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Published November 23, 2023
Updated July 29, 2024

शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10वीं शताब्दी में श्रीमच्छंकराचार्य द्वारा रचित था।

शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् के कुछ प्रमुख श्लोक निम्नलिखित हैं:

Shashankamoulishwarastotram

श्लोक 1:

शशांकमोलीश्वराय शशिमुखवल्लभाय । चन्द्रशेखराय नीलकण्ठाय नमो नमः ॥

अर्थ:

हे शशांक के समान मोतियों से सुशोभित शिव! हे चंद्र के समान मुख वाले शिव! हे नीलकंठ शिव! आपको नमस्कार है।

श्लोक 2:

त्रिलोकेशाय त्रिपुरहाराय त्रिकालज्ञाय । त्रिशूलपाणये त्रिनेत्राय नमो नमः ॥

अर्थ:

हे तीनों लोकों के स्वामी शिव! हे त्रिपुर का विनाश करने वाले शिव! हे तीनों कालों के ज्ञाता शिव! हे त्रिशूलधारी शिव! हे तीन नेत्रों वाले शिव! आपको नमस्कार है।

श्लोक 3:

अघोराय बगलामुख्याय सद्योजाताय । त्र्यम्बकाय वृषभध्वजाय नमो नमः ॥

अर्थ:

हे अघोर शिव! हे बगलामुखी के स्वामी शिव! हे सद्योजात शिव! हे तीन नेत्रों वाले शिव! हे वृषभ के ध्वज वाले शिव! आपको नमस्कार है।

शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् का पाठ करने से माना जाता है कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो भगवान शिव की भक्ति करते हैं।

शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् का पाठ करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है:

  • एकांत स्थान में बैठ जाएं और अपने मन को शांत करें।
  • भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति के सामने खड़े हो जाएं।
  • अपने हाथों को जोड़ें और भगवान शिव को नमस्कार करें।
  • स्तोत्र का 108 बार या अधिक बार पाठ करें।

शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् का पाठ करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • स्तोत्र का सही उच्चारण करें।
  • स्तोत्र का अर्थ समझें।
  • स्तोत्र में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ लगाव रखें।

शशांकमोलीश्वरस्तोत्रम् का नियमित रूप से पाठ करने से आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति, और आनंद प्राप्त कर सकते हैं।

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