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Published November 7, 2023
Updated November 7, 2023

श्रीमुकुंदमुक्तावल्ली एक संस्कृत पद्य है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 16वीं शताब्दी के कवि श्रीमुकुंद ने लिखा था।

पद्य में, कवि श्रीकृष्ण के रूप और गुणों का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि श्रीकृष्ण के रूप में सभी सुंदरता का समावेश है। उनके नेत्र चंचल हैं, और उनकी मुस्कान मोहक है। उनके बाल घने और काले हैं, और उनका शरीर सुंदर है। वे दयालु और करुणामय हैं, और सभी के दुखों को दूर करते हैं। वे सभी के लिए भगवान हैं, और सभी को सुख और आनंद प्रदान करते हैं।

पद्य का अनुवाद इस प्रकार है:

shreemukundamuktavallee

श्रीमुकुंद मुक्तावल्ली

मुरलीधर सुंदरमूर्तये,
नमो नमो मुकुंद माधव।
नयनचंचले, नटनागर,
गोपिकाप्रिय मुरारी।

सुंदर वदन सुंदर नेत्र,
सुंदर मुख सुंदर नाक।
सुंदर कंठ सुंदर छाती,
सुंदर अंग सुंदर पाँव।

नयनचंचले, नटनागर,
गोपिकाप्रिय मुरारी।

दयालु करुणामयाय,
सर्वेश्वराय नमो नमः।
आदर्शाय प्रेरणाया,
मार्गदर्शकाय नमो नमः।

नयनचंचले, नटनागर,
गोपिकाप्रिय मुरारी।

आनंददायी सुखदायी,
शांतिदायकाय नमो नमः।
जीवदायी प्रकाशदायी,
प्रेमदायी नमो नमः।

नयनचंचले, नटनागर,
गोपिकाप्रिय मुरारी।

श्रीमुकुंदमुक्तावल्ली एक लोकप्रिय भक्ति मंत्र है। इसे अक्सर मंदिरों और घरों में गाया और पढ़ा जाता है।

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