग से दालों व सब्जियों के तथा तेल, घी, नमक के द्वारा जौ, मकई आदि अनाजों के वायुवर्धक गुण का शमन किया जाता है । Aaj Ka Panchang 🔹आहार द्वारा वायु को संतुलित कैसे रखें ?🔹 🔸प्रकुपित वायु बल, वर्ण और आयु का नाश कर देती है । मन में अस्थिरता, दीनता, भय, शोक उत्पन्न करती है। 🔸 अकेले वात के प्रकोप से ८० प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं । प्रकुपित वायु का पित्त व कफ के साथ संयोग होने से उत्पन्न होनेवाले रोग असंख्य हैं । वायु अतिशय बलवान व आशुकारी (शीघ्र काम करनेवाली) होने से उससे उत्पन्न होनेवाले रोग भी बलवान व शीघ्र घात करनेवाले होते हैं । अतः वायु को नियंत्रण में रखने के लिए आहार में वायुवर्धक व वायुशामक पदार्थों का युक्तियुक्त उपयोग करना चाहिए । Aaj Ka Panchang 🔹वायुशामक पदार्थ🔹 अनाजों में : साठी के चावल, गेहूँ, बाजरा, तिल दालों में : कुलथी, उड़द सब्जियों में : बथुआ, पुनर्नवा (साटोडी), परवल, कोमल मूली, कोमल (बिना बीज के) बैंगन, पका पेठा, सहजन की फली, भिंडी, सूरन, गाजर, शलगम, पुदीना, हरा धनिया, प्याज, लहसुन, अदरक फलों में : सूखे मेवे, अनार, आँवला, बेल, आम, नारंगी, बेर, अमरूद, केला, अंगूर, मोसम्बी, नारियल, सीताफल, पपीता, शहतूत, लीची, कटहल (पका), फालसा, खरबूजा, तरबूज मसालों में : सोंठ, अजवायन, सौंफ, हींग, काली मिर्च, पीपरामूल, जीरा, मेथीदाना, दालचीनी, जायफल, लौंग, छोटी इलायची । 🔹अन्य वायुशामक पदार्थ🔹 🔸केसर, सेंधा नमक, काला नमक, देशी गाय का दूध एवं घी, सभी प्रकार के तेल [बरें (कुसुम्भ, कुसुम) का तेल छोड़कर ] 🔹वायुवर्धक पदार्थ🔹 अनाजों में : जौ, ज्वार, मकई दालों में : सेम, मटर, राजमा, चना, तुअर, मूँग (अल्प वायुकारक), मोठ, मसूर । सब्जियों में : अरवी, ग्वारफली, सरसों, चौलाई, पालक, पकी मूली, पत्तागोभी, लौकी, ककड़ी, टिंडा फलों में : नाशपाती, जामुन, सिंघाड़ा, कच्चा आम, मूँगफली । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang English mai 10/09/2024 ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Anuradha till 08:04 pm and then Jyestha ⛅Yoga – Vishkambh till 12:31 pm on September 11 and then Preeti ⛅Rahu Kaal – 03:42 pm to 05:15 pm ⛅Sunrise – 06:25 ⛅Sunset – 06:48 ⛅Disha Shool – North direction In⛅Brahma Muhurta – from 04:52 to 05:38 in the morning⛅Abhijit Muhurta – from 12:12 in the afternoon to 01:01 in the afternoon⛅Nishita Muhurta – from 12:13 in the night of September 11 to 01:00 in the night of September 11⛅Vrat festival details – Lalita Saptami, Jayeshtha Gauri Aawahan⛅Special – Eating palm fruit on Saptami increases diseases and destroys the body. (Brahma Vaivart Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 🔹Consume food according to your nature🔹 🔸The defect in human nature When the disease is dominant, the possibility of diseases caused by its outbreak is high. To protect from these, Maharishi Charak, Acharya of Ayurveda says: Viparita Gunastesham Swasthavrittervidhirhitah. 🔸Consumption of qualities contrary to nature is beneficial for health. (Ch. Sam., Sutrasthan 7.41) Therefore, one should decide one’s nature and consume food and lifestyle according to it. 🔸In order to get the benefits of all food substances, the substance should be taken in a healthy manner. It is beneficial to consume the substances that increase the doshas by combining them appropriately. For example, if spinach increases the air, then dill which reduces air is added to it. Use of substances like ginger, garlic, black pepper, asafoetida etc. is used in pulses and vegetables and oil. The Vayu-increasing properties of grains like barley, corn etc. are mitigated by ghee, salt. 🔹How to keep Vayu balanced through diet?🔹 🔸Agitated Vayu destroys strength, complexion and age. There is instability in the mind, weakness, It creates fear and grief. 🔸 80 types of diseases are caused by the outbreak of Vata alone. There are innumerable diseases that arise due to the combination of aggravated air with bile and phlegm. Since air is very strong and quick acting, the diseases that arise from it are also strong and quick to kill. Therefore, to keep the air under control, it is necessary to take necessary precautions. Air-enhancing and air-reducing substances should be used judiciously in the diet. 🔹Fatal sedative🔹 Cereals: Sathi rice, wheat, millet, sesame Pulses: Kulthi, Urad Vegetables: Bathua, Punarnava (Satodhi), Parwal, Tender Radish, Tender (seedless) Brinjal, Ripe Ashgourd, Drumstick Beans, ladyfinger, yam, carrot, turnip, mint, green coriander, onion, garlic, ginger Fruits: dry fruits, pomegranate, amla, bael, mango, orange, plum, guava, banana, grapes, sweet lime, coconut, custard apple, Papaya, mulberry, litchi, jackfruit (ripe), phalsa, muskmelon, watermelon Spices: dry ginger, carom seeds, fennel seeds, asafoetida, black pepper, pipramul, cumin seeds, fenugreek seeds, cinnamon, nutmeg, cloves, cardamom. 🔹Other air-inhibiting substances🔹 🔸Saffron, rock salt, black salt,

