Sri Shivastotram 11
श्री शिवस्तोत्रम् ११
अर्थ:
हे शिव, आप ब्रह्मांड के निर्माता, संहारक और संरक्षक हैं। आप सभी देवताओं और प्राणियों के स्वामी हैं। आप अज्ञानता और मृत्यु के विनाशकर्ता हैं। आप सभी गुणों के स्वामी हैं। आप अद्वितीय और सर्वशक्तिमान हैं।
श्लोक:
नमो भगवते रुद्राय लोकत्रयनाथाय।अज्ञानमृत्युनाशकाय त्रिगुणाधिपतये।सर्वगुणाधिशेश्वराय नमस्ते नमस्ते।अद्वितीयाय सर्वशक्तिमानाय नमस्ते नमस्ते।
अनुवाद:
मैं भगवान रुद्र को नमन करता हूं, जो तीन लोकों के स्वामी हैं। मैं अज्ञान और मृत्यु के विनाशकर्ता को नमन करता हूं, जो तीन गुणों के स्वामी हैं। मैं सभी गुणों के स्वामी को नमन करता हूं। मैं अद्वितीय और सर्वशक्तिमान को नमन करता हूं।
Sri Shivastotram 11
व्याख्या:
इस श्लोक में, भक्त शिव की स्तुति करते हैं। वे शिव को ब्रह्मांड के निर्माता, संहारक और संरक्षक के रूप में स्वीकार करते हैं। वे शिव को अज्ञानता और मृत्यु के विनाशकर्ता के रूप में स्वीकार करते हैं। वे शिव को सभी गुणों के स्वामी के रूप में स्वीकार करते हैं। और वे शिव को अद्वितीय और सर्वशक्तिमान के रूप में स्वीकार करते हैं।
महत्व:
यह श्लोक शिव की महिमा को दर्शाता है। यह श्लोक भक्तों को शिव की पूजा करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
KARMASU