श्रीवैकुण्ठनाथष्टक एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के वैकुण्ठ निवास रूप की स्तुति करता है। इस स्तोत्र में भगवान विष्णु को एक सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी और सर्वज्ञ देवता के रूप में वर्णित किया गया है।
श्रीवैकुण्ठनाथष्टक के छंद निम्नलिखित हैं:
shreevaatpuranaathaashtakam
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वैकुण्ठनाथ नमस्ते नमो नमस्ते नमो वैकुण्ठनाथ नमस्ते भगवन्
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शेषशायी नमस्ते नमो नमस्ते नमो शेषशायी नमस्ते भगवन्
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शेषशयन नमस्ते नमो नमस्ते नमो शेषशयन नमस्ते भगवन्
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नारायण नमस्ते नमो नमस्ते नमो नारायण नमस्ते भगवन्
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माधव नमस्ते नमो नमस्ते नमो माधव नमस्ते भगवन्
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श्रीधर नमस्ते नमो नमस्ते नमो श्रीधर नमस्ते भगवन्
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केशव नमस्ते नमो नमस्ते नमो केशव नमस्ते भगवन्
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गोविन्द नमस्ते नमो नमस्ते नमो गोविन्द नमस्ते भगवन्
श्रीवैकुण्ठनाथष्टक का अर्थ निम्नलिखित है:
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हे वैकुण्ठनाथ, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
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हे शेषशायी, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
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हे शेषशयन, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
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हे नारायण, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
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हे माधव, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
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हे श्रीधर, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
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हे केशव, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
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हे गोविन्द, मैं आपको प्रणाम करता हूं। हे भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूं।
श्रीवैकुण्ठनाथष्टक एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
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