Srichidambarashtakam 1
श्री चिदम्बराष्टकम् 1
अर्थ:
हे चिदम्बरेश्वर! आप ही सृष्टि, पालन और संहार के कारण हैं। आप ही समस्त ब्रह्मांड के स्वामी हैं। आप ही सभी जीवों के उद्धारकर्ता हैं।
आप ही त्रिगुणात्म, त्रिलोचन, त्रिशूलधारी हैं। आप ही सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ और सर्वव्यापी हैं। आप ही परम सत्य हैं, परम आनंद हैं, परम शांति हैं।
आप ही भक्तों के सर्वस्व हैं। जो भक्त आप में श्रद्धा और भक्ति रखता है, उसे आपकी कृपा प्राप्त होती है।
आपकी महिमा अपरंपार है। आप अनादि, अनंत और अद्वितीय हैं।
हे चिदम्बरेश्वर! कृपा करके हमें अपनी कृपा से आच्छादित करें। हमें अपने मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें। हमें सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएं और हमें सुख, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करें।
श्री चिदम्बराष्टकम् 1 एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाने में मदद करता है।
श्री चिदम्बराष्टकम् 1 के पाठ का लाभ:
- यह स्तोत्र भक्तों को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाता है।
- यह स्तोत्र भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।
- यह स्तोत्र भक्तों के सभी कष्टों को दूर करता है और उन्हें सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति कराता है।
श्री चिदम्बराष्टकम् 1 का पाठ कैसे करें:
- इस स्तोत्र का पाठ किसी भी दिन, किसी भी समय किया जा सकता है।
- इस स्तोत्र का पाठ करते समय, भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
- इस स्तोत्र का पाठ करने से पहले, भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराना चाहिए।
- इस स्तोत्र का पाठ करने के बाद, भगवान शिव को फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करना चाहिए।
Srichidambarashtakam 1
श्री चिदम्बराष्टकम् 1 का पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इससे भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्री चिदम्बराष्टकम् 1 के रचयिता:
श्री चिदम्बराष्टकम् 1 के रचयिता अज्ञात हैं। यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाने में मदद करता है।
श्री चिदम्बराष्टकम् 1 के श्लोक:
- जय जय चिदम्बरेश्वर! जय जय चिदम्बरेश्वर! सर्वलोकनाथासि त्वं, नमोस्तु ते महादेव।
हे चिदम्बरेश्वर! आपका जयकारा हो! आपका जयकारा हो! आप समस्त लोकों के नाथ हैं, आपको मेरा प्रणाम।
- त्रिगुणात्मस्वरूपासि, त्रिशूलधारीस्वरूपासि, सर्वशक्तिमानस्वरूपासि, नमोस्तु ते महादेव।
आप त्रिगुणात्मस्वरूप हैं, आप त्रिशूलधारीस्वरूप हैं, आप सर्वशक्तिमानस्वरूप हैं, आपको मेरा प्रणाम।
- भक्तवत्सलस्वरूपासि, परमपदप्रदायिने, सर्वपापहारिणे, सर्वसुखदायिने, नमोस्तु ते महादेव।
आप भक्तवत्सलस्वरूप हैं, आप परमपदप्रदायिन हैं, आप सर्वपापहारि हैं, आप सर्वसुखदायिन हैं, आपको मेरा प्रणाम।
- नारायणस्वरूपासि, ब्रह्मस्वरूपासि, रुद्रस्वरूपासि, गणेशस्वरूपासि, सदाशिवस्वरूपासि, नमोस्तु ते महादेव।
आप नारायणस्वरूप हैं, आप ब्रह्मस्वरूप हैं, आप रुद्रस्वरूप हैं, आप गणेशस्वरूप हैं, आप सदाशिव
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