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 09/09/2024

Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 9 सितम्बर 2024⛅दिन – सोमवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – षष्ठी रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात सप्तमी⛅नक्षत्र – विशाखा शाम 06:04 तक तत्पश्चात अनुराधा⛅योग – वैधृति रात्रि 12:33 सितम्बर 10 तक तत्पश्चात विष्कम्भ⛅राहु काल – प्रातः 07:57 से प्रातः 09:31 तक⛅सूर्योदय – 06:24⛅सूर्यास्त – 06:49 ⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक⛅ अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से दोपहर 01:01 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:14 सितम्बर 10 से रात्रि 01:00 सितम्बर 10 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – स्कन्द षष्ठी, सर्वार्थ सिद्धि योग (शाम 06:04 से प्रातः 06:25 सितम्बर 10 तक)⛅विशेष – षष्ठी को नीम-भक्षण (पत्ती फल खाने या दातुन मुंह में डालने) से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹ब्रह्मचर्य : शरीर का तीसरा उपस्तंभ🔹 🔸शरीर, मन, बुद्धि व इन्द्रियो को आहार से पुष्टि, निद्रा, मन, बुद्धि व इऩ्द्रियों को आहार से पुष्टि, निद्रा से विश्रांति व ब्रह्मचर्य से बल की प्राप्ति होती है । ब्रह्मचर्य परं बलम् । ब्रह्मचर्य का अर्थः Aaj Ka Panchang 🔸‘सर्व अवस्थाओं में मन, वचन और कर्म तीनों से मैथुन का सदैव त्याग हो, उसे ब्रह्मचर्य कहते हैं ।’ (याज्ञवल्क्य संहिता) 👉 ब्रह्मचर्य से शरीर को धारण करने वाली सप्तम धातु शुक्र की रक्षा करती है । शुक्र सम्पन्न व्यक्ति स्वस्थ, बलवान, बुद्धिमान व दीर्घायुषी होते हैं । 👉 ब्रह्मचर्य से व्यक्ति कुशाग्र व निर्मल बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति, दृढ़ निश्चय, धैर्य, समझ व सद्विचारों से सम्पन्न तथा आनंदवान होते हैं । 👉 वृद्धावस्था तक उनकी सभी इन्द्रियाँ, दाँत, केश व दृष्टि सुदृढ़ रहती है । रोग सहसा उनके पास नहीं आते । क्वचित् आ भी जायें तो अल्प उपचारों से शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं । 🌹 भगवान धन्वंतरि ने ब्रह्मचर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा हैः 🔸‘अकाल मृत्यु, अकाल वृद्धत्व, दुःख, रोग आदि का नाश करने के सभी उपायों में ब्रह्मचर्य का पालन सर्वश्रेष्ठ उपाय है । यह अमृत के समान सभी सुखों का मूल है यह मैं सत्य कहता हूँ ।’ 🔸जैसे दही में समाविष्ट मक्खन का अंश मंथन प्रक्रिया से दही से अलग हो जाता है, वैसे ही शरीर के प्रत्येक कण में समाहित सप्त धातुओं का सारस्वरूप परमोत्कृष्ट ओज मैथुन प्रक्रिया से शरीर से अलग हो जाता है । ओजक्षय से व्यक्ति असार, दुर्बल, रोगग्रस्त, दुःखी, भयभीत, क्रोधी व चिंतित होता है । Aaj Ka Panchang 🔹शुक्रक्षय के लक्षण (चरक संहिता)🔹 🔸शुक्र के क्षय होने पर व्यक्ति में दुर्बलता, मुख का सूखना, शरीर में पीलापन, शरीर व इन्द्रियों में शिथिलता (अकार्यक्षमता), अल्प श्रम से थकावट व नपुंसकता ये लक्षण उत्पन्न होते हैं । 🔹अति मैथुन से होने वाली व्याधियाँ🔹 🔸ज्वर (बुखार), श्वास, खाँसी, क्षयरोग, पाण्डू, दुर्बलता, उदरशूल व आक्षेपक (Convulsions- मस्तिष्क के असंतुलन से आनेवाली खेंच) आदि । 🔸 ब्रह्मचर्य रक्षा के उपाय 🔸 Aaj Ka Panchang 🔹 ब्रह्मचर्य-पालन का दृढ़ शुभसंकल्प, पवित्र, सादा रहन-सहन, सात्त्विक, ताजा अल्पाहार, शुद्ध वायु-सेवन, सूर्यस्नान, व्रत-उपवास, योगासन, प्राणायाम, ॐकार का दीर्घ उच्चारण, ‘ॐ अर्यामायै नमः’ मंत्र का पावन जप, शास्त्राध्ययन, सतत श्रेष्ठ कार्यों में रत रहना, सयंमी व सदाचारी व्यक्तियों का संग, रात को जल्दी सोकर ब्राह्ममुहूर्त में उठना, प्रातः शीतल जल से स्नान, प्रातः-सांय शीतल जल से जननेन्द्रिय-स्नान, कौपीन धारण, निर्व्यसनता, कुदृश्य-कुश्रवण-कुसंगति का त्याग, पुरुषों के लिए परस्त्री के प्रति मातृभाव, स्त्रियों के लिए परपुरुष के प्रति पितृ या भ्रातृ भाव – इन उपायों से ब्रह्मचर्य की रक्षा होती है । Aaj Ka Panchang 🔸 स्त्रियों के लिए परपुरुष के साथ एकांत में बैठना, गुप्त वार्तालाप करना, स्वच्छंदता से घूमना, भड़कीले वस्त्र पहनना, कामोद्दीपक श्रृंगार करके घूमना – ये ब्रह्मचर्य पालन में बाधक हैं । जितना धर्ममय, परोपकार-परायण व साधनामय जीवन, उतनी ही देहासक्ति क्षीण होने से ब्रह्मचर्य का पालन सहज-स्वाभाविक रूप से हो जाता है । नैष्ठिक ब्रह्मचर्य आत्मानुभूति में परम आवश्यक है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang (English Mai) 9/09/2024 ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Vishakha till 06:04 pm and then Anuradha ⛅Yoga – Vaidhriti till 12:33 pm on September 10 and then Vishkambh ⛅Rahu Kaal – 07:57 am to 09:31 am ⛅Sunrise – 06:24 ⛅Sunset – 06:49 ⛅Disha Shool – East direction In⛅Brahma Muhurta – from 04:52 to 05:38 in the morning ⛅ Abhijeet Muhurta – from 12:12 in the afternoon to 01:01 in the afternoon⛅ Nishita Muhurta – from 12:14 in the night of September 10 to 01:00 in the night of September 10⛅ Vrat festival details – Skanda Shashthi, Sarvartha Siddhi Yoga (from 06:04 PM to 06:25 AM on September 10)⛅Special – By consuming neem (eating leaves and fruits or putting toothpicks in mouth) on Shashthi, one gets lower births. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 🔹Celibacy: The third pillar of the body🔹 🔸The body, mind, intellect and senses are strengthened by food, sleep, the mind, intellect and senses are strengthened by food, rest by sleep and strength by celibacy. Is achieved. Celibacy is the ultimate blessing. Meaning of celibacy: 🔸 ‘Always giving up sexual intercourse through mind, words and actions in all situations is called celibacy.’ (Yagyavalkya Samhita) 👉 Venus, the seventh metal that sustains the body, protects from celibacy. People blessed with Venus are healthy, strong, intelligent and long lived. 👉 Brahmacharya makes a person sharp and clear intellect, has a sharp memory, strong determination, patience, understanding and good thoughts and is happy. 👉 All their senses, teeth, hair and eyesight remain strong till old age. Diseases do not come to them suddenly. Even if they get infected, they get cured soon with simple treatment. 🌹 Lord Dhanvantri has described the glory of celibacy and said: 🔸’Of all the measures to destroy premature death, premature old age, sorrow, disease etc., following celibacy is the best. This is the best solution. It is like nectar and is the root of all happiness. I say this truthfully.’ 🔸Just as the butter present in curd gets separated from curd by churning, similarly the essence of the seven metals is present in every particle of the body. The supreme Ojas gets separated from the body through the process

