षड्गोस्वामीष्टकम् एक संस्कृत कविता है जो कृष्ण भक्ति आंदोलन के छह प्रमुख गुरुओं की प्रशंसा में लिखी गई है। इन छह गुरुओं का नाम है:
shadgosvaameeshtakam
- रूप गोस्वामी
- सनातन गोस्वामी
- रघुनाथ भट्ट गोस्वामी
- राघवदास गोस्वामी
- जीव गोस्वामी
- गोपाल भट्ट गोस्वामी
कविता में इन छह गुरुओं की महानता और उनकी योगदानों की प्रशंसा की गई है। कविता के अनुसार, ये गुरु भगवान कृष्ण के प्रेम और भक्ति के प्रचार में अग्रणी थे। उन्होंने भक्ति आंदोलन को एक नए आयाम दिया और कृष्ण भक्ति को एक व्यापक आंदोलन बना दिया।
षड्गोस्वामीष्टकम् की रचना श्रीनिवासाचार्य ने की थी। यह कविता कृष्ण भक्ति आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कृति है।
षड्गोस्वामीष्टकम् की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
कृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी
धीराधीर-जन-प्रियौ प्रिय-करौ निर्मत्सरौ पूजितौ
श्री-चैतन्य-कृपा-भरौ भुवि भुवो भारावहंतारकौ
अर्थ:
वे कृष्ण की महिमा का गान करने, नृत्य करने और उनका प्रेम करने में लीन रहते हैं। वे प्रेम के अमृत के सागर हैं, जो सभी को आकर्षित करते हैं। वे धीर-धीर और सभी के प्रिय हैं, और वे किसी से ईर्ष्या नहीं करते। वे श्री चैतन्य की कृपा से भरे हुए हैं, और वे इस पृथ्वी पर सभी जीवों का बोझ उठाते हैं।
षड्गोस्वामीष्टकम् एक सुंदर और भावपूर्ण कविता है जो कृष्ण भक्ति आंदोलन के छह प्रमुख गुरुओं की याद में बनी है।
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