श्रीकृष्ण स्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 100 श्लोकों में विभाजित है।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना का श्रेय 16वीं शताब्दी के कवि और संत श्रीमद्गोपाल भट्ट गोस्वामी को दिया जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की प्रेममय लीलाओं का वर्णन करता है।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् के कुछ प्रमुख श्लोक निम्नलिखित हैं:
Sri Krishna Stotram Sri Mahadevkritam
श्लोक 1:
नमस्ते कृष्णाय देवाय गोविन्दाय नमो नमः । कृष्ण गोविन्द कृष्ण गोविन्द कृष्ण गोविन्द नमः ॥
अर्थ:
हे देवता कृष्ण! हे गोविंद! आपको नमस्कार है। हे कृष्ण! हे गोविंद! हे कृष्ण! हे गोविंद! हे कृष्ण! आपको नमस्कार है।
श्लोक 2:
गोपिकावनमध्यस्थं नन्दकन्दनमण्डितम् । वृन्दावननिवासिं कृष्णं भक्त्या वन्दे ॥
अर्थ:
गोपिकाओं के वन के मध्य में स्थित, नंद के कान में कर्णफूल पहने हुए, वृंदावन में निवास करने वाले कृष्ण को भक्तिपूर्वक नमस्कार करता हूं।
श्लोक 3:
वत्सरूपं मधुरभाषिं मुरलीवादिनं । गोपिकावल्लभं कृष्णं भक्त्या वन्दे ॥
अर्थ:
बछड़े के रूप वाले, मधुरभाषी, मुरली बजाने वाले, गोपियों के प्रियतम कृष्ण को भक्तिपूर्वक नमस्कार करता हूं।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् का पाठ करने से माना जाता है कि भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यह पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो भगवान कृष्ण की भक्ति करते हैं।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् के कुछ अन्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- यह मानसिक शांति और एकाग्रता प्रदान करता है।
- यह आध्यात्मिक विकास में मदद करता है।
- यह प्रेम और भक्ति की प्राप्ति में सहायक है।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका है।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना के बारे में एक मान्यता यह है कि यह स्तोत्र भगवान शिव द्वारा रचित है। इस मान्यता का आधार यह है कि श्रीकृष्ण स्तोत्रम् में भगवान शिव की स्तुति के कई श्लोक हैं।
हालांकि, इस मान्यता का कोई निश्चित प्रमाण नहीं है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम् की रचना के बारे में सबसे अधिक प्रचलित मान्यता यह है कि यह स्तोत्र श्रीमद्गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा रचित है।
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