श्रीराधाकृष्णाष्टकम् एक संस्कृत वर्णनात्मक कविता है जो भगवान कृष्ण और उनकी प्रेमिका राधा की महिमा का वर्णन करती है। यह कविता संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है। यह कविता वराष्टक छंद में रचित है, जिसमें प्रत्येक चरण में आठ अक्षर होते हैं।
श्रीराधाकृष्णाष्टकम् की पहली दो पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
shreeraadhaakrshnaashtakam
श्रीराधाकृष्णाष्टकम्
श्रीराधाकृष्णा, श्रीराधाकृष्णा,
हे प्रेममूर्ति,
तेरी महिमा अपार,
तेरी लीला अपरंपार।
इस कविता में, विद्यापति भगवान कृष्ण और राधा को "श्रीराधाकृष्णा" कहते हैं, जिसका अर्थ है "राधा और कृष्ण"। वे उन्हें "प्रेममूर्ति" कहते हैं, जिसका अर्थ है "प्रेम के रूप"। वे उनकी महिमा को "अपार" और उनकी लीला को "अपरंपार" कहते हैं।
इस कविता में, विद्यापति भगवान कृष्ण और राधा की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हैं। वे उनकी बाल लीलाओं का वर्णन करते हैं, जैसे कि माखन चोरी करना और अक्रूर से द्वारका जाने के लिए रोना। वे उनकी युवावस्था की लीलाओं का वर्णन करते हैं, जैसे कि गोपियों के साथ रासलीला करना और कंस का वध करना। वे उनकी वृद्धावस्था की लीलाओं का वर्णन करते हैं, जैसे कि अर्जुन को गीता का उपदेश देना और द्रौपदी को चीरहरण से बचाना।
श्रीराधाकृष्णाष्टकम् एक अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण कविता है। यह कविता भगवान कृष्ण और राधा के भक्तों के लिए एक अमूल्य निधि है।
यहाँ श्रीराधाकृष्णाष्टकम् की पूरी कविता दी गई है:
श्रीराधाकृष्णा, श्रीराधाकृष्णा,
हे प्रेममूर्ति,
तेरी महिमा अपार,
तेरी लीला अपरंपार।
बाल रूप में,
तूने माखन चुराया,
और अक्रूर से द्वारका,
जाने के लिए रोया।
गोपियों के साथ,
तूने रासलीला की,
और कंस का वध कर,
तूने धर्म की रक्षा की।
अर्जुन को गीता का उपदेश,
तूने दिया,
और द्रौपदी को चीरहरण से,
तूने बचाया।
तू हो सर्वव्यापी,
तू हो सर्वशक्तिमान,
तू हो सर्वज्ञ,
तू हो परमेश्वर।
हे राधाकृष्ण, हे श्यामसुंदर,
हम तेरे चरणों में,
सदा शीश झुकाते हैं।
श्रीराधाकृष्णाष्टकम् की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- यह कविता भगवान कृष्ण और राधा की महिमा का वर्णन करती है।
- यह कविता वराष्टक छंद में रचित है।
- यह कविता संस्कृत भाषा में रचित है।
- यह कविता संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है।
श्रीराधाकृष्णाष्टकम् एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध कविता है। यह कविता भगवान कृष्ण और राधा के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है।
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