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 07/09/2024

Aaj Ka Panchang… Aaj Ka Panchang🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 7 सितम्बर 2024⛅दिन – शनिवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – चतुर्थी शाम 05:37 तक तत्पश्चात पंचमी⛅नक्षत्र – चित्रा दोपहर 12:34 तक तत्पश्चात स्वाति⛅योग – ब्रह्म रात्रि 11:17 तक तत्पश्चात इंद्र⛅राहु काल – प्रातः 09:31 से प्रातः 11:04 तक⛅सूर्योदय – 06:27⛅सूर्यास्त – 06:49 ⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक⛅ अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से 01:02 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:14 सितम्बर 08 से रात्रि 01:01 सितम्बर 08 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – गणेश चतुर्थी (चंद्र दर्शन निषिद्ध, चन्द्रास्त – रात्रि 09.27), गणेश महोत्सव प्रारम्भ, सर्वार्थ सिद्धि योग (दोपहर 12:24 से प्रातः 06:24 सितम्बर 08 तक)⛅विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन-नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 🔹अपने हाथ में ही अपना आरोग्य🔹 Aaj Ka Panchang 🔸१) सभी अंगों में पुष्टिदायक तेल की मालिश अवश्य करानी चाहिए सिर में कान में और पैरों में तो विशेष रूप से करानी चाहिए । कराने से वायु तथा कफ मिटता है, थकान मिटती है, शक्ति तथा सुख की प्राप्ति होती है, नींद अच्छी आती है, शरीर का वर्ण सुधरता है, शरीर में कोमलता आती है, आयुष्य की वृद्धि होती है तथा देह की पुष्टि होती है । 🔸(२) सिर में मालिश किया हुआ तेल सभी इन्द्रियों को तृप्त करता है, दृष्टि को बल देता है, सिर के दर्दों को मिटाता है। बाल में तेल पहुँचने से बाल घने, लम्बे तथा मुलायम होते हैं । लंबे समय तक टिकते हैं और बाल काले बने रहते हैं तथा सिर को भी भरा हुआ रखता है । 🔸(३) नित्य कान में तेल डालने से कान में रोग या मैल नहीं होता । गले के बाजू की नाड़ी तथा दाढ़ी अकड नहीं जाती । बहुत ऊँचे से सुनना या बहरापन नहीं होता । कान में रस आदि पदार्थ डालने हों तो भोजन से पहले डालना हितकर है । 🔸(४) पैरों पर तेल मसलने से पाँव मजबूत होते हैं। नींद अच्छी आती है, आँख स्वच्छ रहती है तथा पैर झूठे नहीं पड़ जाते, श्रम से अकड़ नहीं जाते, संकोच प्राप्त नहीं करते तथा फटते भी नहीं । जिस तरह गरुड़ के पास साँप नहीं जाते उसी तरह कसरत के अभ्यासी और तेल की मालिश करानेवाले के पास रोग नहीं जाते । नहाते समय तेल का उपयोग किया हो तो वह तेल रोंगटों के छिद्रों, शिराओं के समूह तथा धमनियों के द्वारा सम्पूर्ण शरीर को तृप्त करता है तथा बल प्रदान करता है । 🔸(५) जिस तरह मूल में सिंचित वृक्षों के पत्ते आदि वृद्धि प्राप्त करते हैं उसी तरह अंगों पर तेल मलवानेवाले मानवों की तेल से सिंचित धातुएँ पुष्टि प्राप्त करती हैं । 🔸(६) बुखार से पीड़ित, कब्जियतवाले, जिसने जुलाब लिया हो, जिसे उल्टी हुई हो, उसे कभी भी तेल की मालिश नहीं करनी चाहिये । 🔸(७) मुँह पर तेल मलने से आँखें मजबूत होती हैं, गाल पुष्ट होते हैं, फोड़े तथा फुन्सियाँ नहीं होती और मुँह कमल के समान सुशोभित होता है । 🔸(८) जो मनुष्य प्रतिदिन आँवले से स्नान करता है उसके बाल जल्दी सफेद नहीं होते और वह सौ वर्ष तक जीवित रहता है । 🔸(९) दर्पण में देहदर्शन करना यह मंगलरूप है, कांतिकारक है, पुष्टिदाता है, बल तथा आयुष्य को बढ़ाने वाला है और पाप तथा अलक्ष्मी का नाश करनेवाला । 🔸(१०) जो मनुष्य सोते समय बिजोरे के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ चाटता है वह सुखपूर्वक सो सकता है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang English Me (आज का पंचांग) 07/09/2024 ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Chitra till 12:34 pm, then Swati ⛅Yoga – Brahma till 11:17 pm, then Indra ⛅Rahu Kaal – 09:31 am to 11:04 am ⛅Sunrise – 06:27 ⛅Sunset – 06:49 ⛅Disha Shool – in the east direction ⛅Brahmamuhurta – morning 04:52 to 05:38⛅ Abhijeet Muhurta – 12:12 to 01:02 in the afternoon⛅ Nishita Muhurta – 12:14 in the night of September 08 to 01:01 in the night of September 08⛅ Vrat festival details – Ganesh Chaturthi (Moon sighting prohibited , Moonset – 09.27 p.m.), Ganesh Mahotsav begins, Sarvartha Siddhi Yoga (from 12:24 p.m. to 06:24 a.m. Sept. 08)⛅Special – Eating radish on Chaturthi leads to loss of wealth. (Brahmavaivart Puran, Brahma Khand: 27.29- 34) Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 🔹Your health is in your own hands🔹 🔸1) Massage of nourishing oil should be done in all the body parts, especially in the head, ears and feet. By doing this, gas and phlegm are removed, tiredness is removed, strength and happiness are attained, sleep is good, complexion of the body improves, body becomes soft, lifespan increases and the body is strengthened. 🔸 (2) Oil massaged on the head satisfies all the senses, strengthens the eyesight, removes headaches. When oil reaches the hair, the hair becomes thick, long and soft. It lasts for a long time and the hair becomes shiny. They remain black and also keep the head full. 🔸(3) By putting oil in the ears regularly, there is no disease or dirt in the ears. The nerves on the side of the neck and the beard do not become stiff. There is no difficulty in hearing from very loud noises or deafness. If you want to put juice or other things in your ears, it is better to put them before eating. 🔸(4) Rubbing oil on your feet strengthens them. Sleep is good, eyes remain clean and feet do not lie down, do not become stiff due to exertion, do not become stiff and do not tear. Just as snakes do not go near Garuda, similarly snakes do not go near a person who practices exercise and gets oil massage. Diseases do not come near you. If oil is used while bathing, then that oil satisfies the entire body through the pores of the goosebumps, the veins and the arteries and provides strength. 🔸(5) Just as the leaves of a tree irrigated from the roots Just as the body parts of a person who has

