Shreeshivanaamaavaleeshtakam
श्रीशिवनामावलीष्टकम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के 108 नामों की स्तुति करता है। यह एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो शिव को एक शक्तिशाली और करुणामय देवता के रूप में स्वीकार करता है। स्तोत्र में प्रत्येक नाम शिव के एक विशेष गुण या विशेषता का प्रतिनिधित्व करता है।
श्रीशिवनामावलीष्टकम के कुछ महत्वपूर्ण नामों में शामिल हैं:
- नाम 1: शिव को "ओंकारमूलं परमशिवम्" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, आप "ॐ" के रूप में मौजूद हैं। आप ब्रह्मांड के मूल हैं। आप सभी सृष्टि के स्रोत हैं।
- नाम 2: शिव को "नमः शिवाय" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। मैं आपकी कृपा और आशीर्वाद की कामना करता हूं।
- नाम 3: शिव को "नमः रुद्राय" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप सभी दुखों को दूर करने वाले हैं। आप सभी को शांति और आनंद प्रदान करते हैं।
- नाम 4: शिव को "नमः भवाय" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप संहार के देवता हैं। आप सभी बुराई को नष्ट करते हैं।
- नाम 5: शिव को "नमः शंभवे" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप सभी का स्वामी हैं। आप सभी को अपनी कृपा से आच्छादित करते हैं।
- नाम 6: शिव को "नमः महेश्वराय" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
Shreeshivanaamaavaleeshtakam
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप सभी देवताओं के स्वामी हैं। आप सभी को अपने आशीर्वाद से शक्ति प्रदान करते हैं।
- नाम 7: शिव को "नमः त्र्यम्बके" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आपके तीन नेत्र हैं, जो ब्रह्मांड के तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप सभी ज्ञान और प्रकाश के स्रोत हैं।
- नाम 8: शिव को "नमः पशुपतिनाथाय" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप सभी प्राणियों के स्वामी हैं। आप सभी को अपने आशीर्वाद से जीवन और शक्ति प्रदान करते हैं।
- नाम 9: शिव को "नमः नीलकंठाय" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आपने विष को पिया था, और आपका कंठ नीला पड़ गया था। आप सभी दुखों को दूर करने वाले हैं।
- नाम 10: शिव को "नमः शशिशेखराय" के रूप में स्वीकार करता है।
अर्थ:
हे भगवान शिव, आपके सिर पर चंद्रमा है। आप सभी ज्ञान और प्रकाश के स्रोत हैं।
श्रीशिवनामावलीष्टकम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जिसका उपयोग शिव की उपासना और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। यह स्तोत्र शिव के भक्तों के बीच एक लोकप्रिय स्तुति है।
श्लोक 1 का अनुवाद:
ओंकारमूलं परमशिवम्, नमः शिवाय।
अर्थ:
हे भगवान शिव, आप "ॐ" के रूप में मौजूद हैं। आप ब्रह्मांड के मूल हैं। आप सभी सृष्टि के स्रोत हैं।
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