श्रीमधुसूदनस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है। यह स्तोत्र अष्टपदी छंद में रचित है, जिसमें प्रत्येक चरण में आठ अक्षर होते हैं।
श्रीमधुसूदनस्तोत्रम् की पहली दो पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
shreemadhusoodanastotram
श्रीमधुसूदनस्तोत्रम्
श्रीमधुसूदन, श्रीमधुसूदन,
हे त्रिविक्रम,
तेरी महिमा अपार,
तेरी लीला अपरंपार।
इस स्तोत्र में, विद्यापति भगवान कृष्ण को "श्रीमधुसूदन" कहते हैं, जिसका अर्थ है "मधुसूदन भगवान"। वे उन्हें "त्रिविक्रम" कहते हैं, जिसका अर्थ है "तीनों लोकों में विचरने वाला"। वे उनकी महिमा को "अपार" और उनकी लीला को "अपरंपार" कहते हैं।
इस स्तोत्र में, विद्यापति भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन करते हैं। वे उन्हें "त्रिविक्रम" कहते हैं, क्योंकि उन्होंने तीनों लोकों में विचरने की लीला की थी। वे उन्हें "नृसिंह" कहते हैं, क्योंकि उन्होंने नृसिंह अवतार में हिरण्यकश्यपु का वध किया था। वे उन्हें "वामन" कहते हैं, क्योंकि उन्होंने वामन अवतार में बलिराज से तीन पग भूमि मांगी थी और फिर तीनों लोकों को नाप लिया था। वे उन्हें "कृष्ण" कहते हैं, क्योंकि उन्होंने कृष्ण अवतार में कंस का वध किया था और गोपियों के साथ रासलीला की थी।
श्रीमधुसूदनस्तोत्रम् एक अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक अमूल्य निधि है।
यहाँ श्रीमधुसूदनस्तोत्रम् की पूरी स्तोत्र दी गई है:
श्रीमधुसूदन, श्रीमधुसूदन,
हे त्रिविक्रम,
तेरी महिमा अपार,
तेरी लीला अपरंपार।
त्रिविक्रम रूप में,
तूने तीनों लोकों में विचरण किया,
नृसिंह रूप में,
तूने हिरण्यकश्यपु का वध किया।
वामन रूप में,
तूने बलिराज से तीन पग भूमि मांगी,
और कृष्ण रूप में,
तूने कंस का वध किया।
तू हो सर्वव्यापी,
तू हो सर्वशक्तिमान,
तू हो सर्वज्ञ,
तू हो परमेश्वर।
हे मधुसूदन,
हम तेरे चरणों में,
सदा शीश झुकाते हैं।
हे मधुसूदन,
हम तेरे प्रेम में,
सदा डूबे रहते हैं,
हे मधुसूदन,
हम तेरे नाम का,
सदा जाप करते हैं।
हे मधुसूदन,
हम तेरे दर्शन के,
लिए सदा व्याकुल रहते हैं,
हे मधुसूदन,
हम तेरे आशीर्वाद के,
लिए सदा प्रार्थना करते हैं।
श्रीमधुसूदनस्तोत्रम् की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन करता है।
- यह स्तोत्र अष्टपदी छंद में रचित है।
- यह स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचित है।
- यह स्तोत्र संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है।
श्रीमधुसूदनस्तोत्रम् एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है।
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