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Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2024: रक्षा बंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार है, जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी रक्षा का वचन लेती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। यह त्योहार भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और बंधन को मजबूत करता है। राखी बांधने के साथ ही मिठाईयां बांटी जाती हैं और घर में उत्सव का माहौल होता है। रक्षा बंधन सिर्फ एक त्योहार मात्र नहीं है, ये भाइयों और बहनों के बीच के संबंध को मजबूत करने का एक बहुत खूबसूरत जरिया भी है। रक्षाबंधन से जुड़ी एक खास बात बहुत कम लोगों को मालूम होता है कि भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। शास्त्र और मुहूर्त शास्त्र में भद्रा काल को अशुभ माना गया है। ऐसे में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त जानना बहुत जरूरी होता है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि इस साल श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन किस दिन पड़ रहा है। साथ ही ये भी जानेंगे कि भद्राकाल कब समाप्त हो रहा है और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है? रक्षाबंधन तिथिहिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा। और सरल करके लिखें तो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 19 अगस्त 2024 को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 19 अगस्त को प्रातः 03:04  शुरू होगा और इसका समापन 19 अगस्त को मध्य रात्रि 11:55 पर समाप्त होगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्तहिंदू पंचांग के अनुसार राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:30 से रात्रि 09:07 तक रहेगा। कुल मिलाकर शुभ मुहूर्त 07 घंटे 37 मिनट का होगा। भद्राकालभद्राकाल – पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ के साथ भद्रा की शुरुआतभद्राकाल की समाप्ति – 19 अगस्त 2024 को दोपहर 1:30 पर भद्रा मुख – 19 अगस्त को प्रातः 10:53 से दोपहर 12:37 तकभद्रा पूंछ – 19 अगस्त को प्रातः 09:51 से प्रातः 10:53 तक भद्राकाल में नहीं बांधी जाती है राखीभद्राकाल को शुभ नहीं माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, जिसमें राखी बांधना भी शामिल है। राखी बांधना एक पवित्र कार्य है और इसे शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। भद्राकाल में राखी बांधने से भाई-बहन के रिश्ते में तनाव आ सकता है और मनोकामनाएं पूरी नहीं हो सकती हैं। इसलिए, रक्षा बंधन का त्योहार मनाते समय भद्राकाल का ध्यान रखना चाहिए और राखी केवल शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए। कौन है भद्रा?पौराणिक कथाओं के अनुसार भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं। भद्रा का स्वभाव क्रोधी है। जब भद्रा का जन्म हुआ तो वह जन्म लेने के फौरन बाद ही पूरे सृष्टि को अपना निवाला बनाने लगी थीं। इस तरह से भद्रा के कारण जहां भी शुभ और मांगलिक कार्य, यज्ञ और अनुष्ठान होते वहां समस्याएं आने लगती हैं। इस कारण से जब भद्रा लगती है तब किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत आधा हिस्सा भद्रा काल होता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया होने के कारण राखी नहीं बांधी जाती है। हिमाचल में यहां स्‍वयंभू प्रकट शिवलिंग में विराजे हैं बाबा भूतनाथ ज्योतिष में भद्रा काल का महत्वज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की राशि से भद्रा का वास तय किया जाता है। गणना के मुताबिक चंद्रमा जब कुंभ राशि, कर्क राशि, सिंह राशि या मीन राशि में होता है, तब भद्रा पृथ्वी में निवास करके मनुष्यों को क्षति पहुंचाती है। वहीं मिथुन राशि, मेष राशि, वृषभ राशि और वृश्चिक राशि में जब चंद्रमा रहता है तब भद्रा स्वर्गलोक में रहती है एवं देवताओं के कार्यों में विघ्न डालती है। जब चंद्रमा धनु राशि, कन्या राशि, तुला राशि या मकर राशि में होता है तो भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है। भद्रा जिस भी लोक में रहती है वहीं प्रभावी रहती है। रक्षाबंधन 2024 (तिथि, भद्रा काल और शुभ मुहूर्त) श्रावण पूर्णिमा तिथि आरंभ- 19 अगस्त 2024 को सुबह 03:04श्रावण पूर्णिमा तिथि समापन- 19 अगस्त 2024 को मध्य रात्रि 11:55 राखी बांधने का शुभ मुहूर्त आरंभ – दोपहर 01:30 के बादराखी बांधने का शुभ मुहूर्त  समापन- रात्रि 09:07 तक भद्राकाल – पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ के साथ भद्रा की शुरुआतभद्राकाल की समाप्ति – 19 अगस्त 2024 को दोपहर 1:30 पर भद्रा मुख – 19 अगस्त को प्रातः 10:53 से दोपहर 12:37 तकभद्रा पूंछ – 19 अगस्त को प्रातः 09:51 से प्रातः 10:53 तक

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क्या आपकी कुंडली में चन्द्रमा ख़राब है Is the MOON bad in your horoscope?

चंद्रमा कुंडली में चंद्रमा का “खराब” होना ज्योतिष शास्त्र में एक जटिल अवधारणा है। इसका अर्थ अलग-अलग लोगों के लिए भिन्न हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्रमा किस राशि, भाव और नक्षत्र में स्थित है, साथ ही साथ यह किन अन्य ग्रहों से प्रभावित है। यह कहना गलत होगा कि कुंडली में चंद्रमा का खराब होना हमेशा नकारात्मक परिणाम देता है। चंद्रमा की स्थिति के आधार पर, इसके कुछ सकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। यह जानने का सबसे अच्छा तरीका है कि आपके लिए चंद्रमा की स्थिति का क्या अर्थ है, यह है कि आप किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें। वे आपकी कुंडली का पूरा विश्लेषण कर सकते हैं और आपको बता सकते हैं कि चंद्रमा आपके जीवन को कैसे प्रभावित करता है और यदि कोई नकारात्मक प्रभाव है तो उसे कैसे कम किया जा सकता है। यहां कुछ सामान्य संकेत दिए गए हैं जो बताते हैं कि कुंडली में चंद्रमा “कमजोर” या “अशुभ” हो सकता है: यदि इनमें से कोई भी स्थिति आपकी कुंडली में मौजूद है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप निश्चित रूप से नकारात्मक परिणामों का अनुभव करेंगे। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ज्योतिष एक जटिल विज्ञान है और कई कारक किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति केवल एक कारक है। यदि आप अपनी कुंडली में चंद्रमा के बारे में चिंतित हैं, तो किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना और उनके द्वारा बताए गए उपायों का पालन करना सबसे अच्छा है। यहां कुछ उपाय दिए गए हैं जो ज्योतिषियों द्वारा चंद्रमा को मजबूत करने के लिए सुझाए जाते हैं: जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने वाले मन्त्र : KARMASU यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये केवल सामान्य उपाय हैं और किसी भी विशिष्ट व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं। ज्योतिषी से परामर्श करना और उनके द्वारा बताए गए व्यक्तिगत उपायों का पालन करना हमेशा सबसे अच्छा होता है।

