Bhajaami Shailsutharamanam
भजै शैलसुतारमं एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव के भक्तों के लिए एक शक्तिशाली साधन है।
भजै शैलसुतारमं की रचना ऋषि मार्कंडेय ने की थी। यह स्तोत्र पद्मपुराण के उत्तरखण्ड में मिलता है।
भजै शैलसुतारमं का पाठ इस प्रकार है:
**भजै शैलसुतारमं
त्रिशूलधारिं शंकरम्
जगत्पालकं देवं
त्रिलोकनाथं शिवम्।।
**भजै भवभंजनं
सर्वपापहरं
सर्वव्यापिं सर्वज्ञं
सर्वकामार्थसिद्धिदम्।।
**भजै शंकरं देवं
सर्वगुणोपेतम्
सर्वलोकनाथं देवं
सर्वभूतहिताय।।
**भजै शिवं शंकरं
भवभयहरं
सर्वपापहरं देवं
सर्वकामार्थसिद्धिदम्।।
Bhajaami Shailsutharamanam
भजै शैलसुतारमं का अर्थ है:
**"मैं शैल पुत्र भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं त्रिशूल धारी भगवान शंकर की भक्ति करता हूं।
मैं जगत् पालक भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं त्रिलोक नाथ भगवान शिव की भक्ति करता हूं।"**
**"मैं भव भंजन भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं सभी पापों का नाश करने वाले भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं सर्वव्यापी और सर्वज्ञ भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले भगवान शिव की भक्ति करता हूं।"**
**"मैं भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं सभी गुणों से युक्त भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं त्रिलोक नाथ भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए भगवान शिव की भक्ति करता हूं।"**
**"मैं भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं भव भय का नाश करने वाले भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं सभी पापों का नाश करने वाले भगवान शिव की भक्ति करता हूं।
मैं सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले भगवान शिव की भक्ति करता हूं।"**
भजै शैलसुतारमं का जाप करने से कई लाभ हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सभी प्रकार के भय और परेशानियों से मुक्ति
- सभी प्रकार के पापों से मुक्ति
- सभी प्रकार की सिद्धियों को प्राप्त करना
- मोक्ष की प्राप्ति
भजै शैलसुतारमं का जाप करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- स्तोत्र का जाप एक पवित्र स्थान पर करें।
- स्तोत्र का जाप करते समय शुद्ध रहें।
- स्तोत्र का जाप एकाग्रचित होकर करें।
भजै शैलसुतारमं एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो सभी भक्तों के लिए लाभदायक है।
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