नहीं, श्रीकृष्ण स्तोत्र ब्रह्मचारी नहीं है। श्रीकृष्ण स्तोत्र की रचना राधाजी ने की थी। राधाजी भगवान कृष्ण की प्रेमिका थीं। वे भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं।
श्रीकृष्ण स्तोत्र की रचना का काल 16वीं शताब्दी माना जाता है। यह स्तोत्रम संस्कृत भाषा में लिखा गया है।
ब्रह्मचारी वह व्यक्ति होता है जो ब्रह्मचर्य का पालन करता है, यानी जो विवाहित नहीं होता है और कामवासना से दूर रहता है। राधाजी एक विवाहित महिला थीं। इसलिए, वे ब्रह्मचारी नहीं थीं।
श्रीकृष्ण स्तोत्र में, राधाजी भगवान कृष्ण की सुंदरता, उनकी प्रेममयी लीलाओं और उनके गुणों की प्रशंसा करती हैं। वे भगवान कृष्ण से अपने प्रेम को व्यक्त करती हैं।
श्रीकृष्ण स्तोत्र एक अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्रम भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक अमूल्य निधि है।
हालांकि, कुछ विद्वानों का मानना है कि श्रीकृष्ण स्तोत्र की रचना किसी ब्रह्मचारी संत ने की थी। इन विद्वानों का तर्क है कि स्तोत्रम में भगवान कृष्ण की ब्रह्मचर्य का पालन करने की क्षमता की प्रशंसा की गई है।
लेकिन यह मत अधिक स्वीकृत नहीं है। अधिकांश विद्वानों का मानना है कि श्रीकृष्ण स्तोत्र की रचना राधाजी ने की थी।
Sri Krishna Stotra Brahmacharit
KARMASU