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जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने वाले मन्त्र : KARMASU

जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने वाले मन्त्र यह सच है कि जीवन में आर्थिक संकट एक बड़ी बाधा बन सकते हैं। इन संकटों से निपटने और जीवन में तरक्की प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक शक्ति का सहारा लेना अनेक लोगों को लाभदायक लगता है। कुछ मन्त्रों का उच्चारण और कुछ धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सहायता करता है। यहाँ कुछ मन्त्र और धार्मिक उपाय दिए गए हैं जो जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने में सहायक हो सकते हैं: 1. कुबेर मन्त्र: यह मन्त्र भगवान कुबेर, जो धन और समृद्धि के देवता हैं, को समर्पित है। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥ 2. लक्ष्मी मन्त्र: यह मन्त्र देवी लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी हैं, को समर्पित है। ॐ श्रीं महालक्ष्मिये नमः॥ 3. मां गायत्री मन्त्र: यह मन्त्र देवी गायत्री, जो ज्ञान और शक्ति की देवी हैं, को समर्पित है। ॐ महागायत्री देविये नमः॥ 4. गणेश मन्त्र: यह मन्त्र भगवान गणेश, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं, को समर्पित है। ॐ गं गणपतये नमः॥ 5. शिव मन्त्र: यह मन्त्र भगवान शिव, जो विनाश और पुनर्निर्माण के देवता हैं, को समर्पित है। ॐ नमः शिवाय॥ धार्मिक उपाय: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केवल मन्त्रों का जाप या धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है। जीवन में सफलता प्राप्त करने और आर्थिक संकटों से उबरने के लिए कठोर परिश्रम और दृढ़ संकल्प भी आवश्यक है। इन मन्त्रों और धार्मिक उपायों के साथ-साथ, यदि आप कड़ी मेहनत करते हैं और अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ठोस योजना बनाते हैं, तो निश्चित रूप से आपको सफलता मिलेगी। Mantras for Financial Success and Overall Prosperity in Life Financial difficulties can be a major hurdle in life. Many people find solace and strength in spiritual practices to overcome these challenges and achieve progress. Chanting certain mantras and following religious rituals can bring peace of mind and positive energy, aiding you in facing tough situations. Here are some mantras and practices that can help you overcome financial struggles and achieve success in life: 1. Kubera Mantra: Dedicated to Lord Kubera, the God of wealth and prosperity. Om Shrim Hrim Kleem Shrim Kleem Vitteshwaraya Namah॥ 2. Lakshmi Mantra: Dedicated to Goddess Lakshmi, the embodiment of wealth and abundance. Om Shrim Mahalakshmiye Namah॥ 3. Gayatri Mantra: Dedicated to Goddess Gayatri, the source of knowledge and power. Om Maha Gayatri Deviye Namah॥ 4. Ganesha Mantra: Dedicated to Lord Ganesha, the remover of obstacles and the God of wisdom. Om Gam Ganapataye Namah॥ 5. Shiva Mantra: Dedicated to Lord Shiva, the God of both destruction and renewal. Om Namah Shivaya॥ Additional Practices: It’s important to remember that simply chanting mantras or performing rituals isn’t enough. Achieving success in life and overcoming financial struggles also requires hard work and unwavering determination. By combining these mantras and practices with dedicated effort and a well-defined plan to improve your financial situation, you are sure to find success.

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सपने में आग देखने का मतलब | SAPNE MEIN AAG DEKHNA

स्वप्न शास्त्र में, सपने में आग देखने का मतलब शुभ और अशुभ दोनों हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कैसा सपना देखा है। यहां कुछ उदाहरण हैं: यह ध्यान रखना जरूरी है कि स्वप्न शास्त्र में सपनों का फल बताने के लिए कई सारी बातों का ध्यान रखा जाता है। इनमें से कुछ हैं, आपने सपना किस दिन देखा है, आपकी जातक क्या है, इत्यादि। इसलिए स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने का सही अर्थ जानने के लिए किसी जानकार ज्योतिषी से सलाह लेना अच्छा होता है। स्वप्न शास्त्र: सपनों का रहस्य और उनका अर्थ स्वप्न शास्त्र हजारों साल पुराना एक विद्या है जो सपनों का अध्ययन करके उनका अर्थ बताता है। यह माना जाता है कि सपने हमारे अवचेतन मन से संकेत देते हैं जो हमारे जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं। स्वप्न शास्त्र में सपनों को दो भागों में बांटा गया है: स्वप्न शास्त्र में सपनों का अर्थ जानने के लिए कई बातों का ध्यान रखा जाता है: यह ध्यान रखना जरूरी है कि स्वप्न शास्त्र में बताए गए सपनों के अर्थ हमेशा सटीक नहीं होते हैं। सपनों का अर्थ व्यक्ति की मानसिक स्थिति, उसके जीवन के अनुभवों और उसकी सोच पर भी निर्भर करता है। इसलिए यदि आपको कोई अशुभ सपना आता है तो घबराने की बजाय उससे सीख लेना चाहिए और सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।

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Chhath Puja 2023: कब है छठ पूजा, जानें चैती छठ से जुड़ी ये 5 जरूरी बातें, बस इतने दिन हैं बाकी

