नहीं, श्रीकृष्ण स्तोत्रम विप्रपत्नी कृत नहीं है। श्रीकृष्ण स्तोत्रम की रचना राधाजी ने की थी। राधाजी भगवान कृष्ण की प्रेमिका थीं। वे भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम की रचना का काल 16वीं शताब्दी माना जाता है। यह स्तोत्रम संस्कृत भाषा में लिखा गया है।
विप्रपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम एक अलग स्तोत्र है जो श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्रम 12 श्लोकों में विभाजित है।
इस स्तोत्रम की रचना का श्रेय एक विप्रपत्नी को दिया जाता है। इस स्तोत्रम में, विप्रपत्नी भगवान कृष्ण की सुंदरता, उनकी प्रेममयी लीलाओं और उनके गुणों की प्रशंसा करती हैं। वे भगवान कृष्ण से अपने प्रेम को व्यक्त करती हैं।
विप्रपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम भी हिंदू धर्म के एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह स्तोत्रम भगवान कृष्ण की महिमा का वर्णन करता है और भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
श्रीकृष्ण स्तोत्रम और विप्रपत्नी कृत श्रीकृष्ण स्तोत्रम दोनों ही हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं। ये दोनों स्तोत्रम भगवान कृष्ण की महिमा का वर्णन करते हैं।
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