Tryakshrimrityunjayapavidhih
त्र्यक्ष्रीमृत्युंजय पाठ विधि
उपकरण:
- रुद्राक्ष की माला
- शिवलिंग
- धूप
- दीप
- फूल
- जल
विधि:
- सबसे पहले, एक पवित्र स्थान पर बैठें और शिवलिंग को सामने रखें।
- फिर, अपने हाथों को जोड़कर भगवान शिव का ध्यान करें।
- अब, रुद्राक्ष की माला से त्र्यक्ष्रीमृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- मंत्र का जाप करते समय, अपनी आंखें बंद रखें और भगवान शिव का ध्यान करें।
- मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||
Tryakshrimrityunjayapavidhih
अर्थ:
हम सुगन्धित और पुष्टि प्रदान करने वाले त्रिनेत्र भगवान शिव की पूजा करते हैं। जैसे कि नारियल पानी से बँधा हुआ नारियल मृत्यु से मुक्त होकर जीवन प्राप्त करता है, वैसे ही मैं भी मृत्यु से मुक्त होकर अमरता प्राप्त करूं।
लाभ:
- त्र्यक्ष्रीमृत्युंजय मंत्र का जाप करने से सभी प्रकार के भय और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
- यह मंत्र मृत्यु के भय को दूर करता है और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करता है।
- यह मंत्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
विशेष ध्यान दें:
- त्र्यक्ष्रीमृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय, शुद्ध मन और एकाग्रचित रहें।
- मंत्र का जाप नियमित रूप से करें, इससे आपको अधिक लाभ मिलेगा।
त्र्यक्ष्रीमृत्युंजय मंत्र का जाप करने के कुछ अन्य लाभ:
- यह मंत्र धन-धान्य और समृद्धि को बढ़ाता है।
- यह मंत्र शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद करता है।
- यह मंत्र ज्ञान और विवेक को बढ़ाता है।
- यह मंत्र मन को शांत और स्थिर करता है।
यदि आप इन लाभों को प्राप्त करना चाहते हैं, तो त्र्यक्ष्रीमृत्युंजय मंत्र का जाप नियमित रूप से करें।
देवैःकृता महाकालमहेश्वरस्तुतिः Devaihkrita mahakalmaheshwarstutih
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