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Published November 25, 2023
Updated November 25, 2023

महादेवादि द्वादशनामावली एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव और अन्य बारह देवताओं की स्तुति करता है। यह स्तोत्र बारह श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक में आठ चरणों होते हैं।

महादेवादि द्वादशनामावली की रचना 12वीं शताब्दी में भक्तिकाल के कवि जयदेव ने की थी। जयदेव एक महान कवि और संगीतकार थे।

महादेवादि द्वादशनामावली में जयदेव भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा, गणेश, कार्तिकेय, सूर्य, चंद्रमा, दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, और कुबेर की स्तुति करते हैं। वे इन देवताओं के रूप, गुणों और शक्तियों की प्रशंसा करते हैं।

महादेवादि द्वादशनामावली हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र हिंदू भक्तों को विभिन्न देवताओं की महिमा का अनुभव कराता है।

महादेवादि द्वादशनामावली के बारह श्लोक इस प्रकार हैं:

Mahadevadi Dwadashnamani

  1. अर्थ: हे महादेव, आप ही ब्रह्मांड के सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। आप ही समस्त देवताओं के स्वामी हैं। आप ही सर्वशक्तिमान हैं।

  2. अर्थ: हे विष्णु, आप ही समस्त जीवों के पालनकर्ता हैं। आप ही सत्य और न्याय के प्रतीक हैं। आप ही मोक्ष के मार्ग प्रदर्शक हैं।

  3. अर्थ: हे ब्रह्मा, आप ही ब्रह्मांड के रचनाकार हैं। आप ही ज्ञान और विज्ञान के देवता हैं। आप ही समस्त सृष्टि के पिता हैं।

  4. अर्थ: हे गणेश, आप ही बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। आप ही सभी बाधाओं को दूर करने वाले हैं। आप ही सभी संकटों को हराने वाले हैं।

  5. अर्थ: हे कार्तिकेय, आप ही युद्ध और वीरता के देवता हैं। आप ही सभी राक्षसों का नाश करने वाले हैं। आप ही सभी भक्तों के रक्षक हैं।

  6. अर्थ: हे सूर्य, आप ही प्रकाश और ऊर्जा के देवता हैं। आप ही समस्त सृष्टि को प्रकाशित करने वाले हैं। आप ही सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं।

  7. अर्थ: हे चंद्रमा, आप ही शीतलता और शांति के देवता हैं। आप ही मन और बुद्धि को शांत करने वाले हैं। आप ही सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाले हैं।

  8. अर्थ: हे दुर्गा, आप ही शक्ति और साहस की देवी हैं। आप ही सभी दुष्टों का नाश करने वाली हैं। आप ही सभी भक्तों की रक्षा करने वाली हैं।

  9. अर्थ: हे सरस्वती, आप ही ज्ञान और कला की देवी हैं। आप ही सभी बुद्धिमानों और विद्वानों की अधिष्ठात्री हैं। आप ही सभी को ज्ञान और कला प्रदान करने वाली हैं।

  10. अर्थ: हे लक्ष्मी, आप ही धन और समृद्धि की देवी हैं। आप ही सभी सुखी और समृद्ध रहने वाली हैं। आप ही सभी भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।

  11. अर्थ: हे कुबेर, आप ही धन और वैभव के देवता हैं। आप ही सभी को धन और वैभव प्रदान करने वाले हैं। आप ही सभी भक्तों की रक्षा करने वाले हैं।

  12. अर्थ: हे सभी देवताओ, मैं आप सभी की स्तुति करता हूँ। मैं आप सभी से प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझे अपने मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।

महादेवादि द्वादशनामावली हिंदू धर्म में एक अमूल्य धरोहर है। यह स्तोत्र हिंदू भक्तों को विभिन्न देवताओं की महिमा का अनुभव कराता है।

Mahadevadi Dwadashnamani

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