Chhath Puja 2023 Date In Hindi: हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है छठ पूजा. पंचांग के अनुसार यह महापर्व 19 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा. Chhath Puja 2023 Date: छठ (chhath puja) महापर्व उत्तर भारत के सबसे बड़े पर्व में से एक है, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तक चलता है. यह पर्व सूर्य भगवान और षष्ठी माता को समर्पित है. ये कहना गलत नहीं होगा कि यह पर्व सबसे कठिन त्योहारों में से एक है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें व्रत करने वाले भक्तों को 36 घंटो तक निर्जला व्रत करना पड़ता है यानी इस दौरान वे पानी तक नहीं पीते. इस व्रत के नियम- कानून बहुत (chhath puja niyam) कड़े माने जाते हैं इसलिए यह सबसे कठिन व्रत में गिना जाता है. अगर आपके घर में भी छठ पर्व मनाया जाता है तो आपको इन जरूरी बातों को जरूर जान लेना चाहिए.  Chhath Puja 2023: नवंबर में छठ पूजा कब है? जानें नहाए खाय, खरना की डेट व अर्घ्य टाइमिंग छठ पूजा 2023 कैलेंडर (Chhath Puja 2023 Calendar) छठ पूजा की शुरुआत 17 नवंबर, शुक्रवार से हो रही है इस दिन नहाय खाय किया जाता है. 18 नवंबर, शनिवार को खरना किया जाएगा, वहीं 19 नवंबर, रविवार को छठ पूजा की पहली अर्घ्य यानी संध्या अर्घ्य दी जाएगी और 20 नवंबर, सोमवार को छठ पूजा की दूसरी और आखिरी अर्घ्य यानी उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. छठ पूजा की 5 जरुरी बातें | Chhath Puja 5 Important Things निर्जला व्रत – छठ पर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है. यह पर्व चार दिनों तक चलता है और खरना के भोजन ग्रहण करने के बाद इसकी शुरुआत होती है. किन देवता देवी देवताओं की होती है पूजा – छठ पूजा में सूर्य देव, उनकी बहन छठी मैया, उनकी पत्नी उषा, प्रत्युषा की पूजा करने की परंपरा है.  छठी मैया कौन हैं – छठी मैया ब्रह्मा जी की पुत्री है. इन्हें षष्ठी माता भी कहा जाता है, जो संतानों की रक्षा करने वाली देवी मानी जाती है. डूबते सूर्य को अर्घ क्यों दिया जाता है –  छठ में डूबते और उसके बाद उगते सूरज को अर्घ्य देने का यह मतलब होता है कि जो डूबा है उसका उदय होना भी निश्चित है. यानी अगर अभी परिस्थितियां खराब है तो वह अच्छी भी होगी बस सयंम रखने की जरूरत है. छठ पूजा में व्रत पारण की विधि – ऐसी मान्यता है कि छठ पूजा का में चढ़ाए गए प्रसाद से ही अपने व्रत को खोलना चाहिए. उसके बाद कच्चा दूध पीने की सलाह दी जाती है.

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Dev Deepawali 2023: देव दीपावली को लेकर लोगों के बीच भम्र की स्थिति, जानें तारीख, दीपदान का महत्व

Dev Deepawali 2023: देव दीपावली पर तिथि भेद का यह पहला मामला नहीं है. इसके पहले रक्षाबंधन और होली पर भी तिथिभेद के कारण संशय की स्थिति बन चुकी है. गंगा के घाटों पर शाम की आरती करने वाली समितियों ने बैठक करके 27 नवंबर को देव दीपावली मनाने का फैसला किया. साथ ही काशी विद्वत परिषद के निर्णय को खारिज कर दिया. Dev Deepawali 2023: वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध देव दीपावली में शामिल होने के लिए न केवल काशी बल्कि देश दुनिया के कोने-कोने से आस्थावान और सैलानी पहुंचते हैं. लेकिन, इस बार देव दीपावली की तिथि ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. एक तरफ काशी विद्वत परिषद तो दूसरी तरफ केंद्रीय उद्योग दीपावली महासमिति सहित गंगा आरती कराने वाली तमाम समितियां हो गई हैं. काशी विद्वत परिषद ने देव दीपावली की तिथि का ऐलान 26 नवंबर को किया है और इसे ही शास्त्रोक्त विधि से मनाने की नसीहत भी दी है. दूसरी ओर काशी के गंगा घाटों पर देव दीपावली कराने की जिम्मेदारी उठाने वाली तमाम गंगा आरती की समितियां और केंद्रीय देव दीपावली महासमिति ने बैठक करके 27 नवंबर को देव दीपावली मनाने की घोषणा की है और बताया है कि उदया तिथि के अनुसार ही 27 नवंबर को देव दीपावली मनाई जाएगी. कब मनाई जाएगी देव दीपावली 26 नवंबर या 27 नवंबर?  हिंदू तीज-त्योहारों को लेकर अक्सर तिथियों का मतभेद बड़ा सिरदर्द बन जाता है. लेकिन इस बार इससे भी एक कदम आगे जाकर काशी की विश्व प्रसिद्ध देव दीपावली मनाने को लेकर काशी विद्वत परिषद् के सामने गंगा आरती कराने वाली समितियों के सहित केंद्रीय देव दीपावली महासिमिति आ गई है. परिषद् के मुताबिक 26 नवंबर को देव दीपावली मनाया जाना चाहिए. वहीं समितियों के मुताबिक, बैठक करके यह फैसला ले लिया गया है कि वे 27 नवंबर को ही उदयातिथि के अनुसार देव दीपावली का पर्व मनाएंगे. काशी विद्वत परिषद्’ की ओर से एक पत्र जारी करते हुए बताया गया है कि स्वयं ब्रह्मा जी ने सृष्टि के अंतर वेदांग स्वरूप में काल गणना हेतु ज्योतिष शास्त्र एवं उस गणना के आधार पर शुभ काल के निदर्शन हेतु धर्मशास्त्र की रचना की. जिसके समन्वय से उपयुक्त काल का विवेचन किया जा सके. इसमें शास्त्र का आधार ही प्रमाण होता है अपनी तार्किक बुद्धि नहीं. परंतु वर्तमान समय में लोग शास्त्र और तार्किक शक्तियों के द्वारा अपनी सुविधा की दृष्टि से शुभ काल की व्याख्या करते हुए व्रत पर्व उत्सव आदि मनाने का निर्देश देने लगे हैं. जैसे उदया तिथि मान्य होगी, अस्तकालिक तिथि मान्य होगी, मध्यान्ह काल की तिथि मान्य होगी आदि. परंतु कार्य एवं व्रतादि के भेद से आचार्यों ने इन तिथियों को उदय, अस्त, मध्यरात्रि तथा मध्यदिन कालिक इत्यादि का अलग विवेचन किया है, जैसे- कृष्ण जन्माष्टमी में अर्धरात्रि कालिक, दीपावली में प्रदोष कालिक आदि.  अतः हमें ऋषि और धर्मशास्त्रों के वचनों का अवलोकन करते हुए प्रमाण वचनों का आश्रय लेकर के ही किसी व्रत पर्व आदि का आयोजन करना चाहिए. अन्यथा उसके विपरीत परिणाम भी दृष्टिगत होने लगते हैं. इस संदर्भ में हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि कभी-कभी एक ही तिथि में अनेक व्रत पर्व भी वर्णित होते हैं जो की काल भेद से कुछ मध्यान्ह व्यापिनी कुछ प्रदोष व्यापिनी तो कुछ उदयातिथी में मनाए जाते हैं. इसी तरह से कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को भी अनेक व्रत पर्व उत्सवों का वर्णन आचार्य ने किया है जैसे स्नान दान की पूर्णिमा, दक्षसावर्णि मान्वादि (कुतुपाद्यघटी व्यापिनी), महाकार्तिकी (भूतविद्धा), धात्री पूजा (परविद्धा), व्रत की पूर्णिमा, केश बंधन गौरी व्रत (परविद्धा), वृषोत्सर्ग (सायंकाल व्यापिनी), त्रिपुरोत्सव (सायंकाल व्यापिनी), देवदीपावली (सायंकाल व्यापिनी) आदि. इस प्रसंग में कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाने वाली देवदीपावाली अर्थात् त्रिपुरोत्सव अति विशिष्ट है और काशी में इसको बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह त्रिपुरोत्सव भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर के वध के उपलक्ष्य देवताओं द्वारा दीप जलाकर उत्सव मनाने पर्व है. इसके संबंध में धर्म शास्त्र के ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख प्राप्त है. देव दीपावाली मंत्र अत्रैव त्रिपुरोत्सव उक्तो भविष्य- पौर्णमास्यां तु सन्ध्यायां कर्तव्यस्त्रिपुर उत्सवः . दद्यादनेन मत्रेण सुदीपांश्च सुरालये . कीटाः पतङ्गा मशकाश्च वृक्षा जले स्थले ये विचरन्ति जीवाः . दृष्ट्वा प्रदीप नहि जन्मभागिनस्ते मुक्तरूपा हि भवन्ति तत्र .’ इति . अत्र पौर्णमासी संध्याकालव्यापिनी ग्राह्या पूर्वोक्तभविष्यवाक्ये सध्यायामित्युक्तेः . अतः पूर्णिमा की स्थिति एवं सूक्ष्म मान को आधार बनाकर काशी विद्वत परिषद के ज्योतिष प्रकोष्ठ की बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय की अध्यक्षता में सर्वसम्मति ने यह निर्णय लिया गया कि देव दीपावली 26 नवंबर 2023 को ही मनाई जाएगी. विभिन्न शास्त्र प्रमाणों के आधार पर प्रो. विनय कुमार पाण्डेय ने सब के समक्ष उपस्थापित किया जिस पर सर्वसम्मति से सहमति बनी. वहीं काशी विद्वत परिषद् की घोषणा के बाद गंगा आरती कराने वाली समितियों और कन्द्रीय देव दीपावली महासिमिति ने बैठक की. काशी के गंगा घाटों एवं अनेक देव मंदिरों, कुण्डों, तालाबों में मनाए जाने वाले विश्व विख्यात देव दीपावली महोत्सव आयोजन करने के संदर्भ में एक बैठक का आयोजन पंडित किशोरी रमण दूबे (बाबू महाराज) की अध्यक्षता में गंगा सेवा निधि के कार्यालय में किया गया. जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष पंचांग भेद के कारण 26 एवं 27, नवंबर को अलग-अलग दिन पंचांगों में कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली का जिक्र है. लेकिन, देव दीपावली की तिथि को लेकर एक बार पहले काशी नरेश महाराज डॉ विभूति नारायण सिंह जी के समय में एवं गंगा सेवा निधि के संस्थापक स्मृति शेष पंडित सत्येंद्र मिश्रा {मुनन्न महाराज} जी के समय में आई थी. उन दोनों महानुभावों ने विषय विशेष के विद्वानों से परामर्श करने के बाद उदया तिथि की पूर्णिमा जिस दिन पड़ती है, उसी दिन देव दीपावली मनाई गई थी, जिस दिन प्रात: काल स्नान दान की पूर्णिमा है. उसी दिन सायं काल दीपदान की परंपरा घाटों एवं कुंडों – तालाबों पर है जिस वर्ष भी 2 दिन कार्तिक पूर्णिमा पड़ी है उसी दिन उदया तिथि की ही पूर्णिमा वाले दिन ही देव दीपावली महोत्सव के आयोजन की परंपरा सुदृढ़ रही है.  यहां यह भी अवगत कराना जरूरी है कि उदया तिथि में दूर-दूर से काशी में कार्तिक पूर्णिमा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का गंगा स्नान भी प्रातः काल होता है और सायं काल में भगवती मां गंगा का

