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Published November 7, 2023
Updated July 29, 2024

Dakshakritam Shivaparadhakshamastotram

दक्षकृतं शिवपराधाक्षमास्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव से क्षमा मांगता है। यह स्तोत्र दक्ष प्रजापति द्वारा रचित है, जिन्होंने अपने दामाद भगवान शिव का अपमान किया था। स्तोत्र में, दक्ष प्रजापति भगवान शिव से क्षमा मांगते हैं और उनके आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं।

स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है:

ॐ नमः शिवाय

दक्षकृतं शिवपराधाक्षमास्तोत्रम्

अयि गिरिशंकर शंभो,
सर्वेश्वर नमस्ते।
तुमने मेरे अपराध को क्षमा किया,
मैं तुम्हारा ऋणी हूँ।

मैंने तुम्हें अपमानित किया,
मैंने तुम्हारे दामाद का अपमान किया।
मैंने तुम्हारे भक्तों का अपमान किया,
मैंने तुम्हारे आशीर्वाद को खो दिया।

तुम दयालु हो,
तुम करुणामय हो।
तुम मेरे अपराध को क्षमा करो,
मुझे अपना आशीर्वाद दो।

मैं तुम्हारी भक्ति करूंगा,
मैं तुम्हारे नियमों का पालन करूंगा।
मैं तुम्हारे भक्तों की सेवा करूंगा,
मैं तुम्हारे मार्ग पर चलूंगा।

हे शिव, कृपया मुझे क्षमा करो।
मैं तुम्हारा ऋणी हूँ।
तुम मेरा आशीर्वाद दो,
मुझे तुम्हारी कृपा प्राप्त हो।

Dakshakritam Shivaparadhakshamastotram

ॐ नमः शिवाय

इस स्तोत्र का अर्थ इस प्रकार है:

  • पहला श्लोक भगवान शिव की स्तुति करता है। भक्त उन्हें "गिरिशंकर" और "शंभो" कहते हैं। वे उन्हें "सर्वेश्वर" कहते हैं।
  • दूसरा श्लोक दक्ष प्रजापति अपने अपराध की स्वीकारोक्ति करते हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने भगवान शिव का अपमान किया है।
  • तीसरा श्लोक दक्ष प्रजापति भगवान शिव की दया की प्रार्थना करते हैं। वे कहते हैं कि वे उनके भक्त हैं और उनके आशीर्वाद के लिए तरसते हैं।
  • चौथा श्लोक दक्ष प्रजापति भगवान शिव की भक्ति का वचन देते हैं। वे कहते हैं कि वे उनके नियमों का पालन करेंगे और उनके भक्तों की सेवा करेंगे।
  • पांचवां श्लोक दक्ष प्रजापति भगवान शिव से क्षमा मांगते हैं। वे कहते हैं कि वे उनके ऋणी हैं।
  • छठा श्लोक दक्ष प्रजापति भगवान शिव से आशीर्वाद मांगते हैं। वे कहते हैं कि वे उनकी कृपा प्राप्त करना चाहते हैं।

दक्षकृतं शिवपराधाक्षमास्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव से क्षमा प्राप्त करने में मदद कर सकती है। यह स्तोत्र उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकती है जो अपने जीवन में अपराध बोध या पश्चाताप महसूस करते हैं।

दक्षकृतं शिवापराधक्षमास्तोत्रम् Dakshakritam Shivaparadhakshamastotram

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