Srikrishna Stotram Brahmavaivartapurane Dharmakritam
नहीं, श्रीकृष्ण स्तोत्रम् ब्रह्मवैवर्त पुराण में धर्मकृत द्वारा रचित नहीं है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना 16वीं शताब्दी में हुई थी, जबकि ब्रह्मवैवर्त पुराण की रचना 10वीं शताब्दी में हुई थी। इस प्रकार, श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना ब्रह्मवैवर्त पुराण के बाद हुई थी।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में श्रीकृष्ण स्तोत्रम् के कुछ श्लोकों का उल्लेख है। हालांकि, इन श्लोकों के आधार पर यह कहना कठिन है कि श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना ब्रह्मवैवर्त पुराण के समय में हुई थी या नहीं।
संभव है कि श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना ब्रह्मवैवर्त पुराण के बाद हुई हो और ब्रह्मवैवर्त पुराण के रचयिता ने श्रीकृष्ण स्तोत्रम् के कुछ श्लोकों को अपने ग्रन्थ में शामिल किया हो।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना श्रीमद्गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा की गई थी। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की स्तुति करता है और उनके प्रेममय लीलाओं का वर्णन करता है।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् का पाठ करने से माना जाता है कि भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यह पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो भगवान कृष्ण की भक्ति करते हैं।
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