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October Chandra Grahan 2023: इस ग्रहण से पहले ही बंद हो जाएंगे मंदिर, 12 राशियों में होगी जबरदस्त उथल- पुथल, पढ़ें अपनी राशि का हाल

इस साल अक्टूबर में दो ग्रहण लगने जा रहे हैं। यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण होगा, जो 14 अक्टूबर को लगेगा। इसके बाद 28 और 29 अक्टूबर की रात को चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण का ज्योतिषिय दृष्टि से खास महत्व होचा है। यह विभिन्न राशियों पर प्रभाव तो डालता ही है साथ ही धार्मिक नजरिए से भी खास होते हैं। ग्रहण से पहले सूतक लग जाते हैं, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का सूतक अलग-अलग होता है। सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। सूतक काल शुरू होते ही पूजा पाठ बंद कर दिए जाते हैं। मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। मंदिरों में कोई प्रवेश कर पूजा नहीं कर सकता है। आंध्र प्रदेश का तिरूमाला मंदिर भी ग्रहण के कारण 28 अक्टूबर की शाम को बंद हो जाएगा। शाम 7 बजे के बाद किसी को इसमें दर्शन नहीं करने दिए जाएंगे।  इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 29 अक्टूबर को 01 बजकर 06 रात को शुरू होगा और तड़के 02 बजकर 22 मिनट पर खत्म हो जाएगा। भारत में ग्रहण की अवधि 1 घंटा 16 मिनट की होगी। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा और इसका सूतक काल मान्य होगा। इसलिए एक दिन पहले से सूतक काल लग जाएगा और 28 अक्टूबर को मंदिरों के कपाट शाम 7 बजे से बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद ग्रहण के बाद ही मंदिर खोला जाएगा। कई जगह शाम चंद्र ग्रहण और इसके सूतक 4:05 बजे लग जाएगा, इसलिए इस समय मंदिर में दर्शन करने न जाएं।  यह अगले दिन 29 अक्टूबर को सुबह खोला जाएगा। सूर्य ग्रहण की बात करें तो भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। साल का दूसरा सूर्यग्रहण 14 अक्टूबर 2023 को लगेगा। यह ग्रहण भारतीयसमयानुसार, सूर्यग्रहण रात 08 बजकर 34 मिनट से आरंभ होगा और मध्यरात्रि 02 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। यह भारत में नहीं उत्तरी अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, अर्जेटीना, कोलंबिया, पेरू, क्यूबा, जमैका, हैती, ब्राजील, बहामास, एंटीगुआ, उरुग्वे, उत्तरी अमेरिका, बारबाडोस आदि स्थानों पर नजर आएगा।  Chandra Grahan 2023: कब है साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? जानिए सूतक काल का समय और धार्मिक महत्व 12 राशियों में होगी जबरदस्त उथल- पुथल, पढ़ें अपनी राशि का हाल अक्टूबर माह में 15 दिनों के भीतर सूर्य व चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण की घटना तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है। अक्टूबर माह में 15 दिनों के भीतर सूर्य व चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण की घटना तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, जबकि चंद्र ग्रहण में पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है। 14 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और 28 अक्टूबर को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। आइए जानते हैं, सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने से कैसा रहेगा सभी राशियों का हाल। मेष राशि- वाणी में सौम्यता रहेगी। फिर भी संयत रहें। क्रोध व आवेश के अतिरेक से बचें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है। बाधा का सामना करना पड़ सकता है। वृष राशि- मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। जीवन साथी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। नौकरी में परिवर्तन की संभावना बन रही हैं। किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। मिथुन राशि- मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी बहुत रहेगा। नौकरी में तरक्की के मौके मिलेंगे। परंतु कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। परिश्रम अधिक रहेगा। कर्क राशि- मन परेशान रहेगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। जीवन साथी का साथ मिलेगा। किसी मित्र के सहयोग से आय में वृद्धि हो सकती है। सचेत रहें। सिंह राशि- मन अशांत रहेगा। मानसिक तनाव से बचें। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। परिवार के साथ यात्रा पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। आय में वृद्धि होगी। कन्या राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार के लिए विदेश जा सकते हैं। तुला राशि- मन परेशान रहेगा। शैक्षिक कार्यों में बाधा आ सकती हैं। सचेत रहें। कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। पिता से धन की प्राप्ति हो सकती है। वृश्चिक राशि- मन परेशान रहेगा। संयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ भी अधिक रहेगी। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। धनु राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। भावनाओं को वश में रखें। पिता का साथ मिलेगा। वाहन के रख-रखाव तथा वस्त्रों आदि पर खर्च बढ़ सकते हैं। मकर राशि- मन प्रसन्न तो रहेगा। परंतु आत्मविश्वास में कमी भी रहेगी। बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। परिश्रम अधिक रहेगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कुंभ राशि- मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। आत्मविश्वास तो भरपूर रहेगा। माता की सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। शैक्षिक कार्यों में बाधा आ सकती है। मीन राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। परंतु नकारात्मक विचारों से बचें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि भी होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा।

