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Published October 25, 2023
Updated October 25, 2023

गोपालस्तव (गोपालतपनीय उपनिषदन्तर्गत) एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति करता है। यह स्तोत्र गोपालतपनीय उपनिषद में पाया जाता है, जो एक वैष्णव उपनिषद है।

स्तोत्र में, अज्ञात कवि भगवान कृष्ण के गोपाल रूप की महिमा का वर्णन करते हैं। वे भगवान कृष्ण को गोपियों का प्रियतम कहते हैं, और वे भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हैं।

यहाँ गोपालस्तव (गोपालतपनीय उपनिषदन्तर्गत) का हिंदी अनुवाद दिया गया है:

श्लोक 1:

हे गोपाल! आप गोपियों के प्रियतम हैं। आप गोकुल में गोपियों के साथ अपनी लीलाओं से सभी को आनंदित करते हैं।

श्लोक 2:

हे गोपाल! आपके रूप अत्यंत सुंदर हैं। आपके दर्शन से सभी जीव मोहित हो जाते हैं।

श्लोक 3:

हे गोपाल! आप अत्यंत दयालु हैं। आप सभी जीवों पर कृपा करते हैं।

श्लोक 4:

हे गोपाल! मैं आपका अनन्य भक्त हूं। मैं आपके चरणों में अपना जीवन समर्पित करता हूं।

गोपालस्तव (गोपालतपनीय उपनिषदन्तर्गत) एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के गोपाल रूप की महिमा का वर्णन करता है, और यह भगवान कृष्ण से प्रार्थना करता है कि वे भक्तों को मोक्ष प्रदान करें।

यहाँ गोपालस्तव (गोपालतपनीय उपनिषदन्तर्गत) के श्लोकों का एक-एक करके वर्णन दिया गया है:

श्लोक 1:

इस श्लोक में, अज्ञात कवि भगवान कृष्ण को गोपियों का प्रियतम कहते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण गोकुल में गोपियों के साथ अपनी लीलाओं से सभी को आनंदित करते हैं।

श्लोक 2:

इस श्लोक में, अज्ञात कवि भगवान कृष्ण के रूप की सुंदरता का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण के दर्शन से सभी जीव मोहित हो जाते हैं।

श्लोक 3:

इस श्लोक में, अज्ञात कवि भगवान कृष्ण की दयालुता और कृपा का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण अत्यंत दयालु हैं, और वे सभी जीवों पर कृपा करते हैं।

श्लोक 4:

इस श्लोक में, अज्ञात कवि भगवान कृष्ण के चरणों में अपना समर्पण व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि वे भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त हैं, और वे भगवान कृष्ण की कृपा से मोक्ष प्राप्त करना चाहते हैं।

गोपालस्तव (गोपालतपनीय उपनिषदन्तर्गत) एक लोकप्रिय स्तोत्र है, और इसे अक्सर भक्ति गीतों और भजनों में गाया जाता है। यह स्तोत्र हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

यहाँ गोपालस्तव (गोपालतपनीय उपनिषदन्तर्गत) के श्लोकों का एक और अनुवाद दिया गया है:

श्लोक 1:

हे गोपाल! आप गोपियों के पति हैं, और आप गोकुल में उनकी देखभाल करते हैं। आपके दर्शन से सभी जीव आनंदित हो जाते हैं।

श्लोक 2:

हे गोपाल! आपके रूप अत्यंत सुंदर हैं, और आपके दर्शन से सभी जीव मोहित हो जाते हैं। आपके चरणों में सभी जीवों की भक्ति है।

श्लोक 3:

हे गोपाल! आप अत्यंत दयालु हैं, और आप सभी जीवों पर कृपा करते हैं। आप सभी जीवों के पालनहार हैं, और आप सभी जीवों को मोक्ष प्रदान करते हैं।

श्लोक 4:

हे गोपाल! मैं आपका अनन्य भक्त हूं। मैं आपके चरणों में अपना जीवन समर्पित करता हूं। कृपया मुझे अपने चरणों में स्थान दें, और मुझे मोक्ष प्रदान करें।

गोपालस्तवः २ (रघुनाथजीकृतः) Gopalastavah 2 (Raghunathjikirtah)

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