Vedaih krtan shivastotram
वेदों द्वारा रचित शिवस्तोत्र एक प्राचीन स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति में रचित है। यह स्तोत्र 44 श्लोकों में विभाजित है। प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के एक विशेष रूप या गुण का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शक्तिशाली तरीका है।
वेदों द्वारा रचित शिवस्तोत्र के रचयिता ऋषि पुलस्त्य हैं। यह स्तोत्र ऋग्वेद के अष्टम मण्डल में मिलता है।
वेदों द्वारा रचित शिवस्तोत्र के कुछ प्रमुख श्लोक और उनके अर्थ निम्नलिखित हैं:
पहला श्लोक
नमस्ते रुद्राय नमस्ते रुद्राय नमस्ते रुद्राय नमो नमः। यस्य नामामृतं जपन्तः सर्वपापविनिर्मुक्ताः।।
अर्थ:
हे रुद्र! मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं। हे रुद्र! मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं। हे रुद्र! मैं तुम्हें बार-बार नमस्कार करता हूं। जिनका नाम अमृत है, उनका जप करने वाले सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं।
दूसरा श्लोक
नमस्ते देवाय नमस्ते देवाय नमस्ते देवाय नमो नमः। यस्य दर्शनं भक्तानां सर्वपापहरं फलम्।।
अर्थ:
हे देव! मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं। हे देव! मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं। हे देव! मैं तुम्हें बार-बार नमस्कार करता हूं। जिनके दर्शन भक्तों के लिए सभी पापों का नाश करने वाला फल हैं।
Vedaih krtan shivastotram
तीसरा श्लोक
नमस्ते सदाशिवाय नमस्ते सदाशिवाय नमस्ते सदाशिवाय नमो नमः। यस्य स्मरणं भक्तानां सर्वकामफलमानन्दी।।
अर्थ:
हे सदाशिव! मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं। हे सदाशिव! मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं। हे सदाशिव! मैं तुम्हें बार-बार नमस्कार करता हूं। जिनकी स्मरण भक्तों के लिए सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला आनंद है।
वेदों द्वारा रचित शिवस्तोत्र एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह स्तोत्र नियमित रूप से पढ़ने से भक्तों को शांति, ज्ञान और मोक्ष प्राप्त हो सकता है।
वेदों द्वारा रचित शिवस्तोत्र के कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहलू निम्नलिखित हैं:
- यह स्तोत्र भगवान शिव के एक विशेष रूप, त्रिपुरासुर-मर्दिनी, की स्तुति में रचित है।
- यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और शक्ति का वर्णन करता है।
- यह स्तोत्र भगवान शिव के भक्तों को प्रेरित करता है।
वेदों द्वारा रचित शिवस्तोत्र एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान शिव के भक्तों के लिए बहुत मूल्यवान है।
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