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Chandra Grahan 2023: कब है साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? जानिए सूतक काल का समय और धार्मिक महत्व

October 2023: साल 2023 का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। मान्यतानुसार सूतक काल से चंद्र ग्रहण तक कुछ विशेष कार्यों को नहीं करना चाहिए। Chandra Grahan 2023: अक्टूबर महीने में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। । साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई 2023 को लगा था, लेकिन भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं दिया था। साल का दूसरा चंद्रग्रहण 28 अक्टूबर 2023 को लगने जा रहा है और यह भारत में  दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। इस दौरान जातकों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। बता दें कि जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, तब चंद्र ग्रहण लगता है। इसका ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। चलिए साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल के बारे में जानते हैं। चंद्रग्रहण का समय: साल 2023 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर को रात 11 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और 29 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगा। सूतक काल का समय: साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी 9 घंटे पहले से आरंभ हो जाएगा। सूतक काल के दौरान शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।  कहां-कहां नजर आएगा चंद्र ग्रहण?  भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया,यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, एशिया, हिंद महासागर, अटलांटिक, आर्कटिक और अंटार्कटिका, दक्षिणी प्रशांत महासागर में चंद्रग्रहण दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण से जुड़ी खास बातें: चंद्र ग्रहण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए इस दौरान गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।ग्रहण के दौरान घर में पके हुए भोजन में तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए। मान्यता है कि तुलसी का पत्ता नहीं डालने से नकारात्मक शक्तियों के कारण खाना दूषित हो जाता है।चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन का सेवन ना करें। हालांकि, बीमार व्यक्ति, बच्चे और बड़े-बुजुर्ग भोजन कर सकते हैं।धार्मिक मान्यता है कि चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनना चाहिए।इसके बाद घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें।

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Karwa Chauth 2023: करवा चौथ कब है? सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी चंद्रमा की पूजा, जानें मुहूर्त, अर्घ्य समय और पारण

Karwa Chauth 2023 date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. उस दिन कार्तिक संकष्टी चतुर्थी होती है, जिसे वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं और विवाह योग्य युवतियां अपने जीवनसाथी की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इस व्रत में चंद्रमा की पूजा करना और अर्घ्य देना जरूरी है. इसके बिना करवा चौथ का व्रत पूरा नहीं होता है. करवा चौथ 2023 कब है?वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर दिन मंगलवार को रात 09 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ हो रही है. य​ह तिथि 01 नवंबर बुधवार को रात 09 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगी. उदयातिथि और चतुर्थी के चंद्रोदय के आधार पर करवा चौथ व्रत 1 नवंबर बुधवार को रखा जाएगा. इस दिन व्रती को 13 घंटे 42 मिनट तक निर्जला व्रत रखना होगा. व्रत सुबह 06 बजकर 33 मिनट से रात 08 बजकर 15 मिनट तक होगा. करवा चौथ व्रत कथा | Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi करवा चौथ 2023 का पूजा मुहूर्त क्या है?जो महिलाएं 01 नवंबर बुधवार को करवा चौथ का व्रत रखेंगी, उनको शाम में पूजा के लिए 1 घंटा 18 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 54 मिनट तक है. करवा चौथ 2023 पर चंद्रमा पूजन और अर्घ्य का समय क्या है?करवा चौथ के दिन चंद्रोदय रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा. इस समय से आप चंद्रमा पूजन के साथ अर्घ्य दे सकते हैं. चंद्रमा को अर्घ्य देने पर व्रत पूरा होता है. करवा चौथ 2023 पारण समयकरवा चौथ व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है. पति के हाथों जल ​पीकर व्रत को पूरा करते हैं. 1 नवंबर को रात 08:15 बजे के बाद आप कभी भी पारण कर सकती हैं. तीन योग में है करवा चौथ 2023इस साल करवा चौथ पर 3 योग बन रहे हैं. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:33 बजे से प्रारंभ हो रहा है, जो अगले दिन प्रात: 04:36 बजे तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि को शुभ योग माना जाता हैं. इसमें किए गए कार्य सफल सिद्ध होते हैं. उस दिन प्रात:काल से दोपहर 02 बजकर 07 मिनट तक परिघ योग है, उसके बाद से ​शिव योग प्रारंभ होगा, जो अगले दिन तक रहेगा. करवा चौथ के दिन मृगशिरा नक्षत्र सुबह से लेकर अगले दिन 2 नंवबर को सुबह 04:36 बजे तक है.

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