Sridharmapuriramlingeshwaramangalastotram
श्रीधर्मपुरीरामलिंगेश्वरमंगलस्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव के श्रीधर्मपुरीरामलिंगेश्वर मंदिर में स्थित लिंग की स्तुति करता है।
स्तोत्र के 10 श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में एक विशेष गुण या प्रशंसा है।
श्लोक 1
श्रीधर्मपुरीरामलिंगेश्वराय नम:।
जो धर्मपुरी में स्थित हैं, जो रामलिंगेश्वर हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 2
महादेवाय महामूर्तिने नम:।
जो महादेव हैं, जो महान मूर्ति हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 3
त्रिलोचनाय त्रिदण्डधारिणे नम:।
जो त्रिलोचन हैं, जो त्रिदंडधारी हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 4
गौरीशंकराया पार्वतीनाथाय नम:।
जो पार्वती के पति हैं, जो पार्वती के स्वामी हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 5
नंदीश्वराय भक्तवत्सलाय नम:।
जो नंदी के स्वामी हैं, जो भक्तों के प्रिय हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 6
शंभो शंकर शिवाय शूलपाणये नम:।
जो शंभु हैं, जो शंकर हैं, जो शिव हैं, जो शूलधारी हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 7
त्रिपुरारी महाकालाय नम:।
जो त्रिपुरारी हैं, जो महाकाल हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 8
नम: शिवाय नम: शिवाय नम: शिवाय।
मैं शिव को नमस्कार करता हूं, मैं शिव को नमस्कार करता हूं, मैं शिव को नमस्कार करता हूं।
श्लोक 9
शिवभक्तियोगेश्वराय नम:।
जो शिवभक्ति के योगेश्वर हैं, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 10
शिवमयं सर्वं जगत् नम:।
यह संपूर्ण जगत शिवमय है, उन शिव को मैं नमस्कार करता हूं।
श्रीधर्मपुरीरामलिंगेश्वरमंगलस्तोत्रम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान शिव के करीब आने में मदद करता है। यह स्तोत्र ध्यान और साधना के लिए भी उपयोग किया जाता है।
यहां स्तोत्र का एक हिंदी अनुवाद दिया गया है:
श्रीधर्मपुरीरामलिंगेश्वरमंगलस्तोत्रम
भगवान शिव की स्तुति
श्रीधर्मपुरी में स्थित रामलिंगेश्वर,महादेव, महामूर्ति, त्रिलोचन,गौरीशंकर, नंदीश्वर, भक्तवत्सल,शंभो, शंकर, शिव, शूलपाणि,त्रिपुरारी, महाकाल,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।
शिवभक्ति के योगेश्वर,यह संपूर्ण जगत शिवमय है,तुम्हें मैं नमस्कार करता हूं।
KARMASU