Abhishekpandykrita Sundareshwar Stuti: Krihaashtakam
अभिषेकपंडिकृत सुंदरेश्वर स्तुति
अभिषेकपंडिकृत सुंदरेश्वर, कमललोचन, नन्दीश्वर, त्रिलोचन, शशिशेखर, जगदीश्वर, शंभु, शंकर।
[अर्थ:]
हे अभिषेक से सुशोभित सुंदरेश्वर, हे कमल के समान नेत्रों वाले नन्दीश्वर, हे तीन नेत्रों वाले शशिशेखर, हे जगदीश्वर, शंभु और शंकर।
दशभुज-मूर्ति-मंडित,शंख-चक्र-गदा-पद्म-धारी,नीलकमल-सुशोभित,जगदीश्वर, शंभु, शंकर।
[अर्थ:]
हे दश भुजाओं वाली मूर्ति से सुशोभित, शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले, नीलकमल से सुशोभित, हे जगदीश्वर, शंभु और शंकर।
नीलकमल-दल-शोभिता,त्रिशूल-वरद-मुद्रा-युता,पद्मासन-सुशोभित,जगदीश्वर, शंभु, शंकर।
[अर्थ:]
हे नीलकमल के समान दल से सुशोभित, त्रिशूल और वरद मुद्रा से युक्त, पद्मासन पर विराजमान, हे जगदीश्वर, शंभु और शंकर।
वृषभ-रुद्र-मूर्ति-मंडित,महादेव-शंकर-रुपिणि,आनन्द-मूर्ति-निभा,जगदीश्वर, शंभु, शंकर।
[अर्थ:]
हे वृषभ और रुद्र की मूर्ति से सुशोभित, महादेव और शंकर के रूप में, आनंद रूप से निवास करने वाली, हे जगदीश्वर, शंभु और शंकर।
Abhishekpandykrita Sundareshwar Stuti: Krihaashtakam
शम्भो, शंकरो, महेशो,नीलकमल-निवासिनी,त्रिलोचन, शिवो,जगदीश्वर, शंभु, शंकर।
[अर्थ:]
हे शम्भो, शंकरो, महेशो, नीलकमल में निवास करने वाली, तीन नेत्रों वाली शिवो, हे जगदीश्वर, शंभु और शंकर।
अमृत-वाणी-निभा,सर्व-वर्ण-मंगलकारी,सर्व-लोक-हितकारी,जगदीश्वर, शंभु, शंकर।
[अर्थ:]
हे अमृत वाणी से निवास करने वाली, सभी वर्णों के लिए मंगलकारी, सभी लोकों के लिए हितकारी, हे जगदीश्वर, शंभु और शंकर।
नमस्तेऽस्तु सुंदरेश्वर!नमस्तेऽस्तु जगदीश्वर!नमस्तेऽस्तु शंभु शंकर!नमस्तेऽस्तु सकल-मंगलकारी!
[अर्थ:]
हे सुंदरेश्वर, आपको नमस्कार! हे जगदीश्वर, आपको नमस्कार! हे शंभु शंकर, आपको नमस्कार! हे सकल मंगलकारी, आपको नमस्कार!
अभिषेकपंडिकृत सुंदरेश्वर स्तुति एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की सुंदरेश्वर रूप की प्रशंसा करता है। यह रूप शिव के शांत और दयालु पहलू का प्रतिनिधित्व करता है। स्तोत्र में, भगवान शिव को नीलकमल के समान सुंदर, दयालु और सभी के लिए मंगलकारी के रूप में वर्णित किया गया है।
यह स्तोत्र अक्सर भक्तों द्वारा भगवान शिव की आराधना और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
KARMASU