Shankarashtakam
शंकाराष्टकम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कश्मीरी शैव दार्शनिक वल्लभदेव द्वारा रचित है।
शंकाराष्टकम में भगवान शिव के कई रूपों का वर्णन किया गया है। इनमें भगवान शिव के निराकार, साकार और अर्धनारीश्वर रूप शामिल हैं।
शंकाराष्टकम के कुछ प्रमुख श्लोक निम्नलिखित हैं:
चन्द्रकलोज्ज्वलभालं कण्ठव्यालं जगत्त्रयीपालम् ।
कृतनरमस्तकमालं कालं कालस्य कोमलं वन्दे ॥
कोपेक्षणहतकामं स्वात्मारामं नगेन्द्रजावामम् ।
संसृतिशोकविरामं श्यामं कण्ठेन कारणं वन्दे ॥
Shankarashtakam
अर्थ
चंद्रमा के समान उज्ज्वल भाल वाले, कंठ में सर्प की माला धारण किए हुए, तीनों लोकों के स्वामी, कृतकृत्य मुख वाले, काल के समान काले, कण्ठ से कारण रूपी सर्प धारण किए हुए, मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
क्रोध के क्षण में काम को नष्ट करने वाले, अपने आत्मा में रमते हुए, नंदीश्वर के वाहन वाले, संसार के शोक का निवारण करने वाले, श्याम वर्ण वाले, कण्ठ में सर्प धारण किए हुए, मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
शंकाराष्टकम का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र मन को शांत करता है और आध्यात्मिक विकास में मदद करता है।
शंकाराष्टकम के कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- यह मन को शांत करता है और चिंता, तनाव और भय को दूर करता है।
- यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक विकास में मदद करता है।
- यह धन, समृद्धि और सफलता को आकर्षित करता है।
- यह रोगों से बचाता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
शंकाराष्टकम का पाठ किसी भी समय और किसी भी स्थान पर किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका पाठ करते समय मन को एकाग्र और शुद्ध रखना चाहिए।
शंकाराष्टकम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक सरल और त्वरित तरीका है।
KARMASU