Shivashtakam Agastyakrit or Agastyashtakam
शिवष्टकम् अगस्त्यकृतम् या अगस्त्यष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र ऋषि अगस्त्य द्वारा रचित है।
शिवष्टकम् अगस्त्यकृतम् इस प्रकार है:
श्रीगणेशाय नमः
श्रीशिवाय नमः
ओं नमः शिवाय
अर्थ:
हे गणेश, हे शिव, हे नमस्कार
हे शिव, हे नमस्कार
ओम, हे शिव, हे नमस्कार
नीलकंठं गंगाधरं चंद्रशेखरं भस्मधारि त्रिशूलधारिं शरभारुढं भक्तवत्सलं शिवम्
भक्तार्तिहरं पापघ्नं सुखसौभाग्यदायकम् महादेवं त्रिगुणातीतं नमस्ते रुद्ररुपिणम्
अर्थ:
**नीले कंठ वाले, गंगाधारी, चंद्रशेखर, भस्मधारी, त्रिशूलधारी, शरभारूढ़, भक्तवत्सल, शिव,
भक्तों के कष्टों को दूर करने वाले, पापों को नष्ट करने वाले, सुख और सौभाग्य प्रदान करने वाले, महादेव, त्रिगुणों से परे, रुद्र रूप में प्रकट होने वाले, आपको नमस्कार है।**
शिवष्टकम् अगस्त्यकृतम् का पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और उन्हें सुख, समृद्धि, और शांति मिलती है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण को बढ़ावा देता है।
शिवष्टकम् अगस्त्यकृतम् के कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- यह भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।
- यह भक्तों को सुख, समृद्धि, और शांति प्रदान करता है।
- यह भक्तों को भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण को बढ़ावा देता है।
शिवष्टकम् अगस्त्यकृतम् का पाठ करने के लिए कोई विशेष विधि निर्धारित नहीं है। भक्त इसे किसी भी समय और किसी भी स्थान पर कर सकते हैं। हालांकि, यदि भक्त इसे अधिक लाभकारी बनाना चाहते हैं तो वे इसे प्रातःकाल या संध्याकाल में किसी शांत स्थान पर कर सकते हैं।
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