श्रीराधाकृष्णयुगलसहस्रनामावली एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी राधा की सहस्र नामों की स्तुति करता है। इस स्तोत्र में भगवान कृष्ण और राधा को एक ही रूप में वर्णित किया गया है, और उन्हें एक दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाता है।
श्रीराधाकृष्णयुगलसहस्रनामावली के छंद निम्नलिखित हैं:
shreeraadhaakrshnayugalasahasranaamaavaleeh
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राधायाः कृष्णस्य च युगलस्य नामानि सहस्रं पठित्वा भक्त्या
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सर्वपापघ्नं चैव सर्वकामनाफलं च तद्भक्तो लभते नरः
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राधायाः कृष्णस्य च नामानि सहस्रं पठित्वा भक्त्या सकृत्
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भवतु तस्य सर्वत्र सुखं सर्वकालं सर्वत्र विजयी भवेत्
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राधायाः कृष्णस्य च नामानि सहस्रं पठित्वा भक्त्या नित्यं
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भविष्यति तस्य सर्वत्र कीर्तिः सर्वत्र पूज्यमानो भवेत्
श्रीराधाकृष्णयुगलसहस्रनामावली का अर्थ निम्नलिखित है:
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राधा और कृष्ण की सहस्र नामों का पाठ करने से, भक्तिपूर्वक
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सभी पापों का नाश होता है और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
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राधा और कृष्ण की सहस्र नामों का एक बार भी भक्तिपूर्वक पाठ करने से
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भक्त के लिए हर जगह सुख होता है और वह हर समय विजयी होता है।
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राधा और कृष्ण की सहस्र नामों का नियमित रूप से भक्तिपूर्वक पाठ करने से
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भक्त का हर जगह कीर्ति होती है और वह हर जगह पूजनीय होता है।
श्रीराधाकृष्णयुगलसहस्रनामावली एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण और राधा के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
इस स्तोत्र में, भगवान कृष्ण और राधा को एक ही रूप में वर्णित किया गया है। वे एक दूसरे के पूरक हैं, और एक के बिना दूसरा अधूरा है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
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